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पापा जी का लौड़ा तो मेरे पति से लंबा है

“इससे भी बड़ा होना चाहिए। लिंग जितना ही लंबा और मोटा होता है, स्त्रियों को संभोग का उतना ही ज्यादा आनंद और संतोष प्राप्त होता है। इसे देखकर घबराओ मत।”

कहकर उन्होंने मेरा मुखड़ा अपनी ओर खींच लिया, “तुम चेहरा इधर तो रखो, बहुत सुंदर हो, मुझे जी भरके देखने दो।”

उन्होंने मेरे चेहरे को हथेलियों में बांध सा लिया। मुझे भी अपना रूप उन्हें दिखाने में आनंद आ रहा था। उत्तेजना के कारण मेरी नासिकाएं फूल और पीचक रही थीं, चेहरा तमतमा गया था, जैसे सारे जिस्म का खून चेहरे पर ही जमा हो गया हो।

यह सब सही था तभी तो पापा जी ने थोड़ा तिरछा करके मेरा चेहरा झुकाया और गाल अपने होंठों पर रख लिया। उन क्षणों में मैं वास्तविक संबंध को एकदम भूल बैठी। मैं इस गुमान में बहुत खुश हो उठी थी कि मेरा जिस्म और हुस्न मेरे एक मनपसंद पुरुष के आगोश में है। प्रभावित होकर मैंने अपना गाल उठाया और उनके गाल पर रखकर चूमने लगी। उनकी त्वचा पर मेरे होंठ गर्म और नम थे।

मेरी हिचक सहसा ही लुप्त हो गई। मैं उन्हें इस तरह प्यार करने लगी मानो वे मेरी पसंद के मनपसंद युवक हों। मैंने उनकी बाजुओं को चूमा, चौड़े सीने को बार-बार चूमा, उसके बाद उनके वक्ष पर सिर टिकाकर समर्पण कर दिया। उनकी मांसपेशियां मेरे स्पर्श से कठोर हो रही थीं।

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उनके हाथ मेरे पेट की ओर तेजी से बढ़े। नाभि पर सहलाने के बाद पेटीकोट उतार दिया। मैं उनके सीने पर टिकी हुई थी। मेरी पीठ पर बाहों को कसा और अपने साथ-साथ मुझे भी उठाकर खड़ा कर दिया।

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हम दोनों एकदम निःवस्त्र अवस्था में एक-दूसरे की बाहों में बंधे खड़े थे। उनका कठोर लिंग मेरी नाभि से एक इंच नीचे चुभ रहा था – गर्म और धड़कता हुआ। मेरे दोनों उरोज उनके जिस्म से दबे हुए थे, मेरी चूचियां उनकी छाती पर मसल रही थीं। उन्होंने मेरी ठोड़ी को छुआ तो मैंने अपना मुखड़ा ऊपर की ओर उठा दिया। उन्होंने मेरे होंठों पर गहरा चुम्बन अंकित करके मुझे अपने से अलग कर दिया। वे मेरा निःवस्त्र बदन देखना चाहते थे, इसलिए स्वयं ही दो फुट पीछे सरककर मेरे बदन का अवलोकन करने लगे। कुछ क्षण बाद वे बैठ गए फिर थोड़ा उठकर ऊपर से नीचे तक नजर दौड़ाने लगे। मेरे बदन ने उन्हें कितना प्रभावित किया यह उनके चेहरे पर स्पष्ट झलक रहा था – उनकी आंखें लालसा से चमक रही थीं, सांसें तेज।

मैंने मुस्कुराकर पूछा, “मुझे शर्म लग रही है, बैठ जाऊं?”

उन्होंने बाहें फैलाकर मेरा स्वागत किया। मैं झुककर उनकी बाहों में गिर पड़ी। ठुनककर बोली, “अब ज्यादा मत तड़पाइए, मेरा दम घुट रहा है।” मेरी योनि में एक गर्म, नम प्यास फैल रही थी।

लुढ़कते हुए वे मुझे नीचे करके मेरे ऊपर आ गए। मेरे गुप्तांग को टटोलते हुए दो-चार चुटकियां काटी, फिर कहने लगे, “तुम तो पहले से ही तैयार हो।” उनकी उंगलियां मेरी योनि पर फिसल रही थीं, नमी महसूस कर रही थीं।

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