कहानी का पिछला भाग: भाई की नजर छोटी बहन की जवानी पर – 2
रोहन का लंड अभी भी पायल की चूत में गहराई तक धँसा हुआ था। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं, पसीने से तर-बतर बदन एक-दूसरे से चिपके हुए थे। रोहन की कमर धीरे-धीरे हिल रही थी, हर हल्की हरकत से उसका मोटा लंड पायल की तंग चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। पायल की आँखें बंद थीं, होंठ कँपकँपा रहे थे, और उसकी उँगलियाँ रोहन की पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थीं।
कुछ देर बाद रोहन का लंड धीरे-धीरे सुकड़ने लगा। उसकी साँसें अब भी भारी थीं। आखिरकार, पूरी तरह ढीला पड़ने पर लंड पायल की चूत से फिसलकर बाहर निकल गया। “फक” की हल्की, गीली आवाज़ कमरे में गूँजी। जैसे ही लंड बाहर आया, रोहन के वीर्य की गाढ़ी धार पायल की चूत से बहकर बाहर निकली। सफेद, गर्म रस पहले तो धीरे-धीरे टपकता रहा, फिर तेज़ी से बेड की चादर पर फैलने लगा। चादर पर पहले से मौजूद खून के लाल धब्बों के साथ अब सफेद वीर्य के धब्बे भी मिल गए। दोनों तरल पदार्थ मिलकर चादर पर गीले, चिपचिपे निशान बना रहे थे।
करीब पाँच मिनट तक दोनों चुपचाप लेटे रहे। उनकी साँसें धीमी और नियमित हो गईं। पायल ने आँखें खोलीं, धीरे से शरीर को हिलाया और बिस्तर पर उठकर बैठ गई। जैसे ही उसने अपने पैर नीचे किए, चूत में तेज़ टीस उठी। दर्द इतना गहरा था कि वह “आह…” करके कराह उठी। उसने झुककर अपनी चूत की ओर देखा। दोनों होंठ सूजकर लाल हो गए थे, बाहर की तरफ फूले हुए, जैसे डबल रोटी की तरह मोटे और भारी हो गए हों। बीच में से अभी भी हल्का खून और वीर्य का मिश्रण रिस रहा था। दर्द और शर्म से उसकी आँखों में आँसू भर आए।
वह फूट-फूटकर रो पड़ी। रोते हुए उसने मुट्ठियाँ बनाईं और रोहन की छाती पर जोर-जोर से मुक्के मारने लगी। “यह देखो भाई… तुमने मेरी चूत का क्या हाल कर दिया! कोई भाई अपनी बहन के साथ ऐसा करता है?”
रोहन ने उसकी कलाइयाँ पकड़ लीं और हल्के से हँसते हुए कहा, “करता है ना… तुमने भी तो भाई-बहन की चुदाई वाली बहुत कहानियाँ पढ़ी हैं, जिनमें भाई ने बहन की चूत चोदी है।”
पायल हैरान होकर बोली, “तुम्हें कैसे पता कि मैं ऐसी कहानियाँ पढ़ती हूँ… कहीं तुम ही तो नहीं…?”
रोहन ने हाँ में सिर हिलाया। पायल का मुँह खुला रह गया। फिर गुस्से से उसने फिर से मुक्के बरसाने शुरू कर दिए। “बहुत कमीने हो भाई… अपनी बहन को चोदने के लिए कैसा रास्ता अपनाया!”
रोहन हँस पड़ा। उसने पायल को अपनी बाहों में खींच लिया और कहा, “पर भाई मैं ही क्यों… सोनम क्यों नहीं? वो तो मुझसे बड़ी है, पहले उसकी चूत फटनी चाहिए थी।”
“तू इसलिए क्योंकि तू मेरी जान है… सोनम से ज्यादा मैं तुझे प्यार करता हूँ।”
“अच्छा… अगर प्यार करते तो इतनी बेदर्दी से चूत न फाड़ते।”
“कभी न कभी तो फटनी ही थी… आज फट गई तो क्या बुरा हुआ? मजा तो आया न?”
पायल ने कुछ पल चुप रहकर कहा, “हाँ… मजा बहुत आया… पर शुरू में दर्द भी बहुत हुआ। लग रहा था अब मर जाऊँगी… लेकिन फिर वो मजा आया जिसके सामने दर्द कुछ भी नहीं।”
रोहन ने फिर पूछा, “तू खुश है ना चुदवाकर?”
पायल कुछ नहीं बोली। बस शरमाकर नजरें नीचे कर लीं। रोहन ने दोबारा पूछा तो उसने हल्के से हाँ में गर्दन हिलाई। फिर वह अपना नंगा बदन रोहन की बाहों में सौंप देती है। रोहन ने उसके होंठों को चूमा, पहले हल्के से, फिर गहराई से। दोनों एक-दूसरे से लिपट गए।
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तभी रोहन की नजर दीवार पर टँगी घड़ी पर पड़ी। लगभग एक घंटा बीत चुका था। उसने तुरंत सोनम को फोन किया। सोनम ने बताया कि पंद्रह मिनट में वे घर पहुँच रहे हैं।
रोहन ने जल्दी से पायल को उठाया। “जल्दी कपड़े पहन लो,” कहकर वह खुद भी नंगे बदन से उठा और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहनकर अपने कमरे की ओर चला गया।
पायल ने काँपते हाथों से अपने कपड़े पहने। फिर उसने चादर को उठाया, उस पर बने खून और वीर्य के धब्बों को एक बार फिर देखा और उसे अपनी पहली चुदाई की निशानी समझकर अलमारी में छुपा दिया। कमरे को जल्दी से दुरुस्त किया, बिस्तर ठीक किया और बाथरूम में चली गई। वहाँ शावर खोलकर देर तक नहाती रही, गर्म पानी से अपने बदन को धोती रही, जब तक मम्मी और सोनम घर नहीं आ गए।
रोहन भी अपने कमरे में नहाकर बाहर आया और बेड पर लेटकर अभी-अभी बीते पलों को याद करता हुआ सो गया।
सोनम और मम्मी आधे घंटे बाद आईं। तब तक चुदाई का तूफान पूरी तरह शांत हो चुका था।
पायल ने दरवाजा खोला। उसके कदम अभी भी लड़खड़ा रहे थे, चूत में उठती टीस और सूजन के कारण चलना मुश्किल हो रहा था। मम्मी और सोनम अभी बाहर से आकर सामान रख रही थीं। पायल ने सीधे मम्मी से मिलने की बजाय हाथ जोड़कर कहा, “मम्मी, मुझे बहुत सर दर्द हो रहा है। मैं कमरे में जाकर सो जाती हूँ।”
मम्मी ने चिंता से देखा लेकिन कुछ बोली नहीं। पायल धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़कर अपने कमरे में गई और दरवाजा बंद करके बिस्तर पर लेट गई। बाकी दिन ऐसे बीता जैसे कुछ हुआ ही न हो। वह चुपचाप लेटी रही, कभी-कभी चादर के नीचे हाथ डालकर अपनी सूजी हुई चूत को सहलाती, दर्द और यादों में खोई रही।
रात को खाने की टेबल पर सब इकट्ठा हुए। सबसे पहले पायल और रोहन आए। पायल ने ढीले-ढाले टॉप और पजामा पहना था ताकि चूत की सूजन छिपी रहे। सोनम मम्मी की मदद कर रही थी, रसोई से प्लेटें ला रही थी।
रोहन ने बेशर्मी से टेबल के नीचे अपना हाथ पायल की जाँघ पर रख दिया। धीरे-धीरे ऊपर की तरफ फेरते हुए उसने पायल की चूची को दबा दिया। पायल घबरा गई, उसकी आँखें फैल गईं। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मरवाओगे क्या भाई… मम्मी ने देख लिया तो दोनों का घर से निकाला हो जाएगा।”
रोहन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हो जाने दो, मैं अपनी प्यारी बहना को लेकर दूर चला जाऊँगा और वहाँ हम साथ जिंदगी बिताएंगे।”
“हट… तुम पागल हो गए हो भाई।” पायल हँसते हुए बोली, लेकिन उसकी आवाज में डर और शरम दोनों थे।
तभी सोनम आई और हँसती पायल देखकर पूछा, “क्या गपशप हो रही है तुम दोनों में?”
रोहन ने झट से हाथ हटाया और बोला, “कुछ नहीं, बहन-भाई की बात है, तुम्हें क्यों बताएँ?”
“अच्छा न बताओ… तुम्हारी मर्जी।” सोनम हँसकर रसोई में चली गई।
सोनम जाते ही रोहन ने फिर से पायल की चूची पकड़ ली और जोर से दबा दिया। पायल ने दाँत पीसे और फुसफुसाई, “क्या करते हो भाई… दिन में मन नहीं भरा? तुमने मसल-मसलकर दोनों चूचियाँ लाल कर दी हैं।”
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“अच्छा दिखाओ तो जरा…” रोहन ने पायल के टॉप को ऊपर करने की कोशिश की।
पायल डरकर झटके से उठी और रसोई की तरफ चली गई। चुदाई के बाद उसकी चाल अभी भी बदली हुई थी, कूल्हे हिलते हुए, पैर थोड़े फैलाकर चल रही थी। जानबूझकर वह रसोई में सामान से टकराई और “आह…” करके लंगड़ाकर चलने लगी जैसे चोट लगी हो।
मम्मी ने तुरंत डाँटा, “ये लड़की देखकर चल ही नहीं सकती, चोट लग गई न!”
रोहन भी रसोई में आया। पायल ने उसकी तरफ देखकर आँख मारी। रोहन समझ गया। उसने मासूमियत से कहा, “कहाँ चोट खाती घूम रही है… चल कुर्सी पर बैठा दूँ।”
उसने पायल की बाजू पकड़ी और सहारा देते हुए टेबल की तरफ ले गया। मम्मी और सोनम काम में लगे थे, किसी का ध्यान नहीं गया। रोहन ने पायल के बगल में हाथ डाल दिया, उँगलियाँ धीरे-धीरे उसकी चूची पर फिराईं और मसलने लगा। वह तब तक मसलता रहा जब तक पायल कुर्सी पर नहीं बैठ गई।
पायल ने फुसफुसाकर कहा, “भाई तुम बहुत बेशर्म और बदमाश हो… कुछ शर्म करो!”
“अब तुमसे कैसी शर्म… अब तो तुम मेरी रानी हो।” रोहन हँसा।
“आज रात का क्या प्रोग्राम है?”
“ना भाई रात को नहीं… सोनम साथ होती है, शक हो गया तो तरसते रह जाओगे।”
रोहन ने समझाया, “पढ़ाई के बहाने मेरे कमरे में आ जाना और वहीं सो जाना। कोई उठाएगा तो कह दूँगा सो गई है तो यहीं सो जाने दो। जब सब सो जाएँगे तो तुम और मैं… समझ गई न?”
रोहन ने आँख मारी। पायल शरमाई, गाल लाल हो गए। उसने हल्का-सा मुक्का मारकर कहा, “भाई तुम पूरे बहनचोद हो…”
रोहन हँसा, “मुझे बहनचोद बनाया भी तो तुमने ही है मेरी प्यारी बहना!”
खाना आया। सब चुपचाप खाने लगे। पायल दर्द से थोड़ा धीरे-धीरे खा रही थी। खाने के बाद सबने थोड़ी बातें कीं। मम्मी ने पापा को फोन किया। पापा ने बताया कि वे रात को नहीं आ रहे थे।
दस बजे सब सोने लगे। पायल ने सोनम और मम्मी से कहा, “मैं रोहन भैया के पास पढ़ाई करने जा रही हूँ।”
सोनम ने कहा, “मैं समझा दूँगी लेकिन…”
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पायल ने मना कर दिया। “नहीं, मैं खुद जाऊँगी।”
सब सोने चले गए। सोनम मम्मी के साथ सो गई।
रोहन के कमरे में दोनों किताबें खोलकर बैठे। रोहन ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। पायल ने किताब खोलकर रखी लेकिन उसकी नजरें रोहन पर थीं। रोहन ने मुस्कुराकर कहा, “अब इंतजार खत्म… बस थोड़ी देर और।”
पायल शरमाकर मुस्कुराई और किताब के पीछे छिप गई।
मम्मी दूध देने आएगी, यह दोनों को पहले से पता था। बीस-पच्चीस मिनट बाद दरवाजे पर हल्की खटखटाहट हुई। रोहन ने फुर्ती से किताबें ठीक कीं और पायल ने दुपट्टा सिर पर डाल लिया। मम्मी ने दरवाजा खोलकर अंदर झाँका, हाथ में दो गिलास गरम दूध लिए हुए थे। उन्होंने ट्रे बेडसाइड टेबल पर रखी और मुस्कुराकर बोलीं, “लो, पढ़ाई के बीच में पी लेना, ठंडा न हो जाए।”
पायल ने शरमाते हुए कहा, “मम्मी, आज रात यहीं सो जाऊँगी। काम बहुत ज्यादा है, देर तक लगेगा।”
मम्मी ने एक पल उन्हें देखा, फिर सहमति में सिर हिलाया। “जैसा ठीक लगे। बस ज्यादा देर मत जागना, सुबह जल्दी उठना है।” कहकर वे दरवाजा बंद करके चली गईं।
मम्मी के कदमों की आवाज़ गलियारे में फीकी पड़ते ही रोहन ने पलक झपकते ही पायल को अपनी मजबूत बाहों में कसकर भर लिया। उसके होंठ पायल के नरम, गर्म होंठों पर टिक गए। चुम्बन गहरा और भूखा था, जीभें एक-दूसरे से उलझ रही थीं। पायल ने हल्के से उसका सीना धकेला और फुसफुसाई, “रुको भाई, पहले देख लूँ सब सो गए कि नहीं।”
वह उठी, धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर झाँका। घर में लाइटें बंद हो चुकी थीं, मम्मी और सोनम के कमरे से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। सब सोने की तैयारी में थे। पायल ने मन ही मन राहत की साँस ली, वापस कमरे में आई और कुंडी लगा दी। अब कमरा पूरी तरह उनका था।
रोहन बाथरूम चला गया। जब वह वापस आया तो पायल बेड पर बैठी थी। उसने दुपट्टे को सिर पर इस तरह लपेट लिया था जैसे कोई नवविवाहिता दुल्हन घूँघट निकाले बैठी हो। उसकी आँखों में शरारत और शरम दोनों थे।
“अजी अपनी सुहागरात है न आज, तो सैंया का इंतजार कर रही हूँ,” उसने नखरे से कहा।
रोहन का लंड एक झटके में खड़ा हो गया, पजामा के नीचे तनकर उभर आया। वह धीरे-धीरे उसके पास आया, फिल्मी अंदाज़ में घूँघट उठाया। पायल ने शरमाकर नजरें झुका लीं। रोहन ने गिलास उठाया, दूध का एक घूँट पिया। फिर गिलास पायल के होंठों पर लगाया। पायल ने स्टाइल से सिर झुकाकर दूध पिलाया। रोहन ने आधा पीया, बाकी पायल को पिलाया।
“पूरा पी लो भाई… आज रात बहुत मेहनत करनी है,” पायल ने धीमी, कामुक आवाज़ में कहा।
दूध खत्म होते ही रोहन ने पायल को फिर से अपनी बाहों में कस लिया। होंठों पर गहरा चुम्बन, हाथ सीधे उसकी चूचियों पर। उसने फुसफुसाया, “बहना… मर्द को ताकत औरत के दूध से मिलती है, भैंस के दूध से नहीं।”
एक तेज़ झटके में उसने पायल का टॉप ऊपर खींचकर उतार दिया। चूचियाँ नंगी होकर उछल पड़ीं, निप्पल्स पहले से ही सख्त और उभरे हुए। रोहन ने दोनों चुचुक अपनी उँगलियों से दबाए, फिर मुँह में एक चूची भर ली। जोर से चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाता, दाँतों से हल्के से काटता। दूसरी चूची हाथ से मसलता, निचोड़ता।
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पायल सिसकारियाँ भरने लगी। उसकी आवाज़ कमरे में गूँज उठी, “आह्ह… भाई… चूस लो… अपनी बहन का सारा दूध… उफ्फ… निचोड़ लो चूचियों को… बहुत मजा आ रहा है… आह्ह!”
रोहन पूरी चूची मुँह में भरकर चूसता रहा, दाँतों से काटता, जीभ से चाटता। पायल तड़प उठती, कमर ऊपर उठाकर खुद को और पास लाती। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, शरीर में कंपन सा दौड़ने लगा।
पायल के हाथ अब रोहन के पजामे की तरफ बढ़े। पजामा के ऊपर से लंड को टटोला, फिर अंदर हाथ डालकर बाहर निकाला। मोटा, गरम, नसों से भरा लंड हाथ में आया। उसने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे मसलना शुरू किया, सुपाड़े पर अँगूठे से दबाव डाला।
रोहन ने अपना लंड पायल के होंठों पर रख दिया। पायल ने सुपाड़ा दबाया, जीभ निकालकर चाटना शुरू किया। पहले सुपाड़े के चारों ओर जीभ घुमाई, फिर लंड की पूरी लंबाई चाटी, नीचे तक जाकर अंडकोष को भी चूमा। रोहन की साँसें भारी हो गईं।
रोहन ने पायल की स्कर्ट और पेंटी एक साथ नीचे खींच दी। चूत अभी भी सूजी हुई थी, होंठ लाल और फूले हुए, दिन की चुदाई के निशान साफ दिख रहे थे। उसने जीभ चूत पर फेरी। हल्की टीस हुई लेकिन साथ ही गहरा मजा भी। रोहन ने पुतियाँ उँगलियों से खोलीं और जीभ अंदर डाल दी। चूत की दीवारों को चाटा, क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई।
पायल कसमसाई, सिसकारियाँ तेज़ हो गईं। “आह्ह… भाई… उफ्फ… जीभ अंदर… और गहराई में… ओह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”
कामरस निकलने लगा, चूत गीली और चिकनी हो गई। पायल अब तड़प रही थी लंड के लिए, कमर हिलाकर इशारा कर रही थी।
रोहन ने लंड मुहाने पर लगाया। पहले धीरे से दबाया, फिर जोरदार धक्के से दो-तीन इंच अंदर घुसा दिया।
पायल तड़प उठी। चीख निकलने वाली थी लेकिन रोहन ने तुरंत उसका मुँह अपनी हथेली से दबा दिया। आँसू उसकी आँखों से टपक पड़े। उसने हाथ जोड़कर निकालने की गुहार लगाई, लेकिन रोहन रुका नहीं।
उसने दो-तीन और जोरदार धक्के लगाए। पूरा मोटा लंड चूत में समा गया, जड़ तक। पायल छटपटाई, शरीर काँप उठा, लेकिन रोहन जन्नत के अहसास में डूबा हुआ था।
कुछ देर लंड अंदर ही रखा। वह पायल के ऊपर लेट गया, होंठ चूमे, चूचियाँ मसलीं। धीरे-धीरे पायल की साँसें शांत हुईं।
“भाई… तुम बहुत गंदे हो… बहन का ख्याल नहीं… आराम से करते तो क्या जाता… कितना दर्द किया,” उसने शिकायत भरी आवाज़ में कहा।
रोहन हँसा और फिर चूची चूसने लगा।
पायल ने हल्के मुक्के मारे। “अब ऐसे लेटे रहोगे या आगे करोगे?”
चुदाई शुरू हुई। पहले धीरे-धीरे, लंड को अंदर-बाहर करते हुए हर धक्के में गहराई और लय बढ़ाता रहा। स्पीड धीरे-धीरे तेज़ हुई।
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“उईई… आह्ह… धीरे… ओह्ह… भाईई…” पायल की सिसकारियाँ कमरे में भर गईं।
दस मिनट बाद पायल पहली बार झड़ी। कामरस फूटा, चूत सिकुड़कर लंड को कसकर जकड़ लिया। उसने टाँगों से रोहन को मजबूती से जकड़ा, नाखून उसकी कमर में गड़ गए।
रोहन ने उसे किनारे लिटाया। एक जोरदार धक्के में फिर जड़ तक घुसाया। अब जोरदार, तेज़ चुदाई शुरू। गहरे, तेज़ धक्के। पायल अब साथ दे रही थी, कमर उठाकर हर धक्के का जवाब दे रही थी।
आधा घंटा तक चुदाई चलती रही। पायल तीसरी बार झड़ी, पूरा शरीर काँप उठा, चूत से कामरस की धार निकली। रोहन ने आखिरी जोरदार धक्कों के साथ वीर्य भर दिया। गर्म, गाढ़ा वीर्य चूत में फैल गया।
दोनों पस्त होकर लेट गए। पसीने से तर-बतर, साँसें तेज़। धीरे-धीरे नींद आने लगी। नंगे बदन एक-दूसरे से लिपटे हुए, वे गहरी नींद में सो गए।
रात के ठीक तीन बजे रोहन की आँख खुल गई। कमरे में हल्की नीली रोशनी चाँद की किरणों से आ रही थी, जो पर्दे के बीच से छनकर बिस्तर पर पड़ रही थी। उसकी नजर पहले पायल के नंगे, मुलायम बदन पर पड़ी। पायल करवट लेकर सोई हुई थी, एक टाँग हल्के से ऊपर चढ़ी हुई, चूचियाँ धीरे-धीरे साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उसकी चूत अभी भी थोड़ी सूजी हुई लग रही थी, लेकिन अब सूजन कम हो चुकी थी। रोहन को देखते ही कामेच्छा की लहर सी दौड़ गई। उसका लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा।
वह धीरे से पायल के करीब सरक गया। पहले उसने पायल की एक चूची को हाथ में लिया, नरम मांस को सहलाया, फिर मुँह में लेकर धीरे से चूसना शुरू किया। जीभ से निप्पल को घुमाया, हल्के से दाँत गड़ाए। पायल नींद में ही सिसकारी, “उम्म…” करके करवट बदली। रोहन ने दूसरी चूची पर हाथ फेरा, फिर नीचे हाथ सरकाया। चूत पर उँगली रखी, दाना ढूँढकर हल्के से मसलने लगा। क्लिटोरिस को अँगूठे और तर्जनी से दबाकर घुमाया। पायल की साँसें तेज़ हो गईं।
पायल की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। उसने रोहन को देखा, पहले थोड़ा हैरान हुई, फिर मुस्कुराई। “भाई… रात में भी नींद नहीं आ रही?” उसने फुसफुसाकर पूछा। रोहन ने जवाब में उसके होंठ चूम लिए। चुम्बन गहरा होता गया, जीभें उलझीं। पायल ने भी हाथ बढ़ाकर रोहन के लंड को पकड़ लिया, धीरे-धीरे मसलने लगी।
फिर चुदाई शुरू हो गई। रोहन ने पायल को पीठ के बल लिटाया, टाँगें फैलाकर बीच में बैठ गया। लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा और गीला था। उसने लंड मुहाने पर लगाया, धीरे से दबाया। चूत अब पहले जितनी तंग नहीं थी, लेकिन फिर भी गरम और गीली। एक धीमा धक्का दिया, लंड आधा अंदर चला गया। पायल ने सिसकारी भरी, “आह्ह… भाई… धीरे…”
रोहन ने रुककर होंठ चूमे, चूचियाँ मसलीं, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर किया। जड़ तक पहुँचकर रुका, पायल की कमर को सहलाया। पायल ने टाँगें रोहन की कमर पर लपेट लीं। अब धक्के शुरू हुए। पहले धीमे, लंबे, गहरे। हर धक्के के साथ पायल की सिसकारियाँ बढ़ती गईं। “उफ्फ… ओह्ह… भाई… और गहराई में… आह्ह…”
रोहन ने स्पीड बढ़ाई। तेज़, जोरदार धक्के। बिस्तर हल्के से हिलने लगा। पायल की चूत से कामरस की आवाज़ें आने लगीं, गीली चपचपाहट कमरे में गूँजने लगी। रोहन ने पायल की टाँगें कंधों पर रख लीं, और और गहराई से चोदने लगा। पायल तड़प उठी, नाखून रोहन की पीठ पर गड़ गए।
सुबह तक दोनों एक-दूसरे में समाए रहे। बीच-बीच में पोज़िशन बदली। कभी पायल ऊपर आ गई, रोहन के लंड पर उछलती रही। कभी डॉगी स्टाइल में रोहन ने पीछे से जोर-जोर से ठोका। पायल कई बार झड़ी, हर बार चूत सिकुड़कर लंड को जकड़ लेती। रोहन ने भी दो बार वीर्य छोड़ा, पहली बार चूत में, दूसरी बार पायल के मुँह में।
अंत में रोहन ने पायल की चूत पर अपना झंडा गाड़ दिया। आखिरी जोरदार धक्कों के साथ वीर्य की गर्म धार चूत की गहराई में भर दी। पायल की चूत अब पूरी तरह उसकी थी, उसका निशान छोड़कर।
अगला पड़ाव सोनम की चूत था, लेकिन इसके लिए तीन महीने इंतजार करना पड़ा।
तीन महीनों में हर दूसरी रात पायल रोहन के कमरे में सोने आ जाती। पढ़ाई का बहाना बनाकर दरवाजा बंद कर लेतीं, और पूरी रात चुदाई होती। कभी धीमी, रोमांटिक, कभी जंगली और बेकाबू। पायल अब चुदाई की आदी हो चुकी थी, दर्द की जगह सिर्फ मजा रह गया था। रोहन हर बार नई-नई तरकीबें आजमाता, पायल को नई-नई ऊँचाइयों पर ले जाता।
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सोनम की चुदाई कैसे हुई, यह अगली कहानी में।
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