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नाना जी माचो मैन जैसे चोदने लगे मुझे

कहानी का पिछला भाग: नाना जी माचो मैन जैसे चोदने लगे मुझे – Part 1

नाना ने बड़े प्यार से कहा, “अरे बेटी, इसमें पूछना क्या है? आ जा, अपना घर है।”

मैं उनके पास रजाई में घुस गई। टीवी पर कार्टून चल रहा था, लेकिन मेरा ध्यान तो नाना पर था। मुझे पूरा यकीन था कि आज कुछ तो होगा। और हुआ भी वही।

धीरे-धीरे नाना ने रजाई के अंदर अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। उनकी उंगलियां मेरी मुलायम जांघों पर सरक रही थीं, धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रही थीं। फिर उन्होंने लेगिंग के अंदर हाथ डाल दिया, पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगे। उनकी उंगलियां कपड़े के ऊपर से ही मेरी चूत की लकीर पर रगड़ रही थीं। मैं सिहर उठी।

“आह… स्स्स्स… अह्ह… नाना जी…” मेरे मुंह से अनायास कराह निकल गई।

नाना ने और जोश में आकर मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया। उनकी मोटी उंगली सीधे मेरी गीली चूत पर लग गई। वो धीरे-धीरे चूत के होंठों को सहला रहे थे, फिर क्लिटोरिस पर उंगली घुमा रहे थे। मैं तड़प उठी।

नाना ने कान में फुसफुसाया, “कैसा लग रहा है बेटी? मजा आ रहा है ना?”

मैंने शरमाते हुए कहा, “नाना जी… आप तो सच में माचो मैन हो… बहुत मजा आ रहा है… और करो ना…”

बस इतना सुनते ही नाना का जोश दोगुना हो गया। वो तेजी से उठे, कमरे का दरवाजा अच्छे से बंद किया, टीवी का वॉल्यूम थोड़ा बढ़ाया ताकि बाहर किसी को आवाज न जाए। फिर मेरे पास लौट आए और रजाई पूरी हटा दी।

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नाना ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और पूरे बदन पर किस करने लगे। पहले मेरे माथे पर, फिर आंखों पर, गालों पर, गर्दन पर… उनकी जीभ मेरी गर्दन पर सरक रही थी, काट-काट कर निशान बना रहे थे। फिर उन्होंने मेरी टी-शर्ट ऊपर करके मेरे पेट पर किस करना शुरू किया। मेरी नाभि गहरी थी, उन्होंने जीभ डालकर नाभि चाटी, उंगली अंदर डालकर खेलने लगे। मैं कराह रही थी।

“आह्ह… ओह्ह… नाना जी… वहां… बहुत अच्छा लग रहा है…”

नाना ने मेरी टी-शर्ट पूरी उतार दी। फिर ब्रा का हुक खोला। मेरे 34 इंच के गोल-गोल, कड़े स्तन उनके सामने थे। नाना ने दोनों को हाथों में भर लिया, मसलने लगे। उनकी हथेलियां मेरी चूचियों पर दबाव डाल रही थीं, निप्पल्स को उंगलियों से मरोड़ रहे थे। फिर एक निप्पल को मुंह में लेकर जोर से चूसने लगे, दूसरी चूची को हाथ से दबाते हुए।

मैं उनके सिर को सीने से दबा रही थी, “आह्ह… चूसो नाना जी… जोर से चूसो… मेरे निप्पल्स को काटो… ओह्ह… हां ऐसे ही…”

काफी देर तक उन्होंने मेरे दोनों स्तनों को चूसा, चाटा, काटा। मेरी चूत से पानी बह रहा था, लेगिंग पर गीला धब्बा बन गया था।

फिर नाना ने अपना लोअर और कच्छा उतार दिया। उनका लंड सामने आया – करीब 10 इंच लंबा, 2.5 इंच मोटा, सख्त और नसों से भरा हुआ। सुपाड़ा गुलाबी और चमकदार था। मैंने उसे हाथ में पकड़ा, सहलाया, ऊपर-नीचे किया।

नाना बोले, “ले बेटी… चूस मेरे लौड़े को… अच्छे से चूस…”

मैंने झुककर उनका लंड मुंह में लिया। पहले सुपाड़े को जीभ से चाटा, फिर धीरे-धीरे पूरा मुंह में ले लिया। गले तक गया तो ग्ग्ग्ग… गी… गी… की आवाज आई। नाना मेरे बाल पकड़कर आगे-पीछे करने लगे। मैं जोर-जोर से चूस रही थी, लार टपक रही थी।

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करीब 15 मिनट तक मैंने उनका लंड चूसा, गोलियां भी चाटीं, दबाईं। नाना की सांसें तेज हो गई थीं।

फिर नाना ने मुझे उठाया और कहा, “आजा बेटी… अब तेरी चूत की बारी है… मेरा लंड कब से तेरी चूत का इंतजार कर रहा है…”

मैंने अपनी लेगिंग और पैंटी उतार दी। पूरी नंगी होकर नाना के ऊपर चढ़ गई। मैंने उनका लंड पकड़ा, अपनी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे बैठने लगी। जैसे ही सुपाड़ा अंदर गया, मैं चीख पड़ी, “हूंउउ… ऊं… नाना जी… बहुत मोटा है… आह्ह…”

धीरे-धीरे पूरा 10 इंच का लंड मेरी चूत में घुस गया। मैं उनके ऊपर बैठकर उछलने लगी। नाना मेरी कमर पकड़कर नीचे से धक्के मार रहे थे। मेरी चूचियां उछल रही थीं, नाना उन्हें पकड़कर मसल रहे थे।

मैं कराह रही थी, “आह्ह… ओह्ह… नाना जी… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… हां ऐसे ही… ऊं… ऊं…”

20 मिनट तक हम ऐसे ही चुदाई करते रहे। नाना ने मुझे कई पोजिशन में चोदा – कभी मैं ऊपर, कभी वो ऊपर आकर जोर-जोर से पेलते। आखिर में नाना ने मेरी चूत में जोर से धक्का मारा और गरम वीर्य छोड़ दिया। मैं भी झड़ गई। हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

कुछ देर बाद मैं चुपके से बाहर चली गई।

दोस्तों, आपको ये कहानी कैसी लगी? कमेंट में जरूर बताना।

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