Mama ki ladki chudai sex story, bhai ne cousin ko choda sex story, Mama ki beti chudai sex story: बात उस वक्त की है जब मैं अपने नानी के घर पर रहता था। घर में सिर्फ नानी और मैं ही थे। बाकी सब परिवार वाले अलग-अलग शहरों में बसे थे। जिंदगी एकदम बोरिंग थी, रोज का एक ही रूटीन। सुबह उठो, काम करो, खाना खाओ और सो जाओ।
मामा-मामी मुंबई में रहते थे। उनकी इकलौती बेटी रूमी भी वहीं कॉलेज करती थी। एक दिन अचानक मामा का फोन आया। वो गुस्से से लाल थे। नानी से बोले, “अब रूमी तुम्हारे पास रहेगी। मुंबई से भेज रहा हूं।” बस इतना कहकर फोन काट दिया।
नानी ने मुझे बताया कि रूमी किसी लड़के से प्यार में पड़ गई थी। एक दिन वो उसके साथ भाग भी गई थी। पूरी रात साथ बिताकर आई थी। मामा को जब पता चला तो गुस्सा बहुत आया। इसलिए उसे सुधारने के लिए यहां भेज रहे थे।
मैंने सोचा अच्छा हुआ, घर में थोड़ी रौनक आएगी। रूमी को मैंने बचपन में देखा था, लेकिन अब कई साल हो गए थे। चोदने का तो ख्याल भी नहीं आया। बस लगा कि कोई साथी तो मिलेगा बात करने का।
दो दिन बाद रूमी आ गई। जैसे ही दरवाजा खुला और वो अंदर आई, मैं ठिठक गया। गोरी चिट्ट, लंबे बाल, बड़ी-बड़ी आंखें। टाइट काली टॉप और नीली लेगिंग्स पहने हुए। टॉप इतना टाइट कि चूचियां उभरकर सामने आ रही थीं। कमर पतली, गांड गोल और भरी हुई। उम्र करीब २०-२१ की लग रही थी। मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। मैंने खुद को समझाया, अरे ये मामा की लड़की है, बहन लगती है। ऐसा मत सोच। लेकिन आंखें उससे हट नहीं रही थीं।
पहले कुछ दिन सब नॉर्मल रहा। हम साथ खाना खाते, टीवी देखते, बातें करते। लेकिन मन में वो बेचैनी बढ़ती जा रही थी। रात को सोते वक्त उसके बारे में सोचकर लंड हिलाना पड़ता।
एक दिन मामा ने फोन करके बताया कि रूमी अभी भी उसी लड़के से बात कर रही है। उसके पास एक छोटा छुपा हुआ फोन है। नानी ने सामान चेक किया। सच में मिला। घर में हंगामा मच गया। नानी ने रूमी को जमकर डांटा और थप्पड़ मारे। बोलीं, “अब अगर उस लड़के से बात की तो मार डालूंगी।”
रूमी बहुत रोई। बेचारी का चेहरा लाल हो गया था। उस रात वो नानी के साथ सोने नहीं गई। गुस्से और दुख में मेरे कमरे में आकर बैठ गई। टीशर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थी। आंसू बहा रही थी।
मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने उसे पास बिठाया। कंधे पर हाथ रखा। बोला, “रूमी रो मत। सब ठीक हो जाएगा।”
रूमी बोली, “भैया.. मैं क्या करूं.. वो मुझे बहुत याद आता है।”
मैंने कहा, “अरे उससे भी अच्छा लड़का मिलेगा। मेरे दोस्त हैं, सब अच्छे हैं। बता देना जो पसंद आए।”
रूमी बोली, “कहां मिलेगा भैया.. वो बहुत अच्छा था। मेरा ख्याल रखता था।”
मैंने हंसते हुए पूछा, “किस बात का याद आता है सबसे ज्यादा?”
रूमी शरमाई, “कुछ नहीं.. छोड़ो ना।”
मैंने कहा, “अरे बोल ना.. चुदाई याद आ रही है क्या?”
रूमी लाल हो गई। बोली, “छी भैया.. ऐसी बातें कैसे कर रहे हो।”
मैंने कहा, “जो सच है बोल ना। मुझे पता है तुझे अब भोसड़ी में खुजली हो रही होगी।”
वो चुप रही। फिर धीरे से बोली, “हां भैया.. बहुत तकलीफ हो रही है।”
उस रात हम बस बातें करते रहे। शाम को मैं उसे मेकअप दिलाने लेकर गया। बाइक पर बैठते वक्त उसकी चूचियां मेरी पीठ से सट गईं। नरम, गर्म। रास्ते भर लंड तनकर खड़ा रहा। मन कर रहा था रोककर कहीं चोद दूं। लेकिन खुद को रोका।
रात को कमरे में लेटकर दो बार हिलाया और सो गया।
अगले दिन रूमी फिर मेरे कमरे में आई। आज वो सफेद टीशर्ट और छोटी शॉर्ट्स में थी। टीशर्ट थोड़ा पारदर्शी, ब्रा की लाइन साफ दिख रही थी। हम बातें करने लगे।
मैंने धीरे से उसका गाल छुआ। वो सिहर गई। बोली, “भैया..”
मैंने कहा, “मैं हूं ना तेरे लिए। जब तक अच्छा लड़का नहीं मिलता, मैं तेरा ख्याल रखूंगा। बोल क्या चाहिए?”
धीरे-धीरे बात बढ़ी। मैंने कहा, “क्या तुझे चोदना है? मैं बहुत अच्छे से चोद दूंगा। कोई पता नहीं चलेगा।”
रूमी बोली, “छी.. क्या कह रहे हो भैया। हम रिश्ते में..”
मैंने कहा, “अरे रिश्ते में भैया लगता हूं। असल में तो मामा की लड़की है तू। हम शादी भी कर सकते हैं।”
वो चुप रही। मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए। पहले हल्के से चूमा। फिर जीभ अंदर डाली। वो पहले हिचकिचाई, फिर जवाब देने लगी।
मैंने टीशर्ट ऊपर किया। ब्रा हटा दी। दो गोल-गोल चूचियां सामने। गुलाबी निप्पल्स खड़े। मैंने जोर से चूसा।
रूमी बोली, “आह्ह.. भैया.. हल्के से.. आह्ह.. बहुत अच्छा लग रहा है..”
मैंने शॉर्ट्स और पैंटी उतारी। चूत पर हल्के बाल, गीली हो चुकी थी। उंगली डाली तो वो तड़पी।
रूमी बोली, “आह्ह.. इह्ह.. भैया.. अंदर.. और अंदर.. ओह्ह..”
मैंने लंड निकाला। ७ इंच लंबा, मोटा। रूमी ने देखा तो बोली, “इतना बड़ा.. कैसे घुसेगा भैया?”
मैंने कहा, “अरे तू तो पहले चुद चुकी है। सब अंदर चला जाएगा।”
लंड चूत पर रगड़ा। धीरे से सिरा अंदर। फिर एक जोरदार धक्का। पूरा अंदर।
रूमी चिल्लाई, “आह्ह्ह्ह!! दर्द.. भैया.. बहुत दर्द हो रहा है.. निकालो..”
मैंने कहा, “बस थोड़ा दर्द होगा। फिर मजा आएगा रंडी। ले मेरा लंड।”
धीरे-धीरे धक्के। वो पहले दर्द से कराही, फिर “आह्ह.. ओह्ह.. अच्छा.. भैया.. और जोर से..”
मैंने उसे घोड़ी बनाया। पीछे से पकड़कर जोर-जोर से पेला। चूत से चप-चप आवाज। गांड हिल रही थी।
रूमी बोली, “आह्ह.. भैया.. फाड़ दो मेरी चूत.. ले लो सब.. ओह्ह.. तेरे लंड ने तो मेरी जान निकाल दी..”
मैंने कहा, “ले साली.. ले पूरा.. तेरी चूत तो बहुत टाइट है.. मजे ले रंडी..”
फिर उसे लेटाकर टांगें कंधों पर। गहराई तक। वो तड़प रही थी।
रूमी बोली, “आह्ह.. ह्ह्ह.. ओह्ह.. भैया.. पानी निकल रहा है.. आह्ह्ह्ह!!”
चूत सिकुड़ी। गर्म पानी की धार निकली। वो चरम पर। पूरा शरीर कांप रहा था। आंखें बंद, मुंह खुला।
मैंने कहा, “अब मेरी बारी। मुंह खोल।”
उसने लंड मुंह में लिया। चूसने लगी। ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गोग.. गले तक ले रही थी।
मैंने मुंह में ही १५-२० बार पेला और झड़ गया। गर्म वीर्य मुंह भर गया। वो निगल गई।
कुछ देर आराम। फिर लंड फिर खड़ा। शाम तक कई राउंड। कभी बिस्तर पर, कभी दीवार से सटाकर। कंडोम खत्म। फिर भी चुदाई जारी।
रात को नानी सो गईं। हमने दरवाजा बंद किया। पूरी रात चुदाई। हर पोजिशन। सुबह तक रूमी की चूत लाल, सूजी हुई। जलन हो रही थी। फिर भी वो मुस्कुरा रही थी। बोली, “भैया.. आप जैसा भाई सबको मिले तो बॉयफ्रेंड की जरूरत ही नहीं।”
अब हम जब मन करता है चुदाई करते हैं। कभी OYO, कभी घर में छुपकर। मजा अलग लेवल का है।
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