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दुल्हन बनकर भाभी ने रात भर लंड लिया

Second suhagraat sex story – Pregnant bhabhi ka doodh sex story – Milky boobs sucking sex story: हैलो दोस्तों, मैं मेरठ का रहने वाला हूँ, अभी 25 साल का हूँ। मेरा लंड 6 इंच लम्बा और इतना मोटा है कि कोई भी चूत एक बार में पूरी नहीं निगल पाती।

हमारे पड़ोस में अंजली भाभी रहती थीं। फिगर था 34-28-36, गोरा दूधिया बदन, गुलाबी होंठ, काले लम्बे बाल और निप्पल बिल्कुल गुलाबी। पहली बार जब मैंने उन्हें लाल साड़ी में देखा तो मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया था। मैं दिन-रात बस उनकी मटकती गांड और उभरे हुए बूब्स के सपने देखता।

धीरे-धीरे दोनों परिवार करीब आ गए। वो हमारे घर आतीं तो जानबूझकर दुपट्टा सरकाकर बूब्स दिखातीं। मैं भी उनके घर छोटे-मोटे बहाने बनाकर पहुँच जाता। बातें सेक्स तक पहुँच गईं। एक दिन उन्होंने अपनी पहली सुहागरात का पूरा डिटेल सुनाया – कैसे पति ने उनकी चूत फाड़ी थी, कितनी बार झड़े थे। मैं सुनते हुए लंड मसल रहा था। वो खुद भी चुदाई की बहुत प्यासी थीं, रोज़ चुदवाती थीं लेकिन फिर भी तृप्त नहीं होती थीं।

फिर उनका पति 15 दिन के लिए दिल्ली चला गया। बस फिर क्या था, अंजली भाभी और ज़्यादा बेकाबू हो गईं। रात को मैसेज आता, “तेरे मोटे लंड की याद से चूत गीली हो रही है, जल्दी आ ना।” मैं जवाब देता, “भाभी आज तुम्हारी चूत फाड़ दूँगा।” फोन सेक्स होने लगा, दोनों तरफ़ से सिसकारियाँ – आह्ह्ह… ओह्ह्ह… डालो ना…

एक दिन मैं उनके घर गया। वो अकेली थीं। बातें करते-करते वो उदास हो गईं। मैंने हिम्मत करके कहा, “भाभी, मैं तुम्हें वो सारा सुख दे सकता हूँ जो तुम चाहती हो, बस एक बार कहो।” वो फौरन बोलीं, “हाँ, मैं भी यही चाहती हूँ, बस ये राज़ किसी को मत बताना।” मैंने कहा, “हम दोनों की इज़्ज़त दाँव पर है, किसी को कानोकान खबर नहीं होगी।” फिर उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, “रात 11 बजे छत के रास्ते आ जाना, दरवाज़ा खुला रहेगा।”

मैंने उन्हें गाल पर हल्का सा किस किया और घर आ गया। पूरा दिन बेचैनी से कटा। रात 11 बजते ही उनका फोन आया, “आ जा, मैं तैयार बैठी हूँ।”

मैं छत पर चढ़ा। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। अंधेरे में हाथ टटोलते हुए उनकी छत पर पहुँचा। ऊपर वाला दरवाज़ा हल्का सा अटकाया हुआ था, एक धक्का दिया और अंदर घुस गया। सीढ़ियाँ उतरते हुए इत्र की तेज़ महक आने लगी।

बेडरूम का दरवाज़ा खोला तो नज़ारा देखकर मैं साँस रोक लिया। कमरे में चारों तरफ़ मोमबत्तियाँ जल रही थीं, लाल बेडशीट बिछी थी, फूलों की महक, हल्की लाल लाइट। और बीच में अंजली भाभी पूरी दुल्हन बनी बैठी थीं – लाल भारी लहंगा, मंगलसूत्र, चूड़ियाँ, बिंदी, माथे पर माँगटीका, होंठों पर लाल लिपस्टिक।

मैंने हैरानी से पूछा, “ये सब?” वो शरमाते हुए बोलीं, “ये सब सिर्फ़ तुम्हारे लिए। मैंने सोच लिया था कि अपनी दूसरी सुहागरात सिर्फ़ तुम्हारे साथ मनाऊँगी, तुम्हारे मोटे लंड से अपनी चूत को भरवाऊँगी।”

ये सुनते ही मैं बेकाबू हो गया। हम एक-दूसरे पर टूट पड़े। पहले लम्बे गहरे किस। मैंने उनकी जीभ चूसी, वो मेरी। साँसें तेज़, आह्ह्ह… ओह्ह्ह… धीरे-धीरे मैंने उनका घूंघट उठाया, माथे पर किस किया, फिर गाल, फिर गर्दन। वो सिहर उठीं।

फिर मैंने एक-एक करके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले चुन्नी, फिर ब्लाउज़ के हुक, ब्रा नीचे की। उनके गुलाबी निप्पल देखकर मैं पागल हो गया। दोनों बूब्स मुँह में लेकर चूसने लगा। वो तड़पने लगीं, “आह्ह्ह… काटो… ज़ोर से… हाय…”

फिर मैंने लहंगा ऊपर किया। पैंटी पूरी गीली थी। मैंने पैंटी उतारी और चूत पर मुँह रख दिया। जीभ से क्लिटोरिस को चाटने लगा। वो कमर उठाकर चिल्लाने लगीं, “आह्ह्ह… ओह्ह्ह… मैं मर गई… और ज़ोर से… ह्हीईईई… आह्ह्ह्ह…” कुछ ही मिनट में वो झड़ गईं। मैंने सारा रस चाट लिया।

अब उनकी बारी। उन्होंने मेरा लंड बाहर निकाला। प्यार से सहलाया, फिर मुँह में लिया। ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… गले तक ले लिया। मैंने उनके बाल पकड़कर मुँह चोदा। कुछ देर बाद मैं उनके मुँह में झड़ गया, उन्होंने एक बूंद नहीं छोड़ी।

फिर मैंने उन्हें लिटाया। लंड उनकी चूत पर रखा। वो बोलीं, “कंडोम मत पहनना, मुझे तुम्हारा बच्चा चाहिए।” मैंने धीरे से अंदर धकेला। वो चीखीं, “उइईईई… मर गई… बहुत मोटा है… आह्ह्ह… धीरे… फाड़ दोगे…” पहले धीरे-धीरे, फिर स्पीड बढ़ाई। वो भी गांड उठाकर साथ देने लगीं, “हाँ… ऐसे ही… चोदो मुझे… फाड़ दो आज… रंडी बना लो… आह्ह्ह… ओह्ह्ह…”

पहले मिशनरी में चोदा, फिर उन्हें घोड़ी बनाया। गांड ऊपर करके ज़ोर-ज़ोर से पेला। फिर वो ऊपर आईं, खुद लंड पर बैठकर उछलने लगीं। फिर साइड से लेकर चोदा। बीस-पच्चीस मिनट बाद मैं उनकी चूत में झड़ गया, एक-एक बूंद अंदर।

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उस रात मैंने उन्हें पाँच बार चोदा। हर बार चूत में वीर्य भरा। जब तक पति नहीं आया, मैं दिन-रात उनकी चूत मारता रहा।

तीन महीने बाद पता चला – वो गर्भवती हैं। अब उनका पेट थोड़ा उभरा हुआ है, बूब्स और भी भारी और दूध से भरे। जब भी मौका मिलता है, मैं उनके घर जाता हूँ। ब्लाउज़ ऊपर करता हूँ, निप्पल मुँह में लेकर गरम-गरम दूध पीता हूँ। दूध की बूंदें उनके पेट पर गिरती हैं, मैं चाट लेता हूँ। वो फिर से चुदवाने लगती हैं।

अब भी हमारा सिलसिला जारी है। जब भी पति बाहर जाता है, अंजली भाभी मुझे बुलाती हैं और कहती हैं, “आजा, आज फिर अपनी बच्चे की माँ को चोद।”

धन्यवाद।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।

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