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लड़की ने टीचर को क्लासरूम में ही चोदने को मजबूर कर दिया

Classroom Sex Story – Teacher ne student ki choot chati: मेरा नाम सुवास है और मैं ३० साल का हूँ। मैं दिखने में बहुत सुंदर और आकर्षक हूँ पर मेरा रंग सांवला है। मेरी भरी हुई छाती, आकर्षक बदन और सिक्स पैक्स देखकर खूब सारी लड़कियां मेरे पीछे पड़ी रहती हैं।

मैं कॉलेज में विद्यार्थियों को पढ़ाता हूँ और मेरा विषय साइंस है। मैं सारे लड़के और लड़कियों को पढ़ाता हूँ।

ये घटना तीन साल पहले की है। मैं बारहवीं कक्षा की क्लास ले रहा था।

माधुरी नाम की वह खूबसूरत लड़की लगातार मेरी ओर ध्यान दे रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें बार-बार मेरे चेहरे से लेकर छाती तक और फिर नीचे तक घूम रही थीं। प्यार भरी उन नजरों में गहरा आकर्षण था जो मुझे अंदर तक छू जाती थीं। उसके होंठों पर हल्की मुस्कान खेल रही थी और वह अपनी कुर्सी पर बैठकर बार-बार बालों को उंगलियों से सुलझाती हुई मुझे देखती रहती थी।

ऐसा कई दिन तक चलता रहा। हर क्लास में उसकी निगाहें मेरे शरीर पर टिकी रहतीं। फिर मैंने उसे समझाने का फैसला लिया और क्लास के बाद उसे रुकने को कहा।

मैंने कहा, “तुम क्लास में ध्यान नहीं रखती, इधर उधर देखना गलत है।”

उसने जवाब दिया, “मैं तो आपको देखती हूं सर, क्योंकि आप मुझे बहुत पसंद हो।”

मुझे ये सुनकर अच्छा नहीं लगा और मैं उसे समझाने लगा लेकिन वो सुनने को तैयार ही नहीं थी। वह मेरी आँखों में गहरी नजर डालकर मुझे मोहित करने लगी। उसकी आवाज मधुर और लुभावनी हो गई थी। वह धीरे-धीरे मेरे शरीर का वर्णन करने लगी। उसने कहा कि मेरी चौड़ी छाती कितनी आकर्षक है, मेरी मजबूत बाहें कितनी पुरुषत्व भरी लगती हैं, और मेरी कमर की रेखा देखकर उसके मन में कैसी उथल-पुथल मच जाती है।

उसका मधुर बोलना सुनकर मैं गर्म होने लगा और मेरे शरीर पर रोमांच हो गए। मेरे हाथों की हथेलियाँ पसीने से गीली हो रही थीं। दिल की धड़कन तेज हो गई थी और मेरी पैंट के अंदर मेरी नसें तनने लगी थीं। उसकी मीठी सांसों की महक हवा में फैल रही थी।

सुंदर लड़की ने उठकर धीरे से दरवाजा बंद किया। मैं उसके गर्म होने से कुछ बोल नहीं सका। दरवाजा बंद करने के बाद वह मेरे करीब आई और कुर्सी के पीछे से हाथ रख दिया।

फिर उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और और नजदीक आ गई।

माधुरी उस दिन बहुत सुंदर और आकर्षक लग रही थी। उसने लाल रंग का चूड़ीदार सूट पहना हुआ था जिसमें वह बेहद खूबसूरत दिख रही थी। लाल कपड़ा उसके गोरे शरीर पर चिपका हुआ था जो उसके उभरे हुए वक्षस्थल और घुमावदार कमर को और भी नमकदार बना रहा था। उसकी नीली आँखें कामुकता से चमक रही थीं और लंबे काले बाल उसकी पीठ पर लहरा रहे थे।

उसका गोरा रंग, नीली आँखें, लंबे बाल और पतली कमर देखकर मैं बहुत कामुक हो गया। उसके बड़े-बड़े गोल स्तन सूट के अंदर ऊपर-नीचे हिल रहे थे। भरे हुए, मोटे नितंब कपड़े में फटने को तैयार दिख रहे थे। उसकी मीठी, फूलों जैसी खुशबू ने मेरे दिमाग को पूरी तरह से दीवाना बना दिया। मेरे शरीर में गर्मी फैलने लगी और मेरी सांसें भारी हो गईं।

मैंने अपने होंठ उसके गुलाबी होंठों की तरफ बढ़ाए और नाजुक से चूम लिया। उसके नरम और मुलायम होंठों को छूते ही मुझे जोश आ गया। मैंने धीरे-धीरे उसके निचले होंठ को अपने होंठों में लेकर चूसा। उसकी गरम सांस मेरे मुंह में घुल रही थी। फिर मैंने अपनी जीभ निकालकर उसके होंठों को चाटा और धीरे से उसके मुंह के अंदर डाल दी। हम दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपटकर खेलने लगीं।

मैंने उसके शरीर पर हाथ सहलाते हुए मजा लिया। मेरी उंगलियाँ उसकी पतली कमर पर घूम रही थीं। फिर मैंने ऊपर की तरफ बढ़कर उसके बड़े स्तनों को बाहर से दबाया। वे बहुत नरम, गर्म और भरे हुए थे। कपड़े के ऊपर से भी उनकी निप्पल्स सख्त होकर महसूस हो रही थीं।

वो गर्म हो गई और आह भरने लगी। “आह सर…” उसकी मीठी, काँपती हुई आवाज मेरे कान में गूँजी। उसकी सांस मेरे मुंह में आकर मुझे और उत्तेजित कर रही थी। उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी और उसकी आँखें आधा बंद हो गई थीं।

मैं उठ गया और उसके गोल बड़े नितंबों को दबाते हुए उसके होंठों का रस पीने लगा। मेरी दोनों हथेलियाँ उसके मोटे, नरम नितंबों पर रखी थीं। मैंने उन्हें जोर से मसला, ऊपर नीचे दबाया और अपनी उंगलियों से उनकी गहराई को महसूस किया। उसके नितंबों की गर्मी और नरमी मेरे हाथों में समा रही थी। उसने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरी छाती पर पागलों की तरह चूमने लगी।

वह पेट पर नीचे जाते हुए चूमती गई और मेरी पैंट की चेन खोल दी।

उसकी गर्म और नरम होंठ मेरी छाती से होते हुए पेट की ओर नीचे सरक रहे थे। हर चुंबन के साथ वह अपनी जीभ से मेरी त्वचा को चाटती जा रही थी, जिससे ठंडी सिहरन मेरी रीढ़ में दौड़ रही थी। उसकी उंगलियाँ पैंट की चेन पर गईं और धीरे-धीरे उसे नीचे खींच दिया। चेन खुलने की आवाज कमरे में गूँज गई।

मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। पूरी तरह से तना हुआ और नसों से फूला हुआ मेरा मोटा लंड पैंट के अंदर से बाहर आने को बेताब था। उसने अपनी नरम, गरम हथेली अंदर डाली और उसे बाहर निकाल लिया। हवा में उसकी उत्तेजित खुशबू फैल गई।

उसने उसे हाथ में लेकर हिलाने लगी। उसकी पतली उंगलियाँ मेरे लंड के मोटे तने को जकड़कर ऊपर-नीचे हिल रही थीं। हर हिलाने के साथ उसकी हथेली के अंदर का नरम मांस मेरी संवेदनशील त्वचा को रगड़ रहा था।

मैं आह भर उठा। “आहह…” मेरे मुंह से अनियंत्रित आह निकली। फिर उसने लंड के ऊपरी भाग पर चूमा। उसके गुलाबी होंठ मेरे लंड के ग्लान्स पर लगे और धीरे से चूसे। काफी देर तक उसने लंड को चूमा। वह बार-बार ऊपर से लेकर नीचे तक होंठों से दबाती और चूसती रही।

मैंने कहा, “लो न मुंह में।”

उसने लंड का अगला भाग मुंह में लिया और सफेद रस पी लिया। उसकी गरम, गीली जीभ मेरे लंड के छेद पर घूमी और उसमें से निकल रहे पारदर्शी रस को चाटकर निगल गई। फिर पूरे लंड को मुंह में लेकर अंदर बाहर करने लगी। उसके होंठ मेरे लंड के चारों ओर कसे हुए थे। वह सिर को आगे-पीछे करके उसे गहरे तक ले जा रही थी।

उसने लंड को ऊपर से नीचे तक चाटा और मेरी गोटियों को हाथ से सहलाया। उसकी जीभ मेरे लंड की पूरी लंबाई पर चली, हर नस को चाटती हुई। साथ ही उसकी उंगलियाँ मेरी गोटियों को नरम-नरम दबा रही थीं और उन्हें सहला रही थीं। मैंने उसके बाल पकड़े और लंड को उसके मुंह में और अंदर तक घुसा दिया।

फिर मैंने उसे खड़ा किया और होंठों को चूम लिया।

मैंने उसके कंधों को पकड़कर उसे अपनी कुर्सी से उठाया और सीधा खड़ा कर लिया। तुरंत ही मैंने उसके गुलाबी होंठों को अपने मुंह में ले लिया। गहरे चुंबन के दौरान मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर घुस गई और उसकी जीभ से जोर-जोर से खेलने लगी। माधुरी की सांसें तेज हो गईं और वह “उम्म्म… सर…” करके हल्की आह भर रही थी।

मैंने उसका टॉप निकाल दिया। उसकी काली ब्रा बहुत आकर्षक लग रही थी। काली ब्रा उसके गोरे और भरे हुए स्तनों को कसकर दबाए हुए थी। मैंने पीछे से हुक खोलकर ब्रा उतार दी। उसके बड़े, गोल स्तन पूरी तरह आजाद हो गए।

मैंने उसके गोरे स्तनों पर चूमा। वो आह भरने लगी। मेरे होंठ उसके दाहिने स्तन की नरम त्वचा पर लगते ही वह काँप उठी और “आहह… सर, बहुत अच्छा लग रहा है…” कहकर कराहने लगी। मैंने उसके बड़े स्तनों को दोनों हाथों से जोर से दबाया। वे नरम और गर्म थे। फिर मैंने उसकी सख्त चुचियों को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसा।

एक स्तन को चूसते हुए दूसरे की चुची को चिमटकर मैं उसे खुश कर रहा था। मेरे दाँत हल्के-हल्के चुची को काट रहे थे जबकि उंगलियाँ दूसरी चुची को मरोड़ रही थीं। माधुरी ने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुकाई और जोर से कराह उठी, “आह सर… हाँ… और जोर से चूसिए… मेरी चुचियाँ आपके लिए हैं… उफ्फ… बहुत मजा आ रहा है।” उसका पूरा शरीर खुशी से काँप रहा था और उसकी चूत से पहले ही गीला होने लगा था।

फिर मैंने उसकी पैंट उतार दी।

मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर पैंट को धीरे-धीरे नीचे सरकाया। कपड़ा उसके मोटे गोरे नितंबों और जाँघों पर रगड़ता हुआ उतर रहा था। जैसे ही पैंट पूरी तरह उतरी, उसकी लाल चड्डी बहुत सेक्सी लग रही थी। पतली लाल चड्डी उसके गोरे नितंबों पर चिपकी हुई थी और उसके बीच की लकीर साफ दिख रही थी।

मैंने चड्डी के ऊपर से उसकी चूत को स्पर्श किया। मेरी उँगलियाँ उसके गर्म और नम हिस्से पर दबाते ही वह सिहर उठी। “आहह सर…!” माधुरी की काँपती हुई आवाज निकली। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। चड्डी के पतले कपड़े पर गीला धब्बा साफ दिख रहा था। मैंने अपनी उँगलियों से उसके क्लिटोरिस को दबाकर गोल-गोल घुमाया जिससे वह जोर से कराह उठी, “उफ्फ… सर, वहाँ मत दबाइए… मैं पागल हो जाऊंगी… हाँ… ऐसे ही…”

उसने चड्डी उतारने के बाद मैंने उसके पैरों को सहलाया, उसे नीचे सुलाया और पैर फैलाकर उसकी चूत को होंठों से चूम लिया।

मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसके दोनों पैरों को चौड़ा करके मैंने अपनी नाक उसके गर्म, गीले चूत के पास ले जाकर गहरी सांस ली। उसकी मीठी, उत्तेजित खुशबू ने मुझे और दीवाना कर दिया। मैंने अपने गर्म होंठ उसकी बिना बाल वाली चूत पर रख दिए और जोर से चूमा। माधुरी ने अपनी कमर ऊपर उठाई और चीखते हुए बोली, “आआह सर… आपकी जीभ… बहुत अच्छा लग रहा है… मेरी चूत चूसिए सर… पूरी चूस लीजिए…”

मैंने जुबान से पूरी चूत चाटी। उसकी बिना बाल वाली चूत मुझे बहुत पसंद आई।

मैंने अपना खड़ा लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे घुसाया।

मेरा मोटा और नसों वाला लंड उसकी गीली और गरम चूत के मुंह पर रगड़ते हुए रखा। मैंने हल्का दबाव दिया और धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा। उसकी चूत के नरम होंठ मेरे लंड को चूसते हुए निगल रहे थे। उसकी चूत बहुत टाइट थी लेकिन पहले इस्तेमाल हो चुकी होने की वजह से मेरा पूरा मोटा लंड आसानी से चला गया। पूरी लंबाई अंदर डालते ही माधुरी जोर से चीखने लगी। “आआहह… सर… इतना मोटा लंड… उफ्फ… धीरे से घुसाइए… मेरी चूत फट जाएगी…”

मुझे साफ़ पता चल गया था, कि ये कुवारी चुत तो नहीं है।

उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। उसकी नाखून मेरी पीठ पर गड़ गए और उसकी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लिपट गईं। मैं जोर-जोर से धक्के देने लगा। मैं उसके ऊपर लेट गया और होंठ चूमते हुए चोदता रहा। हमारे होंठ चिपके हुए थे और मेरी जीभ उसके मुंह में घुसकर उसके मुंह का रस चूस रही थी।

मैंने घोड़े से भी तेज धक्के दिए। हर धक्के के साथ उसकी चूत से पिच-पिच की आवाज निकल रही थी। वो जोर से चिल्ला रही थी। “हाँ सर… और जोर से चोदिए… मेरी चूत फाड़ दीजिए… आहह… बहुत मजा आ रहा है…” मैंने उसके स्तनों को दबाया और चुचियों को चिमटते हुए उसे काबू में किया। मेरी उंगलियाँ उसकी सख्त चुचियों को जोर से मरोड़ रही थीं।

मैंने उससे पूछा, “मुझे हक़ है जानने का, कौन इससे पहले तुम्हारी चूत का सेवन किया है?” और तेज-तेज पेलने लगा।

मैंने अपनी कमर को पूरी शक्ति से हिलाते हुए अपना मोटा और खड़ा लंड उसकी गीली चूत में जोर-जोर से घुसा-पेलने लगा। हर धक्के पर उसकी चूत के अंदरूनी दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं और पिच-पिच की चुदाई की आवाज पूरे क्लासरूम में गूंज रही थी। माधुरी की चूत से गाढ़ा, गर्म रस मेरे लंड और गोटियों पर बह रहा था।

माधुरी कराहते हुए बोली, “आह सर… वो… आहह… कार्तिक सर थे…”

मैंने और तेज धक्का मारते हुए पूछा, “कार्तिक सर? वो जो हमारे कॉलेज में पढ़ाते हैं? उसी ने तुम्हारी चूत खोली?”

माधुरी ने अपनी टांगें मेरी कमर पर और कसकर जकड़ ली और आह भरते हुए बताने लगी, “हाँ सर… आह… वही कार्तिक सर… हम कई दिनों से चैटिंग करते थे… रात को फोन पर घंटों गंदी बातें करते थे… वो कहते थे कि मेरी चूत को चोदना है… मेरी चुचियों को काटना है… कई बार वीडियो कॉल पर हमने नंगे होकर बात भी किया था… फिर एक रात उन्होंने प्लान बनाया की सुबह कॉलेज के टाइम मैं उनका इंतज़ार करू कॉलेज के बाहर… मैंने ऐसा ही किया… उस दिन वो मुझे होटल ले गए… कमरे में घुसते ही मेरे सारे कपड़े उतर दिए… पूरी सुबह से शाम तक मुझे चोदते रहे… उन्होंने मेरी चूत को पहली बार सील खोला…”

मैं और जोश में आकर उसके बाल पकड़ते हुए तेज-तेज धक्के मारते हुए बोला, “फिर क्या हुआ? उसने तुम्हें कैसे चोदा? विस्तार से बताओ… मेरी चूत…”

माधुरी जोर से चीखकर बोली, “आआह सर… पहले तो उन्होंने मेरी चुचियों को बहुत जोर से चूसा… फिर मेरी चूत को जीभ से चाटा… आह… उसके बाद अपना लंड मेरी चूत में घुसाया… लेकिन सर… उनका लंड आप जितना मोटा और लंबा नहीं था… आहह… आपका तो बहुत मोटा पेल्हर है… बहुत मर्दाना है… आपकी लंड मेरी चूत को फाड़ रही है…”

मैंने उसके स्तनों को जोर से दबाते हुए और तेज पेलते हुए कहा, “तो कार्तिक सर ने तुम्हें पूरा दिन होटल में चोदा? कितनी बार चोदा उसने? और किस-किस तरीके से?”

माधुरी जोर से चिल्लाई, “आआह सर… हाँ… कई बार… पहले तो मिशनरी में… फिर मुझे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा… बार-बार मेरी चूत में घुसते रहे… मेरी चूत को अपना गाढ़ा रस से भर दिया… तीन-चार बार तो उन्होंने मेरी चूत में झड़ भी दिया…”

मैंने उसे और भी जोरदार धक्कों से चोदते हुए गरम सांसों के साथ पूछा, “क्या तुम फिर कभी कार्तिक सर के पास वापस जाओगी? बोल न रंडी… साफ-साफ बोल…”

माधुरी ने अपनी चूत को मेरे लंड पर कसकर जकड़ते हुए चीखकर कहा, “नहीं सर… कभी नहीं… आहह… मैं अब सिर्फ आपकी रंडी हूँ… आपकी चूत हूँ… कार्तिक सर को भूल गई हूँ… सिर्फ आप चोदिए मुझे… हमेशा…”

मैंने उसके गाल पर थपकी मारते हुए और भी तेज पेलते हुए कहा, “नहीं… मैं चाहता हूँ कि तुम एक बार फिर कार्तिक सर के पास जाओ… उसकी छोटी लंड से चुदवाओ… और फिर मुझे आकर बताओ कि वो तुम्हें क्या नहीं दे पाया… जबकि मेरे मोटे लंड को चोदते हुए तुम कितना मिस कर रही थीं… बोलो, जाओगी न रंडी?”

माधुरी पूरी तरह उत्तेजित होकर चीखी, “आआह सर… हाँ… अगर आप चाहते हो तो जाऊंगी… उसकी छोटी लंड से चुदवाऊंगी… और फिर आपको बताऊंगी कि वो मेरी चूत को कैसे संतुष्ट नहीं कर पाया… जबकि मैं पूरे समय आपकी मोटी लंड को याद करके तरस रही थी… आप ही मेरे असली मालिक हो सर…”

उसकी चुदाई की कहानी सुनते हुए मुझे और जोश आने लगा और मैं और जोरदार धक्के देने लगा लेकिन डर ये भी था की कोई सुन न ले क्युकी हम कर तो क्लास रूम में ही रहे थे न।

उसकी वासना बढ़ गई।

माधुरी की आँखों में भूख और भी गहरी हो गई थी। उसका पूरा शरीर पसीने से चिपचिपा हुआ था और चूत से लगातार गर्म रस बह रहा था। वह मेरे ऊपर से उठकर बैठ गई। अपनी नरम, गर्म हथेली में मेरे मोटे लंड को पकड़कर उसने जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। फिर वह झुककर मेरे होंठों को चूमने लगी। उसके गुलाबी होंठ मेरे मुंह पर लगे और उसने गहरी जीभ वाली चुम्बन ली।

फिर मेरे लंड को चूमने लगी और चाटने लगी। उसने मेरे लंड के ऊपरी सिरे को चूमा, फिर जीभ से पूरी लंबाई ऊपर से नीचे तक चाटी। उसकी गर्म, गीली जीभ मेरी नसों पर घूम रही थी। उसने बताया, “सर… मैं अब तक 5 बार झड़ चुकी हूँ सर… बहुत मजा आ रहा है… आह… आपकी मोटी लंड ने मेरी चूत को पूरी तरह भर दिया…”

वो बातें करते-करते मेरे लंड को चूस रही थी। उसके होंठ मेरे लंड के चारों ओर कसे हुए थे और वह गहरे तक मुंह में ले जा रही थी। बीच-बीच में वह ऊपर देखकर मेरी आँखों में निगाहें मिला रही थी। उसकी कजरारी आँखों में वासना और समर्पण साफ दिख रहा था। इससे मैं और गरम हो गया। मेरे लंड में और खून भर गया और वह और भी सख्त होकर फड़कने लगा।

फिर वह श्वान शैली में हो गई।

माधुरी ने खुद को चारों हाथ-पैरों पर टिका लिया और अपनी कमर को नीचे करके पीछे की ओर उठा दिया। उसकी श्वान मुद्रा बेहद कामुक और आकर्षक लग रही थी। उसके गोरे, मोटे नितंब मेरे सामने पूरी तरह फैले हुए थे और बीच में उसकी गीली चूत साफ दिख रही थी। उसकी चूत से अभी भी सफेद रस की बूँदें टपक रही थीं।

मैंने उसके गोरे नितंबों को चूमा और उंगली डालकर गर्म किया।

मैंने दोनों हाथों से उसके नरम और गोल नितंबों को फैलाया और अपने गर्म होंठ उन पर रख दिए। मैंने पहले उसके दाहिने नितंब को चूमा, फिर बाएँ को, और अपनी जीभ से उनकी पूरी गोलाई चाटने लगा। उसके नितंबों की नरम त्वचा पर मेरी जीभ घूम रही थी। फिर मैंने अपनी उँगली उसके चूत के छेद पर रखी और धीरे-धीरे अंदर डाल दी। उसकी चूत अभी भी बहुत गर्म और गीली थी। मैंने उँगली को अंदर-बाहर करके उसे और गर्म किया। माधुरी श्वान शैली में रहते हुए जोर से कराह उठी, “आह सर… उँगली और गहरी डालिए… मेरी चूत अभी भी आपकी लंड के लिए तरस रही है…”

मैंने अपना मोटा, नसों वाला लंड माधुरी की सिकुड़ी हुई गांड़ के छेद पर रखा और एक जोरदार झटके के साथ पूरी लंबाई घुसा दिया। “आआआहह सर…! मेरी गांड़ फट गई… उफ्फ… बहुत मोटा लंड है आपका…!” माधुरी जोर से चीख पड़ी। उसका पूरा शरीर तेजी से काँप उठा और आँखों से आँसू निकल आए।

2 उंगलिया उसकी चुत में अंदर बाहर हो रही थी और मेरा मोटा लौड़ा उनकी गांड में सरपट दौड़ रहा था। मेरी दो उंगलियाँ उसकी चूत में तेज-तेज अंदर-बाहर घुस रही थीं जबकि मेरा गाढ़ा लंड उसकी टाइट गांड़ को फाड़ता हुआ सरपट दौड़ रहा था। बीच-बीच में मैं लंड को बाहर निकालकर उसके क्लिट पर जोर से रगड़ देता। माधुरी पूरी तरह हवस में पागल हो चुकी थी। वह चीख-चीखकर कह रही थी, “सर… और तेज चोदिए… मेरी गांड़ और चूत दोनों को फाड़ दीजिए… आहह… हाँ सर… मुझे रंडी की तरह चोदिए… बहुत मजा आ रहा है… उफ्फ…!”

कुछ देर घोड़ी की सवारी करने के बाद मैंने उसको दीवाल के सहारे गांड़ अपनी तरफ करके खड़ा कर दिया फिर घुटनों पर बैठ कर उसकी चुत और गांड को चाटने लगा।

और कुछ देर की चुसाई के बाद उसकी चुत ने फिरसे पानी छोड़ दिया और मैं फिरसे खड़ा हुआ और अपने लौड़े को चुत के मुहाने पर लगाकर जोरदार धक्का दिया। वो लगभग चीखने ही वाली थी कि मैंने उसका मुँह हाथ से दबाकर बंद कर दिया और बिना किसी रहम के जोरदार धक्के मारने लगा। “मेरी रंडी… ले… ले मेरी मोटी लंड… तेरी चूत को आज पूरी तरह नष्ट कर दूँगा…”

बिना किसी रहम के लगातार पेलाई करने लगा, और करीब 5 मिनट की जोरदार पेलाई के बाद उसका पैर कांपने लगा और वो बैठ गयी। उसकी चुत से जोरदार पानी का फवारा निकला और पूरा आस-पास का फर्श गीला हो गया जैसे उसने मूत दिया हो लेकिन मुझे पता था ये मूत नहीं, चूत का ही पानी था। झरने के काफी देर तक उसका पैर काँपता रहा और वो वैसे ही बैठी रही। “आहह सर… मैं मर गई… मेरी चूत फट गई… हाँ… हाँ…!”

और जब आराम मिला तो उठ कर खड़ी हुई और मुझे गले लगा कर किस की और बोली, “सर आपने मुझे पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया।”

मैंने उसे गोदी में उठाया। उसने दोनों हाथ मेरे गले में फँसा लिए और दोनों टांगें मेरी कमर पर लपेट ली। मैंने लौड़ा उसकी चूत में सेट किया और फिरसे चुदाई शुरू कर दिया।

मैंने माधुरी को अपनी मजबूत बाहों में गोदी में उठा लिया। उसका गोरा, पसीने से चिपचिपा शरीर मेरे सीने से सट गया। उसने दोनों हाथ मेरे गले में फँसा लिए और दोनों टांगें मेरी कमर पर कसकर लपेट ली। उसकी गीली चूत मेरे पेट से सटी हुई थी। मैंने अपना मोटा लंड नीचे से उठाकर उसकी चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्के के साथ अंदर सेट कर दिया।

मैंने लौड़ा उसकी चूत में सेट किया और फिरसे चुदाई शुरू कर दिया।

मैं खड़े-खड़े उसे गोदी में उठाए हुए जोर-जोर से चोदने लगा। हर धक्के पर उसके भारी स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। माधुरी मेरे गले से लिपटी हुई चीख रही थी, “आह सर… हाँ… इस तरह चोदिए… आपकी गोदी में चुदना बहुत मजा दे रहा है… मेरी चूत को और गहरी फाड़िए सर… उफ्फ…!” उसकी चूत मेरे लंड को कसकर चूस रही थी और हर धक्के के साथ पिच-पिच की आवाज निकल रही थी।

कुछ देर बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था।

मेरी सांसें तेज हो गईं और कमर में तनाव बढ़ गया। मैंने उसे और कसकर पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्कों के साथ अपना गाढ़ा, गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। “ले रंडी… ले मेरे वीर्य को… अपनी चूत भर ले…” माधुरी भी काँपते हुए चीखी, “हाँ सर… भर दीजिए… आपका गर्म वीर्य मेरी चूत में डालिए… आहह… मैं भर गई…!”

मैंने अपना मोटा लंड उसकी चूत से बाहर खींचा। उस पर मेरा गाढ़ा, सफेद वीर्य और उसकी चूत का रस चिपका हुआ था। माधुरी तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और पागलों की तरह मेरे वीर्य लगे लंड को मुंह में ले लिया। उसने पूरी लंबाई मुंह में भर ली और जोर-जोर से चूसने लगी। “मम्म… सर का गर्म वीर्य… बहुत स्वादिष्ट है…” वह आँखें बंद करके चूस रही थी, उसकी जीभ मेरे लंड की नसों पर घूम रही थी और सारा वीर्य चाट-चाटकर निगल रही थी।

लण्ड चूसते हुए बोली जितनी जोरदार चुदाई आपने 1 घंटे में कर दिया सर, उतनी चुदाई कार्तिक सर ने पुरे दिन में नहीं किया था, मैंने उससे कहा की कल तुम कार्तिक के साथ होटल चली जाओ, और वीडियो भी बनाना, मुझे देखना है, वो मान गयी।

माधुरी मेरे लंड को चूसते हुए ही बोली, “सर… जितनी जोरदार चुदाई आपने सिर्फ एक घंटे में कर दी… आह… उतनी तो कार्तिक सर पूरे दिन में भी नहीं कर पाए थे… आपकी मोटी लंड ने मेरी चूत को पूरी तरह फाड़ दिया… मैं कई बार झड़ गई…” मैंने उसके बाल पकड़कर कहा, “कल तुम कार्तिक सर के साथ होटल चली जाना… और पूरी चुदाई का वीडियो बना लेना… मुझे देखना है कि वो तेरी चूत कैसे चोदता है… समझी?” माधुरी ने मेरे लंड को चूसते हुए ही सिर हिलाया और बोली, “जी सर… मैं कल जाऊंगी… और वीडियो बनाकर आपको दूंगी…” वो मान गई।

अगली कहानी में बताऊंगा की कार्तिक के बाद मैं भी उसे होटल ले गया और क्या क्या हुआ। ये थी कहानी और मैंने माधुरी को करीब 3 साल तक चोदा, एक वक्त ऐसा भी थी की मेरी शादी हो गयी, और मैं अपनी और मेरी बीवी की चुदाई का वीडियो बनाकर उसे दिखता था और फिर उसे चोदता था, और मेरी किस्मत भी बहुत अच्छी निकली, मेरी बीवी ओपन माइंड वाली मिली और उसे लड़के और लड़की दोनों में इंरेस्ट था, और एक बार मैंने अपनी बीवी और माधुरी दोनों को साथ में चोदा और मेरी बीवी राधिका ने कई बार लेस्बियन सेक्स भी किया उसके साथ।

सभी कहानिया बारी बारी आती रहेंगी लेकिन आपको कमेंट करना पड़ेगा नहीं तो मुझे लगेगा की आपको कहानी पसंद नहीं आयी।

करीब 1 साल से माधुरी का पता नहीं चल रहा, मैंने एक दो चक्कर भी लगया उसके घर के आस पास लेकिन केवल माता पिता ही दीखते है उसके घर पर शायद उसकी शादी हो गई होगी।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।