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गर्लफ्रेंड की माँ से चुदाई पार्ट-2

हेलो दोस्तों मैं प्रवीण एक बार फिर से आपके सामने अपनी सच दास्तान सुनाने आया हूं। उम्मीद है आपने मेरी कहानी का पहले पार्ट जिसका नाम गर्लफ्रेंड की माँ से चुदाई जरूर पढ़ा होगा।

तो मैं डेली उसकी मम्मी के साथ गपागप करता था। मैं डेली सुबह से शाम उसके घर जाता और उसकी मम्मी को अलग अलग रंग की साड़ी पहनने के लिए बोलता। कभी लाल कभी पीली कभी हरी और कभी नीली। आज हमारा छठा दिन था और आज उन्होंने गुलाबी साड़ी गुलाबी ब्रा और पैंटी भी गुलाबी पहनी थी। मैं ग्यारह बजे उनके घर आ चुका था और आज वो मुझे अपना नाच दिखा रही थी।

वो गुलाबी साड़ी में मेरे सामने ठुमके लगा रही थी। उनकी कमर मधुर लय में घूम रही थी और साड़ी का घेरा हवा में लहरा रहा था। उनके नितंबों की गोलाई हर ठुमके के साथ उछल रही थी जिससे साड़ी का कपड़ा उनके शरीर से चिपककर उनकी आकृति को और भी आकर्षक बना रहा था। उनकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी और गुलाबी ब्लाउज में उनके स्तन हल्के से हिल रहे थे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में हूं और अप्सरा मेरे सामने नाच रही हो। वो बहुत खूबसूरत थी तो मेरा उनका नाच देखकर ही खड़ा हो गया।

मैंने उन्हें अपने पास बुलाया और उनके गुलाबी होंठ पर किस लेना शुरू कर दिया। उनके नरम होंठ मेरे होंठों से जुड़े हुए थे। मैंने धीरे से उनका निचला होंठ चूसा और फिर अपनी जीभ से उनके होंठों को छुआ। वो आहिस्ता से कराह उठीं और मेरे बालों में अपनी उंगलियां फेरने लगीं। थोड़ी देर चूमने के बाद मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और वो उठकर आगे भागने लगी और हंसने लगी।

मेरे हाथ में उनकी साड़ी का पल्लू था। वो मुझसे जानकर भाग रही थी। मैं उनके पल्लू को खींचकर उनकी साड़ी उतार रहा था। वो भी साड़ी को हंसते हंसते घूम घूम कर उतरवा रही थी। साड़ी का कपड़ा धीरे धीरे उनके शरीर से खिसक रहा था। उनकी गुलाबी पेटीकोट अब नजर आ रही थी जो उनकी जांघों को कसकर जकड़े हुए थी। भागते भागते वो रिया के कमरे में चली गई और अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थी।

मैंने उन्हें पकड़ा और उनके ब्लाउज और ब्रा उतार दी। फिर वो भागकर दूसरे कमरे में चली गई और उसके दरवाजे से मुझे पेटीकोट को ऊपर करके मस्त गांड दिखाकर चिढ़ा रही थी। मैं भागकर कमरे के पास गया उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया।

मैंने बोला बड़ी शरारती हो आप मुझे चिढ़ा रही हो प्लीज दरवाजा खोल दो। दरवाजा खुला और उसमें से पेटीकोट और पैंटी बाहर फेंक दी नंगी टांग मुझे दिखाने लगी। अब का बांध टूटा मैंने दरवाजा खोला और वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी। उनकी गोरी त्वचा कमरे की रोशनी में चमक रही थी। उनके स्तन पूरी तरह खुले हुए थे और गुलाबी निप्पल्स सख्त होकर खड़े थे। उनकी जांघों के बीच साफ चिकनी चूत दिख रही थी जो पहले से ही थोड़ी गीली हो चुकी थी।

वो चुपचाप जाकर पलंग पर अपनी टांगे उठाकर लेट गई। उनकी टांगें चौड़ी होकर फैली हुई थीं और उनकी चूत पूरी तरह खुली हुई मेरी तरफ इशारा कर रही थी। मैं उन्हें पास गया और उनकी चूत को चाटने लगा। मेरी जीभ उनके बाहरी होंठों पर घूमी फिर अंदर की नरम गीली सतह को चाटने लगी। उनका मीठा रस मेरी जीभ पर फैल रहा था और मैं उसे लपलपाकर पीने लगा। उनकी कमर हल्के से उठ रही थी और उनके मुंह से आवाजें आने लगीं आह्ह्ह उह्ह्ह अम्मम्म और चाटो जीभ को अंदर डालो मजा आ रहा है।

मैं अपनी जीभ अंदर बाहर डालने लगा और उनकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा। मेरी जीभ उनकी अंदरूनी दीवारों को छू रही थी और हर बार अंदर डालते समय वो सिकुड़कर मेरी जीभ को दबा रही थी। उनकी सांसें तेज हो गई थीं और उनकी उंगलियां मेरे बालों को जकड़ रही थीं। उनकी जांघें मेरे सिर के दोनों तरफ कांप रही थीं। हर बार जीभ अंदर डालते ही उनकी चूत से ज्यादा रस निकल रहा था जो मेरे ठोड़ी पर बह रहा था।

थोड़ी देर करने के बाद मैंने सीधा उनके मुंह में अपना लंड डाल दिया और अब उनके मुंह को मैं अपने लंड से चोदने लगा। उनके गर्म नरम होंठ मेरे लंड के चारों तरफ लिपटे हुए थे। मैं धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा और उनकी जीभ मेरे लंड के नीचे की नसों को चाट रही थी। उनकी आंखें ऊपर की तरफ देख रही थीं और उनके गाल थोड़े फूले हुए थे। उनके मुंह की गर्मी और नमी मेरे लंड को और भी सख्त बना रही थी।

थोड़ी देर बाद मेरा कड़क लंड हो गया और गीला भी अब समय था उनकी चूत मारने का। मैंने अपने लोड़े को उनकी चूत पर रखा और उनकी चूत बाहर से मसलने लगा।

ये सब उनको बड़ा मजा आ रहा था और वो मदहोश होकर बोली, “अब मुझसे नहीं रहा जा रहा है। प्लीज अंदर डाल दो।”

ऐसा कहते ही मैंने अपनी कमर को एक जोरदार झटके के साथ आगे बढ़ाया। मेरा मोटा, लंबा लंड उनकी भीगी हुई चूत के अंदर एकदम से पूरा का पूरा घुस गया। उनकी तंग चूत मेरे मोटे लंड को कसकर जकड़ ली, जैसे उसे कभी छोड़ना ही न चाहती हो। अंदर की गर्मी और नमी पूरे लंड पर फैल गई, जिससे मुझे सिर से पैर तक झुरझुरी सी दौड़ गई। उनकी आंखें बंद हो गईं और मुंह से एक जोरदार चीख निकली, “अह्ह्ह्हह… मर गई हाय!”

उनके निप्पल्स को मैंने अपनी उंगलियों से टाइट रगड़ना शुरू किया। फिर धीरे से दांतों से काटने लगा। वो तड़प उठीं और चिल्लाईं, “अह्ह्ह्हह… मजा आ रहा है… पर धीरे करो… दर्द है।” उनकी सांसें तेज हो चुकी थीं। मैंने अपनी कमर को तेजी से ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। हर झटके के साथ उनकी चूत से चिकचिक की आवाज गूंज रही थी, जो कमरे को और गर्म बना रही थी।

मेरा लंड बार-बार उनकी चूत की गहराई तक धंस रहा था। उनकी दीवारें मेरे लंड को चूस रही थीं।

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हर जोरदार धक्के के साथ मेरा मोटा लंड उनकी चूत में पूरी तरह समा जाता। उनकी भीतर की गर्म, नरम दीवारें मेरे लंड को कसकर दबाती और चूसती हुई महसूस हो रही थीं। पसीने से उनकी छाती चमक रही थी। मैं उनके निप्पल्स को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसता और दांतों से हल्का-हल्का काटता जा रहा था। अपनी रफ्तार और तेज कर दी थी। उनकी चूत से निकलता गर्म, चिपचिपा रस मेरे लंड को पूरी तरह भिगो रहा था और मेरी जांघों तक बह रहा था।

हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। पसीना उनके गले से रिस-रिसकर उनके बड़े बूब्स पर गिर रहा था। मैं लगातार उन्हें चोदे जा रहा था। मेरी सांसें फूल चुकी थीं और उनकी भी। हर धक्के पर उनकी चूत से चिकचिक की तेज आवाजें निकल रही थीं।

अचानक से किसी के आने की आहट आई और जब मैंने और रिया की मां ने मुड़कर देखा तो हमारे पीछे रिया खड़ी थी।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।