Bhai behan sex story, Ghar me chudai sex story: दोस्तों, मेरा नाम रिया है। मेरी आयु 24 साल है। मैं एक छोटे से गांव से हूं। मेरे गांव की सुबह हमेशा ताजगी भरी होती थी जहां खेतों से मिट्टी की खुशबू उठती और हवा में बैलों की घंटियों की आवाज गूंजती रहती थी। घर की छत पर खड़े होकर हरे-भरे खेत नजर आते थे और किसान सुबह से शाम तक मेहनत करते दिखाई देते थे। मैं वहीं बड़ी हुई हूं जहां जीवन सरल था लेकिन दिल की भावनाएं बहुत गहरी और सच्ची होती थीं।
यह कहानी 3 साल पहले की है जब मैं 21 साल की थी। उस समय मेरी शादी नहीं हुई थी और मैं कुंवारी थी। अब तो मेरी शादी हो चुकी है और दो साल बीत चुके हैं। उन दिनों मेरी जिंदगी नई-नई उत्तेजनाओं से भरी थी जहां हर पल में कुछ अनोखा महसूस होता था। मैं अपनी उम्र के हिसाब से काफी उत्सुक रहती थी और दुनिया को नई नजर से देखने लगी थी।
हम लोग परिवार में कुल 4 सदस्य थे। मेरा भाई, मैं और मम्मी-पापा। हम मिडिल क्लास के लोग हैं। हमारा घर छोटा सा था लेकिन उसमें परिवार की गर्मजोशी हर कोने में भरी रहती थी। रसोई से मम्मी के हाथों के स्वादिष्ट खाने की महक आती रहती थी और शाम को हम सब बैठकर बातें करते थे।
पापा हमेशा बाहर जाते थे पैसे कमाने के लिए। वह दिल्ली में रहते हैं और सिलाई का काम करते हैं। पापा के जाने के बाद घर में एक खालीपन सा महसूस होता था लेकिन हम सब मिलकर उस कमी को पूरा करने की कोशिश करते थे। उनकी अनुपस्थिति में मम्मी घर संभालती थीं और हम भाई-बहन अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देते थे।
मैं और मेरा भाई जो कि मेरे से 2 साल छोटा है हम लोग पढ़ने जाते थे। उस समय मैं कॉलेज के सेकेण्ड इयर में थी और मेरा भाई बारहवीं में था। मैंने भी कभी चुदाई नहीं करवाई थी और भाई भी चुदाई से पूरी तरह अनजान था। हम दोनों की जिंदगी अभी तक बहुत निर्दोष और सीधी-सादी थी जहां छोटी-छोटी बातों पर भी दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं।
वो काफी शर्मीले मिजाज का हुआ करता था और मेरी हर बात मानता था। मुझे पता था कि उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी। मुझसे उसकी कोई बात छिपी नहीं थी। भाई का चेहरा हमेशा साफ-सुथरा और भावुक रहता था। जब वह मेरी बात सुनता था तो उसकी आंखों में पूरा भरोसा झलकता था।
जब मैं कॉलेज जाती थी तो एक लड़का मुझे ध्यान से देखा करता था। उसकी निगाहें इतनी गहरी और लगातार होती थीं कि मैं महसूस करती थी जैसे वह मेरे मन की बातें पढ़ रहा हो। मैं भी धीरे धीरे उसको पसंद करने लगी। उसकी मुस्कान और आंखों की चमक मेरे दिल में एक अनजानी गर्माहट भर देती थी।
फिर वो बहाने से मेरे साथ बात करने लगा और हम दोनों की फ्रेंडशिप हो गई। हमारी बातें शुरू में छोटी-छोटी होती थीं लेकिन धीरे-धीरे वे गहरी होती गईं। मैं हर मुलाकात का इंतजार करने लगी थी। चूंकि भाई मेरे कॉलेज के सामने से ही गुजरता था तो वो भी उस लड़के की निगाहें पढ़ चुका था। यह बात भाई को बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी।
भाई की आंखों में नाराजगी और चिंता साफ दिखाई देती थी जब वह मुझे देखता था। मुझे वो लड़का अच्छा लगने लगा था। हम लोग चोरी छुपे मिलते थे। उन मुलाकातों में मेरे दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं और एक अनोखा रोमांच महसूस होता था।
भाई को ये बात एक दिन पता लग गई कि हम लोग आपस में मिलते हैं। उसने मुझे धमकी दी कि वो घर में इस बात के बारे में बोल देगा। उसकी आवाज में गुस्सा और चिंता दोनों थे जो मुझे डरा रहे थे लेकिन साथ ही मैं समझ रही थी कि वह मेरी रक्षा करना चाहता है। बड़ी मुश्किल से मैंने उसको मनाया। फिर वो मान गया।
फिर कुछ दिन के बाद गर्मी का मौसम शुरू हो गया। फिर जुलाई का महीना आ गया। गर्मी काफी पड़ रही थी। हम लोग अब छत पर सोते थे। दिन में तो सूरज इतना तीखा चमकता था कि जमीन से आग सी निकल रही थी। रात को भी हवा गर्म और भारी हो जाती थी। पंखे की हवा भी राहत नहीं दे पाती थी। शरीर से पसीना लगातार बहता रहता था और कपड़े चिपक जाते थे। हम लोग अब छत पर सोने लगे थे ताकि थोड़ी ठंडी हवा मिल सके। छत पर तारों भरा आसमान देखना अच्छा लगता था लेकिन गर्मी से नींद उड़ जाती थी।
एक रात को बारिश का मौसम हो रहा था। मैंने भाई को छत पर सोने के लिए मना किया। आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे और हवा में नमी महसूस हो रही थी। कभी-कभी दूर से गरज की आवाज भी आने लगी थी। मैंने भाई से कहा कि आज छत पर मत सोना, बारिश आ सकती है। लेकिन वो नहीं माना। वो कहने लगा कि बारिश आएगी तब नीचे आ जाएगा। फिर वो ऊपर सोने चला गया।
हमारे घर में दो कमरे थे जिनमें बेड डले हुए थे। एक में मम्मी पापा सोते थे और एक में हम दोनों भाई बहन सोते थे। मैं उस दिन अपने रूम में सो रही थी नीचे। नीचे का कमरा थोड़ा गर्म था लेकिन बारिश की संभावना को देखते हुए मैंने वहीं रहना ठीक समझा।
रात को अचानक बारिश शुरू हो गई तो मेरी भी आंख खुली। बाहर जोर-जोर से पानी बरसने की आवाज आने लगी थी। छत पर पानी की बौछारें गिर रही थीं और हवा में ठंडी मिट्टी की खुशबू भर गई थी। मैं नींद में थी तो फिर मैंने दोबारा से आंखें बंद कर लीं। मगर मुझे याद है कि मैंने भाई को भागकर नीचे आते हुए देखा था। वो आकर मेरे पास बेड पर लेट गया। फिर मैं भी सो गई।
कुछ देर के बाद जब अचानक से मेरी नींद हल्की सी टूटी तो मेरी नजर भाई की ओर गई। मैंने पूरी आंखें नहीं खोलीं मगर मैं सोने का नाटक करती रही। वो बैठा हुआ मुझे ही देख रहा था। कुछ देर तक वो ऐसे ही मुझे बैठा बैठा देखता रहा। उसकी नजरें मेरे चेहरे, मेरे बदन पर घूम रही थीं। फिर वो मेरे पास आकर बैठ गया।
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मेरी तो धड़कनें तेज हो गईं। मगर उसने कुछ किया नहीं। मेरे दिल की धड़कनें इतनी तेज थीं कि मुझे लग रहा था वो सुन लेगा। फिर वो दोबारा से लेट गया। मगर इस बार वो मेरे काफी पास लेटा था। उसका शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था। लेटने के बाद उसने मेरे पेट पर अपना हाथ रख दिया।
मैं जाग गई और मैंने उसे भी जगा दिया। मगर वो तो पहले से ही जाग रहा था। मैंने उसको बोला ये क्या कर रहा है तू भाई। वो बोला सॉरी दीदी, नींद में था तो लग गया। फिर मैंने कहा ठीक है, सो जा आराम से।
उसके कुछ देर बाद उसने फिर से मेरे पेट पर हाथ रख दिया। मेरी आंख खुली मगर मैंने सोचा कि नींद में रखा होगा और मैं भी फिर सो गई।
एक घंटे के बाद मुझे कुछ महसूस हुआ। मुझे लगा जैसे कोई नुकीली चीज मेरे पीछे चुभ रही है। मैंने पाया कि भाई के हाथ मेरे बूब्स पर थे और वो पीछे से अपना लंड मेरी गांड पर चुभा रहा था। उसका लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था और वह गर्म तथा सख्त था। वह मेरी गांड की दरार में धीरे-धीरे रगड़ रहा था। मुझे उसके लंड की गर्मी कपड़ों के ऊपर से भी साफ महसूस हो रही थी। कभी-कभी वह अपनी कमर हिलाकर अपने लंड को मेरी गांड पर जोर से दबाता था।
मैं कुछ नहीं बोली और चुपचाप उसकी हरकतें देखने लगी। धीरे धीरे वो मेरे पूरे बदन पर हाथ से सहलाने लगा। उसकी उंगलियां मेरे पेट पर घुम रही थीं, फिर धीरे से नीचे की ओर बढ़ रही थीं। मेरे पेट से होते हुए मेरी चूत तक आ गया। ऊपर से उसने मेरी चूत पर हाथ फिरा दिया। एकदम से मेरे बदन में सरसरी दौड़ी जिसको मैंने बहुत ही मुश्किल से कंट्रोल किया। मेरी सांसें तेज हो गई थीं लेकिन मैंने उन्हें दबाने की कोशिश की।
वो मेरे बूब्स दबाने लगा और मैं कुछ नहीं बोल रही थी। उसके हाथ मेरे नरम और भरे हुए बूब्स को हल्के-हल्के दबा रहे थे। उसकी उंगलियां मेरे स्तनों को मसल रही थीं और मेरे निप्पल धीरे-धीरे सख्त होने लगे थे। हर दबाव के साथ मेरे शरीर में एक अनोखी गर्म लहर दौड़ रही थी।
भाई के सहलाने से मेरी चूत गीली होने लगी। मैंने अपनी चूत के बाल भी दो दिन पहले ही साफ किए थे। मेरी चूत अब धीरे-धीरे गीली हो रही थी और उसमें एक हल्की खुजली सी महसूस हो रही थी। मेरी पैंटी पर नमी का धब्बा बनने लगा था। मैं भी अब धीरे धीरे गर्म होने लगी थी। मगर मैं सोने का नाटक करती रही। मैं उसके हाथों का मजा ले रही थी।
उसने धीरे से फिर मेरी कैपरी नीचे कर दी। मैंने भी बिना उसको जाहिर हुए अपनी गांड थोड़ी सी उठा दी थी ताकि कैपरी आसानी से निकल जाए। मेरी कैपरी दोनों पैरों से होते हुए घुटनों तक और फिर टखनों तक सरक गई। ठंडी हवा अचानक मेरी नंगी टांगों पर पड़ी तो शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। मैं पूरी तरह सोने का नाटक करती रही जैसे मुझे कुछ पता ही न हो।
मेरी कैपरी को नीचे करने के बाद उसने मेरी पैंटी भी नीचे कर डाली और मेरी चूत को चाटने लगा। उसने मेरी पैंटी को धीरे-धीरे मेरी चूत से उतारा। जैसे ही पैंटी निकली मेरी साफ मुंडी हुई चूत पूरी तरह खुलकर उसके सामने आ गई। ठंडी रात की हवा मेरी गीली चूत की नरम फुल्लियों पर लगी तो मुझे एक अनोखा झुरझुरी वाला एहसास हुआ। मेरी चूत पहले ही काफी गीली हो चुकी थी और उसकी गर्म सांसें मेरी चूत पर पड़ रही थीं।
उसकी गर्म जीभ मुझे मेरी चूत पर महसूस हो रही थी। वो पहले मेरी चूत की दोनों फुल्लियों को अपनी जीभ से ऊपर से नीचे तक चाटने लगा। उसकी गर्म नम और मुलायम जीभ मेरी संवेदनशील चूत पर घूम रही थी। वह धीरे-धीरे मेरी चूत की दरार को चाट रहा था और मेरे रस का स्वाद ले रहा था। हर लिक के साथ मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ रही थी।
मैं खुद को अब कंट्रोल कर नहीं पा रही थी। मेरी सांसें तेज हो गई थीं और मेरे बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे। मेरी चूत से लगातार रस निकल रहा था जो उसकी जीभ पर चिपक रहा था।
फिर उसने मेरी चूत के अंदर ही जीभ दे दी और मेरी आह निकल गई। उसने अपनी जीभ को मेरी चूत के छेद में धकेल दिया और अंदर बाहर करने लगा। उसकी जीभ अंदर घुसते ही मेरी चूत की दीवारों को चाट रही थी। मैं अपने होंठ काटने लगी लेकिन फिर भी मेरे मुंह से आह निकल गई।
मैं उठ गई और चौंक कर बोली ये क्या कर रहे थे तुम। वो बोला सॉरी दीदी आप बहुत हॉट हो। मुझसे रहा नहीं गया। मैं नाटक करते हुए बोली मैं ये सब मम्मी को बता दूंगी। वो डर गया और अपनी साइड जाकर लेट गया।
उसका लंड उसकी कैपरी में अभी भी खड़ा था जो फिर धीरे धीरे सो गया। वो लेट तो गया लेकिन वो डर गया था। वो बोला दीदी मम्मी को मत बताना। मैं बोली नहीं बताऊंगी। मगर जैसा मैं कहती हूं फिर वैसा ही कर। उसने कहा हां। ठीक है। बताओ क्या करना है।
मैं बोली मेरे पास आ जा और मेरी चूत को अच्छे से चाट। ये सुनकर वो खुश हो गया और मेरे पास आकर उसने फिर से मुझे नीचे गिरा लिया। उसके बाद वो जोर जोर से मेरी चूत में जीभ से चाटने लगा।
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मैं तो पहले से ही गर्म थी। चूंकि अब भाई को मेरी चूत चाटने की अनुमति मिल गई थी तो वो पूरे जोश में बिना डरे चूत को चाट रहा था। वो अब बेझिझक मेरी चूत की फुल्लियों को चूस रहा था अपनी जीभ से मेरे क्लिटोरिस को तेजी से घुमा रहा था और बीच-बीच में पूरी जीभ अंदर डालकर चूत को फक रहा था। चाटने की आवाजें चट-चट की भर गई थीं।
इससे मैं जल्दी ही झड़ने को हो गई। मैं बोली रुक जा अब … आह … रुक … मेरा आने वाला है। वो बोला आने दो दीदी मैं आपका पानी पी जाऊंगा। अब मैं तेज तेज कमर हिलाने लगी और अपनी चूत को उसके मुंह से चुदवाने लगी। मेरी कमर अपने आप ऊपर-नीचे होने लगी। मैं अपनी चूत को उसके मुंह और जीभ पर जोर-जोर से रगड़ रही थी।
कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया और मैंने उसके मुंह को अपनी चूत पर दबा लिया। मेरा पूरा शरीर सख्त हो गया मेरी चूत सिकुड़ने लगी और गर्म-गर्म रस की धार उसके मुंह में निकलने लगी। मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूत पर कसकर दबा लिया ताकि एक भी बूंद बाहर न गिरे। उसने मेरी चूत का सारा पानी पी लिया। मैं शांत हो गई।
फिर वो बोला आपका तो हो गया लेकिन मेरे इसका क्या। उसने अपनी कैपरी में तने लंड को दिखाते हुए कहा। वो बोला अब आपका तो हो गया, मेरा कौन करेगा। मैंने कहा ठीक है, मगर मैं थोड़ा सा ही करूंगी। ज्यादा नहीं। वो बोला ओके। फिर उसने अपनी कैपरी निकाल दी और मैंने उसका लंड पहली बार देखा। उसका लंड 6 इंच का था और रस में पूरा भीग गया था।
उसका लंड मोटा और पूरी तरह खड़ा था। उसके सिरे पर चिपचिपा सफेद रस चमक रहा था और नसें उभरी हुई थीं। मैंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उसे छुआ तो वह गर्म और सख्त महसूस हुआ। फिर मैंने उसके लंड को मुंह में लिया। मुझे बहुत गंदा लगा। मैंने पहली बार लंड को मुंह में लिया था। फिर मैं चूसने लगी और धीरे धीरे मुझे अच्छा लगने लगा।
अब भाई के मुंह से आह … आह … करके आवाजें आने लगीं। मैं बोली क्या हुआ भाई। वो बोला करती रहो दीदी … बहुत मजा आ रहा है। चूसती रहो अच्छे से। मैं और अच्छे से उसका लंड चूसने लगी क्योंकि मुझे भी अब लंड चूसने में काफी मजा आने लगा था। पांच मिनट तक चुसवाने के बाद फिर उससे रहा नहीं गया और वो मेरे सिर को उठाकर बोला बस दीदी … अब आपको चोदने का मन कर रहा है। अब चूत में डालने दो प्लीज।
मेरी चूत में भी खुजली मची हुई थी इसलिए मैंने भी मौके का फायदा उठाया और मैं चूत खोलकर उसके सामने लेट गई। मैंने अपनी टांगें पूरी तरह चौड़ी कर लीं और घुटनों को मोड़ लिया ताकि मेरी चूत पूरी तरह खुल जाए। वो मेरी टांगों के बीच में आ गया और मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा। मैं भी पूरी गर्म हो गई और मजा लेने लगी। अब मेरा मन खुद ही चुदने का कर रहा था।
मैंने कहा भाई, जल्दी डाल दे। लेकिन वो हरामी मेरी चूत पर लंड को रगड़ता ही रहा। वो जानबूझकर मेरे क्लिटोरिस पर लंड का गर्म सिरा बार बार दबा रहा था जिससे मेरी चूत और गीली हो रही थी। फिर उसने अपना लंड एकदम से मेरी चूत में धकेल दिया और मेरी आह निकल गई। मैंने बहुत बार चूत में उंगली की हुई थी इसलिए मेरी चूत इतनी कुंवारी नहीं रह गई थी। उसका लंड मेरी चूत में फंस गया।
मुझे दर्द तो हुआ लेकिन मैं बर्दाश्त कर गई क्योंकि भाई का लंड भी औसत ही था। फिर वो मेरी चूत में लंड घुसाकर मुझे चोदने लगा। उसकी कमर तेजी से आगे पीछे हो रही थी और हर धक्के पर उसके अंडकोष मेरी गांड से टकरा रहे थे। हम दोनों के मुंह से आह … आह … करके सिसकारियां निकलने लगीं। मगर हमें ध्यान ही नहीं रहा कि घर में मम्मी पापा भी हैं। वो तो अच्छा हुआ कि बाहर जोर से बारिश पड़ रही थी और हम भाई बहन की चुदाई की आवाजें हमारे मम्मी पापा को सुनाई नहीं दीं।
मुझे चुदाई में पूरा मजा आ रहा था। भाई भी पागलों की तरह मुझे चोदने में लगा हुआ था। मैं अब बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी और जोर से चुदना चाह रही थी। मैंने कहा और तेज करो भाई। वो बोला हां चोद रहा हूं दीदी। मगर तुम्हें इतनी जल्दी क्यों मची है। हमें कोई ट्रेन पकड़नी है क्या। मैं बोली तू जोर से चोद … बहुत मजा आ रहा है … आह … चोद भाई … चोद दे बहन को … बहन की चूत भाई के लंड से चुदना चाह रही है। वो मुझे जोर जोर से चोदने लगा।
फिर वो थकने लगा तो मैंने उसको नीचे लेटा दिया और मैं उसके लंड पर बैठकर आगे पीछे होने लगी।
मैंने भाई को पीठ के बल लेटा दिया। उसकी सांसें तेज चल रही थीं और चेहरा पसीने से भीगा हुआ था। मैं उसके ऊपर चढ़ गई। मेरी टांगें उसके दोनों तरफ फैली हुई थीं। मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर उसके लंड को पकड़ा और अपनी गीली चूत के ऊपर रखा। फिर धीरे से नीचे बैठ गई। उसका पूरा लंड एक बार में मेरी चूत में समा गया।
मेरी चूत की दीवारें उसके मोटे लंड को कसकर जकड़ लीं। मैं आगे पीछे हिलने लगी। हर बार जब मैं ऊपर उठती तो उसका लंड आधा बाहर निकल आता और फिर मैं जोर से नीचे बैठ जाती। पच पच की आवाज गूंजने लगी। मेरे बूब्स उसके चेहरे के सामने उछल रहे थे।
उसको थोड़ी राहत मिली और फिर हम दोनों फिर से एक दूसरे का साथ देने लगे। मेरी चूत का पानी निकल चुका था जो भाई के लंड को पूरा गीला कर गया था। अब पच … पच की आवाज होने लगी और भाई भी झड़ने को हो गया।
वो बोला आह दीदी … और अंदर लो … आह … लेती रहो … बहुत मजा आ रहा है… आह … मैं आने वाला हूं दीदी … ओह … मैं आने वाला हूं। उसकी कमर नीचे से ऊपर उठ रही थी। वह मेरी चूत में और गहराई तक धक्के मार रहा था। उसके अंडकोष मेरी गांड से हर बार टकरा रहे थे।
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मैंने कहा नहीं, अंदर नहीं गिराना है। वो बोला ठीक है तो मैं लंड को निकाल लेता हूं। बाहर गिरा दूंगा। मैंने कहा नहीं, बाहर भी नहीं गिराना है। वो गुस्सा होकर बोला साली … फिर कहां गिराना है।
मैंने कहा मेरे मुंह में गिराना है। मैं पीना चाहती हूं। मैं भी देखना चाहती हूं लंड के माल का स्वाद कैसा होता है। तूने तो मेरी चूत के रस का स्वाद ले लिया। अब मैं लंड के माल का स्वाद लूंगी। जब उसका निकलने को हुआ तो उसने मेरी चूत से लंड को निकाल लिया और उठकर मेरे मुंह में लंड दे दिया।
वो मेरे मुंह में लंड से चोदने लगा। मैंने अपना मुंह खोलकर पूरा लंड अंदर ले लिया। मेरी जीभ उसके नीचे की नसों पर घूम रही थी। वो मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़कर तेजी से आगे पीछे कर रहा था।
मैं भी लंड को चूसकर उसका रस चख रही थी लेकिन वीर्य आना बाकी था। फिर वो जोर जोर से चिल्लाते हुए आहें भरने लगा और उसके वीर्य की गर्म पिचकारी मेरे मुंह में आने लगी। गर्म और मोटा वीर्य मेरी जीभ पर गिरा। स्वाद नमकीन और थोड़ा कड़वा था लेकिन बहुत उत्तेजक लग रहा था।
मुझे बहुत अजीब स्वाद लगा लेकिन वीर्य को मुंह में गिरवाने में मजा आया। मैं वीर्य को मुंह में ही रखे रही और फिर पास में जाकर थूक आई। उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और कुल्ला किया। फिर भाई भी बाथरूम में गया। उसका लंड अब सिकुड़ गया था।
फिर वो नंगा ही लेट गया। उसका लंड बहुत रसीला लग रहा था। मैं दोबारा से उसके लंड से खेलने लगी। मैंने उसे हाथ से सहलाया और फिर मुंह में लेकर चूसने लगी।
फिर उसने एक बार मुझे फिर से चोद दिया। इस तरह से हमने उस रात को तीन बार चुदाई की।
फिर मैं भाई से रोज ही चुदने लगी। जब तक मेरी शादी नहीं हुई मैं अपने ही घर में रहकर बहुत बार चुदी। कई बार तो उसने मुझे बाहर रूम पर ले जाकर भी चोदा। हम दोनों होटल में जाते थे और वहां पर चुदाई का मजा लेते थे।
उसके बाद मैंने एक बॉयफ्रेंड भी पाल लिया था। पर मुझे मेरे बॉयफ्रेंड से चुदाई में भी इतना मजा नहीं आता था जितना भाई के लंड से चुदवाने में आता था।
उसके बाद फिर शादी हो गई लेकिन जब भी घर आती मैं भाई का लंड जरूर लेती थी। अब भी हम दोनों का ये प्यार जारी है। मुझे भाई के लंड से चुदने में अलग ही मजा आता है।
यदि आपको भी कभी ऐसा मौका मिला हो कि किसी भाई या बहन संग चुदाई का मजा लिया हो तो अपना अनुभव भी आप मुझसे शेयर करना। आप मुझे हम भाई बहन की चुदाई की कहानी के बारे में भी बताना।
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