“इन सबको थोड़ी देर के लिए उतार फेंको ना, ये मजा किरकिरा कर रहे हैं,” कहकर वे ब्लाउज का हुक खोलने लगे। मैं छिपी नजरों से उनका मुंह ताक लेती थी। धीरे-धीरे मेरी हिचक भी दूर होती जा रही थी, बदन में एक मीठी गर्मी फैल रही थी।
पापा जी ने ब्लाउज, ब्रेजियर उतारने के बाद साड़ी भी खींच दी। मेरे उन्मत्त उरोजों ने उन्हें इस कदर आकर्षित कर लिया कि साड़ी के बाद पेटीकोट को भूल ही बैठे। उन्होंने पहले तो अपने हाथों को उभारों पर हल्के से रखा और हल्के-हल्के सहलाते रहे, फिर धीरे-धीरे दबाने लगे। दबाव भी बढ़ता गया। आखिर में उन्होंने निर्दयता के साथ भींच दिया। उनकी हथेलियां मेरी चूचियों को मसल रही थीं, एक मीठी पीड़ा और उत्तेजना मेरे बदन में दौड़ गई।
“उई री मां!” मैं सीत्कार कर उठी, मेरी आवाज में कराहट और लालसा दोनों थे। साथ ही मैंने उनके हाथों पर हाथ रखकर राहत देने के लिए आंखों ही आंखों से अनुरोध किया। वे मान गए। खिसककर मेरी बगल में आ बैठे और उरोजों को सहलाने लगे। काम-क्रीड़ा से उन्होंने मुझे पर्याप्त आनंदित कर दिया था। मैंने फिर अपने निचले होंठ को दांतों तले दबाया तो वे मेरे चेहरे पर झुककर बोले, “तुम अपने होंठों को घायल मत करो, मेरे हवाले कर दो।”
मैंने होंठ को मुक्त कर दिया। उसी समय उन्होंने अपने होंठों के बीच दबाकर चूसना शुरू कर दिया। मेरी सांसें एकदम तेज हो गईं। पिंजरे में फंसी मैना की भांति मैं छटपटा रही थी और वे होंठों का स्वाद ले रहे थे – एक गर्म, नम चूषण जो मेरे होंठों को लाल कर रहा था। उन्होंने मेरी एक बांह उठाकर अपने गले पर लपेट दी और दूसरे हाथ की उंगलियां पकड़कर अपने गुप्तांग की ओर ले जाने लगे।
“तुम्हारा खिलौना यह है, तुम भी खेलो।”
आप यह Sasur Bahu Chudai Kahani - ससुर बहू की चुदाई हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
अगले ही पल उनका लिंग मेरी मुट्ठी में था। उसका स्पर्श बहुत आनंददायक लगा – गर्म, कठोर, नब्ज की तरह धड़कता हुआ। भयभीत होने की उम्र मैं पार कर चुकी थी। पापा जी का कद मेरे पति से लंबा ही था, शायद इसीलिए उनके लिंग की लंबाई भी कुछ अधिक थी और कोई अंतर नहीं था। वह मेरी हथेली में भारी और गर्म लग रहा था।
मैं लिंग को धीरे-धीरे सहलाने लगी। होंठों पर दर्द महसूस होने लगा तो मैं उनकी गर्दन पीछे की ओर धकेलने लगी। वे समझ गए। मुंह उठाकर मेरी आंखों में आंखें डालकर पूछा, “मेरे साथ आनंद आ रहा है या नहीं?”
मैंने मुस्कुराकर उनके गाल पर हल्की सी चपत लगाई और नाक चढ़ाकर बोली, “बहुत आनंद आ रहा है।” मेरी आवाज में एक शरारती लालसा थी।
“तुम्हारी यही अदा तो कातिल है,” कहकर उन्होंने मेरी नाक पर एक चुम्बन अंकित कर दिया और मुस्कुराने लगे।
मैंने पूछा, “मेरे साथ आप कैसा महसूस कर रहे हैं?”
आप यह Sasur Bahu Chudai Kahani - ससुर बहू की चुदाई हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Fuck me