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दो भाइयों ने पत्नियों को आपस में बदला और चोदा

Wife swap sex story: दोस्तो, मैं वृत्ति चौधरी आज अपनी एक सच्ची सेक्स कहानी लेकर आई हूं।

आपको जानकारी के लिए बता देती हूं कि मैं बाड़मेर राजस्थान से हूं।

वैसे तो मैं पिछले तीन चार साल से बहुत सारी कहानी पढ़ रही हूं लेकिन मैंने महसूस किया कि यहां ज्यादातर कहानी काल्पनिक और मनगढ़ंत होती हैं।

इस कारण मैंने सोचा कि मैं भी एक अपनी सच्ची कहानी लेकर आऊं। ताकि आप लोगों को भी पता चले कि वेबसाइट पर जो कहानी काल्पनिक और मनगढ़ंत कहानी हैं उसमें और सच्ची कहानियों में कितना अंतर होता है।

तो दोस्तो, यह कहानी 2023 के नए साल की है।

यह फॅमिली पोर्न स्वैप सेक्स कहानी मेरी और मेरे पति और मेरे देवर और देवरानी के बीच हुए नए साल पर स्वैपिंग सेक्स की है।

मेरी शादी तो तीन साल पहले यानि 2019 में हो गई थी और मेरे देवर की शादी अभी पिछले साल मई में हुई थी।

सबसे पहले आपको मेरे और हमारे चारों के बारे में बता देती हूं।

मैं वृत्ति चौधरी। मेरी उम्र 23 साल है, मेरे जिस्म का साइज 34 इंच के बूब्स, कमर 30 इंच की और गांड 32 इंच की है।

और मेरा वजन 45 किलो है।

मेरे पति वीरेंद्र चौधरी की उम्र 25 साल है। उनके लंड का साइज 7.5 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।

पति का वजन लगभग 65 किलो के आसपास है।

अब मैं आपको मेरे देवर नरेश के बारे में बताती हूं।

नरेश की उम्र लगभग मेरे बराबर यानि 23-24 साल की है। उनके लंड का साइज 7 इंच और 2.5 इंच मोटा है। वजन लगभग 75 किलो है।

मेरी देवरानी सीमा की उम्र 20 साल है। उसके बदन का साइज बूब्स 32 इंच, कमर 28 इंच की और गांड लगभग 30 इंच है।

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देवर देवरानी की शादी अभी 5-6 महीने पहले हुई है। उनकी शादी से पहले देवर और मेरा सेक्स हो चुका है। मेरे पति जब घर पर नहीं होते थे तो मैं और देवर आपस में चुदाई करते थे।

जब मेरे देवर नरेश की शादी हो गई तो रात को मैं और मेरे पति घर में ऊपर बने कमरे में सोते थे।

उसके पास वाले कमरे में ही देवर और देवरानी सोते थे। यानि हमारे दोनों कपल के कमरे अगल बगल ही थे। देवरानी ज्यादा पतली थी और काफी सेक्सी थी। लेकिन वह संकोच भी ज्यादा करती थी।

अपने देवर से मैं कई बार उनकी चुदाई के बारे में पूछती थी। देवर अच्छी तरीके से बता देते थे कि रात कितनी बार चोदा था, कैसे चोदा था, क्या क्या हुआ था आदि।

इस तरह देवर अपनी चुदाई की कहानी मुझे बताते थे, तब सुनकर बहुत मजा आता था। वैसे मैं आपको एक बात बता भूल गई कि मेरे पति सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। वे सुबह स्कूल जाते हैं और वापस शाम को ही घर आते हैं। और मेरे देवर लकड़ी का काम करते हैं।

वे ज्यादातर राजस्थान से बाहर गुजरात में काम करते हैं। लेकिन शादी से पहले वे घर पर ही ज्यादा रहते थे, इस कारण हम सेक्स कर पाते थे।

देवर की शादी के बाद जब दोनों कपल रात को जब भी चुदाई करते थे तब आपस में चुदाई की आवाज आती थी यानि थप थप की आवाज सुनाई देती थी।

हमारी चुदाई की आवाज भी देवर और देवरानी को सुनाई देती थी। वैसे तो मेरे पति चुदाई करने में काफी एक्सपर्ट हैं, उनका स्टेमिना सांड के जैसा है, घोड़े के जैसा दमदार हथियार है और गधे की तरह फुल स्पीड में पेलते हैं।

तब पलंग भी ऐसी आवाज करता है जैसे रहम की भीख मांग रहा हो। चर्र चर्र आदि की आवाज आती हैं। लेकिन हमारे घर में कमरे ऊपर की मंजिल पर होने से किसी को भी कोई दिक्कत नहीं होती है, न ही आवाज सुनाई देती है।

इस तरह हम लोग बिंदास होकर चुदाई करते थे।

एक दिन मैंने देवर को कहा था कि मुझे आप दोनों की चुदाई देखनी है। तब उन्होंने खिड़की को थोड़ा सा खुला रख के मुझे अपनी चुदाई दिखाई थी। मैंने देखा था उस पलंग पर देवरानी सीमा पूरी नंगी लेटी हुई थी। उसकी गोरी पतली देह बिस्तर पर फैली हुई थी। उसके नाजुक शरीर पर पसीने की चमक थी और सांसें तेज चल रही थीं।

सीमा के शरीर के ऊपर यानि बूब्स के आसपास देवर का माल यानि वीर्य गिरा हुआ था। सफेद गाढ़ा वीर्य उसके छोटे लेकिन नुकीले स्तनों पर फैला हुआ था। कुछ बूंदें उसकी गर्दन और पेट की ओर बह रही थीं। देवर शायद तीसरा राउंड सेक्स कर रहे थे। उनके शरीर से भी पसीना टपक रहा था और वे जोर जोर से हिल रहे थे।

देवरानी के बूब्स ज्यादा बड़े नहीं थे क्योंकि नई नई शादी ही हुई थी तब उनकी। फिर भी उनके गुलाबी निप्पल सख्त होकर खड़े थे। जिन पर देवर का चिपचिपा वीर्य लगा हुआ था और हल्की हल्की खुशबू कमरे में फैल रही थी। हालांकि जब हमने स्वेपिंग सेक्स किया था तब तो सीमा के स्तन काफी ज्यादा बड़े हो गए थे। उस समय उसके बदन भी काफी ज्यादा भर गया था।

गांड भी अच्छी थी यानि उस समय छोटी सी ही थी और देवर जमकर उसकी पेलाई कर रहे थे।

लेकिन मेरे एक मन में एक बात थी कि अगर हम चारों ही एक कमरे में आकर चुदाई करते हैं तो बहुत ज्यादा मजा आयेगा।

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मुझे और एक नए जिस्म के साथ, लंड के साथ मजे लेने का मौका मिलेगा। मैं कल्पना करती थी कि देवर का मोटा और सख्त लंड मेरी चूत के अंदर घुसता हुआ महसूस होगा। उसकी गर्मी, उसकी मोटाई और तेज धक्के मेरी पूरी देह को हिला देंगे। और मेरे पति को भी नई चूत चोदने का मौका मिलेगा क्योंकि मेरी चूत अब कुछ ढीली हो गई थी। ऐसा कई बार पति कहते थे कि अब पहले जितनी टाइट नहीं रही।

मैं सोचती थी कि क्यों ना हम इस दीवार को गिरा दें ताकि चारों एक ही बिस्तर पर आकर चुदाई करें। इससे ज्यादा इंटरेस्ट आता है, चुदाई में भी ज्यादा मजा आता है। कल्पना करते ही मेरी चूत गीली होने लगती थी। मैं सोचती कि मेरे पति सीमा की पतली कमर को पकड़कर जोर जोर से ठोके मार रहे हैं। उसकी छोटी गांड और टाइट चूत उनके घोड़े जैसे लंड को पूरी तरह निचोड़ रही है।

और वैसे भी मेरे पति गांड मारने में ज्यादा इंटरेस्टेड होते हैं लेकिन मैं उन्हें कभी भी नहीं देती हूं पीछे। क्योंकि एक दो बार ट्राई किया था, अंदर गया ही नहीं था, बहुत दर्द कर रहा था।

फिर मैं चुदाई करते कभी कभी देवरानी के बखान करती थी पति को उत्तेजित करने के लिए।

जब मेरे पति मेरे ऊपर चढ़े होते, उनके मोटे लंड मेरी चूत के अंदर गहरे धक्के मार रहे होते और पसीने से भीगी देह आपस में टकरा रही होती, तब मैं धीरे से उनके कान में फुसफुसाती। मैं देवरानी सीमा के पतले लेकिन आकर्षक शरीर का बखान करती, उसके छोटे सख्त बूब्स, पतली कमर और नाजुक गांड की तारीफ करती। बताती कि वह कितनी टाइट और गर्म चूत वाली है, जिसे चोदने में कितना मजा आएगा। ये बातें सुनकर मेरे पति का लंड और भी सख्त हो जाता, उनकी गति तेज हो जाती और वे जोर जोर से मुझे पेलने लगते।

और देवर को भी एक दो बार कहा था कि हम चारों मिल कर सेक्स कर लें। तब उन्होंने कहा कि सीमा मानेगी या नहीं मानेगी, पता नहीं। मैं तो तैयार हूं। धीरे धीरे मैंने ऐसे करते करते मैंने पति को तैयार कर लिया था। क्योंकि बहुत सारी सेक्सी बातें करके मैंने अपने पति की देवरानी के प्रति नजर ही बदल दी थी।

अब वे भी दिन में देवरानी के बूब्स और गांड की तरफ देखते थे। दिन में कई बार वे किसी न किसी बहाने टच भी करते थे। उनके हाथ सीमा की कमर पर फिसल जाते या उसकी पीठ सहलाते। हालांकि देवरानी ने कुछ भी नहीं कहा था, उसे लगा होगा कि यह अचानक हुआ होगा।

मैं देवरानी सीमा से भी सेक्स की बातें करती थी।

उसको भी उसकी चुदाई की बातें पूछती थी कि रात को देवर ने कितनी बार चोदा, किस पोजीशन में किया, कितनी देर तक चोदा और उसके शरीर पर कहां कहां वीर्य गिराया। फिर वह भी मुझसे पूछती थी कि रात को पलंग ज्यादा आवाज कर रहा था आदि। वह शरमाते हुए पूछती कि भाभी आपके पति कितनी जोर से ठोकते हैं, उनकी चुदाई की आवाज सुनकर मेरी चूत गीली हो जाती है। इस तरह हम दोनों एक दूसरी को काफी उत्तेजित करती रहती थी।

मैं कई बार उसकी गांड पर थप्पड़ भी मार देती थी। वह भी शरमाकर वापस मार देती थी। कभी कभी हम दोनों हंसते हंसते एक दूसरे को गले लगाकर छेड़छाड़ करतीं। इस तरह हम काफी खुल गई थी एक दूसरी से।

और उधर मेरे देवर भी सीमा को स्वैपिंग सेक्स के लिए उत्तेजित करते थे कि क्यों ना हम भी ऐसे स्वैपिंग सेक्स करें। वे उसे बताते कि भाभी के साथ स्वैपिंग करने में कितना मजा आता है। तो एक दो बार तो उसने मना किया था लेकिन बाद में वह भी मान गई थी। और मेरे पति भी देवरानी का फिगर देखकर मान गए थे मुझे अपने भाई के लंड से चुदवाने के लिए।

मैं और देवर तो पहले से ही तैयार थे। लेकिन मैंने पति को कभी भी यह अहसास नहीं होने दिया था कि मेरे और देवर के बीच पहले ही चुदाई का खेल खेला जाता रहा है। मैंने बताया था कि देवरानी सीमा को मैंने मनाया था। और देवर को सीमा ने ही मनाया था।

अब स्वैपिंग सेक्स में मुझे भी मजा आने वाला था क्योंकि मेरे पति के नीचे देवरानी लेटी होगी।

मेरे पति ऐसी दमदार चुदाई करते हैं कि देवरानी की चीखें निकाल देंगे। मैं भी बड़ी मुश्किल से उन्हें झेल पाती हूं, उनके घोड़े जैसे मोटे और लंबे लंड के तेज धक्कों को। और सीमा तो पतली और छोटी है, कैसे झेल पायेगी। मैं कल्पना करके ही उत्तेजित हो रही थी कि मेरे पति सीमा की टाइट चूत को कैसे जोर जोर से पेलेंगे। देवरानी भी मेरे पति को देखकर थोड़ा डरी हुई थी।

इस कारण देवर ने भी बड़ी मुश्किल से देवरानी को मनाया था। फिर नए साल से पहले दिन हम सब ने प्लान बनाया कि हम एक ही कमरे में आकर सेक्स करेंगे। फिर नए साल की पूर्व संध्या को 31 दिसंबर को मैं और मेरे पति दोनों कमरे में बैठे थे। लगभग 9 बज रहे थे। उस समय मैंने साड़ी पहनी हुई थी। मेरे पति पैंट और शर्ट में थे।

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शुरुआत में मेरे देवर नरेश हमारे कमरे में आए। फिर देवरानी भी आई। सीमा उस समय राजस्थानी वेशभूषा में बहुत ही सुंदर लग रही थी। गुलाबी वेशभूषा, घूंघट ओढ़े। ऐसा लग रहा था जैसे सुहाग रात मनाने आई है। वैसे हमारे यहां प्रथा हैं कि कोई भी स्त्री अपने जेठ और सास ससुर के सामने बिना घूंघट नहीं आएगी।

हमारे कमरे में दो पलंग हैं, एक हम सोते हैं। हमने दोनों पलंग को पास पास लगा लिया था। हम चारों बैठ गए, आपस में बातें करने लगे। तभी देवर जी बाहर गए और सीढ़ियों से आने वाले दरवाजे को बंद किया ताकि कोई नीचे से अचानक ऊपर नहीं आ जाए। उस समय भयंकर सर्दी का मौसम था।

काफी देर की बातों के बाद मैं देवर के पास जाकर बैठ गई और सीमा को मैंने मेरे पति के पास जाने को बोला। तो वह संकोच के मारे मुंह दूसरी तरफ करके खड़ी हो गई थी। बाद में मेरे पति हाथ पकड़ कर सीमा को अपने पलंग पर ले गए।

मैं देवर के पास बैठ कर मस्ती करने लगी।

मेरे पति सीमा को अपने पलंग पर बैठाकर उसके बूब्स मसलने लगे थे। हमारे दोनों पलंग आपस में चिपके हुए थे। काफी देर बाद देवर ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। साथ साथ हमने आपस में फोरप्ले करना शुरू किया।

धीरे धीरे देवर ने मेरी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिए। मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में रह गई थी। मेरी पेंटी काफी ज्यादा गीली हो गई थी चूत के पानी से। मैंने भी देवर के पैंट और शर्ट उतार दिए। अब वे सिर्फ चड्डी और बनियान के अंदर थे।

चड्डी के अंदर उनका बहुत मोटा सा मूसल सा लंड का उभार आसानी से दिखाई दे रहा था। फिर उन्होंने मेरी ब्रा को उतार दिया। मेरे 34 इंच के बूब्स एकदम आजाद हो गए जैसे कोई पिंजरे में कैद थे। और देवर ने उन्हें बस मसलना शुरू किया। उनके मजबूत हाथ मेरे नरम स्तनों को दबाते, मरोड़ते और निचोड़ते हुए महसूस हो रहे थे।

मेरे होंठों और गालों पर किस करना शुरू किया। उनके गर्म होंठ मेरे होंठों को चूस रहे थे और जीभ अंदर घुसकर मेरी जीभ से खेल रही थी। धीरे धीरे ऐसे करते करते मैं काफी उत्तेजित हो गई। मैंने भी देवर की बनियान उतार दी और चड्डी को भी निकाल कर फेंक दी। उनका मोटा, लंबा और सख्त लंड एकदम सीधा खड़ा हो गया।

फिर उन्होंने मेरी पेंटी उतार दी और अपनी भाभी की चूत पर जुबान लगाकर चाटने लगे। उनकी गर्म और नम जीभ मेरी चूत की फाकों को चाट रही थी। क्लिटोरिस को चूस रही थी और अंदर तक घुसने की कोशिश कर रही थी। मेरे शरीर में अजीब सिहरन दौड़ने लगी। मेरी कमर अपने आप ऊपर उठने लगी।

आज तो मुझे मेरे देवर का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा दिखाई दे रहा था। यानि एक बार तो मैं देखकर डर गई थी कि आज यह लंड मेरी चूत फाड़ देगा।

देवर का वजन लगभग 75 किलो के आसपास है।

फिर हम दोनों 69 की पोजिशन में आ गए। मैं उनके नीचे लेट गई और उन्होंने मेरे ऊपर। मैंने उनके आंड और लंड चूसने लगी थी। उनका मोटा, गर्म और नसों वाला लंड मेरे मुंह में पूरा भर गया था। मैं जीभ से उसकी पूरी लंबाई चाट रही थी और सिरे को जोर से चूस रही थी। वे मेरी चूत की फांकों को चाटने लगे थे। उनकी गर्म जीभ मेरी भीगी चूत के अंदर बाहर घुस रही थी, क्लिटोरिस को चूस रही थी और पसीने व चूत के रस का स्वाद ले रही थी।

मैंने पानी छोड़ दिया तो उन्होंने पूरा पानी पी लिया। मेरी चूत से निकला गर्म और मीठा रस वे चटखारे लेते हुए पी गए। और उन्होंने वीर्य निकलने से थोड़ा पहले लंड मुंह से निकाल कर मेरे पेट पर गिरा दिया। गाढ़ा, सफेद और गरम वीर्य मेरे पेट पर कई फुहारों में गिरा। कुछ बूंदें मेरी नाभि में भर गईं और धीरे धीरे बहने लगीं।

मेरी देवरानी और मेरे पति पास वाले पलंग पर थे। वैसे मैं और सीमा दोनों अगल बगल में लेटी थी, हम दोनों के सर एक ही दिशा में थे। तभी मेरी नजर देवरानी पर पड़ी। अरे मैं आपको देवरानी का बताना भूल गई कि मेरे पति उसे पकड़ कर अपने पलंग पर लेकर गए थे उसके बाद क्या क्या हुआ था। वह बहुत ही शरमाई हुई थी, उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था क्योंकि वह मेरी तरह खुले विचारों वाली नहीं थी।

मेरे पति ने उसे नंगी कर दिया तथा अपने कपड़े भी खुद ही उतारे थे। शुरुआत में जब सीमा नंगी हुई तो वह बहुत संकोच कर रही थी। उसे अपनी चूत को हाथों से ढक भी लिया था। लेकिन अब धीरे धीरे वह खुल रही थी। मस्ती में सीमा के बाल खुल गए थे जो बहुत लंबे थे जो कमर तक आते थे।

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तब वे 69 की पोजिशन में आए थे।

बाद में पति ने देवरानी को सीधा लिटाकर टांगों को अपने कंधे पर ले लिया। फिर मेरे पति ने सीमा की गांड के नीचे एक तकिया लगाए और उसे चाटने लगे। उनकी जीभ सीमा की छोटी सी टाइट चूत की फांकों को पूरी तरह चाट रही थी। वे जोर जोर से चूस रहे थे जिससे सीमा की देह बार बार सिहर रही थी और उसके मुंह से हल्की हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

और उसके बाद लंड पर ढेर सारा थूक लगाकर अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगे। मैं अपनी जगह पर लेटी हुई देवरानी और अपने पति को देख रही थी। मुझे पहले से ही देवरानी की चुदाई उसके पति से देखना पसंद था। मेरे पति ने सीमा की टांगें कंधे पर लेकर लंड को उसकी चूत के छेद पर सेट करके एक धक्का लगाया। लगभग आधा लंड अंदर गया और सीमा की एकदम चीख निकल गई क्योंकि मेरे पति की चुदाई हर कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता था।

फिर उन्होंने दूसरा ही झटका लगाया और पूरा का पूरा लंड सीमा की चूत के अंदर समा गया। सीधा बच्चेदानी से जाकर टकराया। जेठ जी के लंड की चुदाई से सीमा की शरीर में अजीब सी झनझनाहट होने लगी थी। उसकी आंखें बंद हो गईं, मुंह खुला रह गया और वह जोर जोर से सांस ले रही थी। मेरे पति उसे पूरे जोश से पेल रहे थे।

आज पलंग कुछ ज्यादा चर्र चर्र कर रहा था जैसे अभी टूटा। उनके तेज और गहरे धक्कों से पूरा बिस्तर हिल रहा था। इस तरह जबरदस्त चुदाई से सीमा की तो मानो जान निकल गई हो। इधर मेरे देवर ने भी अपना हथियार मेरी चूत पर सेट किया और एक ही झटके में अंदर डाल दिया।

मेरे को चूत को चुदाते हुए काफी लंबा टाइम हो गया था इसलिए मुझे कुछ ज्यादा दर्द नहीं हुआ था।

फिर वह भी पति के जैसे मुझे पेलने लगे। देवर का मोटा और लंबा लंड मेरी चूत के अंदर तेजी से घुस रहा था। हर धक्के पर उनकी कमर जोर से मेरी कमर से टकरा रही थी और थप थप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मेरी चूत उनके लंड को अच्छी तरह निचोड़ रही थी। पसीने से उनकी और मेरी देह फिसल रही थी।

लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद देवर के जब निकलने वाला हुआ, तब उन्होंने बाहर निकाल कर मेरे पेट और बूब्स पर अपना पूरा वीर्य एकदम गर्म लावा डाल दिया। गाढ़ा, गरम और सफेद वीर्य मेरे स्तनों पर फुहारों में गिरा। कुछ बूंदें मेरी गर्दन तक पहुंच गईं और पेट पर फैल गईं। वह चिपचिपा और गर्म महसूस हो रहा था। फिर वे मेरे ऊपर ही लेट गए।

दूसरी तरफ मेरे पति अभी भी देवरानी को पेल रहे थे। हमारे झड़ने के लगभग 5 मिनट बाद उन्होंने भी अपना वीर्य देवरानी के पेट और बूब्स और मुंह और बाल तक उछाल कर खाली कर दिया। सीमा के छोटे स्तनों, सपाट पेट और लंबे बालों पर सफेद वीर्य की मोटी परत जम गई थी। और उसके ऊपर लेट गए।

सीमा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि घोड़े जैसे स्टैमिना और गधे जैसे लंड से पहली बार उसकी चुदाई हुई थी।

उसके बाद मेरे पति और देवर दोनों ही हमारे दोनों के आसपास लेट गए।

लगभग 10 मिनट के बाद उनके हथियार फिर से तैयार हो गए। इस बार उन्होंने लेटे लेटे पीछे से सेक्स करना शुरू किया यानि एक पलंग पर देवरानी और दूसरे पर मैं। हमारे चेहरे आमने सामने थे। हम दोनों एक दूसरे को देख रही थीं और हमारी सांसें तेज चल रही थीं।

जबरदस्त चुदाई करने के लगभग 10 मिनट के बाद मेरे पति और देवर नीचे लेट गए और हम दोनों उनके लंड के ऊपर बैठकर उछलने लगी। यानि लंड की सवारी करने का मौका मिला। हम दोनों ने रिवर्स काउ गर्ल स्टाइल में जम कर चुदाई की। मैं देवर के मोटे लंड पर ऊपर नीचे उछल रही थी। हर बार जब मैं नीचे बैठती तो उनका पूरा लंड मेरी चूत के deepest हिस्से तक धंस जाता और मेरी चूत की दीवारें उसे कसकर निचोड़तीं।

उसके बाद काफी ज्यादा थक गई थी तो लेट गई। फिर घड़ी में टाइम देखा तो लगभग 11 बज रहे थे। यानि हमको चुदाई करते हुए लगभग 2 घंटे हो गए। आज दिन तक इतनी चुदाई कभी नहीं हुई थी। उसके बाद उन भाइयों ने हम दोनों को घोड़ी बनाया।

यानि इस बार मेरा सर और देवरानी का सर आपस में टकरा रहे थे। हम आमने सामने थी। सीमा की गांड के पीछे मेरे पति थे, मेरे पीछे मेरे देवर थे। घोड़ी स्टाइल में उन दोनों ने हम दोनों को चोदना शुरू किया। उनके तेज धक्कों से हमारी गांडें जोर जोर से हिल रही थीं और थप थप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।

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लगभग 10-12 मिनट तक उन्होंने चोदा, काफी मजा आया सबको। जैसे जन्नत की सैर कर ली हो।

इस दौरान मेरे पति ने मेरी देवरानी की गांड भी मारने की सोची।

उन्होंने अपना लंड सीमा की चूत में से निकाल कर थूक लगाकर उसकी गांड में पेल दिया। सीमा ने आज तक कभी भी गांड नहीं चुदवाई थी। मेरे पति का बड़ा और मोटा लंड जब उसकी गांड के टाइट छेद में घुसा तो उसकी गांड फट सी गई थी। उसकी आंखों में आंसू आ गए और वह रोने लग गई। वह जोर जोर से कराह रही थी और उसके हाथ पलंग को कसकर पकड़े हुए थे।

लेकिन देवर ने मेरी गांड नहीं मारी थी क्योंकि मैंने मना किया था। उस रात मेरे पति ने देवरानी की जबरदस्त तरीके से गांड मारी। वे धीरे धीरे शुरू करके बाद में तेजी से उसके गांड में धक्के मार रहे थे। हर धक्के के साथ सीमा की चीखें निकल रही थीं और उसकी पूरी देह कांप रही थी। सीमा उठने लायक हालत में नहीं थी।

उसके बाद हम काफी थक गए थे और मेरे पति ने सीमा को अपने साथ सुला लिया क्योंकि वह चलने की स्थिति में नहीं थी। मैं और देवर उनके कमरे में चले गए। काफी देर तक हमने प्यार भरी बातें की। उसके बाद लगभग 1 बजे हम सो गए।

सुबह लगभग 5 बजे मेरी नींद खुली तो मैं अपने कमरे में आई।

तब मेरे पति सीमा को पेल रहे थे। मेरे पति ने बताया कि सुबह भी उन्होंने एक बार गांड मारी और एक बार चूत मारी। वे सीमा को घोड़ी बनाकर जोर जोर से ठोक रहे थे। सीमा की सांसें फूल रही थीं और उसके मुंह से हल्की कराहें निकल रही थीं।

उसके बाद मैं भी देवर के कमरे में जाकर उनको जगा कर उनसे चुद गई। मैंने देवर को चूमते हुए उनकी चड्डी उतारी और उनके सख्त लंड को चूस लिया। फिर वे मुझे पलंग पर लिटाकर मेरी चूत में अपना मोटा लंड घुसा कर जोरदार चुदाई करने लगे। उधर देवरानी चलने लायक स्थिति में नहीं थी तो मेरे पति ने उसे कपड़े पहनाए और देवर के कमरे में छोड़ गए।

जब मेरे पति सीमा को छोड़ने आए, उस समय देवर मेरे को घोड़ी बनाकर पेल रहे थे। सीमा हमारे पास आकर एकदम निढाल होकर लेट गई। फॅमिली पोर्न स्वैप सेक्स के बाद मैं नंगी अपने कमरे में चली गई। सीमा तीन दिन तक चलने लायक की स्थिति में नहीं रही थी क्योंकि उसकी गांड बहुत ज्यादा सूज गई थी और चूत भी काफी दर्द कर रही थी।

मैंने उसे पेनकिलर गोलियां दी, उसके बाद उसकी हालत सामान्य हुई।

अब जब भी मेरा मन होता है, तब मैं देवर से चुदाई कर लेती हूं।

और पति का जब भी गांड मारने का मन होता है तो वे अपने छोटे भाई की बीवी की जबरदस्त तरीके से गांड मारते हैं। मेरे पति सीमा को बाथरूम में, छत पर, किचन में आदि कई जगह नंगी करके पेल चुके हैं। वे उसे अचानक पकड़कर दीवार से सटाकर या बेंच पर झुकाकर अपना मोटा लंड उसके गांड में घुसा देते हैं। सीमा अब इन जगहों पर चुदाई के दौरान जोर जोर से कराहती और सिसकारती है।

रात को अकसर हम चारों नंगे सोते हैं। कभी मैं देवर के कमरे में सोती हूं तो कभी देवर हमारे कमरे में चारों एक साथ बेड पर सोते हैं। नंगे शरीर एक दूसरे से सटे रहते हैं, हाथ स्तनों और लंड पर घूमते रहते हैं। उसके बाद देवर वापस काम पर चले गए, तब पति मुझे और देवरानी दोनों को चोदते हैं।

अब जेठ से चुद चुद कर सीमा की चूत भी ढीली हो गई है और गांड का छेद भी काफी बड़ा हो गया है। अब इतना दर्द नहीं करता है। अगली बार हम दोनों देवरानी जेठानी का एक साथ दो लंड लेने का विचार है। हालांकि मैंने अभी तक एक बार भी गांड नहीं मरवाई है।

तो दोस्तो, बताना हमारी सेक्स कहानी आपको कैसी लगी। काफी कहानियां बिल्कुल ही काल्पनिक होती हैं पर मैंने यह सच्ची कहानी लिखी है। और यह मेरी पहली कहानी है जिससे मैं इसे ज्यादा रोमांटिक नहीं बना पाई। और त्रुटि हुई है तो माफ करना। फॅमिली पोर्न स्वैप सेक्स कहानी कैसी लगी।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।