कहानी का पिछला भाग: भाई की नजर छोटी बहन की जवानी पर – 1
रोहन को सुनहरा मौका मिल गया था पायल को अपना बनाने का। उसने पायल को सीने से लगा लिया और चुप करवाने के बहाने उसके शरीर पर हाथ घुमाने लगा। उसकी हथेलियाँ धीरे-धीरे पायल की कमर पर फिरने लगीं, फिर पीठ की ओर बढ़ीं। पायल का शरीर अभी भी हल्का काँप रहा था।
“कोई बात नहीं पायल… इस उम्र में ये सब हो जाता है। तू मेरी अच्छी बहन है ना… मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा। वैसे मम्मी और सोनम कहाँ गए हैं?”
“वो मार्केट में गए हैं कुछ सामान लेने…”
पायल चुप हुई तो रोहन ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। उसकी उँगलियाँ पायल के गालों पर रुकीं। आँखों से बहते आँसुओं को देखकर उसने धीरे से अपने होंठ आगे बढ़ाए और उन आँसुओं को चूम लिया। एक-एक बूँद को अपने होंठों से सोखते हुए वह पायल की आँखों के पास पहुँचा। पायल की आँखें बंद हो गईं।
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रोहन ने मौके का फायदा उठाया और अपने होंठ पायल के जवान, रसीले होंठों पर रख दिए। पहले तो सिर्फ हल्का स्पर्श था, जैसे होंठों को महसूस कर रहा हो। फिर उसने धीरे से दबाव बढ़ाया। पायल ने छूटने की कोशिश की, अपने हाथों से रोहन की छाती पर धक्का दिया, लेकिन रोहन की मजबूत बाँहों की पकड़ में वह नहीं छूट पाई।
रोहन अब उसके रसीले होंठों का रस पीने में जुट गया। उसने अपने होंठों को पायल के निचले होंठ पर दबाया, फिर धीरे से चूसा। पायल के मुँह से एक हल्की सिसकारी निकली। रोहन ने जीभ से उसके होंठों की किनारियों को सहलाया, फिर धीरे-धीरे जीभ को अंदर डाला। पायल की जीभ से टकराई तो पहले तो वह सिकुड़ गई, लेकिन रोहन ने धैर्य से उसे सहलाया, चाटा, चूसा। धीरे-धीरे पायल का प्रतिरोध कम होने लगा।
कुछ देर छटपटाने के बाद पायल ने समर्पण कर दिया। उसका शरीर ढीला पड़ने लगा। अब वह रोहन के होंठों का जवाब देने लगी थी। दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपट रही थीं। रोहन ने होंठ चूमते हुए अपना दायाँ हाथ धीरे से पायल की मुलायम चूची पर रखा। पहले तो सिर्फ हथेली से छुआ, फिर हल्के से दबाया। पायल की साँसें तेज हो गईं। उसकी चूची तन गई। रोहन ने अँगूठे से निप्पल को सहलाया, फिर धीरे-धीरे मसलने लगा। पायल अब रोहन से चिपकती जा रही थी। उसकी बाँहें अनजाने में रोहन की कमर पर लिपट गईं।
रोहन ने पायल को खड़ा किया। अब दोनों आमने-सामने थे। उसने पायल के टॉप के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे ऊपर करने लगा। पायल ने दोनों हाथों से रोकने की कोशिश की।
“ये सब ठीक नहीं है भाई… हमें ऐसा नहीं करना चाहिए… आखिर हम बहन-भाई हैं।”
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“पायल, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ… बहुत दिनों से तुम्हें अपना बनाने का सपना देख रहा हूँ। आज अगर मेरा सपना पूरा होने जा रहा है तो प्लीज मुझे मत रोक।”
पायल “नहीं भाई नहीं” करती रही, लेकिन उसकी आवाज अब कमजोर हो चुकी थी। रोहन ने एक न सुनी और टॉप को पूरी तरह ऊपर खींचकर उतार दिया।
पायल ने ब्रा नहीं पहनी थी। टॉप उतरते ही उसकी दोनों संतरे के साइज की तनी हुई, गुलाबी निप्पल वाली चूचियाँ रोहन के सामने आ गईं। वे हल्के-हल्के साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। रोहन को जैसे कुबेर का खजाना मिल गया। उसकी आँखें चमक उठीं।
उसने दोनों चूचियों को अपने हाथों में थामा। पहले तो सिर्फ हथेलियों से उन्हें सहलाया, उनकी गर्माहट और मुलायमियत को महसूस किया। फिर धीरे-धीरे मसलने लगा। अँगूठे और तर्जनी से निप्पलों को पकड़कर हल्का सा खींचा, फिर छोड़ा। पायल के मुँह से सिसकारी निकली। रोहन ने एक चूची को मुँह के पास लाया और पहले तो सिर्फ होंठों से छुआ। फिर जीभ की नोक से निप्पल को चाटा। पायल का शरीर काँप उठा।
अंत में उसने पूरी चूची मुँह में ले ली। गर्म, मुलायम गोले को मुँह में भरते हुए उसने जोर से चूसा। जीभ से निप्पल को गोल-गोल घुमाया, हल्के से दाँतों से काटा। पायल के जवान जिस्म को पहली बार किसी मर्द के हाथों और मुँह का ऐसा मजा मिला था। वह मस्ती के मारे काँपने लगी। उसकी साँसें तेज और गहरी हो गईं।
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रोहन बेड पर बैठे-बैठे नीचे खड़ी पायल की चूचियाँ चूस रहा था। उसका एक हाथ पायल की नंगी पीठ पर था, जो धीरे-धीरे नीचे की ओर सरक रही थी। दूसरा हाथ उसके गदराए, गोल चूतड़ों पर पहुँच गया। उसने दोनों गालों को जोर से दबाया, फिर मसलने लगा। पायल की कमर झुक गई और वह रोहन के मुँह में अपनी चूची और गहराई से धकेलने लगी।
चूचियाँ चूसते-चूसते रोहन ने अपना एक हाथ पायल की स्कर्ट की कमरबंद पर ले जाकर हुक खोल दिया। स्कर्ट का बटन खुलते ही वह धीरे-धीरे नीचे सरकने लगी। रोहन ने हल्का सा झटका दिया तो स्कर्ट पल भर में जमीन पर गिर गई। पायल अब सिर्फ गीली पेंटी में खड़ी थी, उसकी जाँघें हल्की काँप रही थीं।
रोहन ने अपना दायाँ हाथ सीधे पायल की कुंवारी चूत पर रख दिया। पेंटी के पतले कपड़े के ऊपर से ही चूत की गर्माहट महसूस हो रही थी, जैसे कोई भट्टी जल रही हो। पूरी पेंटी कामरस से सराबोर थी, कपड़ा चिपचिपा और गीला हो चुका था। रोहन ने उँगलियों से हल्के से दबाया तो पायल की सिसकारी निकल गई।
रोहन धीरे से घुटनों के बल बैठ गया। उसने पायल की टाँगों को थोड़ा-थोड़ा अलग किया। पायल की जाँघें अब फैली हुई थीं। रोहन ने अपना मुँह आगे बढ़ाया और पेंटी के ऊपर से ही चूत पर होंठ रख दिए। पहले तो सिर्फ हल्के से चूमा, फिर जीभ बाहर निकालकर पेंटी के गीले हिस्से पर फेरने लगा। जीभ के हर स्पर्श पर पायल का शरीर सिहर उठता।
पायल की टाँगें अब जवाब देने लगीं। घुटने कमजोर पड़ रहे थे, वह खड़ी नहीं रह पा रही थी। उसने रोहन के कंधों पर हाथ रखकर खुद को संभालने की कोशिश की।
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रोहन ने अब पेंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे जाँघों से नीचे खींच दिया। पेंटी घुटनों तक आते ही पायल की सुनहरी, महीन बालों से हल्के ढकी गुलाबी कुंवारी चूत पूरी तरह नंगी हो गई। चूत की दोनों फाँकें गीली चमक रही थीं, क्लिटोरिस हल्का सा तना हुआ था। रोहन ने बिना एक पल गँवाए जीभ चूत पर फेर दी।
जीभ के पहले स्पर्श पर ही पायल की चूत ने और कामरस छोड़ दिया। गर्म, चिपचिपा रस रोहन की जीभ पर फैल गया। रोहन ने जीभ को और जोर से चलाया। पहले तो बाहर की फाँकों को चाटा, फिर जीभ की नोक से क्लिटोरिस को गोल-गोल घुमाया। पायल की सिसकारियाँ तेज हो गईं। रोहन ने जीभ को अंदर तक डालने की कोशिश की, चूत की दीवारों को चाटा और सारा रस चूस लिया।
झड़ने से पायल का बदन थोड़ा ढीला हुआ। उसकी साँसें तेज थीं, आँखें बंद। रोहन ने उसे सहारा देकर बेड पर लिटा दिया। पायल पीठ के बल लेट गई, उसकी चूचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
पायल को लिटाने के बाद रोहन खड़ा हुआ। उसने जल्दी से अपनी पैंट की बेल्ट खोली, जिप नीचे की और पैंट साथ अंडरवियर को घुटनों तक सरका दिया। उसका लंबा, मोटा, तना हुआ लंड बाहर आया। सुपाड़ा लाल और चमकदार था, नसें उभरी हुईं।
मोटा लंड देख पायल घबरा गई। उसकी आँखें फैल गईं, शायद पहली बार इतने नजदीक से किसी मर्द का लंड देख रही थी। रोहन ने लंड को पायल के मुँह के पास ले जाकर होंठों से लगाया। पायल ने तुरंत मुँह फेर लिया।
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“भाई, मुँह में मत लगाओ… ये गंदा है!”
“पगली, जिसे तू गंदा कह रही है, लड़कियाँ तरसती हैं इसे मुँह में लेने को। एक बार लेकर देख, फिर बार-बार चूसने का मन न करे तो कहना।”
पायल ना-ना करती रही, सिर हिलाती रही लेकिन रोहन ने धीरे से उसका चेहरा पकड़ा। उसने सुपाड़े को पायल के होंठों पर रगड़ा, फिर हल्का दबाव देकर मुँह में घुसा दिया। पायल तड़प उठी, आँखें खुल गईं, लेकिन बेबस थी। शुरू में उसने बुझे मन से जीभ चलाई, सिर्फ सुपाड़े को छुआ।
फिर धीरे-धीरे कामरस का हल्का नमकीन स्वाद जीभ पर लगा। पायल को अजीब सा मजा आने लगा। उसने अनजाने में जीभ को और आगे बढ़ाया। अब वह मस्ती में लंड को आइसक्रीम की तरह चाटने-चूसने लगी। पहले सुपाड़े को चाटा, फिर जीभ से नसों के साथ ऊपर-नीचे फेरी। रोहन का लंड और सख्त हो गया।
सगी बहन ऐसा करती देख रोहन सातवें आसमान पर था। उसकी मस्ती भरी आहें और सिसकारियाँ निकल रही थीं। वह धीरे-धीरे कमर हिलाने लगा, लंड को पायल के मुँह में और गहराई तक धकेलने लगा।
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रोहन ने पायल को धीरे से सीधा किया और बेड पर लेटते हुए 69 की पोजीशन में आ गया। उसने अपना लंड फिर से पायल के मुँह के पास ले जाकर होंठों पर रख दिया, जबकि अपना मुँह पायल की अभी भी गीली और गरम चूत पर लगा दिया। जीभ बाहर निकालकर उसने चूत की फाँकों को सहलाया, फिर क्लिटोरिस पर हल्के से दबाव डाला।
दोनों भाई-बहन अब पूरी तरह मस्त हो चुके थे। वे एक-दूसरे के यौन अंगों को चाट-चूम रहे थे, दिन-दुनिया से बेखबर। रोहन की जीभ चूत की गहराई तक जाती, रस चूसती, जबकि पायल अब उत्साह से लंड को मुँह में ले रही थी। वह सुपाड़े को चूसती, जीभ से नसों को सहलाती, कभी गहराई तक ले जाती तो कभी बाहर निकालकर चाटती। रोहन की आहें और पायल की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
कुछ देर बाद पायल की चूत से तेज अमृत वर्षा हुई। उसका शरीर काँप उठा, कमर ऊपर उठी और चूत सिकुड़ती हुई रस छोड़ने लगी। रोहन ने सारा रस जीभ से चाट लिया, चूत को और गहराई से चूसा। उसी पल रोहन का लंड भी फड़का और पिचकारी छोड़कर पायल के मुँह में गर्म वीर्य भरने लगा। धड़क-धड़क कर मोटे-मोटे फुहार निकले।
पायल को उबकाई आई, गले में कड़वाहट महसूस हुई लेकिन लंड अभी भी मुँह में था। वह बेबसी में सारा माल गटक गई, कुछ वीर्य होंठों के किनारे से बहकर गाल पर गिर गया। दोनों पस्त हो चुके थे, साँसें तेज, शरीर पसीने से तर। लेकिन असली काम अभी बाकी था।
पायल ने हाँफते हुए कहा, “भाई अब और मत करो… मम्मी और सोनम अब आने वाले होंगे। अगर बीच में आ गए तो सारा मजा खराब हो जाएगा।”
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रोहन अब रुकना नहीं चाहता था। ऐसा मौका दुबारा मिलना मुश्किल था। फिर भी उसने फोन उठाया और सोनम को कॉल किया। फोन मम्मी ने उठाया।
“हाँ रोहन, अभी हम मार्केट में हैं। सामान बहुत है, कम से कम दो घंटे तो लगेंगे।”
इतना समय दोनों के लिए काफी था अपनी कामेच्छा शांत करने को। फोन काटते ही रोहन फिर पायल पर छा गया। उसने अपना अभी भी अधसख्त लंड पायल के होंठों के हवाले कर दिया। पायल ने बिना विरोध के मुँह खोला और चूसने लगी। जीभ से सहलाती, चूसती। दो मिनट में ही लंड लोहे की छड़ जैसा सख्त हो गया, नसें फूल गईं, सुपाड़ा चमकदार और लाल।
रोहन ने पायल को बेड के किनारे लिटाया। उसकी टाँगें फैलाकर अपने कंधों पर रख लीं। चूत अब पूरी तरह खुली हुई थी। रोहन ने जीभ फिर चूत पर फेर दी, बाहर की फाँकों को चाटा, क्लिटोरिस को जीभ की नोक से घुमाया। पायल की सिसकारियाँ फिर शुरू हो गईं।
थूक से चूत को अच्छे से गीली करने के बाद रोहन ने लंड का सुपाड़ा चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। सुपाड़ा चूत की फाँकों के बीच सरकता, क्लिटोरिस को छूता। पायल घबरा रही थी। उसकी आँखों में डर और उत्सुकता दोनों थे।
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“भाई, मेरा पहली बार है… बहुत डर लग रहा है। तुम्हारा लंड कितना मोटा-लंबा है और मेरी चूत का छेद कितना छोटा।”
“मेरी जान, जिसे तू छोटा छेद कह रही है उसमें सारा जहान समा जाए फिर भी जगह बचेगी। घबरा मत, तेरा भाई प्यार से चुदाई करेगा।”
लंड रगड़ने से पायल की चूत भी बेचैन हो गई। वह गांड उठा-उठाकर लंड का स्वागत करने लगी, जैसे और गहराई चाह रही हो। रोहन ने थोड़ा लंड दबाया। सुपाड़ा चूत के मुंह में दबाव डालने लगा। पायल के चेहरे पर दर्द की लकीरें उभरीं, आँखें सिकुड़ गईं।
रोहन समझ गया कि ऐसे फट जाएगी और शोर मचेगा। उसने पास पड़ी तेल की शीशी उठाई। ढेर सारा तेल अपनी हथेली में लिया, पहले चूत पर मल दिया—फाँकों को, क्लिटोरिस को, छेद को। फिर लंड पर भी अच्छे से तेल लगाया, पूरा लंड चिकना और चमकदार हो गया। फिर रगड़ना शुरू किया। सुपाड़ा अब आसानी से सरक रहा था।
“भाई और कितना तड़पाओगे… अब डाल भी दो अंदर… नहीं रुका जा रहा!”
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यह सुनते ही रोहन ने जोश में एक जोरदार धक्का लगाया। फट की हल्की आवाज के साथ सुपाड़ा चूत में घुस गया। पायल नहीं जानती थी कि पहली चुदाई में चूत के साथ गांड भी फटती है। वह जोर से चीख पड़ी और दर्द से हाथ-पैर मारने लगी। आँखों से आँसू बहने लगे।
रोहन ने तुरंत उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, जीभ अंदर डालकर शांत करने की कोशिश की। पायल छटपटा रही थी। लंड अभी सिर्फ दो इंच घुसा था। रोहन ने देर न की। कमर उचकाकर दो जोरदार धक्के लगाए। आधे से ज्यादा लंड चूत में उतर गया। पायल की चूत तनी हुई, दीवारें लंड को कसकर पकड़े हुए थीं। दर्द और मजा दोनों मिलकर उसका शरीर काँप रहा था।
पायल की हालत ऐसी थी जैसे वह बेहोश होने वाली हो। उसकी सांसें तेज और अनियमित चल रही थीं। चूत से खून की पतली धार निकलकर उसकी गांड तक फैल चुकी थी, जिससे चादर पर लाल-भूरा दाग बन गया था। रोहन का सात इंच का मोटा लंड उसकी टाइट चूत में शिकंजे की तरह फंसा हुआ था, बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था।
फिर भी रोहन ने गहरी, लंबी सांस ली। उसने अपने कूल्हों को थोड़ा और पीछे खींचा और फिर जोर से आगे धकेला। पहले धक्के में लंड का आधा हिस्सा और अंदर चला गया। पायल के मुंह से तीखी चीख निकली। दूसरा धक्का और तेज था, अब लंड का तीन चौथाई हिस्सा अंदर समा गया। तीसरे धक्के के साथ रोहन ने पूरी ताकत लगाई और पूरा सात इंच का लंड एक झटके में पायल की चूत के अंदर फिट हो गया। चूत की दीवारें लंड के चारों ओर कसकर सिकुड़ गईं।
अब रोहन ने धक्के देना बंद कर दिया। वह स्थिर होकर पायल के ऊपर लेट गया। उसने धीरे से पायल की दोनों चूचियों को अपने हाथों में भर लिया। पहले दायीं चूची को मुंह में लिया, जीभ से उसकी निप्पल को गोल-गोल घुमाया, फिर जोर से चूसा। बायीं चूची को हाथ से मसलने लगा, उंगलियों से निप्पल को पिंच करता हुआ। पायल दर्द से कराह रही थी, उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
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“बस मेरी बहना… अब दर्द नहीं होगा। देख, पूरा लंड तेरी चूत में जा चुका है। जिसे तू छोटा छेद कहती थी, वो मेरा सात इंच निगल गया है।” रोहन ने प्यार से कहा और उसके माथे पर हल्का चुम्बन दिया।
“प्लीज भाई… बहुत दर्द हो रहा है… निकाल लो… चूत फट गई… मैं नहीं चुदवाना चाहती…” पायल रोते हुए बोली, उसकी आवाज कांप रही थी।
“अरे देख तो, पूरा घुस चुका है… अब धीरे-धीरे दर्द कम हो जाएगा। बस थोड़ा सब्र कर।” रोहन ने उसे तसल्ली दी और लगातार उसकी चूचियों को चूमता रहा, होंठों को चूसता रहा, जीभ से उसके गले और कानों को चाटता रहा।
दो-तीन मिनट तक यही सिलसिला चलता रहा। धीरे-धीरे पायल का शरीर रिलैक्स होने लगा। दर्द अब पहले जितना तेज नहीं था। उसने भी रोहन के चुम्बनों का जवाब देना शुरू कर दिया। जब रोहन ने उसके होंठ चूमे तो पायल ने भी हल्के से होंठ दबाए। रोहन को समझ आ गया कि अब हरी झंडी मिल गई है।
उसने बहुत धीरे से कूल्हे पीछे खींचे। लंड आधा बाहर निकला। पायल की चूत की दीवारें लंड को कसकर पकड़े हुए थीं। फिर रोहन ने फिर से धीरे से अंदर धकेला। पूरा लंड फिर से अंदर चला गया। पायल को हल्का दर्द हुआ, लेकिन अब वह उसे सहन करने को तैयार थी।
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रोहन ने इसी तरह धीरे-धीरे गति बढ़ानी शुरू की। पहले हर धक्का पांच-छह सेकंड में, फिर चार सेकंड में। पायल की चूत में अब गर्माहट और नमी बढ़ने लगी। कुछ देर बाद चूत ने पानी छोड़ना शुरू किया। चिकनाहट आने से लंड अब आसानी से फिसलने लगा। हर धक्के के साथ चपचप की हल्की आवाज आने लगी।
पायल को भी अब मजा आने लगा था। उसने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठानी शुरू की, धक्कों का स्वागत करने लगी। उसकी सांसें तेज हो गईं, लेकिन अब दर्द की जगह सुख की कराह निकल रही थी।
पांच मिनट तक धीमी और गहरी चुदाई चलती रही। फिर अचानक दोनों के बीच तूफान सा उठा। रोहन ने स्पीड बढ़ा दी। अब धक्के जोरदार और तेज हो गए। पायल भी पूरी ताकत से गांड उठाकर जवाब दे रही थी। दोनों एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश में लगे हुए थे। बिस्तर की चादर मुड़ गई थी, तकिए नीचे गिर गए थे।
दस मिनट बाद पायल का पूरा शरीर अकड़ गया। उसकी चूत सिकुड़ने लगी। एक जोरदार झटके के साथ उसने चूत से पानी फेंका। गर्म पानी रोहन के लंड के चारों ओर बहने लगा। रोहन को वह गीलापन और गर्मी साफ महसूस हुई। पायल की आंखें बंद हो गईं, वह सुस्त पड़ गई।
लेकिन रोहन ने धक्के लगाना नहीं रोका। वह लगातार जोर-जोर से अंदर-बाहर करता रहा। कुछ देर बाद पायल फिर से हरकत में आई। उसने फिर से गांड उठाई और धक्कों का जवाब देने लगी।
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एक ही पोजीशन में चुदाई करते-करते रोहन ने पायल को पलट दिया। उसने पायल की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे घुटनों और हाथों के बल पर घोड़ी की तरह खड़ा कर दिया। पायल की गांड ऊपर उठी हुई थी, चूत पीछे की तरफ खुली हुई नजर आ रही थी। रोहन ने पीछे से अपना सात इंच का लंड हाथ में लिया, उसकी नोक को पायल की चूत के मुंह पर रखा और धीरे से धकेला। लंड पहले से चिकना होने की वजह से आसानी से अंदर चला गया। पूरा लंड एक ही झटके में चूत के अंदर समा गया।
चुदाई फिर से शुरू हो गई। रोहन ने दोनों हाथों से पायल की कमर को मजबूती से पकड़ा और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उसके टट्टे हर धक्के के साथ पायल की चूत और क्लिटोरिस पर थपथपा रहे थे। कमरे में फच्च-फच्च, चपचप की तेज आवाजें गूंज रही थीं। पायल की गांड हर धक्के पर हिल रही थी, उसकी चूचियां नीचे लटककर झूल रही थीं। रोहन कभी-कभी हाथ बढ़ाकर उन चूचियों को मसल लेता, निप्पल को उंगलियों से कसकर दबाता।
चुदाई बहुत लंबी चलती रही। रोहन की रफ्तार कभी तेज होती, कभी थोड़ी धीमी, लेकिन रुकती नहीं। पायल की सांसें तेज हो गईं। पहले उसकी चूत ने दूसरी बार रस छोड़ा था, अब तीसरी बार आने वाला था। उसकी चूत की दीवारें बार-बार सिकुड़ रही थीं, लंड को कसकर दबा रही थीं। अचानक पायल का शरीर कांप उठा। उसने जोर से कराहते हुए चूत से गर्म पानी फेंका। पानी लंड के चारों ओर बहकर टट्टों तक पहुंच गया। पायल की टांगें कांप रही थीं, लेकिन रोहन ने धक्के जारी रखे।
कुछ देर बाद रोहन को भी झड़ने का समय आ गया। उसने स्पीड और जोर बढ़ा दिया। आखिरी कुछ धक्के बहुत तेज और गहरे थे। फिर रोहन का शरीर अकड़ गया। उसने जोर से कराहते हुए पूरा वीर्य पायल की चूत के अंदर छोड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य की धारें चूत की दीवारों पर पड़ रही थीं। रोहन ने कई बार कूल्हे पीछे-आगे करके सारा वीर्य अंदर उड़ेल दिया।
झड़ते ही दोनों थककर पस्त हो गए। रोहन पायल की पीठ पर लेट गया। उसका लंड अभी भी चूत के अंदर था, धीरे-धीरे सुकड़ रहा था। कुछ देर बाद लंड पूरी तरह ढीला हो गया। फक की हल्की सी आवाज के साथ लंड चूत से बाहर निकल गया। जैसे ही लंड बाहर आया, चूत से मोटी सफेद धार बहकर निकलने लगी। वीर्य और पायल का कामरस मिलकर चूत के मुंह से टपक रहा था, गांड की दरार से होता हुआ चादर पर फैल रहा था।
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पांच मिनट तक दोनों चुपचाप लेटे रहे। उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। फिर पायल धीरे से उठी। उसने नीचे देखा तो पूरी चादर पर खून के लाल धब्बे, कामरस के गीले निशान और वीर्य की सफेद धारियां नजर आ रही थीं। चादर पूरी तरह गंदी और भीगी हुई लग रही थी।
कहानी जारी रहेगी।
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