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कॉलेज के दिन (भाग-1)

सन्नी- “वो तो मैं तुम्हें समय आने पर ही बताऊंगा, कभी मौका मिला तो।”

काजल- “नहीं, नहीं। अब तो बताना ही पड़ेगा। क्या हैं मेरे लिए तुम्हारे वो अरमान जो पूरे करना चाहते हो?”

सन्नी- “यही कि तुम्हें अपनी बांहों में भर लूं और ढेर सारा प्यार करूं।”

काजल- “कभी मौका मिल भी गया तो कुछ नहीं होने वाला। मुझे ये प्यार-व्यार समझ नहीं आता।”

सन्नी- “कोई बात नहीं, वो सब तो मैं समझा दूंगा। तुम मौका तो दो।”

काजल- “मौका तो पता नहीं कब मिल पाएगा तुम्हें, पर ये प्यार तो तुम मुझे आज सिखा ही दो।”

सन्नी- “वैसे तो तुम सामने होती तो ज्यादा अच्छी तरह सिखा पाता, पर चलो कोशिश करता हूं। पर ध्यान रहे, तुम्हारे जिद करने पर सिखा रहा हूं। बाद में ये मत कहना कि मैंने तुम्हें बिगाड़ दिया।”

काजल- “अच्छा बाबा ठीक है। नहीं कहूंगी, तुम सिखाओ तो सही।”

सन्नी- “चलो ठीक है। कमरे की लाइट बंद करो और आराम से लेट जाओ, फिर शुरू करते हैं।”

काजल सन्नी के कहे अनुसार कमरे की लाइट बंद करके लेट गई और बोली- “हां तो शुरू करो।”

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