अगले दिन शाम को बबीता ने मुझसे फोन किया और कहा कि वह मुझसे मिलना चाहती है।
तब तक सात बज चुके थे। जनवरी का महीना ठंड का था, इसलिए दिन कम थे।
मेरा कार्यक्रम शुरू हो गया था। मैंने दो पैग वोदका लिया था।
यही कारण था कि उसने मुझे घर के सामने की गली में बुलाया था।
मैं गली में आ गया था जब मैं अपनी कार से बाहर निकला।
वह पैदल आई और कार में बैठकर कहा, “यहां से गाड़ी को कहीं और ले चलो।”
उसने गाड़ी को गौर से देखा तो पता चला कि मैंने उसमें मयखाना बना रखा था।
मैंने सकुचाते हुए कहा, “वह बहुत ठंडा नहीं है, और ये मेरी हर शाम है।”
हां, तो मुझे इससे क्या? उसने पूछा।
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उसकी आंखों में चमक देखी तो मैंने उससे इस तरह से कुछ पूछा कि वह बुरा न माने।
उसने मेरी आशा से हटकर सहमति में सर हिला दिया।
मैंने जल्दी से एक और गिलास बनाया और उसे पकड़ा।
उसने बिंदास भी पकड़ लिया।
हम चियर्स बोलकर सिप करने लगे।
मैंने कहा, “मुझे मालूम नहीं था कि तुम्हें भी शौक है।”
सर्दी नहीं है, उसने आंख दबाई।
मैंने सिगरेट का पैकेट उठा लिया और गिलास भरकर रख दिया।
अगले ही क्षण, वह भी अपना भाषण खत्म करके मेरी तरफ देखने लगी।
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मैंने सिगरेट निकाली और उसे अपने मुँह में लगाया।
बाद में उसने भी एक सिगरेट निकाली।
उसकी सिगरेट में लौ दिखाने के लिए मैंने लाइटर जलाया।
उसने पेशेवराना ढंग से कश खींचा और कार से धुंआ उड़ा दिया।

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