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कॉलेज के दिन (भाग-1)

“तुमने कॉल की थी। मैं कमरे में नहीं था, माफ करना उठा नहीं पाया।” सन्नी ने कहा।

काजल- “कोई बात नहीं, मैंने तो वैसे ही कॉल की थी। अपने कमरे में अकेली बैठी बोर हो रही थी तो सोचा थोड़ी देर तुमसे बात कर लूं।”

सन्नी- “अरे, अच्छा किया। वैसे भी मैं तुम्हें कॉल करने ही वाला था। कुछ बात करनी थी।”

काजल- “हां हां, कहो।”

सन्नी- “वो तुम आज वाली ड्रेस में बड़ी अच्छी लग रही थी। मैंने तुम्हें कॉम्प्लिमेंट भी दिया, पर तुम कुछ बोली नहीं। कुछ बुरा लगा क्या?”

काजल- “अरे नहीं, ऐसी कोई बात नहीं। बस वो क्लास में सब होते हैं ना तो इसलिए थोड़ा शरमा गई थी।”

सन्नी- “इसमें शर्माने की क्या बात थी? मैंने तो सिर्फ तारीफ ही की थी।”

काजल- “हां, पर जिस तरह से तुमने मुझे देखा, मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ।”

सन्नी समझ गया था कि काजल को क्या महसूस हो रहा है। उसे लगा कि आज मौका अच्छा है बात को सेक्स की दिशा में मोड़ने के लिए। उसने कहा- “यार ऐसे ना देखता तो और क्या करता? तुम लग ही इतनी सेक्सी रही थी।”

काजल- “क्या? मुझे आज तक किसी लड़के ने इस तरह से नहीं बोला।”

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