पूरे रास्ते वह पूनम भाभी के साथ सेक्स करने की कल्पनाओं में डूबा हुआ था। घर पहुंचने तक वह भाभी के बारे में सोच-सोचकर इतना उत्तेजित हो चुका था कि वह जाते ही बाथरूम में घुसा और भाभी की कल्पना करते हुए हस्तमैथुन करने लगा।
अपनी कल्पना में वह भाभी के घर गया और उन्हें अकेला पाकर उनकी चूचियां दबाने लगा। पहले तो भाभी मना करती रही, पर थोड़ी देर बाद वो भी गरम हो गई और सोनू का साथ देने लगी। सोनू ने भाभी के सारे कपड़े उतार दिए और अपना लंड भाभी की तंग चूत में घुसा दिया।
फिर वह पूरी गति के साथ लंड को अंदर-बाहर करने लगा। बस यही कल्पना करते-करते सोनू के लंड से वीर्य की धार छूट पड़ी। पता नहीं यह सन्नी की बताई हुई बातों का असर था या भाभी की चूचियों की झलक का, पर आज सोनू का वीर्य पहले से कहीं ज्यादा मात्रा में निकला।
सोनू ने अब पक्का निश्चय कर लिया था कि उसे कोई कदम तो उठाना ही पड़ेगा, वरना उसकी कल्पनाएं कभी हकीकत में नहीं बदल पाएंगी।
फिर सोनू ने कपड़े बदले और यह सोचकर तुरंत छत पर आ गया कि आज जैसे ही भाभी बाहर आएगी वह उनसे बात जरूर करेगा। वैसे भी आज सोनू घर पर एकदम अकेला था क्योंकि उसके घर में बाकी सब लोग गांव गए हुए थे, इसलिए उसे भाभी से बात करते हुए देख लिए जाने का कोई डर भी नहीं था।
वह करीब एक घंटे तक भाभी के बाहर आने का इंतजार करता रहा, पर भाभी बाहर नहीं आई। अब तो अंधेरा होने लगा था, सर्दी बढ़ गई थी। पर आज अभी तक पूनम भाभी के दर्शन भी नहीं हुए थे।
तभी सोनू को किरायेदार अंकल के गाड़ी निकालने की आवाज आई। उनकी नाइट शिफ्ट थी तो वो काम पर जा रहे थे।
सोनू भी अब तक भाभी के बाहर आने का इंतजार करते-करते थक चुका था। रात का समय होने के कारण सर्दी भी काफी बढ़ गई थी, इसलिए अब तो पूनम भाभी के बाहर निकलने की कोई उम्मीद नहीं बची थी।
सोनू नीचे आ गया और बालकनी में घूमने लगा। थोड़ी देर तक वहीं घूमने के बाद सोनू अपने घर के अंदर जाने ही लगा था कि तभी अनीता आंटी अपने घर से बाहर निकली।
सोनू को वहां खड़ा देखकर आंटी बोली- “अरे सोनू, इस समय यहां क्या कर रहे हो?”
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