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कॉलेज के दिन (भाग-1)

सन्नी- “नहीं, लंड सख्त हो जाता है और उसका आकार भी बड़ा हो जाता है ताकि तुम्हारी चूत में अंदर तक जा सके और तुम्हें पूरा आनन्द आए।”

काजल- “क्या तुमने भी कपड़े उतार दिए हैं?”

सन्नी- “हां, और तुम्हारी चूत की कल्पना करके अपना लंड भी सहला रहा हूं।”

काजल- “क्या तुम्हें अच्छा लग रहा है ऐसा करना?”

सन्नी- “हां। तुम भी मेरे लंड की कल्पना करो और अपनी चूत में अपनी उंगली घुसाओ यह सोचकर कि मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में घुसा रहा हूं।”

काजल ने अपनी उंगली अपनी चूत में धीरे-धीरे घुसानी शुरू की। उसे अजीब सा मजा आने लगा। थोड़ी ही देर में उसने अपनी पूरी उंगली चूत में घुसा ली थी और उसकी सांसें तेज हो चुकी थीं।

सन्नी भी फोन पर उसकी वासना भरी सिसकियां सुन रहा था और अपना लंड पकड़ कर तेजी से आगे-पीछे कर रहा था। उसने काजल को और भी मजा दिलाने के मकसद से उसकी वासना भरी कल्पनाओं को हवा देनी शुरू की।

सन्नी ने कहा- “अब तुम कल्पना करो कि मैं तुम्हारे होठों को चूम रहा हूं और चूमते-चूमते तुम्हारी चूचियों को दबा रहा हूं।”

यह सुनते ही काजल की सांसें और भी तेज हो गईं और वो पूरी तरह से गरम हो कर आहें भरने लगी। सन्नी ने उसे और उकसाते हुए कहा- “अब मैं तुम्हारे निप्पल्स को मुंह में लेकर चूस रहा हूं और मेरा लंड तेजी से तुम्हारी चूत में अंदर-बाहर हो रहा है।”

काजल- “आआह्ह्ह, ऐसे तो मैं पागल हो जाऊंगी। कुछ करो प्लीज!!”

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