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कॉलेज के दिन (भाग-1)

सन्नी- “चिंता मत करो। मैं कल ही कुछ व्यवस्था करता हूं ताकि तुम्हें सेक्स का मजा लेने का अवसर कल ही मिल सके।”

तभी काजल को लगा जैसे कमरे में कोई आहट हुई। वह घबरा गई क्योंकि वह तो कमरे में अकेली होने के कारण निश्चिंत होकर निर्वस्त्र हालत में लेटी हुई थी। तभी उसने पाया कि बातों-बातों में वह कमरे का दरवाजा तो ठीक से बंद करना भूल ही गई थी।

उसने एकदम से उठकर चद्दर को अपने बदन पर लपेटा और दरवाजे पर देखने गई तो वहां कोई नहीं था। उसकी जान में जान आई और उसने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और आकर बिस्तर पर लेट गई।

सन्नी ने पूछा- “क्या हुआ?”

काजल- “कुछ नहीं, मुझे लगा दरवाजे पर कोई है। पर शायद हवा के कारण दरवाजा हिलने की आवाज हुई होगी।”

सन्नी- “चलो शुक्र है। तुम्हें दरवाजा पहले ही बंद कर लेना चाहिए था। अच्छा तो कल मिलते हैं और सब ठीक रहा तो कल तुम्हें सेक्स का पहला अनुभव ही जाएगा।”

काजल- “चलो ठीक है। पर ध्यान से, कहीं कॉलेज में हम फंस न जाएं। बेकार में मामला गड़बड़ हो जाएगा।”

सन्नी- “अरे तुम चिंता मत करो। सब मुझपर छोड़ दो। तुम बस अच्छे से अपनी चूत के बाल साफ करके आना।”

काजल- “उसकी चिंता तुम मत करो। बस जगह का इंतजाम करो, जहां हम बिना किसी चिंता के आराम से सेक्स का आनन्द ले सकें।”

उसके बाद दोनों ने कपड़े पहने और अगले दिन की वासना भरी कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए सो गए।

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