दारू के नशे में मम्मी को एक वेश्या रांड की तरह चोदा

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम शशांक शुभम है और मै एक बहुत बड़ाशराबी हूँ. मेरे घर में मै और मेरी अम्मी हम तीन जने रहते है. मेरे अब्बू एक नंबर के शराबी है इसी लिये बचपन से मेरी अम्मी ने ही मुझे एक माँ और बाप दोनों का प्यार देकर पाला है. बहुत ज्यादा लाड प्यार मिलने के कारन मै गलत लोगो की सांगत में पड़ गया और दारू पिने लग गया. यारों मैंने दारू के नशे में मेरी अम्मी के साथ ही गन्दा कम कर डाला. दोस्तों आहिस्ता आहिस्ता मेरी दारू पिने की लत कब इतनी बड गई मुझे पता ही नहीं चला. 

आप को मेरी अम्मी की और मेंरी गन्दी हिन्दी 18+ XXX फ्री अश्लील XXX सेक्स कहानी हिंदी में सुनाने से पहले मेरी अम्मी के बारे में बता देता हूँ मेरी अम्मी 43 साल की एक बहुत सुंदर गोरी महिला है. मेरी अम्मी के बदन में सबसे ज्यादा आकर्षक उनके मोटे मोटेयोनी्तर और नारियल के जैसे दूध से भरे स्तन थे माँ के स्तनो के निप्पल भाले की तरह से नुकीले थे. मेरी अम्मी के स्तन इतने मोटे थे की उन्हें देखते ही ऐसा लगता था जैसे की मेरी सगी रांड माँ मेरी अम्मी का ब्लाउज फाड़ के बाहर निकल जाएँगे.

मेरी अम्मी की चूतड़ के तो क्या कहने जब मेरी अम्मी अपनी डबलरोटी जैसी गद्देदार गांड हिलते हुए चलती थी तब उनकी चूतड़ को देख कर सारे मर्द हिल जाते थे. कई बार दारू के नशे में जब मै मेरी अम्मी के ब्यूटीफुल और हॉट बदन को देखता था तो मेरा भी मन उन्हें अपनी रांड बनाकर पेलने का हो जाता था पर मई अपने आप पर काबू कर लेटा था. दोस्तों हम बहुत गरीब फैमिली से थे उप्पर से मुझे दारू पिने का गन्दा शौक, हम लोगो के गंदे कपड़े धो धो कर अपना घर चलाते थे हमारा लौंड्री का धंधा था.

(यहाँ भी देंखे 55 साल के अंकल ने कामुक माँ को चोदा रांड मेरी अम्मी की चुदाई) मैं और माँ धोबी घाट पर लोगो के गंदे कपड़े लेकर धोने जाते थे. जब मेरी अम्मी कपड़े को धोभी घाट के किनारे धोने के लिए बैठती थी तब मेरी सगी रांड माँ अपनी साड़ी और पेटिकोट को घुटनो तक उपर उठा लेती थी और फिर पीछे एक पत्थर पर बैठ कर आराम से दोनो टाँगे फैला कर जैसा की औरते गरम मूत करने वक़्त करती है गंदे कपड़ो को धोया करती थी.

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मैं भी अपनी लूँगी को जाँघ तक उठा कर गंदे कपड़े धोता रहता था और बिच बिच में एक दो दारू के पैक लगता रहता था. इस स्थिति में माँ की गोरी गोरी टाँगे मुझे देखने को मिल जाती थी और उसकी साड़ी भी सिमट कर उसके ब्लाउज के बीच में आ जाती थी और उसके मोटे मोटे चुचो के ब्लाउज के उपर से दर्शन होते रहते थे.

कई बार मेरी अम्मी की साड़ी उनकी गोरी गोरी जाँघों के उपर तक उठ जाती थी और जब मेरी निगाहें गलती से अपनी प्यारी माँ की मखमली जाँघो पर पड़ती थी तो उन्हें देख कर मेरा फौलादी लण्ड खडा हो जाता था. फिर मैं सोचता था की मै उस महिला के लिये गंदे खयाल कैसे ला सकता हु जिसने मुझे जन्म दिया है फिर मै अपना सिर झटक कर काम करने लगता था.

कपड़े धोने के बाद हम वही पर नहाते थे और फिर शाम होते ही सुखाए हुए कपड़े इकट्ठा कर के घर वापस लौट जाते थे. मैं तो खैर लूँगी पहन कर धोभी घाट के भीतर कमर तक पानी में नहाता था, मगर माँ धोभी घाट के किनारे ही बैठ कर नहाती थी. नहाने के लिए माँ सबसे पहले अपनी साड़ी उतारती थी. में  फिर अपने पेटिकोट के नाड़े को खोल कर पेटिकोट उपर को सरका कर अपने दाँत से पकड़ लेती थी इस तरीके से उसकी पीठ तो दिखती थी मगर आगे से ब्लाउज पूरा ढक जाता था फिर मेरी सगी रांड माँ पेटिकोट को दाँत से पकडे हुए ही भीतर हाथ घुसेड़ कर अपने ब्लाउज को खोल कर उतरती थी. और फिर पेटीकोट को छाती के उपर बाँध देती थी जिस से उसके चुचे पूरी तरह से पेटीकोट से ढक जाते थे और कुछ भी नज़र नही आता था और घुटनो तक पूरा बदन ढक जाता था.

फिर मेरी सगी रांड माँ वही पर धोभी घाट के किनारे बैठ कर एक बड़े से जग से पानी भर भर के पहले अपने पूरे बदन को रगड़ – रगड़ कर सॉफ करती थी और साबुन लगाती थी फिर धोभी घाट में उतर कर नहाती थी. माँ की देखा देखी मैने भी पहले धोभी घाट के किनारे बैठ कर अपने बदन को साफ करना शुरू कर दिया. फिर मैं धोभी घाट में डुबकी लगा कर के नहाने लगा. मैं जब साबुन लगाता तो मैं अपने हाथो को अपने लूँगी के घुसा के पूरे लण्ड आंड गांद पर चारो तरफ घुमा घुमा के साबुन लगा कर के धुलाई करता था क्यों मैं भी माँ की तरह बहुत धुलाई पसंद था.

जब मैं ऐसा कर रहा होता तो मैने कई बार देखा की माँ बड़े गौर से मुझे देखती रहती थी और अपने पैर की एडियाँ पत्थर पर आहिस्ता आहिस्ता रगड़ के सॉफ करती होती. मैं सोचता था मेरी सगी रांड माँ शायद इस कारण से देखती है की मैं ठीक से धुलाई करता हू या नही. इस कारण से मैं भी बारे आराम से खूब दिखा दिखा के साबुन लगता था की कही डांट ना सुनने को मिल जाए कि ठीक से सॉफ धुलाई का ध्यान नही रखता हू . मैं अपने लूँगी के भीतर पूरा हाथ डाल के अपने पेनिस को अच्छे तरीके से साफ करता था इस काम में मैने नोटीस किया कि कई बार मेरी लूँगी भी इधर उधर हो जाती थी जिससे माँ को मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड की एक आध झलक भी दिख जाती थी. जब पहली बार ऐसा हुआ तो मुझे लगा की शायद माँ डाटेंगी मगर ऐसा कुछ नही हुआ. तब निश्चिंत हो गया और मज़े से अपना पूरा ध्यान सॉफ धुलाई पर लगाने लगा.

और मैं भी चाहता था की मैं उसे साफाई करते हुए देखु पर मेरी सगी रांड माँ ज्यादा कुछ देखने नही देती थी और घुटनो तक की धुलाई करती थी और फिर बड़ी सावधानी से अपने हाथो को अपने पेटीकोट के भीतर ले जा कर अपनी फुद्दी की धुलाई करती जैसे ही मैं उसकी ओर देखता तो मेरी सगी रांड माँ अपना हाथ पेटीकोट में से निकल कर अपने हाथो की धुलाई में जुट जाती थी इसीलिए मैं कुछ नही देख पता था और चुकी मेरी सगी रांड माँ घुटनो को मोड़ के अपने छाती से सताए हुए होती थी इसीलये पेटिकोट के उपर से छाती की झलक मिलनी चाहिए मेरी सगी रांड माँ भी नही मिल पाती थी.

इसी तरह जब मेरी सगी रांड माँ अपने पेटिकोट के भीतर हाथ घुसा कर अपने जाँघों और उसके बीच की धुलाई करती थी ये ध्यान रखती की मैं उसे देख रहा हू या नही. जैसे ही मैं उसकी ओर घूमता मेरी सगी रांड माँ जल्दी से अपना हाथ निकाल लेती थी और अपने बदन पर पानी डालने लगती थी. मैं मन मसोस के रह जाता था. 

एक दिन धुलाई करते करते माँ का ध्यान शायद मेरी तरफ से हट गया था और बरे आराम से अपने पेटिकोट को अपने जाँघों तक उठा के धुलाई कर रही थी. उसकी गोरी मखमली जाँघों को देख कर मेरा फौलादी लण्ड खड़ा होने लगा और मैं जो की इस वक़्त अपनी लूँगी को ढीला कर के अपने हाथो को लूँगी के भीतर घुसेड़ कर अपने लण्ड की धुलाई कर रहा था आहिस्ता आहिस्ता अपने पेनिस को मसल्ने लगा. तभी एकदम माँ की नज़र मेरे उपर गई और उसने अपना हाथ निकल लिया और अपने बदन पर पानी डालती हुई कहने लगी “क्या कर रहा है जल्दी से नहा के काम ख़तम कर” मेरे तो होश ही उर गये और मैं जल्दी से धोभी घाट में जाने के लिए उठ कर खड़ा हो गया, पर मुझे इस बात का तो ध्यान ही नही रहा की मेरी लूँगी तो खुली हुई है और मेरी लूँगी सरसारते हुए नीचे गिर गई.

मेरा पूरा बदन नंगा हो गया और मेरा 12  इंच लम्बा और 4 इंच मोटा लण्ड जो की पूरी तरह से खड़ा था धूप की रोशनी में नज़र आने लगा. मैने देखा की माँ एक पल के लिए चकित हो कर मेरे पूरे बदन और नंगे लण्ड की ओर देखती रह गई मैने जल्दी से अपनी लूँगी उठाई और चुपचाप पानी में घुस गया. मुझे बड़ा डर लग रहा था की अब क्या होगा अब तो पक्की डाँट पड़ेगी और मैने कनखियो से माँ की ओर देखा तो पाया की मेरी सगी रांड माँ अपने सिर को नीचे किया हल्के हल्के मुस्कुरा रही है और अपने पैरो पर अपने हाथ चला के धुलाई कर रही है. मैं ने राहत की सांस ली. और चुपचाप नहाने लगा. उस दिन हम जायदातर चुप चाप ही रहे. घर वापस लौटते वक़्त भी माँ ज़यादा नही बोली.

अगले दिन से मैने देखा की माँ मेरे साथ कुछ ज्यादा ही खुल कर हँसी आनंदक करती रहती थी और हमारे बीच डबल मीनिंग में भी बाते होने लगी थी. पता नही माँ को पता था या नही पर मुझे बड़ा आनंद आ रहा था. जब हम धोभी घाट पर कपड़े धोने जाते तब भी मैं देखता था की माँ अब पहले से थोरी ज्यादा खुले तौर पर पेश आती थी. पहले मेरी सगी रांड माँ मेरी तरफ पीठ करके अपने ब्लाउज को खोलती थी और पेटिकोट को अपनी छाती पर बाँधने के बाद ही मेरी तरफ घूमती थी, पर अब मेरी सगी रांड माँ इस पर ध्यान नही देती और मेरी तरफ घूम कर अपने ब्लाउज को खोलती और मेरे ही सामने बैठ कर मेरे साथ ही नहाने लगती, जब की पहले मेरी सगी रांड माँ मेरे नहाने तक इंतेज़ार करती थी और जब मैं थोडा दूर जा के बैठ जाता तब पूरा नहाती थी.

मेरे नहाते वक़्त उसका मुझे घुरना बदस्तूर जारी था और मेरे में भी हिम्मत आ गई थी और मैं भी जब मेरी सगी रांड माँ अपने छातियों की धुलाई कर रही होती तो उसे घूर कर देखता रहता. माँ भी मज़े से अपने पेटिकोट को जाँघों तक उठा कर एक पत्थर पर बैठ जाती और साबुन लगाती और ऐसे एक्टिंग करती जैसे मुझे देख ही नही रही है. उसके दोनो घुटने मुड़े हुए होते थे और एक पैर थोडा पहले आगे पसारती और उस पर पूरा जाँघो तक साबुन लगाती थी फिर पहले पैर को मोड़ कर दूसरे पैर को फैला कर साबुन लगाती. पूरा भीतर तक साबुन लगाने के लिए मेरी सगी रांड माँ अपने घुटने मोड़े रखती और अपने बाए हाथ से अपने पेटिकोट को थोडा उठा के या अलग कर के दाहिने हाथ को भीतर डाल के साबुन लगाती.

मैं चूँकि थोड़ी दूर पर उसके बगल में बैठा होता इसीलिए मुझे पेटिकोट के अन्दर का नज़ारा तो नही मिलता था, जिसके वजह से मैं मन मसोस के रह जाता था की काश मैं सामने होता, पर इतने में ही मुझे ग़ज़ब का आनंद आ जाता था. और उसकी न्यूड (नग्न) मखमली चिकनी जंघे उपर तक दिख जाती थी. माँ अपने हाथ से साबुन लगाने के बाद बड़े मग को उठा के उसका पानी सीधे अपने पेटिकोट के भीतर डाल देती और दूसरे हाथ से साथ ही साथ रगडती भी रहती थी.

मेरी अम्मी के नहाने का ये इतना जबरदस्त सीन होता था की मेरा तो लण्ड खड़ा हो के फुफ्करने लगता और मैं वही नहाते नहाते अपने पेनिस को मसल्ने लगता. जब मेरे मन में मेरी रांड माँ के साथ संभोग करने के ख़याल आते तो मै बर्दाश नही कर पता था और धोभी घाट में कमर तक पानी में उतर जाता और पानी के भीतर हाथ से अपने पेनिस को पाकड कर अपनी प्यारी माँ को नहाते हुए देख कर उनके नाम की मुठ मारने लग जाता था.

जब मेरी अम्मी मुझे देखती थी तो मै नहाने की एक्टिंग करता रहता. इधर माँ मेरी तरफ देखती हुई अपने हाथो को उपर उठा उठा के अपने कांख की धुलाई करती कभी अपने हाथो को अपने पेटिकोट में घुसा के छाती को साफ करती कभी जाँघों के बीच हाथ घुसा के खूब तेज़ी से हाथ चलने लगती, दूर से कोई देखे तो ऐसा लगेगा के मूठ मार रही है और शायद मारती भी होगी. कभी कभी मेरी सगी रांड माँ भी खड़े हो धोभी घाट में उतर जाती और ऐसे में उसका पेटिकोट जो की उसके बदन से चिपका हुआ होता था गीला होने के कारण मेरी हालत और ज्यादा खराब कर देता था. पेटिकोट चिपकने के कारण उसकी बड़ी बड़ी चुचिया नुमाया हो जाती थी.

कपडे के उपर से उसके बड़े बड़े मोटे मोटे निपल तक दिखने लगते थे. पेटिकोट उसके फुद्दीं से चिपक कर उसके चूतड़ के दरार में फंसा हुआ होता था और उसके बड़े बड़े फुद्दीर साफ साफ दिखाई देते रहते थे. मेरी सगी रांड माँ भी कमर तक पानी में मेरे ठीक सामने आ के खडी हो के डुबकी लगाने लगती और मुझे अपने चुचियों का नज़ारा करवाती जाती. मैं तो वही धोभी घाट में ही लण्ड मसल के मूठ मार लेता था. हालांकि मूठ मारना मेरी आदत नही थी . घर पर मैं ये काम कभी नही करता था पर जब से माँ के स्वाभाव में चेंज आया था धोभी घाट पर मेरी हालत ऐसे हो जाती थी की मैं मज़बूर हो जाता था.

नेक्स्ट डे मोर्निंग सूरज की पहली किरण के साथ हम दोनों माँ और बेटे धोभी घाट पर गंदे कपड़े धोने पहुच गये और फिर अपने काम में लग गये, कपड़ों की धुलाई के बाद मैने उन्हें एक तरफ सूखने के लिए डाल दिया और फिर हम दोनो ने नहाने की तैयारी शुरू कर दी. मम्मी ने भी अपनी साड़ी उतार के पहले उसको साफ किया फिर हर बार की तरह अपने पेटिकोट को उपर चढ़ा के अपनी ब्लाउज निकाली फिर उसको साफ किया और फिर अपने बदन को रगड़ रगड़ के नहाने लगी. मैं भी बगल में बैठा उसको निहारते हुए नहाता रहा बेखयाली में एक दो बार तो मेरी लूँगी भी मेरे बदन पर से हट गई थी पर अब तो ये बहुत बार हो चुका था इस कारण से मैने इस पर कोई ध्यान नही दिया, हर बार की तरह मम्मी ने भी अपने हाथो को पेटिकोट के भीतर डाल के खूब रगड़ रगड़ के नहाना चालू रखा.

थोरी देर बाद मैं धोभी घाट में उतर गया. मम्मी ने भी धोभी घाट में उतर के एक दो डुबकिया लगाई और फिर हम दोनो बाहर आ गये. मैने अपने कपड़े चेंज कर लिए और पाजामा और कुर्ता पहन लिया. मम्मी ने भी पहले अपने बदन को टॉवेल से सूखाया फिर अपने पेटिकोट के डोर को जिसको की मेरी सगी रांड माँ छाती पर बाँध के रखती थी उपर से खोल लिया और अपने दांतों से पेटिकोट को पकड़ लिया, ये उसका हमेशा का काम था, मैं उसको पत्थर पर बैठ के एक तक देखे जा रहा था.

इस प्रकार उसके दोनो हाथ फ्री हो गये थे अब उसने ब्लाउज को पहन ने के लिए पहले उसने अपना बाया हाथ उसमे घुसाया फिर जैसे ही मेरी सगी रांड माँ अपना दाहिना हाथ ब्लाउज में घुसाने जा रही थी की पता नही क्या हुआ उसके दांतों से उसकी पेटिकोट छुट गई. और सीधे सरसरते हुए नीचे गिर गई. और उसका पूरा का पूरा नंगा बदन मेरी आँखो के सामने दिखने लगा. उसके बड़ी बड़ी चुचिया जिन्हे मैने अब तक कपड़ों के उपर से ही देखा था और उसके भारी बाहरी फुद्दीर और उसकी मोटी मोटी जांघे और झाट के बाल सब एक पल के लिए मेरी आँखो के सामने नंगे हो गये. पेटिकोट के नीचे गिरते ही मै मेरी अम्मी की तरफ गया और अपने एक हाथ को सीधे अपनी न्यूड (नग्न) माँ की छाती पर रख दिया और कहा की माँ मै आप से बहुत प्यार करता हूँ और मै आप से नाजायज शारीरिक संबंध कायम करना चाहता हूँ.

मेरी बात सुन मेरी सगी रांड माँ एकदम से हडबडा गई और अपने आँचल को संभालते हुए अपनी चुचियों को ढक लिया और फिर अपने कपड़े पहन मेरी तरफ देखती हुई बोली, “हाय, क्या कर रहा था तू मै तेरी माँ हूँ मैंने तुझे जन्म दिया है और तू दारू के नशे में मुझसे गन्दी बात कर रहा है तू अपनी ही माँ के साथ नाजायज शारीरिक संबंध बनाना चाहता है ये बहुत बड़ा पाप है.

दोस्तों जिस गुस्से से मेरी अम्मी ने मुझे डाटा डर के मारे मेरी टट्टी से भरी चूतड़ फट रही थी और मेरे मुँह से तो आवाज़ ही नही निकाल पा रही थी, फिर उसने हल्के से अपना एक हाथ मेरी जाँघो पर रखा और एक मेरी लुंगी ऊपर कर के मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को सहलाते हुए बोलने लगी डर मत बेटा मुझे भी कई सालो से चुदवाने की तड़प में जाल रही हूँ तेरा बाप तो मुझे चोदता नहीं है आज से तेरी ये माँ तेरी रांड हुई. अब मेरी अम्मी सेक्स करने के लिये पुरे जोश में आ चुकी थी.

फिर मेरी अम्मी ने कहा बेटा तू मुझे घूरे जा रहा है, बोल तेरा मन मेरे साथ सेक्स करने का कर रहा है की ऩही, बोल ना मै कहा हाँ  माँ मन तो मेरे बहुत कर रहा है और इसके बाद मैंने कहा के माँ आज आप और मै दारू पीकर सेक्स करेंगे इसके बाद मैंने दो पेक बनाये एक मेरे लिये और एक मेरी अम्मी के लिये और फिर पैक लगा कर सेक्स करना शुरू करा.

मैंने दारू के नशे में पूरे जोश के साथ हल्के हाथो से अपनी प्यारी माँ के दूध से भरे मोटे मोटे स्तनो को दबाने लगा. उधर माँ के हाथ तेज़ी से मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड पर चल रहे थे, तभी माँ जो अब तक काफ़ी उत्तेजित हो चुकी थी ने मेरे चेहरे की ओर देखते हुए कहा “क्यों आनंद आ रहा है ना, ज़ोर से दबा मेरे चुचयों को बेटा तभी पूरा आनंद मिलेगा, मसलता जा, देख अभी तेरा माल मैं कैसे निकलती हू”. मैने ज़ोर से चुचियों को दबाना शुरू कर दिया था, मेरा मन कर रहा था की मैं माँ के ब्लाउज खोल के चुचियों को नंगा करके उन्हें देखते हुए दबाऊं , इसीलये मैने माँ से पुछा ” माँ तेरा ब्लाउज खोल दू?”

इस पर मेरी सगी रांड माँ मुस्कुराते हुए कहने लगी “ऩही अभी रहने दे, मैं जानती हू की तेरा बहुत मन कर रहा होगा की तू मेरी न्यूड (नग्न) चुचियों को देखे मगर, अभी रहने दे”

मैं कहा ठीक है माँ, पर मुझे लग रहा हाई की मेरे औज़ार से माल निकालने वाला है “.

इस पर माँ कहने लगी “कोई बात ऩही बेटा निकालने दे, तुझे आनंद आ रहा है ना?”

“हा माँ आनंद तो बहुत आ रहा है”

“अभी क्या आनंद आया है बेटे अभी तो और आएगा, अभी तेरा माल निकाल ले फिर देख मैं तुझे कैसे जन्नत की सैर कराती हू” कह कर मम्मी ने अपना हाथ और ज़यादा तेज़ी के साथ चलना शुरू कर दिया. मेरे पानी अब बस निकालने वाला ही था, मैने भी अपना हाथ अब तेज़ी के साथ माँ के अनारो पर चलाना शुरू कर दिया था. मेरा दिल कर रहा था उन प्यारे प्यारे चुचियों को अपने मुँह में भर के चुसू, किन्तु मेरी सगी रांड माँ अभी संभव ऩही था. मुझे केवल चुचियों को दबा दबा के ही संतोष करना था. ऐसा लग रहा था जैसे की मैं अभी सातवे आसमान पर उड़ रहा था, मैं भी खूब ज़ोर ज़ोर सिसकते हुए बोलने लगा “ओह माँ, हा माँ और ज़ोर से मस्लो, और ज़ोर से मूठ मारो, निकाल दो मेरा सारा पानी”

पर तभी मुझे ऐसा लगा जैसे की मम्मी ने लण्ड पर अपनी पकर ढीली कर दी है. पेनिस को छोड़ कर मेरे आंडो को अपने हाथ से पकड़ के सहलाते हुए माँ कहने लगी “अब तुझे एक नया आनंद चखती हू, ठहर जा” और फिर आहिस्ता आहिस्ता मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड पर झुकने लगी, पेनिस को एक हाथ से पकडे हुए मेरी सगी रांड माँ पूरी तरह से मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड पर झुक गई और अपने लिप्स को खोल कर मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपने मुँह में भर लिया. मेरे मुँह से एक आह निकल गई, मुझे विश्वास ऩही हो रहा था की मेरी सगी रांड माँ ये क्या कर रही है.

मैं कहा “ओह माँ ये क्या कर रही हो, है छोड़ ना बहुत गुदगुदी हो रही है”

मगर मेरी सगी रांड माँ कहने लगी “तो फिर मज़े ले इस गुदगुदी के, करने दे तुझे अच्छा लगेगा”.

” माँ क्या इसको मुँह में भी लिया जाता,”

“हा मुँह में भी लिया जाता है और दूसरी जगहो पर भी, अभी तू मुँह में डालने का आनंद लूट” कह कर तेज़ी के साथ मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को चूसने लगी, मेरी तो कुछ समझ में ऩही आ रहा था, गुदगुदी और सनसनी के कारण मैं मज़े के सातवे आसमान पर झूल रहा था. मम्मी ने पहले मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के सुपारे को अपने मुँह में भरा और आहिस्ता आहिस्ता चूसने लगी, और मेरी ओर बड़ी गदराई अंदाज़ में अपने नज़रो को उठा के बोली, “कैसा लाल लाल सुपारा है रे तेरा, एकदम पहरी आलू के जैसे, लगता है अभी फट जाएगा, इतना लाल लाल सुपरा कुंवारे लड़कों का ही होता है” फिर मेरी सगी रांड माँ और कस कस के मेरे सुपारे को अपने कोमल होंठो में भर भर के चूसने लगी. धोभी घाट के किनारे, पेड़ की छावं में मुझे ऐसा आनंद मिल रहा था जिसकी मैने मेरे पूरे जीवन में आज की तारीख तक कल्पना तक ऩही की थी. 

माँ अब मेरे आधे से अधिक लौरे को अपने मुँह में भर चुकी थी और अपने कोमल होंठो को कस के मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के चारो तरफ से दबाये हुए आहिस्ता आहिस्ता उपर सुपारे तक लाती थी और फिर उसी तरह से सरकते हुए नीचे की तरफ ले जाती थी. उसकी शायद इस बात का अच्छी तरह से अहसास था की ये मेरा किसी महिला के साथ पहला संबंध है और मैने मेरे पूरे जीवन में आज की तारीख तक किसी महिला हाथो का स्पर्श अपने लण्ड पर ऩही महसूस किया है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए मेरी सगी रांड माँ मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को बीच बीच में ढीला भी छोड़ देती थी और मेरे अंडों को दबाने लगती थी. मेरी सगी रांड माँ इस बात का पूरा ध्यान रखे हुए थी की मैं जल्दी ना झाडूं . मुझे भी गजब का आनंद आ रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे की मेरा फौलादी लण्ड फट जाएगा मगर. मुझसे अब रहा ऩही जा रहा था मैने माँ से कहा ” माँ, अब निकाल जाएगा माँ, मेरा माल अब लगता है ऩही रुकेगा”.

उसने मेरी बातो की ओर कोई ध्यान ऩही दिया और अपनी चूसाई जारी रखी.

मैने कहा “माँ तेरे मुँह में ही निकल जाएगा, जल्दी से अपना मुँह हटा लो”

इस पर मम्मी ने अपना मुँह थोरी देर के लिए हटाते हुए कहा की “कोई बात ऩही मेरे मुँह में ही निकाल मैं देखना चाहती हू की कुंवारे लड़के के पानी का स्वाद कैसा होता है” और फिर अपने मुँह में मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को कस के जकड़ते हुए उसने अब अपना पूरा ध्यान केवल अब मेरे सुपाडे पर लगा दिया और मेरे सुपारे को कस कस के चूसने लगी, उसकी जबान मेरे सुपारे के कटाव पर बार बार फिर रही थी. मैं सिसकते हुए बोलने लगा “ओह माँ पी जाओ तो फिर, चख लो मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का सारा पानी, ले लो अपने मुँह में, ओह ले लो, कितना आनंद आ रहा है, ही मुझे ऩही पाता था की इतना आनंद आता है, ही निकाल गया, निकाल गया, माँ-निकला 

तभी मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का फ़ौवारा छुट पड़ा और. तेज़ी के साथ भालभाला कर मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड से पानी गिरने लगा. मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का सारा सारा पानी सीधे माँ के मुँह में गिरता जा रहा था. और मेरी सगी रांड माँ मज़े से मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को चूसे जा रही थी. कुछ ही देर तक लगातार मेरी सगी रांड माँ मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को चुस्ती रही, मेरा फौलादी लण्ड अब पूरी तरह से उसके थूक से भीग कर गीला हो गया था और आहिस्ता आहिस्ता सिकुड़ रहा था. पर उसने अब भी मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपने मुँह से ऩही निकाला था और आहिस्ता आहिस्ता मेरे सिकुड़े हुए पेनिस को अपने मुँह में किसी चॉक्लेट की तरह घुमा रही थी.

कुछ देर तक ऐसा ही करने के बाद जब मेरी साँसे भी कुछ ठण्डी हो गईतब मम्मी ने अपना चेहरा मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड पर से उठा लिया और अपने मुँह में जमा मेरे स्पर्मा को अपना मुँह खोल कर दिखाया और हल्के से हंस दी. फिर उसने मेरा सारा पानी गटक लिया और अपने सारी पल्लू से अपने कोमल होंठो को पोछती हुई बोली, ” आनंद आ गया, सच में कुंवारे लण्ड का पानी बड़ा मीठा होता है, मुझे ऩही पाता था की तेरा पानी इतना मजेदार होगा” फिर मेरे से पुछा “आनंद आया की ऩही”, मैं क्या उत्तर देता, जोश ठंडा हो जाने के बाद मैने अपने सिर को नीचे झूका लिया था, पर गुदगुदी और सनसनी तो अब भी कायम थी, तभी मम्मी ने मेरे लटके हुए लौरे को अपने हाथो में पकड़ा और धीरे से अपने साड़ी के पल्लू से पोछती हुई पूछी “बोल ना, आनंद आया की ऩही,” मैने शर्माते हुए उत्तर दिया “हाँ माँ बहुत आनंद आया, इतना आनंद कभी ऩही आया था”,

तब मम्मी ने पुछा “क्यों? अपने हाथ से नही करता था क्या”,

“करता हूँ माँ, पर उतना आनंद ऩही आता था जितना आज आया है”

“महिला के हाथ से करवाने पर तो ज़यादा आनंद आएगा ही, पर इस बात का ध्यान रखियो की किसी को पता ना चले “

“हा माँ किसी को पता ऩही चलेगा”

तब माँ उठ कर खडी हो गई, अपने साड़ी के पल्लू को और मेरे द्वारा मसले गये ब्लाउज को ठीक किया और मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए अपने मखमली चूत के सामने अपने साड़ी को हल्के से दबाया और साड़ी को फुद्दी के उपर ऐसे रगडा जैसे की पानी पोछ रही हो. मैं उसकी इस क्रिया को बरे गौर से देख रहा था. मेरे ध्यान से देखने पर मेरी सगी रांड माँ हसते हुए कहने लगी “मैं ज़रा गरम मूत कर के आती हू, तुझे भी अगर करना है तो चल अब तो कोई शरम ऩही है” मैं हल्के से शरमाते हुए मुस्कुरा दिया तो कहने लगी “क्यों अब भी शर्मा रहा है क्या”.

मैने इस पर कुछ ऩही कहा और चुप चाप उठ कर खडा हो गया. मेरी सगी रांड माँ आगे चल दी और मैं उसके पीछे पीछे चल दिया. जब हम झाड़ियों के पास पहुच गये तो मम्मी ने एक दफे पीछे मुड कर मेरी ओर देखा और मुस्कुरई फिर झाड़ियों के पीछे पहुच कर बिना कुछ बोले अपने साड़ी उठा के गरम मूत करने बैठ गई. उसकी दोनो गोरी गोरी जंघे उपर तक न्यूड (नग्न) हो चुकी थी और उसने शायद अपने साड़ी को जान बुझ कर पीछे से उपर उठा दिया था जिस के कारण उसके दोनो फुद्दीर भी नुमाया हो रहे थे. ये सीन देख कर मेरा फौलादी लण्ड फिर से फुफ्करने लगा. उसका गोरे गोरे फुद्दीर बड़े कमाल के लग रहे थे. मम्मी ने अपने फुद्दीं को थोरा सा उचकाया हुआ था जिस के कारण उसके चूतड़ की खाई भी दिख रही थी.

हल्के भूरे कलर की चूतड़ की खाई देख कर दिल तो यही कर रहा था की पास जा उस चूतड़ की खाई में आहिस्ता आहिस्ता उंगली चलाऊं और चूतड़ की भूरे कलर की छेद को अपनी उंगली से छेड़ूँ और देखूं की कैसे पाक-पकती है. तभी माँ गरम मूत कर के उठ खडी हुई और मेरी तरफ घूम गई. उसने अभी तक साड़ी को अपने जाँघों तक उठा रखा था. मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए उसने अपने साड़ी को छोड़ दिया और नीचे गिरने दिया, फिर एक हाथ को अपनी फुद्दी पर साड़ी के उपर से ले जा के रगड़ने लगी जैसे की गरम मूत पोछ रही हो और कहने लगी “चल तू भी गरम मूत कर ले . खडा खडा मुँह क्या टाक रहा है”.

मैं जो की अभी तक इस शानदार नज़ारे में खोया हुआ था थोडा सा चौंक गया पर फिर और हकलाते हुए कहा “हा हा अभी करता हू,,,,,, मैने सोचा पहले तुम कर लो इस कारण से रुका था”. फिर मैने अपने पाजामा के नाड़े को खोला और सीधा खड़े खड़े ही मूतने की प्रयास करने लगा. मेरा फौलादी लण्ड तो फिर से खड़ा हो चुका था और खड़े लण्ड से गरम मूत ही ऩही निकाल रहा था. मैने अपनी लेट्रिंग से भरी चूतड़ तक का ज़ोर लगा दिया गरम मूत करने के चक्कर में. 

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माँ वही बगल में खडी हो कर मुझे देखे जा रही थी. मेरे खरे पेनिस को देख कर मेरी सगी रांड माँ हसते हुए कहने लगी “चल जल्दी से कर ले गरम मूत, देर हो रही है घर भी जाना है” मैं क्या बोलता गरम मूत तो निकाल ऩही रहा था. तभी मम्मी ने आगे बढ़ कर मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपने हाथो में पकड़ लिया और कहने लगी “फिर से खाद कर लिया, अब गरम मूत कैसे उतरेगा’ ? कह कर पेनिस को हल्के हल्के सहलाने लगी, अब तो लण्ड और तंग हो गया पर मेरे ज़ोर लगाने पर गरम मूत की एक आध बूंदे नीचे गिर गई, मैने माँ से कहा “अर्रे तुम छोडो ना इसको, तुमहरे पकड़ने से तो ये और खड़ा हो जाएगा, छोडो “

और माँ का कोमल हाथ अपने लण्ड पर से झटकने की प्रयास करने लगा, इस पर मम्मी ने हसते हुए कहा “मैं तो छोड़ देती हू पर पहले ये तो बता की खडा क्यों किया था, अभी दो मिनिट पहले ही तो तेरा पानी निकाला था मैने, और तूने फिर से खडा कर लिया, कमाल का लड़का है तू तो”. मैं कुछ ऩही बोला, अब लण्ड थोडा ढीला पड़ गया था और मैने गरम मूत कर लिया. मूतने के बाद जल्दी से पाजामा के नाड़े को बाँध कर मैं माँ के साथ झारियों के पीछे से निकल आया, माँ के चेहरे पर अब भी मंद मंद मुस्कान आ रही थी. मैं जल्दी जल्दी चलते हुए आगे बढ़ा और कपड़े के गट्ठर को उठा कर अपने माथे पर रख लिया, मम्मी ने भी एक गट्ठर को उठा लिया और अब हम दोनो माँ और बेटे जल्दी जल्दी गाँव के पगडंडी वाले रास्ते पर चलने लगे.

शाम होते होते तक हम अपने घर पहुच चुके थे. कपड़ों के गट्ठर को इस्त्री करने वाले कमरे में रखने के बाद हमने हाथ मुँह धोया और फिर मम्मी ने कहा कि बेटा चल कुछ खा पी ले. भूख तो वैसे मुझे नहीं लगी ऩही थी (दिमाग़ में जब सेक्स का भूत सवार हो तो भूख तो वैसे भी मार जाती हाई) पर फिर भी मैने अपना सिर सहमति में हिला दिया. मम्मी ने अब तक अपने कपड़ों को बदल लिया था, मैने भी अपने पाजामा को खोल कर उसकी जगह पर लूँगी पहन ली क्यों की गर्मी के दिनों में लूँगी ज्यादा आरामदायक होती है . माँ किचन घर में चली गई.

नाईट के 9:30 ही बजे थे. पर गाँव में तो ऐसे भी लोग जल्दी ही सो जाया करते है. हम दोनो माँ और बेटे आ के बिछावन पर लेट गये. बिछावन पर मेरे पास ही माँ भी आ के लेट गई थी. माँ के इतने पास लेटने भर से मेरे शरीर में एक गुदगुदी सी दौड़ गई. उसके बदन से उठने वाली प्रसनबु मेरी सांसो में भरने लगी और मैं बेकाबू होने लगा था. मेरा फौलादी लण्ड आहिस्ता आहिस्ता अपना सिर उठाने लगा था. तभी माँ मेरी ओर करवट कर के घूमी और पुछा “बहुत तक गये हो ना”?

“हाँ , माँ , जिस दिन धोभी घाट पर जाना होता है, उस दिन तो थकावट ज्यादा हो ही जाती है”

“हाँ , मुझे भी बड़ी थकावट लग रही है, जैसे पूरा बदन टूट रहा हो”

“मैं दबा दूँ , थोड़ी थकान दूर हो जाएगी”

“ऩही रे, रहने दे तू, तू भी तो थक गया होगा”

“ऩही माँ उतना तो ऩही थका की तेरी सेवा ना कर सकु”

माँ के चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई और मेरी सगी रांड माँ हँसते हुए बोली…..”दिन में इतना कुछ हुआ था, उससे तो तेरी थकान और बढ़ गई होगी”

“नही दिन में थकान बढ़ने वाला तो कुछ ऩही हुआ था”.

इस पर माँ थोड़ा सा और मेरे पास सरक कर आई, माँ के सरकने पर मैं भी थोड़ा सा उसकी तरफ सरका. हम दोनो की साँसे अब आपस में टकराने लगी थी. मम्मी ने अपने हाथो को हल्के से मेरी कमर पर रखा और आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथो से मेरी कमर और जाँघो को सहलाने लगी. माँ की इस हरकत पर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई और लण्ड अब फुफ्करने लगा था. मम्मी ने हल्के से मेरी जाँघो को दबाया. मैने हिम्मत कर के हल्के से अपने हाथो को बढ़ा के माँ की कमर पर रख दिया. मेरी सगी रांड माँ कुछ ऩही कहने लगी बस हल्का सा मुस्कुरा दी. मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं अपने हाथो से माँ के नंगे कमर को दबाने और सहलाने लगा. मम्मी ने केवल पेटिकोट और ब्लाउज पहन रखा था. उसके ब्लाउज के उपर के दो बटन खुले हुए थे. इतने पास से उसकी चुचियों की गहरी घाटी नज़र आ रही थी और मन कर रहा था जल्दी से जल्दी उन चुचियों को पकड़ लूँ . पर किसी तरह से अपने आप को रोक रखा था. मम्मी ने जब मुझे चुचियों को घूरते हुए देखा तो मुस्कुराते हुए बोली, “क्या इरादा है तेरा, शाम से ही घूरे जा रहा है, खा जाएगा क्या मेरी चूची को ? “

“नही ,माँ तुम भी क्या बात कर रही हो, मैं कहा घूर रहा था? “

“चल झूठे , मुझे क्या पता ऩही चलता, नाईट में भी वही करेगा क्या”

“क्या माँ ?”

“वही जब मैं सो जाउंगी तो अपना लण्ड भी मसलेगा और मेरी चुचियों को भी दबाएगा.”

“नहीं , माँ “

“तुझे देख के तो यही लग रहा है कि तू फिर से वही हरकत करने वाला है”

“ऩही, माँ” .

मेरे हाथ अब माँ की न्यूड (नग्न) जाँघो को सहला रहे थे.

“वैसे दिन में आनंद आया था? ” पुछ कर मम्मी ने हल्के से अपने हाथो को मेरे लूँगी के उपर लण्ड पर रख दिया.

मैने कहा “हाँ माँ, बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा था”

“फिर करने का मन कर रहा है क्या”

“हाँ , माँ “

इस पर उस ने अपने हाथो का दवाब ज़रा सा मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड पर बढ़ा दिया और हल्के हल्के दबाने लगी. उस के हाथो का स्पर्श पा के मेरी तो हालत खराब होने लगी थी. ऐसा लग रहा था की अभी के अभी पानी निकल जाएगा.

तभी माँ बोली, “जो काम तू मेरे सोने के बाद करने वाला है मेरी सगी रांड माँ काम अभी कर ले, चोरी चोरी करने से तो अच्छा है कि जो करना है तू मेरे सामने ही कर ले “

मैं कुछ ऩही कहा और अपने हाथो को हल्के से माँ की चुचियों पर रख दिया. मम्मी ने अपने हाथो से मेरे हाथो को पकड़ कर अपनी चुचियों पर कस के दबाया और मेरी लूँगी को आगे से उठा दिया और अब मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को सीधे अपने हाथो से पकड़ लिया. मैने भी अपने हाथो का दवाब उसकी चुचियों पर बढ़ा दिया. मेरे भीतर की आग एकदम भड़क उठी थी और अब तो ऐसा लग रहा था की जैसे इन चुचियों को मुँह में ले कर चूस लू. मैने हल्के से अपने गर्दन को और आगे की तरफ बढ़ाया और अपने लिप्स को ठीक चुचियों के पास ले गया. माँ शायद मेरे इरादे को समझ गई थी. उसने मेरे सिर के पीछे हाथ डाला और अपने चुचियों को मेरे चेहरे से दबा दिया.

हम दोनो अब एक दूसरे की तेज़ चलती हुई सांसो को महसूस कर रहे थे. मैने अपने लिप्स से ब्लाउज के उपर से ही माँ की चुचियों को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा मेरा दूसरा हाथ कभी उसकी चुचियों को दबा रहा था कभी उसके मोटे मोटे फुद्दीं को. मम्मी ने भी अपना हाथ तेज़ी के साथ चलना शुरू कर दिया था और मेरे मोटे पेनिस को अपने हाथ से मुठिया रही थी. मेरा आनंद बढ़ता जा रहा था. तभी मैने सोचा ऐसे करते करते तो माँ फिर मेरा माल निकल देगी और शायद फिर कुछ देखने भी ऩही दे जबकि मैं आज तो माँ को पूरा नंगा करके जी भर के उसके बदन को देखना चाहता था. इस कारण से मैने माँ के हाथो को पकड़ लिया और कहा ” माँ रूको”

“क्यों आनंद ऩही आ रहा है क्या, जो रोक रहा है”

“माँ , आनंद तो बहुत आ रहा है मगर”

“फिर क्या हुआ,”

“फिर माँ , मैं कुछ और करना चाहता हू, ये तो दिन के जैसे ही हो जाएगा”

इस पर माँ मुस्कुराते हुए पूछा ” तो तू और क्या करना चाहता है, तेरा पानी तो ऐसे ही निकलेगा ना और कैसे निकलेगा”

“ऩही माँ, पानी ऩही निकलना मुझे”

“तो फिर क्या करना है”

“माँ , देखना है”

“क्या देखना है रे”

“माँ , ये देखना है” कह कर मैने एक हाथ सीधा माँ के मखमली चुत पर रख दिया.

“बदमाश, ये कैसी तमन्ना पल ली तूने”

” माँ बस एक दफे दिखा दो ना”

“इधर आ , मेरे पैरो के बीच में अभी तुझे दिखाती हूँ . पर एक बात जान ले तू पहली बार देख रहा है देखते ही तेरा पानी निकल जाएगा समझा”

फिर मम्मी ने अपने हाथो से पेटिकोट के निचले भाग को पकड़ा और आहिस्ता आहिस्ता उपर उठाने लगी. मेरी हिम्मत तो बढ़ ही चुकी थी मैने धीरे से माँ से कहा “ओह माँ ऐसे ऩही” “

माँ- “तो फिर कैसे रे, कैसे देखेगा”

“माँ , पूरा खोल के दिखाओ ना”

“पूरा खोल के से तेरा क्या मतलब है”

” पूरा कपड़ा खोल के, मेरी बड़ी तमन्ना है की मैं तुम्हारे पूरे बदन को नंगा देखूं “

मम्मी ने मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को फिर से अपने हाथो में पकड़ लिया और मुठियाने लगी. इस पर मैं कहा “ओह छोड़ दो माँ , ज्यादा करोगी तो अभी निकल जाएगा”

“कोई बात ऩही अभी निकल ले . अगर पूरा खोल के दिखा दूँगी तो फिर तो तेरा देखते ही निकल जाएगा, पूरा खोल के देखना है ना अभी”, इतना सुनते ही मेरा दिल तो बल्लियों उछलने लगा.

“हाँ माँ , सच में दिखाओगी ना?”

“हाँ दिखाउंगी , मेरे राजा बेटा, ज़रूर दिखाउंगी , अब तो तू पूरा जवान हो गया है और, काम करने लायक भी हो गया है, अब तो तुझे ही दिखना है सब कुछ और तेरे से अपना सारा काम करवाना है मुझे.

माँ और तेज़ी के साथ मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को मुठिया रही थी और बार बार मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के सुपाडे को अपने अंगूठे से दबा भी रही थी.

माँ कहने लगी “अभी जल्दी से तेरा निकल देती हू फिर देख तुझे कितना आनंद आएगा, अभी तो तेरी ये हालत है की देखते ही झर जाएगा, एक पानी निकल दे फिर देख तुझे कितना आनंद आता है”

“ठीक है माँ निकाल दो एक पानी, मैं भी तेरी चूची दबाऊं ?”

” अब आया ना लाइन पर. पूछता क्या है, दबा ना, दबा मेरी चुचियों को . इस से तेरा पानी जल्दी निकलेगा, क्या भयंकर लौड़ा है, पता ऩही इस उमर में ये हाल है, जब इस छोकरे के लण्ड का, तो पूरा जवान होगा तो क्या होगा”

मैने अपने दोनो हथेलियो में माँ की चुचिया भर ली और उन्हे खूब कस कस के दबाने लगा. ग़ज़ब का आनंद आ रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे की मैं पागल हो जाउंगा . दोनो चुचिया किसी अनार की तरह से सख़्त और गुदाज़ थी. उसके मोटे मोटे निपल भी ब्लाउज के उपर से पकड़ में आ रहे थे.

मैं दोनो निपल के साथ साथ पूरी चूची को ब्लाउज के उपर से पकड़ कर दबाए जा रहा था. माँ के मुँह से अब सिसकारिया निकलने लगी थी और मेरी सगी रांड माँ मेरा उत्साह बढाते जा रही थी. “हाँ बेटा, शाबाश… ऐसे ही दबा मेरी चुचियों को, है क्या लण्ड है, पता ऩही घोड़े का है या सांड का, ठहर जा अभी इसे चूस के तेरा पानी निकलती हूँ ” कह कर मेरी सगी रांड माँ नीचे की तरफ झुक गई जल्दी से मेरा पेनिस अपने कोमल होंठो के बीच क़ैद कर लिया और सुपाडे को कोमल होंठो के बीच दबा के खूब कस कस के चूसने लगी जैसे कि पीपे लगा कर के कोई कोका-कोला पीता है. मैं उसकी चुचियो को अब और ज्यादा ज़ोर से दबा रहा था, मेरी भी सिसकारिया निकलने लगी थी, मेरा चिपचिपा सफेद पानी अब छूटने वाला ही था.

“रे मेरी अम्मी निकला रे निकला मेरा निकल गया ओह माँ सारा सारा का सारा पानी तेरे मुँह में ही निकल गया रे”. माँ का कोमल हाथ अब और तेज रफ्तार से चलने लगा ऐसा लग रहा था जैसे मेरी सगी रांड माँ मेरे पानी को गटागट पीते जा रही है. मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के सुपरे से निकले एक-एक बूँद पानी चूस जाने के बाद मम्मी ने अपने कोमल होंठो मेरे को मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड पर से हटा लिया और मुस्कुराती हुई मुझे देखने लगी और कहने लगी कैसा लगा.

मैने कहा “बहुत ही ज्यादा अच्छा .. और बिस्तर पर एक तरफ लुढ़क गया. मेरे साथ साथ माँ भी लुढ़क के मेरे बगल में लेट गई और मेरे कोमल होंठो और गालो को कुछ समय तक चूमती रही.कुछ समय तक आँख बंद कर के पड़े रहने के बाद जब मैं उठा तो देखा की मम्मी ने अपनी आँखे बंद कर रखी है और अपने हाथो से अपने चुचियों को हल्के हल्के सहला रही थी. मैं उठ कर बैठ गया और धीरे से माँ के टांगों के पास चला गया. मम्मी ने अपना एक पैर मोड़े रखा था और एक पैर सीधा कर के रखा हुआ उसका पेटिकोट उसके जाँघों तक उठा हुआ था.

पेटिकोट के उपर और नीचे के भागो के बीच में एक गैप सा बन गया था. उस गैप से उसकी झाँट भीतर तक नज़र आ रही थी. उसकी गुदज जाँघों के उपर हाथ रख के मैं हल्का सा झुक गया और भीतर तक देखने के लिए. हालाँकि अन्दर रोशनी बहुत कम थी परंतु फिर भी मुझे उसके काले काले झाटों के दर्शन हो गये. झाटों के कारण फुद्दी तो ऩही दिखी परंतु फुद्दी की प्रसनबु ज़रूर मिल गई. तभी मम्मी ने अपनी आँखे खोल दी और मुझे अपने जाघों के बीच झकते हुए देख कर कहने लगी “हाय दैया… उठ भी गया तू मैं तो सोच रही थी अभी कम से कम आधा घंटा शांत पडा रहेगा, और मेरी जाँघों के बीच क्या कर रहा है? , देखो इस लड़के को मखमली बुर देखने के लिए दीवाना हुआ बैठा है,”

फिर मुझे अपने बाँहो में भर कर मेरे गाल पर चुम्मि काट कर कहने लगी “मेरे लाल को अपनी प्यारी माँ का मखमली बुर देखना है ना, अभी दिखती हू मेरे छोरे , है मुझे ऩही पता था कि तेरे भीतर इतनी बेकरारी है मखमली बुर देखने की”

मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी ” माँ जल्दी से खोलो और दिखा दो”

“अभी दिखती हू, कैसे देखेगा, बता ना”

“कैसे क्या माँ , खोलो ना बस जल्दी से”

“तो ले ये है मेरे पेटिकोट का नाड़ा . खुद ही खोल के माँ को नंगा कर दे और देख ले”

“हाय , माँ मेरे से ऩही होगा, तुम खोलो ना”

“क्यों ऩही होगा, जब तू पेटिकोट ऩही खोल पाएगा तो आगे का काम कैसे करेगा”

” माँ आगे का भी काम करने दोगी क्या?”

मेरे इस सवाल पर मम्मी ने मेरे गालो को मसलते हुए कहा , “क्यों आगे का काम ऩही करेगा क्या, अपनी प्यारी माँ को ऐसे ही प्यासा छोड़ देगा, तू तो कहता था कि तुझे ठंडा कर दूँगा, पर तू तो मुझे गरम कर छोड़ने की बात कर रहा है”

” माँ , मेरा ये मतलब ऩही था, मुझे तो अपने कानो पर विश्वास ऩही हो रहा कि तुम मुझे और आगे बढ़ने दोगी “

“गधे के जैसा लण्ड होने के साथ साथ तेरा तो दिमाग़ भी गधे के जैसा ही हो गया है, लगता है सीधा खोल के ही पुछना पडेगा , बोल चोदेगा मुझे? , चोदेगा अपनी प्यारी माँ को, माँ की मखमली बुर चाटेगा ? , और फिर उसमे अपना लण्ड डालेगा, बोल ना.”

“हाँ माँ , सब करूँगा, सब करूँगा जो तू कहेगी मेरी सगी रांड माँ सब करूँगा, है मुझे तो विश्वास ऩही हो रहा की मेरा सपना सच होने जा रहा है, ओह मेरे सपनो में आने वाली परी के साथ सब कुछ करने जा रहा हू”

“क्यों सपनो में तुझे और कोई ऩही मैं ही दिखती थी क्या”

“हा माँ , तुम्ही तो हो मेरे सपनो की परी, पूरे गावं में तुमसे सुंदर कोई ऩही”

“है, मेरे 16 साल का जवान छोकरे को उसकी माँ इतनी सुंदर लगती है क्या?”

“हा माँ , सच में तुम बहुत सुंदर हो और मैं तुम्हे बहुत दिनों से चोदना चाहता हूँ ….पर कह ऩही पाता था”

“कोई बात ऩही बेटा अभी भी कुछ ऩही बिगड़ा है.. मेरी सगी रांड माँ भला हुआ कि आज मैने खुद ही पहल कर दी.

चल आ देख अपनी प्यारी माँ को नंगा और आज से बन जा उसका सैयां ” कह कर माँ बिस्तर के नीचे उतर गई और मेरे सामने आके खडी हो गई और आहिस्ता आहिस्ता करके अपने ब्लाउज के एक बटन को खोलने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे चाँद बादल में से निकल रहा है. आहिस्ता आहिस्ता उसकी गोरी गोरी चुचिया दिखने लगी. ओह गजब की चुचिया थी, देखने से लग रहा था जैसे की दो बड़े बड़े नारियल हों . दोनो तरफ लटक रहे हो. एकदम गोल और आगे से नुकीले तीर के जैसे. चुचियों पर नसों की नीली रेखाएं स्पष्ट दिख रही थी. निपल थोड़े मोटे और एकदम कड़े थे और उनके चारो तरफ हल्का गुलाबीपन लिए हुए गोल गोल घेरा था. निपल भूरे कलर के थे.

माँ अपने हाथो से अपने चुचियों को नीचे से पकड़ कर मुझे दिखाती हुई कहने लगी “पसंद आई अपनी प्यारी माँ की चूची , कैसी लगी बेटा बोल ना, फिर आगे का दिखाउंगी ” “हाँ माँ तुम सच में बहुत सुंदर हो, ओह कितनी सुंदर चूची है …..ओह” मम्मी ने अपने चुचियों पर हाथ फेरते हुए और अच्छे से मुझे दिखाते हुए हल्का सा हिलाया और कहने लगी “खूब सेवा करनी होगी इसकी तुझे, देख कैसे शान से सिर उठाए खडा है इस उमर में भी, तेरे बाप के बस का तो है ऩही अब तू ही इन्हे संभालना” कह कर मेरी सगी रांड माँ फिर अपने हाथो को अपने पेटिकोट के नाड़ा पर ले गई और कहने लगी “अब देख बेटा तुझे जन्नत का दरवाजा दिखती हूँ , अपनी प्यारी माँ का स्पेशल मालपुआ देख, जिसके लिए तू इतना तरस रहा था”.

कह कर मम्मी ने अपने पेटिकोट के नाड़ा को खोल दिया. पेटिकोट उसके कमर से सरसरते हुए सीधा नीचे गिर गया और मम्मी ने एक पैर से पेटिकोट को एक तरफ उछल कर फेंक दिया और बिस्तर के और नज़दीक आ गई फिर कहने लगी ” बेटा तूने तो मुझे एकदम बेशरम बना दिया”, फिर मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपने मुट्ठी में भर के कहने लगी “ओह तेरे इस सांड जैसे लण्ड ने तो मुझे पागल बना दिया है, देख ले अपनी प्यारी माँ को जी भर के”  मेरी नज़रे माँ के जाँघों के बीच में उसकी मस्त फुद्दी पर टिकी हुई थी. माँ की गोरी गोरी मखमली रानों के बीच में काले काले झाटों का एक तिकोना बना हुआ था. झांट बहुत ज्यादा बड़े ऩही थे. झांटों के बीच में से उसकी लाल फुद्दी की हल्की झलक मिल रही थी.

मैने अपने हाथो को माँ के जाँघों पर रखा और थोडा नीचे झुक कर ठीक फुद्दी के पास अपने चेहरे को ले जा के देखने लगा. मम्मी ने अपने दोनो हाथ को मेरे सिर पर रख दिया और मेरे बालो से खेलने लगी फिर कहने लगी “रुक जा ऐसे ऩही दिखेगा तुझे आराम से बिस्तर पर लेट के दिखाती हूँ ” “ठीक है, आ जाओ बिस्तर पर,माँ एक दफे ज़रा पीछे घुमो ना” “ओह, मेरा राजा मेरा पिछवाडा भी देखना चाहता है क्या, चल चूतड़ तो मैं तुझे खड़े खड़े ही दिखा देती हूँ . ले देख अपनी प्यारी माँ के मखमली बुर और चूतड़ को”. इतना कह कर मेरी सगी रांड माँ पीछे घूम गई.

ओह कितना सुंदर दृश्य था मेरी सगी रांड माँ. इसे मैं अपनी पूरी जिंदगी में कभी ऩही भूल सकता. उस के फुद्दी सच में बड़े गरम थे. एकदम मलाई जैसे, गोल-मटोल, गुदज, मांसल. और उस फुद्दी के बीच में एक गहरी लकीर सी बन रही थी. जो कि उसके चूतड़ की खाई थी. मैने उसे को थोडा झुकने को कहा तो मेरी सगी रांड माँ झुक गई और मै आराम से दोनों मक्खन जैसे फुद्दीं को पकड के अपने हाथो से मसलते हुए उनके बीच की खाई को देखने लगा. दोनो फुद्दीं को बीच में चूतड़ की भूरे कलर की छेद फुकफुका रही थी. एकदम छोटी सी गोल छेद, मैने हल्के से अपने हाथ को उस छेद पर रख दिया और हल्के हल्के उसे दबाने और सहलाने लगा, साथ में मैं फुद्दीं को भी मसल रहा था. पर तभी माँ आगे घूम गई.

“चल मैं खड़े खड़े थक गई. अब जो करना है बिस्तर पर करेंगे”. और मेरी सगी रांड माँ बिस्तर पर चढ़ गई. पलंग की पुष्ट से अपने सिर को टिका कर उसने अपने दोनो पैरो को मेरे सामने खोल कर फैला दिया और कहने लगी “अब देख ले आराम से, पर एक बात तो बता तू देखने के बाद क्या करेगा कुछ पता भी है तुझे या ऩही” ” हाँ , माँ तुझे चोदुंगा ” “अच्छा चोदेगा? , पर कैसे ज़रा बता तो सही कैसे चोदेगा…??? मैं पहले तुम्हारी फुद्दी चुसना चाहता हू” “चल ठीक है चूस लेना, और क्या करेगा” “ओह और………. पता नहीं … “पता ऩही ये क्या उत्तर हुआ पता ऩही, जब कुछ पता ऩही तो माँ पर डोरे क्यों डाल रहा था?” “ओह माँ मैने पहले किसी को किया ऩही है ना इस कारण से मुझे पता ऩही है, मुझे बस थोडा बहुत पता है, जो कि मैने गाँव के लड़कों के साथ सीखा था” “तो गाँव के छोकरों ने ये ऩही सिखाया कि कैसे किया जाता है, खाली यही सिखाया कि माँ पर डोरे डालो” “ओह माँ तू तो समझती ही ऩही…

अरे मेरी सगी रांड माँ लोग मुझे क्यों सिखाने लगे कि तुम पर डोरे डालो, मेरी सगी रांड माँ तो… मेरी सगी रांड माँ तो तुम मुझे बहुत सुंदर लगती हो इस कारण से मैं तुम्हे देखता था” “ठीक है चल तेरी बात समझ गई बेटा कि मैं तुझे सुंदर लगती हू पर मेरी इस सुंदरता का तू फायदा कैसे उठाएगा उल्लू ये भी तो बता दे ना, कि खाली देख के मूठ मार लेगा” ” माँ , ऩही मैं तुम्हे चोदना चाहता हूँ , माँ तुम सीखा देना, सीखा दोगी ना ?” कह कर मैने बुरा सा मुँह बना लिया” “हाँ मेरा राज दुलारा बेटा देख तो माँ की लेने के लिए कैसे तड़प रहा, आजा मेरे प्यारे मैं तुझे सब सीखा दूँगी, तेरे जैसे लण्ड वाले पुत्र को तो कोई भी माँ सीखना चाहेगी, तुझे तो मैं सीखा पढ़ा के चुदाई का बादशाह बना दूँगी, आजा पहले अपनी प्यारी माँ की चुचियों से गेम ले जी भर के फिर तुझे फुद्दी से खेलना सिखाती हूँ बेटा”

मैं माँ के कमर के पास बैठ गया और माँ तो पूरी न्यूड (नग्न) पहले से ही थी मैने उसकी चुचियों पर अपना हाथ रख दिया और उन्हें आहिस्ता आहिस्ता दबाने और सहलाने लगा. मेरे हाथ में शायद दुनिया की सबसे ब्यूटीफुल चुचिया थी. ऐसी चुचिया जिनको देख के किसी का भी दिल मचल जाए. मैं दोनो चुचियों की पूरी गोलाई पर हाथ फेर रहा था. चुचिया मेरी हथेली में ऩही समा रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में घूम रहा हू.

माँ की चुचियो का स्पर्श ग़ज़ब का था. मुलायम, गुदज, और सख़्त गठीलापन. ये सब अहसास शायद अच्छी गोल मटोल चुचियों को दबा के ही पाया जा सकता है. मुझे इन सारी चीज़ो का एक साथ आनंद मिल रहा था. ऐसी चूची दबाने का सौभाग्य नसीब वालो को ही मिलता है इस बात का पता मुझे अपनी लाइफ में बहुत बाद में चला जब मैने दूसरी अनेक तरह की चुचियों का स्वाद लिया.

माँ के मुँह से हल्की हल्की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी और उसने मेरे चेहरे को अपने पास खीच लिया और अपने तपते हुए लाल कोमल होंठो का पहला अनूठा स्पर्श मेरे कोमल होंठो को दिया. हम दोनो के कोमल होंठ एक दूसरे से मिल गये और मैं माँ की दोनो चुचियों को पकडे हुए उसके कोमल होंठो का रस ले रहा था. कुछ ही सेकेंड्स में हमारे जबान आपस में टकरा रहे थे. मेरे जीवन का ये पहला चुंबन करीब दो तीन मिनिट्स तक चला होगा.

मेरी सेक्सी माँ के पतले कोमल होंठो को अपने मुँह में भर कर मैने चूस चूस कर और लाल कर दिया. जब हम दोनो एक दूसरे से अलग हुए तो दोनो हाँफ रहे थे. मेरे हाथ अब भी उसकी दोनो चुचिया पर थे और मैं अब उन्हें ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था. माँ के मुँह से अब और ज्यादा तेज सिसकारिया निकलने लगी थी. 

मम्मी ने सिसकते हुए मुझसे कहा ” ओह ओह स्स्सि……शाबाश .. ऐसे ही प्यार करो मेरी चुचियो से, हल्के हल्के आराम से मसलो बेटा, ज्यादा ज़ोर से ऩही, ऩही तो तेरी माँ को आनंद ऩही आएगा, आहिस्ता आहिस्ता मसलो ” . मेरे हाथ अब माँ की चुचियों के निपल से गेम रहे थे. उसके निपल अब एकदम सख़्त हो चुके थे. हल्का कालापन लिए हुए लाल कलर के निपल कड़े होने के बाद ऐसे लग रहे थे जैसे दो गोरे लाल पहाड़ियों पर बादाम की गिरी रख दी गई हो. निपल के चारो ओर उसी कलर का घेरा थे. ध्यान से देखने पर मैने पाया कि उस घेरे पर छोटे छोटे दाने से उगे हुए थे.

मैं निपलो को अपनी दो उंगलियों के बीच में लेकर धीरे-धीरे मसल रहा था और प्यार और मोहब्बत से उन्हें खींच रहा था. जब कभी भी मैं ऐसा करता तो माँ की सिसकियाँ और तेज हो जाती थी. माँ की आँखें एकदम नशीली हो चुकी थी और मेरी सगी रांड माँ सिसकियाँ लेते हुए बुदबुदाने लगी “ओह बेटा ऐसे ही, ऐसे ही, तुझे तो सीखने की भी ज़रूरत ऩही है रे, ओह क्या खूब मसल रहा है मेरे प्यारे , ऐसे ही कितने दिन हो गये जब इन चुचियों को किसी मर्द के हाथ ने मसला है या प्यार किया है, कैसे तरसती थी मैं कि काश कोई मेरी इन चुचियों को मसल दे . प्यार और मोहब्बत से सहला दे, पर आख़िर में अपना बेटा ही काम आया, आजा मेरे लाल” कहते हुए उसने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चुचियों पर झुका लिया. मैं माँ का इशारा समझ गया और मैने अपने कोमल होंठ माँ की चुचियों से भर लिए.

मेरे एक हाथ में उसकी एक चूची और दूसरी चूची पर मेरे कोमल होंठ चिपके हुए थे. मैने आहिस्ता आहिस्ता उसके चुचियों को चूसना शुरू कर दिया था. मैं ज्यादा से ज्यादा चूची को अपने मुँह में भर के चूस रहा था. मेरे भीतर का ब्लड इतना उबाल मरने लगा था कि एक दो बार मैने अपने दाँत भी चुचियों पर गड़ा दिए थे, जिस से माँ के मुँह से एकदम से चीख निकल गई थी. पर फिर भी उसने मुझे रोका ऩही मेरी सगी रांड माँ अपने हाथो को मेरे सिर के पीछे ले जा कर मुझे बालो से पकड़ के मेरे सिर को अपनी चुचियों पर और ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी और दांत काटने पर एकदम से घुटि घुटि आवाज़ में चीखते हुए कहने लगी “ओह धीरे बेटा, धीरे से चूसो चुछी को ऐसे ज़ोर से ऩही काटते है”,

फिर उसने अपनी चूची को अपने हाथ से पकडा और उसको मेरे मुँह में घुसाने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे मेरी सगी रांड माँ अपनी चूची को पूरा का पूरा मेरे मुँह में घुसा देना चाहती हो और कहा “ओह राजा मेरे निपल को चूसो ज़रा, पूरे निपल को मुँह में भर लो और कस कस के चूसो राजा.. जैसे बचपन में दूध पीने के लिए चूस्ते थे”. मैने अब अपना ध्यान निपल पे कर दिया और निपल को मुँह में भर कर अपनी जबान उसके चारो तरफ गोल गोल घूमते हुए चूसने लगा. मैं अपनी जबान को निपल के चारो तरफ के घेरे पर भी फिरा रहा था.

निपल के चारो तरफ के घेरे पर उगे हुए दानो को अपनी जबान से कुरेदते हुए निपल को चूसने पर माँ एकदम मस्त हो जा रही थी और उसके मुँह से निकलने वाली सिसकिया इसकी गवाही दे रही थी. मैं उसकी चीखे और सिसकिया सुन कर पहले पहल तो डर गया था पर माँ के द्वारा ये समझाए जाने पर की ऐसी चीखे और सिसकिया इस बात को बतला रही है कि उसे आनंद आ रहा है तो फिर दुगुने जोश के साथ अपने काम में जुट गया था. जिस चूची को मैं चूस रहा था मेरी सगी रांड माँ अब पूरी तरह से मेरे लार और थूक से भीग चुकी थी और लाल हो चुकी फिर भी मैं उसे चूसे जा रहा था.

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तभी मम्मी ने मेरे सिर को अपनी उस चूची से हटा के अपनी दूसरी चूची की तरफ करते हुए कहा ” खाली इसी चूची को चूस्ता रहेगा, दूसरी को भी चूस, उसमे भी वही स्वाद है”, फिर अपनी दूसरी चुची को मेरे मुँह में घुसाते हुए कहने लगी “इसको भी चूस चूस के लाल कर दे मेरे लाल, दूध निकल दे मेरे सैय्या, एकदम आम के जैसे चूस और सारा रस निकल दे अपनी प्यारी माँ की चुचियों का, किसी काम की ऩही है ये, कम से कम मेरे लाल के काम तो आएँगी” मैं फिर से अपने काम में जुट गया और पहली वाली चुची दबाते हुए दूसरी को पूरे मनोयोग से चूसने लगा.

माँ सिसकिया ले रही थी और चुसवा रही थी . कभी कभी अपना हाथ मेरे कमर के पास ले जा के मेरे लोहे जैसे तने हुए पेनिस को पकड के मरोड़ रही थी कभी अपने हाथो से मेरे सिर को अपनी चुचियों पर दबा रही थी. इस तरह काफ़ी देर तक मैं उसकी चुचियों को चूसता रहा, फिर मम्मी ने खुद अपने हाथो से मेरा सिर पकड के अपनी चुचियों पर से हटाया और मुस्कुराते मेरे चेहरे की ओर देखने लगी.

मेरी सेक्सी माँ की बायीं चुची अभी भी मेरे लार से चमक रही थी जबकि दाहिनी चुची पर लगा थूक सुख चुका था पर उसकी दोनो चुचिया लाल हो चुकी थी, और निपलो का कलर हल्का काला से पूरा काला हो चुका था (ऐसा बहुत ज्यादा चूसने पर ब्लड का दौरा भर जाने के कारण हुआ था). मम्मी ने मेरे चेहरे को अपने कोमल होंठो के पास खीच कर मेरे कोमल होंठो पर एक गहरा चुंबन लिया और अपनी कातिल मुस्कुराहट फेकते हुए मेरे कान के पास धीरे से कहने लगी “खाली दूध ही पियेगा या मालपुआ भी खायेगा , देख तेरा मालपुआ तेरा इंतेज़ार कर रहा है राजा”

मैने भी माँ के कोमल होंठो का चुंबन लिया और फिर उसके भरे भरे गालो को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और फिर उसके नाक को चूमा और फिर धीरे से कहा “ओह माँ तुम सच में बहुत सुंदर हो”  इस पर मम्मी ने पुछा – “क्यों आनंद आया ना चूसने में” “हा माँ , गजब का आनंद आया, मुझे मेरे पूरे जीवन में आज की तारीख तक ऐसा आनंद कभी ऩही आया था”. तब मम्मी ने अपने पैरो के बीच इशारा करते हुए कहा ” नीचे और भी आनंद आएगा, यहाँ तो केवल तिजोरी का दरवाजा था, वास्तविक खजाना तो नीचे है, आजा बेटे आज तुझे वास्तविक मालपुआ खिलती हूँ ”  मैं धीरे से खिसक कर माँ के पैरो पास आ गया. मम्मी ने अपने पैरो को घुटने के पास से मोड कर फैला दिया और कहने लगी “यहाँ , बीच में, दोनो पैर के बीच में आ के बैठ तब ठीक से देख पाएगा अपनी प्यारी माँ का खजाना”

मैं उठ कर माँ के दोनो पैरो के बीच घुटनो के बल बैठ गया और आगे की ओर झुका, सामने मेरे मेरी सगी रांड माँ चीज़ थी जिसको देखने के लिए मैं मरा जा रहा था. मम्मी ने अपनी दोनो जांघें फैला दी और अपने हाथो को अपने मखमली चूत के उपर रख कर कहने लगी “ले देख ले अपना मालपुआ, अब आज के बाद से तुझे यही मालपुआ खाने को मिलेगा”

मेरी प्रसनी का तो ठिकाना ऩही था. सामने माँ की खुली जाँघो के बीच झांटों का एक तिकोना सा बना हुआ था. इस तिकोने झांटों के जंगल के बीच में से माँ की फूली हुए लाल मखमली बुर का चीड़ झाँक रहा था जैसे बादलों के झुरमुट में से चाँद झांकता है. मैने अपने हाथो को माँ के चिकने जाँघो पर रख दिया और थोडा सा झुक गया. उसके मखमली चूत के बाल बहुत बड़े बड़े ऩही थे छोटे छोटे घुंघराले बाल और उनके बीच एक गहरी लकीर से चीरी हुई थी.

मैने अपने दाहिने हाथ को जाँघ पर से उठा कर हकलाते हुए पुछा “माँ मैं इसे छू लूँ ?…….” “छू ले, तेरे छुने के लिए ही तो खोल के बैठी हूँ ” मैने अपने हाथो को माँ की फुद्दी को उपर रख दिया. झांट के बाल एकदम रेशम जैसे मुलायम लग रहे थे और ऐसा लग रहा थे, हालाँकि आम तौर पर झांट के बाल मोटे होते है और उसके झांट के बाल भी मोटे ही थे पर मुलायम भी थे. हल्के हल्के मैं उन बालो पर हाथ फिरते हुए उन्हें एक तरफ करने की प्रयास कर रहा था.

अब फुद्दी की दरार और उसकी मोटी मोटी फांके स्पष्ट रूप से दिख रही थी. माँ का मखमली बुर एक फूला हुआ और गद्देदार पावरोटी की तरह लगता था. फुद्दी की मोटी मोटी फांके बहुत आकर्षक लग रही थी. मेरे से रहा ऩही गया और मैं बोल पडा “ओह माँ ये तो सचमुच में मालपुए के जैसा फूला हुआ है”. “हाँ बेटा यही तो तेरा वास्तविक मालपुआ है. आज के बाद जब कभी भी मालपुआ खाने का मन करे यही खाना” “हाँ माँ .

मैं तो हमेशा यही मालपुआ खाउंगा , ओह माँ देखो ना इस से तो रस भी निकल रहा है” (फुद्दी से रिस्ते हुए पानी को देख कर मैने कहा ). “बेटा यही तो वास्तविक माल है हम औरतो का, ये रस मैं तुझे अपनी मखमली बुर की थाली में सज़ा कर खिलाउंगी , दोनो फाँक को खोल के देख कैसा दिखता है, हाथ से दोनो फाँक पकड़ कर खीच कर मखमली बुर को चीर कर देख” सच बताता हूँ . दोनो फांको को चिर कर मैने जब फुद्दी के लाल रस से भीगे छेद को देखा तो मुझे यही लगा कि मेरा तो जनम सफल हो गया है.

फुद्दी के भीतर का भाग एकदम लाल था और रस से भीगा हुआ था जब मैने उस चीर को स्पर्श करा तो मेरे हाथो में चिपचिपा सा रस लग गया. मैने उस रस को वही बिस्तर के बेडशीट पर पोछ दिया और अपने सिर को आगे बढ़ा कर माँ के मखमली बुर को चूम लिया. मम्मी ने इस पर मेरे सिर को अपने फुद्दी पर दबाते हुए हल्के से सिसकते हुए कहा “बिस्तर पर क्यों पोछ दिया, उल्लू, यही माँ का वास्तविक प्यार है जो कि तेरे पेनिस को देख के फुद्दी के रास्ते छलक कर बाहर आ रहा है, इसको चख के देख, चूस ले इसको ” “हाँ माँ मैं तेरे मखमली बुर को ज़रूर चुसुंगा”.  “हाँ बेटा चूस ले अपनी प्यारी माँ के फुद्दी के सारे रस को, दोनो फांको को खोल के उसमे अपनी जबान डाल दे और चूस, और ध्यान से देख तू तो मखमली चूत के केवल फांको को देख रहा है, देख मैं तुझे दिखाती हू”

और मम्मी ने अपने फुद्दी को पूरा फैला दिया और अंगुली रख कर बताने लगी “देख ये जो छोटा वाला छेद है ना मेरी सगी रांड माँ मेरे गरम मूत करने वाला छेद है, मखमली चूत में दो – दो छेद होते है, उपर वाला गरम मूत करने के काम आता है और नीचे वाला जो ये बड़ा छेद है वो चुदवाने के और बच्चा पैदा करने के काम आता है इसी छेद में से रस निकालता है ताकि मोटे से मोटा लण्ड आसानी से फुद्दी को आराम से चोद सके.  “हाँ बेटा, अब तू चाटना शुरू कर दे, पहले पूरी मखमली चूत के उपर अपनी जबान को फिरा के चाट फिर मैं आगे बताती जाती हूँ कि कैसे कैसे करना है”

मैने अपनी जबान निकाल ली और माँ की मखमली चुत पर अपने ज़ुबान को फिरना शुरू कर दिया, पूरी फुद्दी के उपर मेरी जबान चल रही थी और मैं फूली हुई गद्देदार मखमली बुर को अपनी खुरदरी ज़बान से उपर से नीचे तक चाट रहा था. अपनी जबान को दोनो फांको के उपर फेरते हुए मैं ठीक मखमली चूत के दरार पर अपनी जबान रखी और आहिस्ता आहिस्ता उपर से नीचे तक पूरे फुद्दी की दरार पर जबान को फिराने लगा, मखमली चूत से रिस रिस कर निकालता हुआ रस जो बाहर आ रहा था उसका नमकीन स्वाद मेरे मुझे मिल रहा था.

जीभ जब फुद्दी के उपरी भाग में पहुच कर क्लिट से टकराती थी तो माँ की सिसकिया और भी तेज़ हो जाती थी. मम्मी ने अपने दोनो हाथो को प्रारंभ में तो कुछ देर तक अपनी चुचियों पर रखा था और अपनी चुचियों को अपने हाथ से ही दबाती रही मगर बाद में उसने अपने हाथो को मेरे सिर के पीछे लगा दिया और मेरे बालो को सहलाते हुए मेरे सिर को अपनी फुद्दी पर दबाने लगी. मेरी फुद्दी चुसना बदस्तूर जारी थी और अब मुझे इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि माँ को सबसे ज्यादा आनंद अपनी क्लिट की चूसाने में आ रहा है इस कारण से मैने इस बार अपने जबान को नुकीला कर के क्लिट से सटा दिया और केवल क्लिट पर अपनी जबान को तेज़ी से चलाने लगा.

मैं बहुत तेज़ी के साथ क्लिट के उपर जबान चला रहा था और फिर पूरे क्लिट को अपने कोमल होंठो के बीच दबा कर ज़ोर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा, मम्मी ने उत्तेजना में अपने फुद्दीं को उपर उछाल दिया और ज़ोर से सिसकिया लेते हुए कहने लगी “है दैया, उईईइ माँ सी सी….. चूस ले ओह चूस ले मेरे भगनसे को ओह, सी क्या खूब चूस रहा है रे तू, ओह मैने तो सोचा भी ऩही थऽआअ की तेरी जबान ऐसा कमाल करेगी, हाय रे बेटा तू तो कमाल का निकला ओह ऐसे ही चूस अपने कोमल होंठो के बीच में भगनसे को भर के इसी तरह से चूस ले, ओह बेटा चूसो, चूसो बेटा……”

माँ के उत्साह बढ़ने पर मेरी उत्तेजना अब दुगुनी हो चुकी थी और मैं दुगुने जोश के साथ एक कुत्ते की तरह से लॅप लॅप करते हुए पूरे मखमली बुर को चाटे जा रहा था. अब मैं फुद्दी के भगनसे के साथ साथ पूरे फुद्दी के माँस (गुड्डे) को अपने मुँह में भर कर चूस रहा था और, माँ की मोटी फूली हुई फुद्दी अपने झाटों समेत मेरे मुँह में थी. पूरी मखमली बुर को एक दफे रसगुल्ले की तरह से मुँह में भर कर चूसने के बाद मैने अपने कोमल होंठो को खूल कर फुद्दी के पेलने वाले छेद के सामने टिका दिया और मखमली चूत के कोमल होंठो से अपने कोमल होंठो को मिला कर मैने खूब ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. मखमली बुर का नशीला रस रिस रिस कर निकल रहा था और सीधा मेरे मुँह में जा रहा था. मैने कभी सोचा भी ऩही था की मैं फुद्दी को ऐसे चुसूंगा या फिर फुद्दी की चूसाई ऐसे की जाती है, पर शायद फुद्दी सामने देख कर चूसने की कला अपने आप आ जाती है.

फुददी और जबान की लड़ाई अपने आप में ही इतनी मजेदार होती है कि इसे सीखने और सीखाने की ज़रूरत ऩही पड़ती. , बस जबान को फुददी दिखा दो बाकी का काम जबान अपने आप कर लेती है. माँ की सिसकिया और शाबाशी और तेज हो चुकी थी, मैने अपने सिर को हल्का सा उठा के माँ को देखते हुए अपने मखमली चूत के रस से भीगे कोमल होंठो से माँ से पुछा, “कैसा लग रहा है माँ , तुझे अच्छा लग रहा है?”

मम्मी ने सिसकते हुए कहा ” हाय बेटा, मत पुछ, बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है, मेरे लाल, इसी मज़े के लिए तो तेरी माँ तरस रही थी. चूस ले मेरे मखमली बुर को और ज़ोर से चुस्स्स्स्सस्स.. . सारा रस पी लीई मेरे सैय्या, तू तो जादूगर है रीईईई, तुझे तो कुछ बताने की भी ज़रूरत ऩही, है मेरे मखमली चूत के फांको के बीच में अपनी जबान डाल के चूस बेटा, और उसमे अपने जबान को लिबलिबते हुए अपनी जबान को मेरी फुद्दी के भीतर तक घुमा दे, हाय घुमा दे राजा बेटा घुमा दे….”

माँ के बताए हुए रास्ते पर चलना तो बेटे फ़र्ज़ बनता है और उस फ़र्ज़ को निभाते हुए मैने मखमली चूत के दोनो फांको को फैला दिया और अपनी जबान को उसके फुद्दी में पेल दिया. बर के भीतर जबान घुसा कर पहले तो मैने अपनी जबान और उपरी कोमल होंठ के सहारे मखमली चूत के एक फाँक को फाड़ कर के खूब चूसा फिर दूसरी फाँक के साथ भी ऐसा ही किया . फिर फुद्दी को जितना चिदोर सकता था उतना चिदोर कर अपने जबान को मखमली चूत के बीच में घुसेड़ कर उसके रस को चटकारे ले कर चाटने लगा. फुद्दी का रस बहुत नशीला था और माँ की फुद्दी कामो-उत्तेजना के कारण खूब रस छोड़ रही थी रुँघहीन, हल्का चिपचिपा रस पीने में मुझे बहुत आनंद आ रहा था,

माँ धीमी आवाज़ में चीखते हुए बोल पड़ी “ओह चाटो, ऐसे ही चाटो .. मेरे राजा, चाट चाट के मेरे सारे रस को पी जाओ, हाय रे मेरा राज दुलारा बेटा, देखो कैसे कुत्ते की तरह से अपनी प्यारी माँ की मखमली बुर को चाट रहा है ..ओह …चाट ना ऐसे ही चाट मेरे कुत्ते बेटे.. अपनी कुतिया माँ की मखमली बुर को चाट और उसके मखमली चूत के भीतर अपने जबान को हिलाते हुए मुझे अपने जबान से चोद डाल “.

मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि एक तो माँ मुझे कुत्ता कह रही है फिर खुद को भी कुतिया कह रही है. पर मेरे दिलो-दिमाग़ में तो अभी केवल माँ की रसीली मखमली बुर की चटाई घुसी हुई थी इस कारण से मैने इस तरफ से ध्यान ऩही दिया. माँ की आज्ञा का पालन किया और जैसा उसने बताया था उसी तरह से अपने जबान से ही उसकी फुद्दी को चोदना शुरू कर दिया. मैं अपनी जबान को तेज़ी के साथ मखमली चूत में से भीतर बाहर कर रहा था और साथ ही साथ फुद्दी में जबान को घुमाते हुए फुद्दी के लाल छेद से अपने कोमल होंठो को मिला के अपने मुँह को फुद्दी पर रगड़ भी रहा था. मेरी नाक बार बार फुद्दी के भगनसे से टकरा रही थी और शायद मेरी सगी रांड माँ भी माँ के आनंद का एक कारण बन रही थी. मेरे दोनो हाथ माँ के मोटे गुदज जाँघो से गेम रहे थे.

तभी मम्मी ने तेज़ी के साथ अपने फुद्दीं को हिलाना शुरू कर दिया और ज़ोर ज़ोर से हांफते हुए बोलने लगी “ओह निकल जाएगा ऐसे ही मखमली चूत में जबान चलते रहना बेटा ओह, सी सी सीईई, साली बहुत खुजली करती थी आज निकल दे इसका सारा पानी” और अब माँ दाँत पीस कर लग भर चीखते हुए बोलने लगी ओह हूऊओ सीईईईईईई साले कुत्ते, मेरे प्यारे बेटे मेरे लाल है रे चूस और ज़ोर से चूस अपनी प्यारी माँ के मखमली बुर को जबान से चोद दे अभी,,,,,,,सीईईईईई ईईइ छोड़ना नही… कुत्ते हरमजाड़े और ज़ोर से चोद साले .., ,,,,,,,, चोद डाल अपनी प्यारी माँ को है निकाला रे मेरा तो निकल गया ओह मेरे चुदासी पुत्र ने निकाल दिया रे तूने तो…. अपनी प्यारी माँ को अपने जबान से चोद डाला” कहते हुए मम्मी ने अपने फुद्दीं को पहले तो खूब ज़ोर ज़ोर से उपर की तरफ उछाला फिर अपनी आँखो को बंद कर के फुद्दीं को आहिस्ता आहिस्ता फुदकते हुए झरने लगी “ओह गई मैं मेरे राजा, मेरा निकल गया मेरे सैय्या हाय .

बेटा तूने मुझे आज दारू के नशे में चोदकर जन्नत की सैर करवा दी रे, है मेरे बेटे ओह ओह मैं गई…….” माँ की मखमली बुर मेरे मुँह पर खुल बंद हो रही थी. मखमली चूत के दोनो फांको से रस अब भी रिस रहा था पर माँ अब थोड़ी ठंडी पड़ चुकी थी और उसकी आँखे बंद थी उसने दोनो पैर फैला दिए थे और सुस्त सी होकर लंबी लंबी साँसे छोडती हुई लेट गई. मैने अपने जबान से ठोक चोदकर अपनी प्यारी माँ को झार दिया था. मैने मखमली चुत पर से अपने मुँह को हटा दिया और अपने सिर को माँ की जाँघो पर रख कर लेट गया. कुछ देर तक ऐसे ही लेटे रहने के बाद मैने जब सिर उठा के देखा तो पाया कि माँ अब भी अपने आँखो को बंद किए बेसुध होकर लेटी हुई है.

मैं चुपचाप उसके पैरो के बीच से उठा और उसकी बगल में जा कर लेट गया. मेरा फौलादी लण्ड फिर से खडा हो चुका था पर मैने चुपचाप लेटना ही बेहतर समझा और माँ की ओर करवट लेट कर मैने अपने सिर को उसके चुचियों से सटा दिया और एक हाथ पेट पर रख कर लेट गया. मैं भी थोड़ी बहुत थकावट महसूस कर रहा था, हालाँकि लण्ड पूरा खडा था और पेलने की तमन्ना बाकी थी. मैं अपने हाथो से माँ के पेट टुंडी और जाँघो को सहला रहा था. मैं आहिस्ता आहिस्ता ये सारा काम कर रहा था और प्रयास कर रहा था की माँ ना जागे. मुझे लग रहा था कि अब तो माँ सो गई और मुझे शायद मूठ मार कर ही संतोष करना पडेगा . इस कारण से मैं चाह रहा था कि सोते हुए थोड़ा सा माँ के बदन से गेम लूँ और फिर मूठ मार लूँगा.

मुझे माँ के जाँघ बड़े अच्छे लगे और मेरे दिल कर रहा था की मैं उन्हे चुमू और चाटूं. . इस कारण से मैं चुप चाप धीरे से उठा और फिर माँ के पैरो के पास बैठ गया. मम्मी ने अपना एक पैर फैला रखा था और दूसरे पैर को घुटनो के पास से मोड़ कर रखा हुआ था. इस पोजीशन में मेरी सगी रांड माँ बरी ब्यूटीफुल लग रही थी, उसके बाल थोड़े बिखरे हुए थे एक हाथ आँखो पर और दूसरा बगल में. पैरो के इस तरह से फैले होने से उसकी मखमली बुर और गांद दोनो का छेद स्पष्ट रूप से दिख रहा था. आहिस्ता आहिस्ता मैने अपने कोमल होंठो को उसके जाँघो पर फेरने लगा और हल्की हल्की चुम्मिया उसके रानों से शुरू कर के उसके घुटनो तक देने लगा.

एकदम मक्खन जैसी गोरी मखमली जाँघो को अपने हाथो से पकर कर हल्के हल्के मसल भी रहा था. मेरा ये काम कुछ समय तक चलता रहा, तभी मम्मी ने अपनी आँखे खोली और मुझे अपने जाँघो के पास देख कर मेरी सगी रांड माँ एकदम से चौंक कर उठ गई और प्यार और मोहब्बत से मुझे अपने जाँघो के पास से उठाते हुए कहने लगी “क्या कर रहा है बेटे……. ज़रा आँख लग गई थी, देख ना इतने दिनों के बाद इतने अच्छे से पहली बार मैने वासना का आनंद उठाया है, इस तरह पिछली बार कब झड़ी थी मुझे तो ये भी याद ऩही, इसीलिए सयद संतुष्टि और थकान के कारण आँख लग गई” “कोई बात ऩही माँ तुम सो जाओ”.

तभी माँ की नज़र मेरे 8.5 इंच के लौड़े की तरफ गई और मेरी सगी रांड माँ चौंक के कहने लगी “अरे ऐसे कैसे सो जाऊं ? और मेरा पेनिस अपने हाथ में पकड़ लिया. कहने लगी – मेरे लाल का लण्ड खडा हो के बार बार मुझे पुकार रहा है और मैं सो जाऊं ? ” “ओह माँ , इसको तो मैं हाथ से ढीला कर लूँगा. तुम सो जाओ” “ऩही मेरे लाल आजा ज़रा सा माँ के पास लेट जा, थोरा दम ले लूँ फिर तुझे वास्तविक चीज़ का आनंद दूँगी” मैं उठ कर माँ के बगल में लेट गया. अब हम दोनो माँ और बेटे एक दूसरे की ओर करवट लेते हुए एक दूसरे से बाते करने लगे.

मम्मी ने अपना एक पैर उठाया और अपनी मोटी जाँघो को मेरे कमर पर डाल दिया. फिर एक हाथ से मेरे खड़े पेनिस को पकड़ के उसके सुपाडे के साथ आहिस्ता आहिस्ता खेलने लगी. मैं भी माँ की एक चुची को अपने हाथो में पकड कर आहिस्ता आहिस्ता दबाने और सहलाने लगा और अपने कोमल होंठो को माँ के कोमल होंठो के पास ले जा कर एक चुंबन लिया. मम्मी ने अपने कोमल होंठो को खोल दिया. चूमा चाटी ख़तम होने के बाद मम्मी ने पुछा “और बेटे, कैसा लगा माँ की मखमली बुर का स्वाद, अच्छा लगा या ऩही?” “हाँ मान बहुत स्वादिष्ट था, सच में आनंद आ गया” “अच्छा , चलो मेरे पुत्र को अच्छा लगा इस से बढ़ कर मेरे लिए कोई बात ऩही”

“माँ तुम सच में बहुत सुंदर हो, तुम्हारी चुचिया कितनी ब्यूटीफुल है, मैं…. मैं क्या बोलू माँ, तुम्हारा तो पूरा बदन ब्यूटीफुल है.” “कितनी बार बोलेगा ये बात तू मेरे से, मैं तेरी आँखें ऩही पढ़ सकती क्या, जिनमे मेरे लिए इतना पायर छलकता है”. मैं माँ से फिर पूरा चिपक गया. उसकी चुचिया मेरी छाती में चुभ रही थी और मेरा फौलादी लण्ड अब सीधा उसकी फुद्दी पर ठोकर मार रहा था. हम दोनो एक दूसरे की आगोश में कुछ देर तक ऐसे ही खोए रहे फिर मैने अपने आप को अलग किया और मसलते मसलते मेरी नज़र माँ के सिकुड़ते – फैलते हुए चूतड़ के छेद पर पडी .

मेरे मन मैं आया कि क्यों ना इसका स्वाद भी चखा जाए. देखने से तो माँ की चूतड़ वैसे भी काफ़ी ब्यूटीफुल लग रही थी जैसे गुलाब का फूल हो. मैने अपनी लपलपाति हुई जबान को उसके गांद की छेद पर लगा दिया और आहिस्ता आहिस्ता उपर ही उपर लपलपते हुए चाटने लगा. गांद पर मेरी जबान का स्पर्श पा कर माँ पूरी तरह से हिल उठी. “ओह ये क्या कर रहा है, ओह बड़ा अच्छा लग रहा है , कहा से सीखा ये, तू तो बड़ा कलाकार है रे…. , हाय राम देखो कैसे मेरी मखमली बुर को चाटने के बाद मेरी टट्टी से भरी चूतड़ को चाट रहा है, तुझे मेरी टट्टी से भरी चूतड़ इतनी अच्छी लग रही है कि इसको भी चाट रहा है, ओह बेटा सच में गजब का आनंद आ रहा है, चाट ले चाट ले पूरे चूतड़ को चाट ले ओह ओह उऊउगगगगगगगग” .

मैने पूरे लगन के साथ चूतड़ के छेद पर अपने जबान को लगा कर के, दोनो हाथो से दोनो फुद्दीं को पकड कर छेद को फैलया और अपनी नुकीली जबान को उसमे ठेलने की प्रयास करने लगा. माँ को मेरे इस काम में बड़ी मस्ती आ रही थी और उसने खुद अपने हाथो को अपने फुद्दीं पर ले जा कर गांद के छेद को फैला दिया और मुझे जबान पेलने के लिए उत्साहित करने लगी. “हाय रे जालिम … पेल दे जबान को जैसे मेरी मखमली चूत में पेला था वैसे ही चूतड़ के छेद में भी पेल दे और पेल के खूब चाट .. मेरी टट्टी से भरी चूतड़ को है…हाय दैया…मै तो मर ही जाउंगी आज.खुशी के मारे…, ओह इतना आनंद तो कभी ऩही आया था, ओह देखो कैसे गांद चाट रहा है,,,,,,,,सस्स्स्स्ससे ईईई चाटो बेटा चाटो और ज़ोर से चाटो , माधरचोद….असली चूतड़ू है रे तू.. “

मुझे माँ की गालियाँ बहुत प्यारी लग रही थी. मैं पूरी लगन से चूतड़ चाट रहा था. मैने देखा कि फुद्दी का लाल छेद अपने नशीले रस को टपका रहा है तो मैने अपने कोमल होंठो को फिर से मखमली चूत के लाल छेद पर लगा दिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा जैसे कि पीपे लगा कर के कोकोकॉला पी रहा हूँ , सारे रस को चाट के खाने के बाद मैने मखमली चूत के छेद में जबान को पेल कर अपने कोमल होंठो के बीच में मखमली चूत के भगनसे को क़ैद कर लिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दी. माँ के लिए अब बर्दाश्त करना शायद कठिनाई हो रहा था उसने मेरे सिर को अपनी मखमली चूत से अलग करते हुए कहा “अब छोड़ बहिनचोद..,

फिर से चूस के ही झार देगा क्या, अब तो वास्तविक आनंद लूटने का टाइम आ गया है, है बेटा राजा अब चल मैं तुझे जन्नत की सैर कराती हू अब अपनी प्यारी माँ की चुदाई करने का आनंद लूट मेरे राजा, चल मुझे नीचे उतरने दे साले” मैने माँ की मखमली चुत पर से मुँह हटा लिया. मेरी सगी रांड माँ जल्दी से नीचे उतर कर लेट गई और अपने पैरो को घुटनो के पास से मोड कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया और अपने दोनो हाथो को अपनी मखमली चूत के पास ले जा कर कहने लगी “आ जा राजा जल्दी कर अब ऩही रहा जाता, जल्दी से अपने मूसल को मेरी ओखली में डाल के कूट दे, जल्दी कर बेटा डाल दे अपना लण्ड अपनी प्यारी माँ की प्यासी फुद्दी में”

मैं उसके दोनो जाँघो के बीच में आ गया पर मुझे कुछ समझ में ऩही आ रहा था कि क्या करू, फिर भी मैने अपने खड़े पेनिस को पकडा और माँ के उपर झुकते हुए उसकी मखमली चूत से अपने पेनिस को सटा दिया. मम्मी ने लण्ड के मखमली चूत से सटते ही कहा “हाँ अब मार धक्का और घुसा दे अपने घोड़े जैसे पेनिस को माँ की बिल में” मैने धक्का मार दिया पर ये क्या लण्ड तो फिसल कर मखमली चूत के बाहर ही रगड़ खा रहा था, मैने दुबारा प्रयास की फिर वही नतीज़ा ढाक के तीन पात ..

फिर लण्ड फिसल के बाहर, इस पर मम्मी ने कहा “रुक जा मेरे अनाडी सैय्या, मुझे ध्यान रखना चाहिए था. तू तो पहली बार चुदाई कर रहा है ना, अभी तुझे मैं बताती हूँ. ” फिर अपने दोनो हाथो को मखमली चुत पर ले जा कर फुद्दी के दोनो फांको को फैला दिया, मखमली चूत के भीतर का लाल छेद नज़र आने लगा था, मखमली बुर एकदम पानी से भीगी हुई लग रही थी, मखमली बुर चिदोरकर माँ कहने लगी “ले मैने तेरे लिए अपने फुद्दी को फैला दिया है अब आराम से अपने पेनिस को ठीक निशाने पर लगा कर के पेल दे”.

मैने अपने पेनिस को ठीक फुद्दी के खुले हुए मुँह पर लगाया और धकका मारा, लण्ड थोड़ा सा भीतर को घुसा, पानी लगे होने के कारण लण्ड का सुपरा भीतर चला गया था, मम्मी ने कहा “शाबाश ऐसे ही सुपाडा चला गया अब पूरा घुसा दे . मार धक्का कस के और चोद डाल मेरी मखमली बुर को बहुत खुजली मची हुई है” मैने अपनी गांद तक का ज़ोर लगा कर के धक्का मार दिया पर मेरा फौलादी लण्ड में ज़ोर की दर्द की लहर उठी और मैने चीखते हुए जल्दी से पेनिस को बाहर निकल लिया.

मम्मी ने पुछा “क्या हुआ, चिल्लाता क्यों है” “ओह माँ, लण्ड में दर्द हो रहा है”. माँ उठ कर बैठ गई और मेरी तरफ देखते हुई कहने लगी “देखूं तो कहा ँ दर्द है”  मैने लण्ड दिखाते हुए कहा “देखो ना जैसे ही फुद्दी में घुसाया वैसे ही दर्द करने लगा”  माँ कुछ देर तक देखती रही फिर हंसने लगी और कहने लगी “साले अनाडी चुदासी चला है माँ को पेलने अबे अभी तक तो तेरे सुपाडे की चमडी ढंग से उलटी ही ऩही है तो दर्द ऩही होगा तो और क्या होगा, चला है माँ को पेलने . , चल कोई बात ऩही मुझे इस बात का ध्यान रखना चाहिए था, मेरी ग़लती है, मैने सोच तूने खूब मूठ मारी होगी तो चमडी अपने आप उलटने लगी होगी मगर तेरे इस लाल सुपाडे की शकल देख के ही मुझे समझ जाना चाहिए था की तूने तो अभी तक ढंग से मूठ भी ऩही मारी, चल नीचे लेट अब मुझे ही कुछ करना padega लगता है”.

मैने तो अब तक यही सुना था कि लड़का लड़की के उपर चढ़ कर चोदता है. मगर जब मम्मी ने मुझे नीचे लेटने के लिए कहा तो मैं सोच में पड गया और माँ से पुछ “नीचे क्यों लेटना है माँ , क्या अब चुदाई ऩही होगी”.  मुझे लग रहा था कि माँ फिर से मेरा मूठ मार देगी. मम्मी ने हँसते हुए कहा “ऩही बे चुदाई तो होगी ही, जितनी तुझे पेलने की आग लगी है मुझे भी चुदवाने की उतनी ही आग लगी है, चुदाई तो होगी ही, तुझे तो अभी नाईट भर मेरी मखमली बुर का बाजा बजाना है मेरे राजा, तू नीचे लेट अब उल्टी तरफ से चुदाई होगी.

“उल्टी तरफ से चुदाई होगी, इसका क्या मतलब है माँ “”इसका मतलब है मैं तेरे उपर चढ़ के खुद से चुदवाउंगी.  कैसे चुदवाओगी ?  ये तो तू खुद ही कुछ समय के बाद देख लियो मगर, फिलहाल तू नीचे लेट और अपना लण्ड खडा कर के रख फिर देख मैं कैसे तुझे आनंद देती हूँ ” मैं नीचे लेट तो गया पर अब भी मैं सोच रहा था कि माँ कैसे करेगी. मम्मी ने जब मेरे चेहरे पर हिचकिचाहट के भाव देखे तो मेरी सगी रांड माँ मेरे गाल पर एक प्यार भरा तमाचा लगते हुए कहने लगी “सोच क्या रहा है माधरचोद? .

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अभी चुप चाप तमाशा देख फिर बताना कि कैसा आनंद आता है” कह कर मम्मी ने मेरे कमर के दोनो तरफ अपनी दोनो टाँगे कर दी और अपनी मखमली बुर को ठीक मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के सामने ला कर मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को एक हाथ से पकड़ा और सुपाडे को सीधा अपनी फुद्दी के लाल मुँह पर लगा दिया. सुपाडे को मखमली चूत के लाल मुँह पर लगा कर मेरी सगी रांड माँ मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपने हाथो से आगे पीछे कर के अपनी मखमली चूत के दरार पर रगड़ने लगी.

उस साली रांड की फुद्दी से निकला हुआ पानी मेरे सुपाडे पर लग रहा था और मुझे बहुत आनंद आ रहा था. मेरी साँसे उस अगले पल के इंतेज़ार में रुकी हुई थी जब मेरा फौलादी लण्ड उसके फुद्दी में घुसता. मैं दम साधे इंतेज़ार कर रहा था तभी मम्मी ने अपने फुद्दी के फाँक को एक हाथ से फैलाया और मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के सुपाडे को सीधा मखमली चूत के लाल मुँह पर लगा कर उपर से हल्का सा ज़ोर लगाया.

मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का सुपाडा उसके फुद्दी के फांको बीच समा गया. फिर मम्मी ने मेरे छाती पर अपने हाथो को जमाया और उपर से एक हल्का सा धक्का दिया मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का थोडा सा और भाग उसकी फुद्दी में समा गया. उसके बाद माँ स्थिर हो गई और इतने से ही पेनिस को अपनी मखमली चूत में घुसा कर आगे पीछे करने लगी. कुछ समय तक ऐसा करने के बाद उसने फिर से एक धक्का मारा, इस बार धक्का थोरा ज्यादा ही खतरनाक था और मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का लगभग आधा से अधिक भाग उसकी फुद्दी में समा गया. मेरे मुँह से एक ज़ोर की चीख निकल गई.

क्यों कि मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के सुपाडे की चमडी एकदम से पीछे उलट गई थी. पर मम्मी ने इस पर कोई ध्यान ऩही दिया और उतने ही लण्ड पर आगे पीछे करते हुए धक्का मरते हुए कहने लगी “बेटा चुदाई कोई आसान काम ऩही है, लड़की भी जब पहली बार चुदती है तो उसको भी दर्द होता है, और उसका दर्द तो तेरे दर्द के सामने कुछ भी ऩही है, जैसे उसके मखमली बुर की सील फटती है वैसे ही तेरे लण्ड की भी आज सील फटी है, कुछ समय तक आराम से लेटा रह फिर देख तुझे कैसा आनंद आता है”.

माँ अब उतने पेनिस को ही मखमली चूत में ले कर आहिस्ता आहिस्ता शोर्ट लगा रही थी. मेरी सगी रांड माँ अपने चूतड़ को उछल उछल के शोर्ट पर धक्का मारे जा रही थी. थोडी देर में ही मेरा दर्द कम हो गया और मुझे गीलेपन का अहसास होने लगा. माँ की फुद्दी ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और उसकी मखमली चूत से निकलते पानी के कारण मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का घुसना और निकलना भी आसान हो गया था. माँ अब और ज़ोर ज़ोर से अपनी लेट्रिंग से भरी चूतड़ उछाल उछाल के शोर्ट लगा रही थी और मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का ज़यादा से ज़यादा भाग उसके फुद्दी के भीतर घुसता जा रहा था.

मम्मी ने इस बार एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का ज्यादातर भाग अपनी फुद्दी में छूपा लिया और सिसकरते हुए कहने लगी “सस्स्स्स्स्सिईईईईई हाय दैयया, कितना मोटा लण्ड है जैसे की गरम लोहे का रोड हो, एकदम सीधा मखमली चूत के दीवारो को रगडी मार रहा है, मेरे जैसी चुदी हुई महिला के मखमली चूत में जब ये इतना कसा हुआ है तो जवान लौंडियों की फुद्दी फाड़ के रख देगा, आनंद आ गया, ले साले और घुसा लण्ड और घुसा” कह कर तेज़ी से तीन चार शोर्ट मार दिए.

माँ के द्वारा तेज़ी से लगाए गये इन धक्को से मेरा पूरा का पूरा लण्ड उसकी फुद्दी के भीतर चला गया. मम्मी ने सिसकरते हुए शोर्ट लगाना जारी रखा और अपने एक हाथ को लौरे के जड़ के पास ले जाकर देखने लगी कि पूरा लण्ड भीतर गया है कि ऩही. जब उसने देखा कि पूरा का पूरा लण्ड उसकी मखमली चूत में घुस चुका है तब उसने अपनी फुद्दीं को उछालते हुए एक तेज धक्का मारा और मेरे कोमल होंठो का चुम्मा ले कर कहने लगी “कैसा लग रहा है बेटा, अब तो दर्द ऩही हो रहा है ना” “ऩही माँ अब दर्द ऩही हो रहा है, देखो ना मेरा पूरा लौड़ा तुम्हारे मखमली चूत के भीतर चला गया है”

“हा बेटा अब दर्द ऩही होगा अब तो बस आनंद ही आनंद है, मेरे मखमली चूत के पानी के गीलेपन से तेरी चमडी उलटने में अब आसानी हो रही है इस कारण से तुझे अब दर्द ऩही हो रहा होगा, बल्कि आनंद आ रहा होगा, क्यों बेटा बोल ना आनंद आ रहा है या ऩही अपनी प्यारी माँ के मखमली चूत में लौड़ा पेल के, अब तो तुझे पता चल रहा होगा कि चुदाई क्या होती है बेटा , ले मज़े चुदाई का और बता कि तुझे कैसा लग रहा है माँ की फुद्दी में लौड़ा घुसाने में “हाय माँ, सच में गजब का आनंद आ रहा है, ओह मेरी रांड माँ तुम्हारी फुद्दी कितनी कसी हुई है मेरा फौलादी लण्ड तो इसमे बड़ी कठिनाई से घुसा है जबकि मैने सुना था कि मैरिड औरतो की फुद्दी ढीली हो जाती है” “बेटा ये तेरी रंडी माँ की फुद्दी है, ये ढीली होने वाली फुद्दी ऩही है”

कह कर मम्मी ने पेनिस को पूरे सुपाडे तक खींच कर बाहर निकाला और फिर उपर से चूतड़ का ज़ोर लगा कर के एक ज़ोरदार शॉट मार का पूरा लण्ड एक ही बार में गपक से अपनी मखमली चूत के भीतर लील लिया. माँ अब तेज तेज शॉट लगा कर के पूरा का पूरा लण्ड अपनी मखमली चूत में एक ही बार में गपक से लील लेती थी. उसने मेरा उत्साह बढ़ते हुए कहा ” आबे साले नीचे क्या औरतो की तरह से पड़े रह कर चुदवा रहा है अपना गांद उछल उछल के तू भी धक्का मार साले माधरचोद. , चोद अपनी प्यारी माँ को, ऐसे पड़े रहने से थोड़े ही आनंद आएगा, देख मेरी फुद्दी कैसे तेरे सारे पेनिस को एक ही बार में निगल रही है, तेरा लण्ड मेरी मखमली चूत के दीवारो को कुचालता हुआ कैसे मेरी मखमली चूत के जड़ तक ठोकर मार रहा है, बहिनचोद, तू भी नीचे से धक्का मार मेरे राजा और बता कि कैसा लग रहा है अपनी मम्मी की चुदाई करने में, आनंद आ रहा है या ऩही अपनी प्यारी माँ की मखमली बुर पेलने मे… 

मैने भी नीचे से गांद उछल कर धक्का मारना शुरू कर दिया. और माँ के फुद्दीं को अपने हथेलियों के बीच दबोच कर कहा “हाँ माँ, बहुत आनंद आ रहा है, सच में इतना आनंद तो जिंदगी में कभी ऩही आया, ओह तुम्हारी मखमली चूत में मेरा फौलादी लण्ड एकदम कसा कसा जा रहा है और ऐसा लगता है जैसे कि मैने किसी गरम भट्टी में अपने पेनिस को डाल दिया है, ओह कितना गरम है तेरी मखमली बुर माँ ,,,,,,,और ज़ोर से मारो धक्का और ले लो अपने रजा बेटे का नुकीला लण्ड अपनी मखमली चूत में ऊऊओह साली आनंद आ गया..तू भी कम कुतिया नहीं है..” कह कर मैने अपनी एक उंगली को माँ के चूतड़ के दरार पर लगा कर उसको हल्का सा उसके गांड में डाल दिया.

माँ का जोश मेरी इस हरकत पर दुगुना हो गया और मेरी सगी रांड माँ अपनी फुद्दीं को और तेज़ी के साथ उछालने लगी और बोलने लगी “हाय मेरा माधरचोद बेटा अपनी ही सगी रांड माँ की लाल गांड में उंगली डालता है, बेटीचोद तेरी माँ को चोदु, साले चूतड़ू ले, और ले मेरी मखमली बुर का धक्का अपने लण्ड पर, तोड़ दूँगी साले तेरा लण्ड चूतड़ू , बहिनचोद. , ले साले , मुँह क्या देख रहा है, चुची दबा साले मुँह में लेकर चूस और चुदाई का आनंद ले, है कितने वर्षो के बाद ऐसी चुदाई का आनंद मिल रहा हाईईईईईईईईई ओह ऊऊऊऊऊओह ह,”

मैने मेरी रांड माँ के आदेश पर उसकी चुचियों को अपने हाथो में थाम लिया और उसकी एक चुचि को खींच कर उसके निपल से अपने मुँह को सटा कर चूसते हुए दूसरी चुची को खूब ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. माँ अब अपने चूतड़ को पूरा उछल उछाल कर मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपनी गरम मखमली चूत में पेलवा रही थी. उसकी फुद्दी एकदम अंगीठी की तरह से गरम हो चुकी थी और खूब पानी चू रही थी मेरा मोटा लम्बा लौड़ा उसकी फुद्दी के पानी से भीग कर सटासट उसकी मखमली चूत के भीतर बाहर हो रहा था. माँ के मुँह से गलियों की बौछार हो रही थी.

मेरी सगी रांड माँ बोल रही थी “साले माधरचोद…. चोद मेरी मखमली बुर को दम लगा कर के, है कितना आनंद आ रहा है, तेरे बाप से अब कुछ ऩही होता रे , अब तो तू ही मेरी फुद्दी की आग को ठंडी करना,,,,,,, मैं तुझे चुदाई का बादशाह बना दूँगी,,,,,,, ,,तेरे उस भडुए माधरचोद बाप को छुने भी ऩही दूँगी अपनी मखमली बुर, तू चोदियो मेरी मखमली बुर को और मेरी आग ठंडी करियो, कहा ँ था रे बहनचोद ..? अब तक तू अब तक तो मैं तेरे लण्ड का कितना पानी पी चुकी होती… चोद रे लौंडे .. चोद, अपनी लेट्रिंग से भरी चूतड़ तक का ज़ोर लगा दे पेलने में आज, आज अगर तूने मुझे प्रसन कर दिया तो फिर मैं तेरी गुलाम हो जाउंगी ” मैं माँ की चुचियों को मसलते हुए अपनी गांद को नीचे से उछलता जा रहा था . मेरा मोटा लम्बा लौड़ा उसकी कसी मखमली चूत में गॅप गप…फच फ़च की आवाज़ करता हुआ भीतर बाहर हो रहा था.

हम दोनो की साँसे तेज हो गई थी और कमरे में चुदाई की नशीली आवाज़ गूँज रही थी. दोनो के बदन से पसीना चु रहा था और सांसो की गर्मी एक दूसरे के बदन को महका रही थी. माँ अब शायद थक चुकी थी. उसके शोर्ट मरने की रफ़्तार अब थोड़ी धीमी हो गई थी और अब मेरी सगी रांड माँ हांफने भी लगी थी. थोडी देर तक हांफते हुए मेरी सगी रांड माँ धक्का लगाती रही फिर एकदम से पस्त हो कर मेरे बदन के ऊपर गिर गई और कहने लगी “ओह मैं तो थक गई रे , इतने में आम तौर पर मेरा चिपचिपा सफेद पानी तो निकल जाता है पर आज नये लण्ड के जोश में मेरा चिपचिपा सफेद पानी भी ऩही निकल रहा, ओह आनंद आ गया, आज से पहले ऐसी चुदाई कभी ऩही की, पर थक गई रे मैं तो, अब तो तुझे मेरे उपर चढ़ कर धक्का मारना होगा तभी चुदाई हो पाएगी साले” कह कर मेरी सगी रांड माँ अपने पूरे शरीर का भर मेरे बदन पर दे कर लेट गई.

मेरी साँसे भी तेज चल रही थी मगर लण्ड अब भी खड़ा था. दिल में चुदाई की ललक बरकरार थी और अब तो मैने चुदाई भी सीख ली थी. मैने धीरे से माँ केयोनीद को पकड कर नीचे से ही धक्का लगाने का प्रयास किया और दो तीन छोटे छोटे शोर्ट मारे मगर क्यों कि माँ थक गई थी इस कारण से मेरी सगी रांड माँ उसी तरह से लेटी रही. माँ के भारी शरीर के कारण मैं उतने ज़ोर के शोर्ट ऩही लगा पाया जितना लगा सकता था. मैने माँ को बाँहो में भर लिया और उसके कान के पास अपने मुँह को ले जा कर फुसफुसते हुए कहा “ओह माँ जल्दी कर ना, और धक्का मार ना, अब ऩही रहा जा रहा है,,,,,जल्दी से मारो ना माँ “.

मम्मी ने मेरे चेहरे को गौर से देखते हुए मेरे कोमल होंठो को चूम लिया और कहने लगी “थोरा दम तो लेने दे साले, कितनी देर से तो चुदाई हो रही है, थकान तो होगी ही” “पर माँ मेरा तो लण्ड लगता है फट जाएगा, मेरा जी कर रहा है की खूब ज़ोर ज़ोर से शोर्ट लगाऊं ” “तो मार ना, मैने कब माना किया है, आजा मेरे उपर चढ़ के खूब ज़ोर ज़ोर से चुदाई कर दे अपनी प्यारी माँ की, बजा दे बाजा उसकी मखमली बुर का” कह कर माँ धीरे से मेरे उपर से उतर गई. उसके उतरने पर मेरा फौलादी लण्ड भी फिसल के उसकी फुद्दी से बाहर निकल गया था मगर मम्मी ने कुछ ऩही कहा और बगल में लेट कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया. 

मेरा फौलादी लण्ड एकदम रस से भीगा हुआ था और उसका सुपदा लाल कलर का किसी पाहरी आलू के जैसे लग रहा था. मैने अपने पेनिस को पकड़ा और सीधा अपनी प्यारी माँ के जाँघो के बीच चला गया. उसकी जाँघो के बीच बैठ कर मैं उसकी फुद्दी को गौर से देखने लगा. उसकी फुद्दी फूल पिचक रही थी और फुद्दी का मुँह अभी थोडा सा खुला हुआ लग रहा था, मखमली बुर का लाल छेद भीतर से झाँक रहा था और पानी से भीगा हुआ महसूस हो रहा था. मैं कुछ देर तक अपलक उसके फुद्दी की सुंदरता को निहारता रहा.

मम्मी ने मुझे जब कुछ करने की बजाए केवल घूरते हुए देखा तो मेरी सगी रांड माँ सिसकते हुए कहने लगी “क्या कर रहा है, जल्दी से डाल ना फुद्दी में पेनिस को ऐसे खड़े खड़े खाली घूरता रहेगा क्या, कितना देखेगा मखमली बुर को, अबे उल्लू देखने से ज़यादा आनंद पेलने में है, जल्दी से अपना मूसल डाल दे मेरे चोदु भरतार, अब नाटक मत चोद” मम्मी ने इतना कह कर मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपने हाथो में पकड़ लिया और कहने लगी “ठहर मैं लगाती हूँ साले” और मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड के सुपरे को मखमली चूत के खुले छेद पर घिसने लगी और कहने लगी “चिकनी बुर का पानी लग जाएगा और चिकना हो जाएगा समझा , फिर आराम से चला जाएगा” मैं माँ के उपर झुक गया और अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लिया अपने जीवन की पहली खतरनाक और धमाकेदार चुदाई के लिए. मम्मी ने मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को फुद्दी को छेद पर लगा कर स्थिर कर दिया और कहने लगी “हाँ अब मारो धक्का और पेल दो फुद्दी में”

मैने अपनी ताक़त को समेटा और कस के एक ज़ोरदार धक्का लगा दिये मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का सुपदा तो पहले से भीगा हुआ था इस कारण से मेरा फौलादी लण्ड सटाक से भीतर चला गया उसके साथ साथ मेरे 12 इंच लम्बे लण्ड का आधा से अधिक भाग फुद्दी की दीवारो को रगाडता हुआ भीतर घुस गया. ये सब एकदम तो ऩही था मगर फिर भी मम्मी ने सोचा ऩही था कि मैं इतनी ज़ोर से धक्का लगा दूँगा इस कारण से मेरी सगी रांड माँ चौंक गई और उसके मुँह से एक घुटि घुटि सी चीख निकल गई. मगर मैने तभी दो तीन और ज़ोर के झटके लगा दिए और मेरा फौलादी लण्ड पूरा का पूरा भीतर घुस गया.

पूरा लण्ड घुसा कर जैसे ही मैं स्थिर हुआ माँ के मुँह से गलियों की बौछार निकल परी “साला , हरामी… क्या समझ रखा है रे, कमीने, ऐसे कही धक्का मारा जाता है, सांड की तरह से घुसा दिया सीधा एक ही बार में माधरचोद.., आहिस्ता आहिस्ता करना ऩही आता है तुझे, साले कमीने पूरी फुद्दी छिल गई मेरी, बाप है कि घुसाना ही ऩही जानता और बेटा है कि घुसाता है तो ऐसे घुसाता है जैसे की मेरी फुद्दी फाड़ने के लिए घुसा रहा हो, हरामी कही का”

“माफ़ कर देना माँ , मगर मुझे ऩही पाता था की तुम्हे चोट लग जायेगी , तू तो जानती है ना की ये मेरी पहली खतरनाक और धमाकेदार चुदाई है” कह कर मैने माँ की दोनो चुचियों को अपने हाथो में थाम लिया और उन्हे दबाते हुए एक चुचि के निपल को चूसने लगा. कुछ देर तक ऐसे ही रहने के बाद शायद माँ का दर्द कुछ कम हो गया और मेरी सगी रांड माँ भी अब नीचे से अपनी लेट्रिंग से भरी चूतड़ उचकाने लगी और मेरे बालो में हाथ फेरते हुए मेरे सिर को चूमने लगी. मैने पूरी तरह से स्थिर था और चुची को चूसने और दबाने में लगा हुआ था, मम्मी ने कहा “हाँ बेटा, अब धक्का लगाओ और चोदना शुरू करो अब देर मत करो तेरी माँ की प्यासी मखमली बुर अब तेरे लण्ड का पानी पीना चाहती है”.

मैने दोनो चुचियों को थाम लिया और आहिस्ता आहिस्ता अपनी गांद उछलने लगा. मेरा तगड़ा देसी लौड़ा माँ के पनियाए हुए फुद्दी के भीतर से बाहर निकालता और फिर घुस जाता था. मम्मी ने अब नीचे से अपनेयोनीद उछालना शुरू कर दिया था. दस बारह झटके मारने के बाद ही मखमली चूत से गछ गछ,,,,फ़च फ़च की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी. ये इस बात को बतला रहा था की उसकी फुद्दी अब पानी छोड़ने लगी है और अब उसे भी आनंद आना शुरू हो गया है. मम्मी ने अपने पैरो को घुटनो के पास से मोड लिया था और अपनी टांगों की कैंची बना के मेरे कमर पर बाँध दिया था.

मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरते हुए उसके कोमल होंठो और गालो को चूमते हुए उसके चुचियों को दबा रहा था. माँ की मुँह से सिसकारियों का दौर फिर से शुरू हो गया था और मेरी सगी रांड माँ हांफते हुए बडबडाने लगी “हाय मारो, और ज़ोर से मारो राजा,छोड़ो मेरी फुद्दी को, चोद चोद के भोसरा बना दो बेटा, कैसा लग रहा है बेटा पेलने में आनंद आ रहा है या ऩही, मेरी मखमली बुर कैसी लगा रही है तुझे बता ना राजा, अपनी प्यारी माँ की मखमली बुर पेलने में आनंद आ रहा है या ऩही, पूरा जड़ तक लंड पेल के छोड़ो ..राजा और कस कस के शोर्ट मार के पक्के माधरचोद बन जाओ, बता ना राजा बेटा कैसा लग रहा है माँ की फुद्दी में लण्ड डालने में”

मैने धक्का लगाते हुए कहा “हाँ मेरी रानी.. बहुत आनंद आ रहा है, बहुत कसी हुई है तुम्हारी मखमली बुर तो, मेरा फौलादी लण्ड तो एकदम फस फस के जा रहा है तेरी मखमली चूत में, ऐसा लग रहा है जैसे किसी बॉटल में लकड़ी का ढक्कन फसा रहा हू, है क्या सच में मेरा बापू तुझे चोद्ता ऩही था क्या, या फिर तुम उस को पेलने ऩही देती थी, तुम्हारी फुद्दी इतनी कसी हुई कैसे है माँ , जबकि मेरे फ्रेंड कहते थे कि उमर के साथ औरतो की फुद्दी ढीली हो जाती है, है तुम्हारी तो एकदम कसी हुई है”.

इस पर मम्मी ने अपने पैरो का शिकंजा कसते हुए दाँत पीसते हुए कहा “साला तेरा बाप तो गान्डू था कभी ढंग से चोद,  वो चूतड़ू तेरी सगी रांड माँ क्या सगी रांड माँ क्या खाक चोदेगा मुझे, उस गान्डू ने तो मुझे ना जाने कब से चोदना छोड़ा हुआ है, पर मैं किसी तरह से अपने फुद्दी की खुजली को भीतर ही दबा लेती थी, क्या करती किस से चुदवाती? , फिर जिसके पास चुदवाने जाती मेरी सगी रांड माँ कही मुझे संतुष्ट ऩही कर पाता तो क्या होता, बदनामी अलग से होती और आनंद भी ऩही आता, तेरा हथियार जब देखा तो लग गया की तू ना केवल मुझे संतुष्ट कर पाएगा बल्कि, तेरे से चुदवाने से बदनामी भी ऩही होगी, और तू भी मेरी फुद्दी का प्यासा है फिर अपने पुत्र से चुदवाने का आनंद ही कुछ और है, जब सोच के इतना आनंद आ रहा था तो मैने सोचा की क्यों ना चोदवा के देख लिया जाए” “हाँ माँ तो फिर कैसा लग रहा है अपने पुत्र से चुदवाने में, आनंद आ रहा है ना, मेरा पेनिस अपने फुद्दी में ले के, बोलो ना मखमली बुर मारनी, साली मेरा फौलादी लण्ड तुझे आनंद दे रहा है या ऩही”

“हाँ गजब का आनंद आ रहा है राजा, तेरा लण्ड तो मेरी फुद्दी के जर तक टकरा रहा है और मेरी फुद्दी के दीवारो को मसल रहा है और मेरी टुंडी तक पहुच जा रहा है, तू बहुत सुख दे रहा है अपनी प्यारी माँ को मार कस के मार धक्का बन जा माधरचोद…, चोदु राम ….हलवाईचोद… ले अपनी मैया के फुद्दी को और इसको दो फाँक कर दे मेरे प्यारे माधरचोद..” “हाँ जब चुदवाने में इतना आनंद आ रहा है और चोद्वाने का इतना मन था तो फिर सोते वक़्त इतना नाटक क्यों कर रही थी, जब मैं तुझे नंगा हो कर दिखाने को बोल रहा था”

“हाय रे मेरे भोलू राम, इतना भी ऩही समझता क्या, इसको कहते है नखरा, औरते दो तरह का छिनालपनी दिखा सकती है या तो सीधा तेरा लण्ड पकड़ के कहती की चोद मुझे या फिर आहिस्ता आहिस्ता तुझे तदपा तदपा के एक एक चीज़ दिखाती और तब तदपा तदपा के च्दवाती.. मुझे सीधे चुदाई में आनंद ऩही आता, मैं तो खूब गेम खेल के चुदवाना चाहती थी, चक्की जितनी धीरे चलती है उतना ही महीन पीसती है साले, इस कारण से मैने थोरा सा छिनालपन दिखया था, समझा अब बाते चोदना बंद कर और लगा ज़ोर ज़ोर से धक्का और चोद मेरी मखमली बुर को माधरचोद , तेरी माँ की छूततततत्त में डंडा डालु बहन्चोद माररर्ररर ज़ोर से और बक्चोदि बंद कर”

“ठीक मेरी छिनाल माँ अब तो मैं भी पूरा सीख गया हू, देख अब मैं कैसे चोदता हू तेरी इस मस्तानी फुद्दी को और कितना आनंद देता हू तुझे, देख साली मखमली बुरचोदि रांड…फिर ना बोलना की पुत्र ने ठीक से चोदा ऩही, रांड जितना तूने मुझे सिखाया है मैं उस से कही ज़यादा आनंद दूँगा तुझे,,,,,,, ,,साली माधरचोद..”

मैं अब पूरे जोश के साथ धक्का मरने लगा था और मेरा पूरा लण्ड सुपाडे तक निकल कर बाहर आ जा रहा था, फिर सीधा सरसरते हुए गचक से भीतर माँ की फुद्दी की गहराइयों में समा जा रहा था. लण्ड की चमडी तो अब शायद पूरी तरह से उलट चुकी थी, और चुदाई में अब कोई दिक्कत ऩही आ रही थी. माँ की फुद्दी एकदम से गरम भट्टी की तरह तप रही थी और मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को सटासट लील रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत की सैर कर रहा हू. मेरी टट्टी से भरी चूतड़ पर माँ का कोमल हाथ था और माँ उपर से दबाते हुए मुझे अपनी फुद्दी पर दबा रही थी और साथ में नीचे चूतड़ उछल कर मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपनी फुद्दी में ले रही थी.

चिकनी चूत के कोमल होंठो को मसलते हुए मेरा फौलादी लण्ड सीधा मखमली बुर की जड़ से टकराता था और फिर उतनी ही तेज रफ्तार से बाहर आ कर फिर घुस जाता था. कमरे का माहौल फिर से गरम हो गया था और वातावरण में चुदाई की महक फैल गई थी. पूरे कमरे में गछ गछ फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. हम दोनो की साँसे धोकनि की तरह से चल रही थी. दोनो के बदन से निकलता पसीना एक दूसरे को भिगो रहा था मगर, इसकी फिकर किसे थी.

मम्मी ने अपने तेज चलती सांसो के बीच से बडबडाते हुए मेरा उत्साह बढ़ाया “ओह चोदो और ज़ोर से पेलो अपना डंडा, घुमा घुमा के डालो राजा, अब तो बस अपने रस से बुझा दे मेरी फुद्दी के प्यास को, चोद दे मुझे माधरचोद , साले मेरे सैया, ऐसे ही धक्का मारे जा, ऐसे ही चोदकर मुझे ठंडा कर दे, तेरे डंडे से ही ठंडी होगी तेरी माँ , पँखे से ठंडे होनी वाली ऩही हू मैं, तेरी माँ को तो तेरा मोटा मुसलांड चाहिए जो की उसकी मखमली बुर को दो फाँक कर के उसकी फुद्दी के भीतर की ज्वाला को ठंडा कर दे, मार साले बहिनचोद , मखमली बुरचत्ता… ज़ोर से मार ना, बेतिचोद चूतड़ू..हाय रे आज से तू ही मेरा भतार है तू ही मेरा सैय्या और तू ही मेरा चोदु है”

“हाँ , ले साली बुर्चोदी मम्मी और ले, और ले मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपनी मस्तानी फुद्दी में, ले ना छिनाल खा जा मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को अपनी मखमली चूत से, पूरा लण्ड खा जा साली बेटाचोदी माँ , ,तेरी बहिन की चूतड़ के खड्डे में भी लण्ड डालूं. , हाय रे मेरी चुदासी मैया, कहा से सीखा है तूने इतना आनंद देना, एक दम से रांड कि तरह करती है रे तू तो मेरी जान..ओह मेरी रांड माँ तुझे चोदकर तो मेरा जन्म ही सफल हो गया साली और ले माधरचोद माँ मै दारू के नशे में अपनी मम्मी को एक रांड की तरह चोदे जा रहा था और वो भी मजे से एक रांड की तरह गन्दी गन्दी गालिया देते हुए अपने इस जवान पुत्र से चुदवाये जा रही थी.

मेरी माँ चुदते चुदते चिल्ला रही थी की दे और कस कस के दे बेटा तेरी ये मम्मी अपने इस प्यारे बेटे के इसी लण्ड के लिए तो इतनी प्यासी थी, ऐसे ही लण्ड से चुदवाने की चाहत को पाले हुए थी तेरी ये सेक्सी मम्मी मन में ना जाने कब से, आज मेरी तम्माना पूरी हो गई, आने दे तेरे उस भडुए बाप को.. उसके सामने तुझसे चुदवाउंगी. तब दिखाउंगी तेरा लण्ड उसे ..और बताउंगी देख साले इसको कहते हैं महिला की चुदाई…

उसने अगर कभी हाथ भी लगाया मेरे इस बदन को या कोई रुकावट डाली तो साले के चूतड़ पर चार लात मार कर घर से निकल दूँगी, साला माधरचोद वो क्या जानेगा चोदना , अभी यहा होता तो दिखाती कि चोदना किसको कहते है, तू लगा रह बेटा चोद के मेरी फुद्दी को मथ दे और इसमे से अपने लिए मक्खन निकाल ले, मेरे चुदक्कर बलम” अब तो बस आँधी आए या तूफान कोई भी हमें ऩही रोक सकता था हम दोनो अब अपने चरम पर पहुच चुके थे और चुदाई की रफ़्तार में कोई कमी ऩही चाहते थे.

हवस में दुबे हुए हम माँ बेटे चाहते थे तो बस इतना की कैसे भी एक दूसरे के बदन में समा जाए और मार मार के चोद चोद के एक दूसरे के लण्ड और फुद्दी का भुर्ता बना दे. माँ की सिसकारिया तेज हो गई थी और अब दोनो में से कोई भी एक दूसरे को छोड़ने वाला ऩही था दोनो, जी जान से एक दूसरे से चिपके हुए शोर्ट धक्के पर धक्का लगाए जा रहे थे मैं ऊपर से और माँ नीचे से. 

मेरी माँ एक रांड की तरह तरह सिसकियाँ लेते हुए कहने लगी “हाय मेरे राजा ऐसे ही मेरा निकलने वाला है, मारता रह धक्का.. धीरे मत करियो, ऐसे ही मादरचोद … अब निकल जाएगा मेरा, निकल जाएगा साले आआआह्ह्ह्ह….मेरा निकल रहा हाईईईईईईईईई ,, ,,,,,,,, चोद अपनी इस रंडी माँ को कस के और ज़ोर ज़ोर से माआआआआअरर्र्र्ररर र्र, गंद्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्डुऊऊउ अयू, छोद्द्द्द्द्द्द्दद्ड डाआाआल मिटा दे खुज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्जलीइीईई ईई, चोद, चोद ज़ोर ज़ोर सीईईईईई, तेरी माँ के मखमली चूत में गधे का लंड डालुउउउउ… चोद ना साले और जोर जोर से पेल मारीईईई माँ… निकलाआआआआआअ रे मेरा तो निकलाआाआ, झारी रीईईई मैं तो झरीईईईईईईई कह कर मेरे मेरे कंधो पर अपने दाँत गड़ा दिए.

मेरा भी अब स्पर्म निकलने वाला था और मैं भी ज़ोर ज़ोर से धकका लगते हुए अपनी मम्मी को एक रांड की तरह पेलने लगा और गालिया बकते हुए झरने लगा “ओह साली मेरा भी स्पर्म निकल रहा है रीईईई, रांड , निकल रहा हैओह रांड, छीनाल साली, तूने तो आज जन्नत की सैर करा दी रे.. मेरी जान. मेरी सोना..मेरी रानी.. मेरी अम्मी , ओह गया मैं तो, ओह चुड़ैल …डायन…. तेरी मखमली चूत में मेरा स्पर्म निकल रहा है रीईईईईई ले पी ले अपनी फुद्दी से मेरे लौड़े के पानी को पी ले और निगल ज़ा…मेरे 12 इंच लम्बे पेनिस को पूरा का पूरा मखमली बुर मारनी मखमली बुरचोदी “”’ ”……. ……… … हाय रे रांड निकल गया रे मेरा तो पूरााआआआआआ” कह कर मैं माँ के उपर लेट गया.

हम दोनो की आँखे बंद थी और हम माँ और बेटे दोनो एक दूसरे के नंगे बदन से चिपके हुए थे. दोस्तों दारू के नशे में मुझे होश ऩही था कि क्या हो गया है. एक दूसरे से चिपके हुए कब आँख लगी कब मेरा मोटा लम्बा लौड़ा उसकी फुद्दी से बाहर निकल गया कब हम दोनो सो गये इसका पता हमे ऩही लगा. दोस्तों आप सभी को हम माँ बेटो की गन्दी हिन्दी 18+ XXX फ्री अश्लील XXX सेक्स कहानी हिंदी में 

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