अजय चंडीगढ़ में रेलवे परीक्षा देने जा रहा था। उसने पठानकोट से ट्रेन की एसी बर्थ बुक कराई थी। जब वह नियत समय पर स्टेशन पर पहुँचा, तो आस-पास हलचल मची हुई थी। ट्रेन के आने में थोड़ा समय था।
5:50 पर ट्रेन स्टेशन पर आई। अजय अपनी सीट पर पहुँचा, जहां उसने देखा कि एक बेहद खूबसूरत लड़की, जिसकी उम्र लगभग 24 साल रही होगी, अपने छोटे भाई के साथ सफर कर रही थी।
लड़की ने हल्के गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था। उसके सिर पर दुपट्टा था, लेकिन उसका चेहरा साफ-साफ दिखाई दे रहा था। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और हल्की मुस्कान अजय को अपनी ओर खींच रही थीं।
उनके कूपे में केवल दो सीटें थीं, और लड़की ऊपर की सीट पर जाने के लिए थोड़ा परेशान दिख रही थी। अजय ने देखा कि वह बार-बार अपने भाई की ओर देखकर कुछ सोच रही थी।
अजय ने अपनी सीट के कोने में बैठते हुए लड़की को नोटिस किया। वह सोच रहा था कि कैसे बातचीत शुरू की जाए।
थोड़ी देर बाद लड़की ने झिझकते हुए अजय से कहा, “क्या आप मेरे लिए एक पानी की बोतल ला सकते हैं? मेरा बैग ऊपर रखा है, और मुझे पैसे निकालने में थोड़ी परेशानी हो रही है।”
अजय ने बिना देर किए कहा, “कोई बात नहीं। मैं अभी लेकर आता हूँ।”
अजय स्टेशन पर गया और पानी की बोतल लेकर वापस आया। लड़की ने मुस्कुराकर कहा, “थैंक यू।” उसकी मुस्कान अजय के दिल में गहरी छाप छोड़ गई।
इसके बाद दोनों के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हुई। अजय अपनी सीट पर बैठा रहा और लड़की अपने भाई के साथ हल्की-हल्की बातें करती रही।
ट्रेन चलने लगी। कुछ देर बाद लड़की ने अजय से कहा, “अगर आप मुझे नीचे की सीट दे दें, तो बड़ी मेहरबानी होगी। मेरे साथ मेरा छोटा भाई है। आप चाहें तो सोने से पहले तक यहीं बैठे रह सकते हैं।”
अजय ने थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं। मैं ऊपर चला जाऊंगा। आप आराम से नीचे सो जाइए।”
लड़की ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, “थैंक यू। वैसे आप कहां जा रहे हैं?”
अजय ने जवाब दिया, “चंडीगढ़ में रेलवे की परीक्षा देने।”
लड़की ने कहा, “मैं भी चंडीगढ़ जा रही हूँ। मेरे रिश्तेदारों के घर से लौट रही हूँ। मेरे पापा रेलवे में ही काम करते हैं, लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं मिली, इसलिए मैं अपने छोटे भाई के साथ अकेली आ रही हूँ।”
बातचीत के दौरान लड़की का छोटा भाई खेलते-खेलते अपना फोन गिरा बैठा। जब लड़की फोन उठाने के लिए झुकी, तो उसका दुपट्टा सरक गया।
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अजय की नजरें लड़की के बड़े-बड़े चूचों पर अटक गईं, जो उसके गुलाबी सूट के अंदर से साफ दिख रहे थे। अजय ने महसूस किया कि वह उसे घूर रहा है, और उसने तुरंत अपनी नजरें झुका लीं।
लड़की ने अजय की इस हरकत को नोटिस किया, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। वह हल्की मुस्कान के साथ अपना दुपट्टा ठीक करने लगी।
शाम के 8 बज चुके थे। ट्रेन की लाइट्स धीमी हो गई थीं, और आसपास का माहौल थोड़ा शांत हो गया था। अजय ने अपना बैग खोला और अपना खाना और शराब की बोतल निकाली।
लड़की ने भी अपने बैग से खाना निकाला। उसने थोड़ा खाना एक प्लेट में डालकर अजय की ओर बढ़ाया।
अजय ने कहा, “नहीं-नहीं, मैं अपना खाना लाया हूँ।”
लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा, “आप खाइए। संकोच मत कीजिए।”
अजय ने हल्की झिझक के साथ जवाब दिया, “असल में… मुझे थोड़ा ड्रिंक करना है। आपके सामने कैसे कर सकता हूँ?”
लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं। आप पी लीजिए। मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है।”
अजय ने धीरे से अपनी शराब निकाली और गिलास में डालने लगा। उसने मजाक में लड़की से पूछा, “आप भी लेंगी क्या?”
लड़की ने बिना किसी झिझक के अपने बैग से गिलास निकालकर उसकी ओर बढ़ा दिया।
अजय थोड़ा हैरान हुआ। उसने पूछा, “क्या सच में?”
लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा, “हां। मैंने आज तक कभी नहीं पी, लेकिन अगर आप पी रहे हैं और यहां सिर्फ हम दोनों हैं, तो क्यों न आज मैं भी ट्राई कर लूं।”
अजय ने दोनों के लिए पेग बनाया। लड़की ने गिलास को हाथ में लिया, और “चियर्स” कहते हुए पूरा पेग एक ही घूँट में खत्म कर दिया।
जब तक अजय अपना पहला पेग खत्म करता, लड़की को सुरूर आने लगा था। उसने अपना गिलास फिर से आगे बढ़ाया।
दारू के नशे में लड़की अब हल्की-हल्की मुस्कुरा रही थी। उसकी आंखों में हल्की चमक थी, जो अजय को और ज्यादा आकर्षित कर रही थी। जब उसने दूसरा पेग खत्म किया, तो वह और भी ज्यादा सहज महसूस करने लगी।
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लड़की ने अजय की ओर देखते हुए कहा, “आप मुझे बार-बार घूर रहे हैं। क्या देख रहे हैं?”
अजय थोड़ा घबरा गया। उसने जवाब में कहा, “कुछ नहीं, बस ऐसे ही।”
लड़की ने हल्की हंसी के साथ कहा, “नहीं, सच बताइए। आप घबरा क्यों रहे हैं?”
अजय ने धीरे से कहा, “मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।”
लड़की ने उसे छेड़ते हुए कहा, “डरो मत। अगर आपको देखना है, तो खुलकर देखिए। मुझे कोई दिक्कत नहीं है।”
यह सुनकर अजय थोड़ा हैरान हुआ। लड़की ने मुस्कुराते हुए अपना दुपट्टा हटा दिया और कुर्ता थोड़ा ऊपर कर लिया। गुलाबी ब्रा में कैद उसके 38 इंच के गोरे चूचे अजय को पूरी तरह से मदहोश कर रहे थे।
अजय ने धीरे-धीरे अपना हाथ आगे बढ़ाया और लड़की की सहमति के साथ उसके चूचों को छूना शुरू कर दिया। वह हल्के-हल्के दबाने लगा। लड़की अब पूरी तरह से नशे में थी और उसने अजय को रोकने के बजाय उसका साथ देना शुरू कर दिया।
अजय ने ब्रा के हुक खोल दिए। जैसे ही ब्रा खुली, उसके दोनों बड़े-बड़े चूचे आज़ाद हो गए। भूरे रंग के निप्पल देखकर अजय खुद को रोक नहीं पाया। उसने एक निप्पल को अपने मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।
दूसरे हाथ से वह दूसरे चूचे को मसल रहा था। लड़की अब सिसकारियां भरने लगी थी। “आह… ओह… हां… हां…” उसकी आवाजें कूपे में गूंज रही थीं।
लड़की ने अब खुद को पूरी तरह से अजय के हवाले कर दिया। उसने अपना कुर्ता उतारकर सीट पर फेंक दिया। अजय ने उसकी सलवार को नीचे खींचना शुरू किया।
लड़की ने गुलाबी पैंटी पहनी हुई थी। अजय ने उसके गोर-पोर शरीर को निहारा और धीरे-धीरे पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। उसकी चूत पहले से ही गीली हो रही थी।
अजय ने पैंटी को थोड़ा और नीचे खींचा। उसने अपनी उंगली लड़की की चूत के अंदर डाल दी। लड़की दर्द और आनंद के मिले-जुले एहसास में एक जोर की सिसकारी भरते हुए चिहुंक उठी।
अजय ने अब अपने कपड़े उतार दिए। उसका 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड हवा में तन कर खड़ा था। लड़की ने उसे देखा और मुस्कुराई। उसने अपना हाथ बढ़ाकर अजय के लंड को पकड़ा और धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया।
अब दोनों पूरी तरह से नंगे थे। अजय ने लड़की को बर्थ पर लिटाया। उसने अपने होंठ लड़की के होंठों पर रखे और उसे चूमने लगा। लड़की ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया।
अजय ने लड़की को पलटकर 69 की पोजिशन में लिटा दिया। उसने अपना लंड लड़की के मुंह में डाल दिया। लड़की ने उसे अपने होठों से पकड़कर चूसना शुरू कर दिया। “गप… गप…” की आवाजें कूपे में गूंज रही थीं।
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उधर, अजय ने अपनी जीभ लड़की की चूत के अंदर डाल दी। उसने उसकी चूत के अंदर के दाने को रगड़ना शुरू किया। लड़की सिसकारियों में खोने लगी। “आह… उम… उह…” वह अब पूरी तरह से आनंद में डूबी हुई थी।
थोड़ी देर के बाद, अजय ने लड़की को सीधा लिटाया। उसने अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने की कोशिश की। जैसे ही लंड का सिरा अंदर गया, लड़की दर्द से चीख उठी। “उई मां… बहुत दर्द हो रहा है। इसे बाहर निकालो।”
अजय ने उसे शांत करते हुए कहा, “थोड़ा सब्र करो। अभी सब ठीक हो जाएगा।” उसने उसके होठों को चूसा और चूचों को मसलना शुरू कर दिया, ताकि उसका ध्यान बंट सके।
थोड़ी देर बाद लड़की का दर्द कम हो गया और उसकी सिसकारियां शुरू हो गईं। “आह… ओह… हां…” अब उसे भी मजा आने लगा था।
अजय ने लड़की की सहमति के साथ अपनी गति बढ़ानी शुरू की। अब उसका लंड पूरी तरह से उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रहा था। “फच… फच…” की आवाजें कूपे में गूंज रही थीं। लड़की की चूत गर्म और गीली हो चुकी थी।
लड़की अब दर्द को भूल चुकी थी और उसके चेहरे पर मजे की झलक साफ दिखाई दे रही थी। उसने अपनी कमर उठाकर अजय का पूरा साथ देना शुरू कर दिया। उसके होंठ बार-बार सिसकारियों के बीच खुल रहे थे। “आह… हां… और जोर से… राजा, आज मेरी सारी प्यास बुझा दो।”
अजय ने एक हाथ से लड़की के चूचों को मसलना जारी रखा और दूसरे हाथ से उसके कूल्हों को पकड़कर जोर-जोर से झटके मारने लगा। हर झटके पर लड़की की सिसकारियां और तेज हो रही थीं।
थोड़ी देर बाद लड़की ने एक जोरदार सिसकारी भरी और उसकी चूत में से गाढ़ा रस निकलने लगा। उसका शरीर झटका खाते हुए कांपने लगा। “आह… उफ… हां…!” उसकी आवाजें अब तेज हो गई थीं।
लड़की ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपनी कमर को ऊपर उठाते हुए खुद को पूरी तरह से अजय के हवाले कर दिया। “और करो, रुको मत। मैं और चाहती हूं…” उसने अपनी थकी हुई आवाज में कहा।
अजय ने उसकी बात सुनकर अपनी स्पीड और बढ़ा दी। उसने लड़की की चूत के अंदर अपने लंड को पिस्टन की तरह चलाना शुरू कर दिया।
लड़की की झड़ने के कुछ देर बाद अजय ने महसूस किया कि वह भी अब झड़ने वाला है। उसने कुछ तेज झटके मारे और एक जोरदार आवाज के साथ उसका लंड लड़की की चूत के अंदर झड़ गया। “उफ… हां…”
लड़की ने अजय को अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया। दोनों के शरीर पसीने से तर हो चुके थे, और उनकी सांसें तेज चल रही थीं।
रात के 2 बजे तक चुदाई खत्म हो चुकी थी। अजय ने लड़की के भाई को नीचे लिटाया और खुद ऊपर की बर्थ पर जाकर लेट गया। लड़की ने मुस्कुराते हुए उसे देखा और कहा, “शुक्रिया, मुझे ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ था।”
सुबह अलार्म बजा, और अजय की आंखें खुल गईं। उसने लड़की को जगाया। दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए और खुद को व्यवस्थित किया।
स्टेशन पर लड़की के पिता उसे लेने आए। उन्होंने अजय को धन्यवाद दिया और उसे अपने घर चलने का आग्रह किया। अजय उनके घर गया, नहाया और नाश्ता किया।
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जब लड़की के पिता ऑफिस चले गए, तो लड़की ने अजय से मुस्कुराते हुए पूछा, “अब क्या इरादा है?”
अजय ने हल्के हंसते हुए जवाब दिया, “जो तुम्हारा इरादा हो।”
लड़की ने उसे अपने बेडरूम में चलने का इशारा किया।
दोनों बेडरूम में पहुंचे और दरवाजा बंद कर लिया। लड़की ने अपना कुर्ता उतारते हुए कहा, “अब कोई डर नहीं है। मैं चाहती हूं कि तुम मुझे फिर से पूरा महसूस कराओ।”
अजय ने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसने धीरे-धीरे उसकी ब्रा और पैंटी उतारी और फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। लड़की ने सिसकारी लेते हुए कहा, “आह… हां, और करो। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।”
दो घंटे तक दोनों ने ताबड़तोड़ चुदाई की।

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