कराहते हुए मैं फिर आगे होने का प्रयास करने लगी, लेकिन उन्होंने सफल नहीं होने दिया। तब मैंने कहा, “थोड़ा रहम कीजिए, जितनी चादर है उतना ही पैर पसारिए, तकलीफ हो रही है।”
उन्होंने मेरी कमर थपथपाकर कहा, “एकाध बार ही तकलीफ होगी। मेरा संसर्ग पहली बार मिला है ना, धैर्य रखो। अभी इतना मजा आने लगेगा जितना तुम सोच भी नहीं सकती।” उनकी उंगलियां मेरी कमर पर गर्म सर्कल बना रही थीं।
इतना कहकर वे थोड़ा पीछे हटे और फिर पूरी तेजी से आ सटे।
“आह!” मैं कराह उठी, मेरी योनि में एक मीठी चुभन दौड़ गई।
पापा जी का जोश दोगुना हो गया। वे उसी रफ्तार से जल्दी-जल्दी घर्षण करने लगे। मैं लगातार कराहती रही। मुझे पेट में चुभन थोड़ा तकलीफ दे रही थी, अन्यथा उनके लंबे लिंग का घर्षण बड़ा आनंददायक लग रहा था – एक गहरा, भरपूर दबाव जो मेरी योनि की दीवारों को रगड़ रहा था। इसमें संदेह नहीं, घर्षण का आनंद ही उठाने के लिए मैं पीड़ा सहने के लिए मजबूर थी। मेरी योनि से नमी की आवाजें आ रही थीं, गर्म और चिपचिपी।
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उन्होंने विश्राम के दौरान पूछा, “मेरे सहवास में मजा आ रहा है ना बहू?”
“मजा तो जरूर आता लेकिन दर्द के कारण मजा किरकिरा हो गया है। आज फंस गई हूं, आइंदा आपके पास कभी नहीं आऊंगी। आप मजा कम पीड़ा ज्यादा पहुंचा रहे हैं।”
वे रुक गए। लिंग को तुरंत थोड़ा सा पीछे खींचकर कहने लगे, “ऐसा क्यों कहती हो? लो अब खुश हो?”
“हां अब ठीक है।”
“ठीक है तो लो अब मजा ही मजा उठाओ,” कहकर सावधानी के साथ घर्षण करने लगे। मैंने कराहना बंद कर दिया था, लेकिन जब मैं मंजिल के करीब पहुंचने लगी तो सिसियाते हुए बोल पड़ी, “पूरी ताकत लगा दीजिए, पहले की तरह, प्लीज।” मेरी योनि में एक जलती हुई लहर उठ रही थी।
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इतना कहना था कि वे पहले जैसी धुन में आ गए। मैं फिर कराहने लगी। अगले ही क्षण स्खलित हो गई तो उनकी जांघ को दबोचते हुए बोली, “बस… बस… प्लीज रुक जाइए।” मेरी योनि में स्पंदन हो रहे थे, गर्म तरल बह रहा था।
वे रुकने के मूड में नहीं थे, लेकिन जल्दी ही वे भी स्खलित हो गए। तब रुक जाना उनकी मजबूरी थी। झुककर उन्होंने अपना मुंह मेरी कमर पर रख दिया और हांफने लगे। उनकी गर्म सांसें मेरी त्वचा पर लग रही थीं।
इस तरह मेरा अवैध संबंध ससुर जी से स्थापित हो गया तो हम अक्सर काम-क्रीड़ा करने लगे। मेरे पति नाइट ड्यूटी में होते तो नाइट के समय और दिन की ड्यूटी पर होते तो दिन के समय पापा जी की आगोश में पहुंच जाती। मेरा मुन्ना नादान ही था, और कोई देखने वाला था नहीं। हम स्वछंद होकर वासना का खेल खेलने लगे थे – उनके लिंग की गर्माहट, मेरी योनि की नमी, सांसों की मिलन, कराहटें और सिसकारियां।
छह महीने तक मैं गर्भवती नहीं हुई तो अवैध संबंध पर पछतावा होने लगा। मुझे यकीन हो गया कि कुछ खराबी मेरे अंदर ही आ गई है, इसलिए गर्भ नहीं ठहर रहा है। निराश हो चली थी कि एकाएक पता चला, मेरी कामना पूरी हो गई। मैंने ससुर जी को और पतिदेव को भी गर्भवती होने की सूचना दी तो पतिदेव बहुत खुश हुए। मुझे शुभकामना दी, “लो तुम्हारी कामना पूरी हो गई, और बच्चों के लिए तरस रही थी। ईश्वर ने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी, अब जरा सावधानी बरतना।”
मेरे पति और मेरे ससुर दोनों ही बहुत खुश थे। मेरा पूरा ध्यान रखते। मैंने एक खूबसूरत बच्चे को जन्म दिया। मैंने अपने ससुर जी के सहयोग से बाद में एक और बच्चे को जन्म दिया। अभी भी ससुर जी पूरे जोश से मुझे संभोग का आनंद देते हैं – उनकी गर्म बांहें, लंबा लिंग, और वह गहरी संतुष्टि।
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अब मैं गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग करती हूं और शारीरिक सुख भोग रही हूं।
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