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कॉलेज के दिन (भाग-1)

सन्नी- “पर काजल तो अकेली थी ना? तुम कहां से???”

सीमा- “मैं अपनी एक दोस्त के कमरे में गई हुई थी। जब वापस आई तो देखा कि कमरे की लाइट बंद है, लेकिन किसी ने गलती से दरवाजा खुला छोड़ दिया था। कमरे के अंदर झांका तो देखा काजल मैडम बिना कुछ पहने अपनी टांगें खोलकर लेटी हुई हैं और उधर से आप उसे ट्रेनिंग दिए जा रहे हैं।”

सन्नी- “पर तुम्हें ये कैसे पता कि फोन पर मैं था?”

सीमा- “फोन स्पीकर पर जो था। तुम्हारी बातें सुनकर तो मैं भी खुद को रोक नहीं पाई और बिना काजल को भनक लगे मैंने भी तुम्हारे फोन सेक्स का मजा ले लिया।”

सन्नी- “तो कमरे में जब काजल को वो आहट सुनाई दी थी, तब वो तुम थी?”

सीमा- “हां। वो मैंने पहले तो हस्तमैथुन करते-करते पता ही नहीं चला कि कब मैंने अपनी शॉर्ट्स उतार दी, पर जब सारा काम कर लिया तो अंधेरे में ढूंढने में बड़ी मुश्किल हुई। बस जल्दबाजी में शॉर्ट्स पहन कर कमरे से बाहर निकली तो दरवाजा जरा जोर से बंद कर दिया।”

सीमा की पूरी बात सुनते-सुनते ही सन्नी के लंड में तनाव आ चुका था। सीमा की बातों का अर्थ था कि जब काजल के साथ सन्नी फोन सेक्स कर रहा था तब सीमा भी अपनी उंगली से अपनी चूत की आग शांत करने में जुटी थी।

सन्नी ने सीमा की तरफ देखा तो उसकी नजर सन्नी की जीन्स में आए उठाव पर ही थी। सन्नी सोच ही रहा था कि अब आगे क्या कहे कि तभी सीमा बोल उठी- “फोन पर तो तुमने मेरे तन-बदन में आग लगा दी, अब इस आग को कब बुझाओगे? कब शांत करोगे मेरी चूत की प्यास को?”

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सन्नी ने सीमा की ओर देखा तो उसकी आंखों में हवस साफ झलक रही थी। वह समझ गया कि एक और चूत उसके लंड के लिए तड़प रही है।

सन्नी ने सोचा जब बात यहां तक आ ही गई है तो सीधे-सीधे बात कर लेना ही सही है। उसने सीमा से कहा- “यार मेरा बस चले तो अभी बुझा दूं, पर कोई जगह तो मिले जहां हम अपने अरमान पूरे कर सकें।”

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