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ससुर जी का जवान लंड-7

पिछला भाग: ससुर जी का जवान लंड-6

कंचन – हाय राम! पिताजी हमें सलवार कमीज पहनने दीजिये, हमें शर्म आ रही है.

रामलाल – अरे बहु शर्म कैसी तुम तो हमारी बेटी के सामान हो. रामलाल कंचन की कच्छी पे हाथ फेरता हुआ बोला.

कंचन भी रामलाल की टांगों पे मालिश करने का नाटक कर रही थी. रामलाल बहु के विशाल नितम्बों को दबाता हुआ बोला…

रामलाल – बहु तुम राजेश का ख्याल तो रखती हो न.

कंचन – जी आप बेफिकर रहिये हम उनका बहुत ख्याल रखते हैं. जब हम आपका इतना ख्याल कर सकते हैं तो क्या उनका नहीं करेंगे? उन्हें हमसे कभी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा.

रामलाल – शाबाश बहु हमें तुमसे यही उम्मीद थी. लेकिन हमारा मतलब था की इस लाजबाब जवानी को बेकार तो नहीं कर रही हो. राजेश को खुश तो रखती हो. वो जो कुछ चाहता है उसे देती हो न.

कंचन – जी वो जो चाहते हैं हम उन्हें देते हैं. जैसा खाना पसंद है वैसा ही बनाते हैं.

कंचन रामलाल का मतलब अच्छी तरह समझ रही थी लेकिन अनजान बनने का नाटक कर रही थी.

रामलाल – बहु तुम तो बहुत भोली हो. हम खाने पीने की बात नहीं कर रहे. खाने पीने के इलावा भी मरद की ज़रूरतें होती हैं जिन्हें अगर बीवी पूरा न करे तो मरद दूसरी औरतों के पास जाने लगता है. उसे अपनी जवानी रोज़ देती हो की नहीं। Sasur bahu xxx sex story

कंचन शर्माने का नाटक करती हुई बोली पिताजी आप ये कैसी बातें कर रहे हैं? हमें तो बहुत शर्म आ रही है.

रामलाल – अपने ससुर से क्या शर्माना बहु हमारी बहु खुश है या नहीं ये जानना हमारा फ़र्ज़ है. बोलो है या नहीं.

कंचन – जी है!

रामलाल – तो फिर बताओ उसे रोज़ देती हो या नहीं?

रामलाल का हाथ अब फिसलकर कंचन के चूतड़ों की दरार में आ गया था. वो उसके चूतड़ों की दरार में हाथ फेरता हुआ बोला..

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रामलाल – बोलो बहु शर्माओ नहीं.

कंचन – जज..जी वो जब चाहते हैं ले लेते हैं. हम कभी मना नहीं करते.

रामलाल – वो जब चाहता है तब लेता है. तुम अपने आप कभी नहीं देती हो?

कंचन – हम तो औरत हैं. पहल करना तो मरद का काम होता है.

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कंचन ने मन ही मन सोचा की रामलाल ने कितनी सफाई से लेने देने की बातें शुरु कर दी थी और अब तो उसके चूतड़ों की दरार में भी हाथ फेर रहा था. सचमुच ससुर जी काफी मंजे हुए खिलाड़ी थे.

रामलाल बोल रहा था – बहु तुम इतनी सेक्सी हो! वो नालायक तो तुम्हारी रोज़ लेता होगा।

कंचन – पिता जी प्लीज..! आप ये सब क्यों पूछ रहे हैं. हमें तो बहुत शरम आ रही है.

रामलाल – अभी हमने कहा था की हमारा बेटा और बहु खुश हैं या नहीं ये जानना हमारा फ़र्ज़ है. जबाब दो. रोज़ लेता तो है न तुम्हारी ?

कंचन – नहीं पिताजी ऐसी कोई बात नहीं है. उन्हें तो फुरसत ही नहीं मिलती. ऑफिस से थक के आते हैं और जल्दी ही सो जाते हैं. महीने में मुश्किल से एक दो बार ही लेते है। हमें तो लगता है की शायद हम इतने सेक्सी हैं ही नहीं की हम उन्हें रिझा सकें.

रामलाल – कैसी बातें करती हो बहु! तुम तो इतनी सुंदर और सेक्सी हो की तुम्हें कपड़ों में देख कर भी किसी बाल ब्रह्मचारी का लंड खड़ा हो जाए और अगर नंगी हो जाओ तब तो भगवान भी अपने पे काबू नहीं कर सकते.

पहली बार रामलाल ने कंचन के सामने लंड जैसे शब्द का इस्तेमाल किया. चूतड़ों की दरार में हाथ रगड़ने और रामलाल के मुंह से इस तरह की बातें सुन के कंचन की चूत गीली होने लगी थी. वो शर्माने का नाटक करते हुए बोली..

कंचन – हाय…. पिताजी आप अपनी बहु के सामने ये कैसे गंदे शब्द बोल रहे हैं? हमें तो बहुत शर्म आ रही है. प्लीज अब हमें जाने दीजिये ना.

रामलाल दोनों हाथों से कंचन के विशाल चूतड़ों को दबाता हुआ बोला..

रामलाल – अरे बहु इसमें शर्माने की क्या बात है. अब मरद के लंड को लंड नहीं तो और क्या कहें? बोलो तुम्हारे पास लंड के लिए कोई और शब्द है तो बताओ.

कंचन शर्माने का नाटक करती हुई चुप रही.

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रामलाल – अरे बहु बोलो चुप क्यों हो?

कंचन – जी हमे नहीं पता. हमने भी लड़कों के मुंह से यही शब्द सुना है.

रामलाल – तो फिर लंड को लंड कहने में शर्म कैसी? लेकिन बहु महीने में सिर्फ एक दो बार से तुम्हारा काम चल जाता है? तुम्हारी इस जवानी को तो रोज़ मरद की ज़रुरत है.

कंचन – अब हम कर भी क्या सकते हैं?

रामलाल – उसे तुम्हारी पसंद तो है न?

कंचन – जी हमें क्या पता?

रामलाल – ये बात तो हर औरत को पता होनी चाहिए. वैसे कुछ मर्दों को वो औरतें पसंद होती हैं जिनकी बहुत फूली हुई होती है. तुम्हारी कैसी है बहु? रामलाल मज़े लेता हुआ बोला.

कंचन – जी हमें क्या पता?

रामलाल – बहु तुम्हें कुछ पता भी है? चलो हम ही पता कर लेते हैं हमारी बहु रानी की कैसी है.

ये कहते हुए रामलाल ने कंचन के चूतड़ों के बीच हाथ डाल कर पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी फूली हुई चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया. बाप रे क्या फूली हुई चूत थी बहु की.

कंचन – उईईईई. ….इस्सस. पिता जी !आआआ… प्लीज! ये आप क्या कर रहे हैं? छोड़िये ना आ…. हम आपकी बहु हैं.

लेकिन कंचन ने अपनी चूत छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की. बल्कि अपनी टांगें इस प्रकार से चौड़ी कर ली और चूतड़ ऊपर की ओर उचका दिए ताकी उसकी चूत रामलाल के हाथ में ठीक तरह से समा जाए. कंचन के पूरे बदन में वासना की लहर दौर रही थी.

रामलाल – क्या छोड़ूँ बहु?

कंचन – वही जो आपने पकड़ रखी है. प्लीज उसे. …छोड़िये ना आ……

रामलाल – हमने क्या पकड़ रखी है? बता दो तो छोड़ देंगे.

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कंचन – वही जो औरतों की टांगों के बीच में होती है.

रामलाल – क्या होती है बहु?

कंचन – उफ!! पिताजी आप तो बड़े वो हैं छोड़िये ना हमारी..प्लीज. .आह!!

रामलाल – जब तक बताओगी नहीं की क्या छोड़ें तब तक हमें कैसे पता चलेगा की क्या छोड़ना है?

कंचन – हाय राम! हमें सचमुच नहीं पता उसे क्या कहते हैं, आप ही बता दीजिये.

रामलाल – बहु तुम इतनी भी भोली नहीं हो. चलो हम ही बता देते हैं. इसे चूत कहते हैं.

कंचन – ठीक है हमारी …हमारी.. च..चूत छोड़ दीजिये प्लीज.. हम आपकी बहु हैं.

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रामलाल – हाँ अब हुई ना बात बहु. चूत बोलने में इतना शर्माती हो चूत देने में भी तो इतना नहीं शर्माती? तभी बेचारा राकेश तुम्हारी ले नहीं पाता होगा. रामलाल कंचन की चूत मुट्ठी में मसलता हुआ बोला. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – इस्स्स्सस्स….. क्या कर रहे हैं? प्लीज छोड़िये ना हमारी…

रामलाल – पहले बताओ चूत देने में भी इतना शर्माती हो?

कंचन – नहीं पहले आप हमारी छोड़िये. फिर बताउंगी.

रामलाल – फिर वही बात! हमारी छोड़िये हमारी छोड़िये कर रही हो. आखिर क्या छोड़ें?

कंचन – उफ़्फ़!! पिता जी आप तो बहुत ही खराब हैं. प्लीज हमारी चूत छोड़ दीजिये. हम तो आपकी बेटी के सामान हैं.

रामलाल – ठीक है बहु ये लो छोड़ देते हैं.

जैसे ही रामलाल ने कंचन की चूत को आज़ाद किया वो रामलाल के ऊपर से उठ कर साइड में बैठ गयी.

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कंचन – पिताजी आप तो बड़े खराब हैं. अपनी बहु के साथ ऐसा करता है कोई? अब हम आपकी मालिश साइड में बैठ कर ही करेंगे.

रामलाल – अरे बहु की चूत पकड़ना मना है क्या? ठीक है साइड में बैठ के मालिश कर दो. लेकिन बहु तुम्हारी चूत तो बहुत फूली हुई है. मरद तो ऐसी ही चूत के लिए तरसते हैं. अब बताओ अपनी इस प्यारी चूत को देने में तो शर्म नहीं करती हो?

कंचन – जी देने में किस बात की शर्म? वैसे भी जब वो लेते हैं लाइट बन्द होती है. उन्हें कैसे पता चलेगा की हमारी कैसी है?

रामलाल – शाबाश बहु चूत देने में कोई शर्म नहीं करनी चाहिए, लेकिन वो नालायक लाइट बन्द करके चोदता है तुम्हें? तुम जैसी सुंदर और सेक्सी औरत को तो नंगी देखने के लिए भगवान भी तड़प जाए, औरत को चोदने का मज़ा तो उसे पूरी तरह नंगी करके ही आता है. और उसकी नंगी जवानी का रस पान करने के लिए लाइट जला के चोदना तो ज़रूरी है.

कंचन ने नोटिस किया की रामलाल ने अब लेने देने की जगह `चोदने’ जैसा शब्द बोलना शुरू कर दिया था.

कंचन – लेकिन पिता जी वो तो ऐसा कुछ भी नहीं करते.

रामलाल – तुम्हारा मतलब वो तुम्हें नंगी तक नहीं करता?

कंचन – जी नहीं! कंचन शर्माते हुए बोली.

रामलाल – तो फिर! फिर क्या? तो फिर कैसे चोदता है वो हमारी प्यारी बहुरानी को?

कंचन – बस पेटीकोट ऊपर उठा के…..

रामलाल – बहुत ही नालायक है! लेकिन उसका लंड बड़ा तो है न?

कंचन – जी वो तो खासा लम्बा और मोटा है। बिलकुल उस गधे के लंड जैसा।

रामलाल – तब तो हमारी बहु की तृप्ति कर देता होगा.?

कंचन – हाँ….! उस गधे के जितना तो किसी का भी नहीं हो सकता।

रामलाल – सिर्फ बड़ा होने से कुछ नहीं होता, मरद को भी तो औरत को तृप्त करने की कला आनी चाहिए.

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कंचन – वो तो अक्सर पैंटी भी नहीं उतारते बस साइड में करके ही कर लेते हैं.

रामलाल – ये तो गलत बात है, ऐसे तो हमारी बहु की प्यास शांत नहीं हो सकती. लेकिन बहु तुम्हें ही कुछ करना चाहिए. अगर औरत काम कला में माहिर ना हो तो मरद दूसरी औरतों की और भागने लगता है. बीवी को बिस्तर में बिलकुल रंडी बन जाना चाहिए तभी वो अपने पति का दिल जीत सकती है.

कंचन – आपकी बात सही है पिताजी हम तो सब कुछ करने के लिए तैयार हैं. लेकिन मरद अपनी बीवी के साथ जो कुछ भी करना चाहता है उसके लिए पहल तो उसे ही करनी होती है न. वो जो भी करना चाहें हम तो हमेशा उनका साथ देने के लिए तैयार हैं.

रामलाल – हमें लगता है की हमारी बहु प्यासी ही रह जाती है. क्यों सही बात है?

कंचन – जी..

रामलाल – कहो तो हम उसे समझाने की कोशिश करें?. ऐसा कब तक चलेगा!

कंचन – नहीं नहीं पिताजी उनसे कुछ कहने की ज़रुरत नहीं है.

रामलाल – तो फिर ऐसे ही तड़पती रहोगी बहु?

कंचन – और कर भी क्या सकते हैं ?

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रामलाल को अब विश्वास हो गया था की उसका बेटा बहु के जिस्म की प्यास को नहीं बुझा पाता है. इतनी खूबसूरत जवानी को इस तरह बर्बाद करना तो पाप है. अब तो उसे ही कुछ करना होगा. कंचन फिर से रामलाल की टांगों की मालिश करने लगी. कंचन का मुंह अब रामलाल की ओर था. बार बार इस तरह से झुकती की उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ और ब्रा रामलाल को नज़र आने लगते. रामलाल अच्छी तरह जानता था, की आज ही सुनहरा मौका था. लोहा भी गरम है. आज अगर बहु की जवानी लूटने में कामयाब हो गया तो ज़िन्दगी बन जाएगी. रामलाल का लंड बुरी तरह फनफनाया हुआ था और टाइट लंगोट की साइड में से आधा बाहर निकल आया था और उसकी जांघ के साथ सटा हुआ था. Sasur bahu xxx sex story

रामलाल बोला – देखो बहु तुम चाहती हो तुम्हारी जवानी की आग ठंडी हो?

कंचन – जी कौन औरत नहीं चाहती?

रामलाल – हम तुम्हारे ससुर हैं! तुम्हारी जवानी की आग को ठंडा करना हमारा धरम है. हमें ही कुछ करना होगा.

कंचन – आप क्या कर सकते हैं पिताजी हमारी किस्मत ही ऐसी है ?

कंचन एक ठंडी सांस लेते हुए रामलाल की जांघ पे तेल लगाती हुइ बोली.

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रामलाल – ऐसा न कहो बहु! अपनी किस्मत तो अपने हाथ में होती है. अरे बहू तुमने हमारी कमर से ले के टांगों तक तो मालिश कर दी लेकिन एक जगह तो छोड़ ही दी.

कंचन – कौन सी?

रामलाल – अरे धोती के नीचे भी बहुत कुछ है, वहां भी मालिश कर दो.

कंचन – जी वहां..?

रामलाल – भाई नहीं करना चाहती हो तो कोई बात नहीं हम वहां कमला से मालिश करवा लेंगे.

कंचन – नहीं नहीं पिताजी कमला से क्यों? हम हैं न.

कंचन ने शरमाते हुए रामलाल की धोती ऊपर कर दी. नीचे का नज़ारा देख के उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. कसे हुए लंगोट का उभार देखने लायक था. कंचन ने लंगोट वाले इलाके को छोड़ के लंगोट के चारो ओर मालिश कर दी.

कंचन – लीजिये पिताजी वहां भी मालिश कर दी.

रामलाल – बहु वहां तो अभी और भी बहुत कुछ है.

कंचन – और तो कुछ भी नहीं है.

रामलाल – ज़रा लंगोट के नीचे तो देखो बहुत कुछ मिलेगा.

कंचन – क्या……! लंगोट के नीचे वहां तो आपका वो है. हमें तो बहुत शरम आ रही है.

रामलाल – शर्म कैसी बहु? तुम तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे कभी मरद का लण्ड नहीं देखा.

कंचन – जी किसी पराए मरद का तो नहीं देखा न.

रामलाल – अच्छा तो तुम हमें पराया समझती हो ?

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कंचन – नहीं नहीं पिता जी ऐसी बात नहीं है.

रामलाल – अगर ऐसी बात नहीं है तो इतना शर्मा क्यों रही हो? वो तुम्हें काटेगा नहीं. चलो लंगोट खोल दो और वहां की भी मालिश कर दो.

कंचन – जी हम तो आपकी बहू हैं. हम आपके उसको कैसे हाथ लगा सकते हैं?

रामलाल – ठीक है बहु कोई बात नहीं वहां की मालिश हम कमला से करवा लेंगे.

कंचन – नहीं नहीं पिताजी ये आप क्या कह रहे हैं? किसी परायी औरत से तो अच्छा है हम ही वहां की मालिश कर दें.

रामलाल – तो फिर शर्मा क्यों रही हो बहु?

ये कहते हुए रामलाल ने बहु का हाथ पकड़ के लंगोट पे रख दिया. लंगोट के ऊपर से ससुर जी के मोटे लंड की गर्माहट से कंचन कांप गयी. कांपते हुए हाथों से कंचन ससुर जी का लंगोट खोलने की कोशिश कर रही थी. आखिर आज ससुर जी का लंड देखने की मुराद पूरी हो ही जाएगी. जैसे ही लँगोट खुला रामलाल का लंड लंगोट से आज़ाद होके एक झटके के साथ तन खड़ा हो गया. 11 इंच के लम्बे मोठे काले लंड को देख के कंचन के मुंह से चीख निकल गयी. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – उई माँ.. ये क्या है..?!

रामलाल – क्या हुआ बहु..?

कंचन – जी.. इतना लम्बा…

रामलाल – नहीं पसंद आया?

कंचन – जी वो बात नहीं है!

रामलाल – मरद का इतना बड़ा भी हो सकता है।

कंचन – सच पिताजी ये तो बिलकुल उस गधे के जैसा है! अब समझी सासु माँ आपको क्यों गधा कहती हैं.

रामलाल – घबराओ नहीं बहु हाथ लगा के देख लो. काटेगा नहीं.

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कंचन मन ही मन सोचने लगी काटेगा तो नहीं लेकिन मेरी चूत ज़रूर फाड़ेगा. बाप का लंड तो बेटों के लंड से कहीं ज़्यादा तगड़ा निकला कंचन उस फौलादी लौड़े को सहलाने के लिए बेचैन तो थी ही. उसने ढेर सारा तेल अपने हाथ में लेके रामलाल के तने हुए लौड़े पे मलना शुरु कर दिया. न जाने कितनी चूतों का रस पी के इतना मोटा हो गया था. क्या भयंकर सुपाड़ा था. मोटा लाल हथोड़े जैसा. कुंवारी चूत के लिए तो बहुत खतरनाक हो सकता था. कंचन को दोनों हाथों का इस्तेमाल करना पड़ रहा था फिर भी रामलाल का लौड़ा उसके हाथों में नहीं समां रहा था. इतना मोटा था की दोनों हाथों से उसकी मोटाई नापनी पड़ी. जब जब कंचन का हाथ लंड पे मालिश करते हुए नीचे की ओर जाता, लंड का मोटा लाल सुपाड़ा और भी ज़्यादा भयंकर लगने लगता.

कंचन – पिता जी एक बात पूछूं? बुरा तो नहीं मानेंगे?

रामलाल – नहीं बहु ज़रूर पूछो.

कंचन – जी सासु माँ तो आपसे बहुत खुश होंगी?

वो क्यों? रामलाल अनजान बनता हुआ बोला.

कंचन – इतना लम्बा और मोटा पा के कौन औरत खुश नहीं होगी?

रामलाल – अरे नहीं बहु ये ही तो हमारी बद-किस्मती है, बस एक गलती कर बैठे उसका फल अभी तक भुगत रहे हैं.

कंचन – कैसी गलती पिताजी?

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रामलाल – अरे बहु सुहागरात को जोश जोश में कुछ ज्यादा ज़ोर से धक्के मार दिए और पूरा लंड तुम्हारी सासु माँ की चूत में पेल दिया, तुम्हारी सासु माँ तो कुंवारी थी, झेल नहीं सकी, बहुत खून खराबा हो गया था, बेचारी बेहोश हो गयी थी. बस उसके बाद से मन में इतना डर बैठ गया की आज तक चुदवाने से डरती है. बड़ी मिन्नत करके 6 महीने में एक बार चोद पाते हैं उसके बाद भी आधे से ज़्यादा लंड नहीं डालने देती. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – ये तो गलत बात है! पति की ज़रुरत पूरी करना तो औरत का धर्म होता है, कोशिश करती तो कुछ दिनों में सासु माँ को आदत पड़ जाती.

रामलाल – क्या करें हमारी दास्ताँ भी कुछ तुम्हारे जैसी है.

कंचन – ओह फिर तो आप भी हमारी तरह प्यासे हैं.

रामलाल – हाँ बहु! सासु माँ को तो हमारा पसंद नहीं आया लेकिन तुम्हें हमारा लंड पसंद आया या नहीं?

जी ये तो बहुत प्यारा है, इतना बड़ा तो औरत को बड़े नसीब से मिलता है, सच हमें तो सासु माँ से जलन हो रही है. कंचन बड़े प्यार से रामलाल के लौड़े को सहलाते हुए बोली.

उसने फिर से अपना मुंह रामलाल की टांगों की ओर और चूतड़ रामलाल के मुंह की ओर कर रखे थे. लंड और टांगों की मालिश करने के बहाने वो आगे की ओर झुकि हुई थी और चूतड़ रामलाल की और उचका रखे थे.

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रामलाल – अरे इसमें जलन की क्या बात है आज से ये तुम्हारा हुआ. रामलाल बहु के चूतड़ों पे हाथ फेरता हुआ बोला.

कंचन – जी मैं आपका मतलब समझी नहीं.

रामलाल – देखो बहु हमसे तुम्हारी बर्बाद होती ये जवानी देखि नहीं जाती, हमारे रहते हमारी प्यारी बहु तड़पती रहे ये तो हमारे लिए शर्म की बात है, आखिर हम भी तो मरद हैं. हमारे पास भी वो सब है जो तुम्हारे उस नालायक पति के पास है. अब हमें ही अपनी बहू की प्यास बुझानी पड़ेगी.

रामलाल का हाथ पेटीकोट के ऊपर से ही बहु के विशाल चूतड़ों की दरार में से होता हुआ उसकी चूत पर आ गया.

कंचन -हा…. पिता जी ये आप क्या कह रहे हैं? आपका मतलब आप हमे…..अपनी बहु को..?

रामलाल- हाँ बहु हम अपनी बहु को चोदेंगे! तुम्हारी इस जवानी को एक मोटे तगड़े लंड की ज़रुरत है. हमारी टांगों के बीच में अब भी बहुत दम है.

रामलाल का हाथ अब धीरे धीरे बहु की टांगों के बीच उसकी फूली हुई चूत को पेटीकोट और पैंटी के ऊपर से ही सहला रहा था.

कंचन – पिता जी…! प्लीज..! ऐसा नहीं कहिये! हम आपके जज्बात समझते हैं लेकिन आखिर हम आपकी बहु हैं, आपके बेटे की पत्नी हैं. आपकी बेटी के सामान हैं.

कंचन रामलाल के बड़े बड़े बॉल्स को सहलाती हुइ बोली.

रामलाल- ये सब सही है, तुम हमारी बहु हो, हमारी बेटी के सामान हो. तभी तो हमारा फ़र्ज़ है की हम तुम्हें खुश रखें. कोई गैर औरत होती तो हमें चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं थी. लेकिन अपनी ही बहु के साथ ऐसा अत्याचार हो ये हमें मंज़ूर नहीं.

रामलाल ने ये कहते हुए बहु की चूत को अपनी मुट्टी में भर के दबा दिया.

कंचन – ईस्स्सस्स…… आह.. छोड़िये ना पिताजी आपने तो फिर पकड़ ली हमारी. सोचिये बेटी के समान बहु के साथ ऐसा करना पाप नहीं होगा ?

कंचन ने अपनी चूत छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की. बल्कि टाँगे इस प्रकार चौड़ी कर ली की रामलाल अच्छी तरह उसकी चूत पकड़ सके.

रामलाल बहु की चूत को और भी ज़ोर से मसलता हुआ बोला.. तो क्या ये जानते हुए भी की बेटी के समान बहु की चूत प्यासी है हम चुप बैठे रहें? जब बहु मायका छोड़ के ससुराल आती है तो ससुराल वालों का फ़र्ज़ बनता है की वो अपनी बहु की सब ज़रूरतों का ख्याल रखें.

कंचन – लेकिन हमने तो आपको पिता के समान माना है अब आपके साथ ये सब कैसे कर सकते हैं.

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रामलाल- ठीक है बहु अगर हमारे साथ नहीं कर सकती तो कोई बात नहीं हम गाँव में एक ऐसा तगड़ा मर्द ढून्ढ लेंगे जिसका लंड हमारी तरह लम्बा हो और जो हमारी बहु को अच्छी तरह चोद के उसके जिस्म की प्यास बुझा सके. बोलो ये मंज़ूर है?

कंचन – हाय राम!…. ये क्या कह रहे हैं? किसी दुसरे से तो अच्छा है कि आप ही…..

कंचन दोनों हाथों से अपना मुंह छुपाती हुई बोली.

रामलाल – इसमें शर्माने की क्या बात है? बोलो क्या कहना चाहती हो बहु?

रामलाल ने अब अपना हाथ बहु के पेटीकोट के अंदर डाल दिया था और उसकी जांघें सहला रहा था.

कंचन – जी. हमारा मतलब था की अगर इतनी ही मजबूरी हो जाए तो घर की इज़्ज़त तो घर में रहनी चाहिए. किसी गैर मर्द को हम अपनी जवानी कैसे दे सकते हैं? हमारी इज़्ज़त घर वालों के पास ही रहेगी.

रामलाल – तो तुम हमें तो गैर नहीं समझती हो?

कंचन – नहीं नहीं पिताजी! आप गैर कैसे हो सकते है।

रामलाल – सच बहु तुम जितनी खूबसूरत हो उतनी ही समझदार भी हो, घर की इज़्ज़त घर में ही रहनी चाहिए, तुम्हारी सब ज़रूरतें घर में ही पूरी की जा सकती हैं. हम इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे की तुम्हें किसी गैर मर्द के लंड की ज़रुरत न महसूस हो.

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रामलाल समझ गया था की बहु भी वासना की आग में जल रही है क्योंकि उसकी कच्छी उसकी चूत के रस से बिलकुल भीग चुकी थी. लेकिन अपने ससुर से चुदवाने में झिझक रही थी. बहु की झिझक दूर करने के लिए उसे शुरू में थोड़ी ज़ोर ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी. लोहा गर्म है अगर अभी इस सुनहरे मौके का फायदा नहीं उठाया तो फिर बहु को कभी नहीं चोद पायेगा. लेटे लेटे तो कुछ कर पाना मुश्किल था. रामलाल उठ के खड़ा हो गया. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – क्या हुआ पिता जी आप कहाँ जा रहे हैं?

रामलाल – कहीं नहीं बहु अब तुम ठीक से सब जगह तेल लगा दो.

रामलाल के खड़े होते ही उसकी धोती और लंगोट नीचे गिर गए. अब वो बिल्कुल नंगा बहु के सामने खड़ा था. उसका तना हुआ 11 इंच का मोटा काला लंड बहुत भयंकर लग रहा था. ये नज़ारा देख के कंचन की तो सांस ही गले में अटक गयी. उसने खड़े हुए ससुर जी की टांगों में टेल लगाना शुरू किया. ससुर जी का तना हुआ लौड़ा उसके मुंह से सिर्फ कुछ इंच ही दूर था. कंचन का मन कर रहा था की उस मोटे मूसल को चूम ले.

रामलाल – बहु थोड़ा हमारी छाती पे भी मालिश कर दो.

ससुर जी की छाती पे मालिश करने के लिए कंचन को भी खड़ा होना पड़ा. लेकिन ससुर जी का तना हुआ लंड उसे नज़दीक नहीं आने दे रहा था. वो ससुर जी को छेड़ते हुए हंसती हुई बोली..

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कंचन – पिता जी आपका गधे जैसा वो तो हमें नज़दीक आने ही नहीं दे रहा, आपकी छाती पे कैसे मालिश करें?

रामलाल – तुम कहो तो काट दें इसे बहु?

कंचन – हाय राम! ये तो इतना प्यारा है, इसे नहीं काटने देंगे हम. कंचन ससुरजी के लौड़े को बड़े प्यार से सहलाती हुई बोली.

रामलाल – तो फिर हमें कुछ और सोचना पड़ेगा.

कंचन – हाँ पिताजी कुछ करिये न. आपका ये तो बहुत प्रॉबलम कर रहा है.

रामलाल – ठीक है बहु हम ही कुछ करते हैं.

ये कहते हुए रामलाल ने बहु के पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया. नाड़ा खुलते ही पेटीकोट बहू की टांगों में गिर गया. दुसरे ही पल रामलाल ने बहु की बगलों में हाथ डाल के उसे ऊपर उठा लिया और खींच के अपनी बाहों में जकड़ लिया. इससे पहले की कंचन की कुछ समझ में आता उसने अपने आप को ससुर जी की छाती से चिपका पाया. वो सिर्फ ब्लाउज और पैंटी में थी. उसका पेटीकोट पीछे ज़मीन पे पड़ा हुआ था. ससुरजी का विशाल लंड उसकी टांगों के बीच ऐसे फंसा हुआ था जैसे वो उसकी सवारी कर रही हो.

उई माँ….. पिता जी…. ये आपने क्या किया? छोड़िये ना हमें. कंचन अपने आप को छुड़ाने का नाटक करती हुई बोली.

रामलाल – तुमही ने तो कहा था की हमारा लंड तुम्हें नज़दीक नहीं आने दे रहा है. देखो न अब प्रॉब्लम दूर हो गयी.

कंचन – सच आप तो बड़े खराब हैं. अपनी बहु का पेटीकोट कोई ऐसे उतारता है?

रामलाल – मजबूरी थी बहु उतारना पड़ा. तुम्हारा पेटीकोट तुम्हें नज़दीक नहीं आने देता. लेकिन अब देखो न तुम हमारे कितनी नज़दीक आ गई हो.

रामलाल दोनों हाथों से बहु के विशाल चूतड़ों को दबा रहा था. बेचारी छोटी सी कच्छी मोटे मोटे चूतड़ों की दरार में घुसी जा रही थी. रामलाल के मोटे लौड़े ने बहु की कच्छी के कपड़े को सामने से भी उसकी चूत की दोनों फांकों के बीच में घुसेड़ दिया था. कंचन को रामलाल के लंड की गर्माहट बेचैन कर रही थी. इतने दिनों से जिस लंड के सपने ले रही थी वो आज उसकी जांघों के बीच फँसा हुआ उसकी चूत से रगड़ खा रहा था.

कंचन – आए हाय! कितने मजबूर हैं आप जो आपको अपनी बहु का पेटीकोट उतारना पड़ा. लेकिन ऐसे चिपके हुए हम आपकी छाती की मालिश कैसे कर सकते हैं? छोड़िये ना हमें प्लीज..

रामलाल – कोई बात नहीं बहु छाती पे नहीं तो पीठ पे तो मालिश कर सकती हो.

कंचन ससुर जी के बदन से बैल की तरह लिपटी हुई थी. उसका सिर ससुर जी की छाती पे टिका हुआ था. उसने दोनों हाथों से पीठ की मालिश शुरू कर दी. रामलाल भी बहु की पीठ और चूतड़ों पे हाथ फेर रहा था. रामलाल के लौड़े से रगड़ खा के कंचन की चूत बुरी तरह गीली हो गयी थी और पैंटी भी बिलकुल उसके रस में भीग गई थी. रामलाल के लंड का ऊपरी भाग बहु की चूत के रस में भीगा हुआ था. कंचन का सारा बदन वासना की आग में जल रहा था. Sasur bahu xxx sex story

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रामलाल – बहु तुम हमारी पीठ की मालिश करो हम भी तुम्हारी पीठ की मालिश कर देते हैं.

रामलाल ने अपने हाथों में तेल ले कर बहू की पीठ पे मलना शुरू कर दिया. धीरे धीरे उसने बहु के विशाल नितंबों पे से उसकी पैंटी को उनके बीच की दरार में सरका दिया और दोनो नितम्बों की दबा दबा के मालिश करने लगा. कंचन के मुंह से हल्की हलकी सिसकारियाँ निकल रही थी. पीठ पे मालिश करने के बहाने धीरे धीरे रामलाल ने बहु के ब्लाउज़ के हुक खोल के ब्रा का हुक भी खोल दिया. कंचन को महसूस तो हो रहा था की शायद ससुर जी उसके ब्लाउज़ और ब्रा का हुक खोल रहे हैं लेकिन वो अनजान बनी रही. जब सासुर जी ने उसके ब्लाउज और ब्रा को उतारना शुरू किया तो वो हड्बड़ा के बोली..

कंचन – हाय राम! पिता जी… ये क्या कर रहे हैं? हमारा ब्लाउज क्यों उतार रहे हैं?

 

अगला भाग: ससुर जी का जवान लंड-8

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।

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