सोनू हिचकिचाने लगा- “पर आपको कैसे…”
आंटी- “मैं सब जानती हूं। उसी को देखने के लिए तुम छत पर घूम रहे थे ना? वैसे पसंद तो अच्छी है तुम्हारी।”
कहकर आंटी फिर से हंसने लगी। सोनू समझ गया था कि अब नाटक करने से कोई फायदा नहीं है। उसने चुपचाप सच्चाई मान ली।
फिर आंटी पूछने लगी- “और कोई भी पसंद आई क्या तुम्हें?” इस पर सोनू ने अपने पहले वाले किरायेदार और नेहा के बारे में आंटी को बता दिया।
सोनू भी अब अनीता आंटी के साथ बातें करने में काफी सहज महसूस कर रहा था, इसलिए उसने आंटी को नेहा को निर्वस्त्र देखने और बेबी आंटी के साथ हुई घटना के बारे में भी बता दिया।
आंटी भी पूरी रुचि के साथ सोनू की बातें सुन रही थी। पहले वाले किरायेदार के घर में हुई घटना सुनने के बाद अनीता आंटी सोनू से बोली- “तुम मेरे घर में तो कभी नहीं आते। क्या बात मैं तुम्हें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती क्या?”
इसपर सोनू बोला- “नहीं आंटी वो बात नहीं है। आप तो मुझे बहुत अच्छे लगते हो। बस कॉलेज से आने में ही इतनी देर हो जाती है कि कभी समय ही नहीं बचता।”
आंटी बोली- “चलो, आज तुम्हारे और मेरे पास समय ही समय है। आज जी भर कर बातें करेंगे।”
इसपर सोनू ने भी मुस्कुरा कर कहा- “जी जरूर आंटी।”
फिर आंटी ने सोनू से पूछा- “अच्छा पूनम तुम्हें कब से पसंद है?” इसपर सोनू ने बचपन में छुप-छुप कर पूनम भाभी को देखने से लेकर अब तक की सारी बातें बताई।
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