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कॉलेज के दिन (भाग-2)

सोनू- “ठीक है आंटी।”

फिर आंटी दूसरे कमरे में जाकर कपड़े बदलने लगी। थोड़ी देर में आंटी ने सोनू को आवाज दी तो सोनू दूसरे कमरे में गया। सोनू ने देखा कि आंटी सिर्फ ब्रा और पेटीकोट पहने खड़ी थी।

सोनू को देखकर आंटी मुस्कुराई और सोनू को पास आने को कहा। सोनू पास गया तो आंटी ने ब्लाउज उठाकर पहन लिया और सोनू को हुक बंद करने का तरीका बताने लगी।

सोनू ने बड़ी आसानी से हुक बंद कर दिए। आंटी ने सोनू का धन्यवाद किया और सोनू वापस अपने घर आ गया। वापस आते ही उसे अपने लंड में तनाव सा महसूस हुआ। पर वह ये नहीं समझ पा रहा था कि ऐसा क्या हुआ।

लेकिन इस घटना के बाद से सोनू की दिलचस्पी नेहा से ज्यादा आंटी में बढ़ गई। वह अब जब भी नेहा से मिलने जाता तो आंटी को निहारता रहता। उस दिन के बाद से बेबी आंटी का व्यवहार भी सोनू के साथ काफी बदल गया था।

वह अब सोनू से काफी बातें करती रहती थी और जब भी सोनू को देखती, उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आ जाती थी। वह भी अक्सर आंटी को एकदम निर्वस्त्र होकर कपड़े पहनते हुए देखने की कल्पना करता रहता।

लेकिन एक दिन उसकी कल्पनाओं के सच होने की उम्मीद ही खत्म हो गई जब उसे पता चला कि आंटी के पति ने कहीं और घर लेने का फैसला लिया है। असल में अंकल को उसका और नेहा का ज्यादा घुलमिल कर रहना पसंद नहीं था। उन्हें सोनू पर हमेशा शक रहता था।

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ऊपर से एक दिन अंकल ने सोनू और बेबी आंटी को हंस-हंसकर बातें करते हुए देख लिया था, जिससे अंकल सिर्फ नेहा ही नहीं, अपनी बीवी को लेकर भी चिंतित रहने लगे। अंततः अंकल ने वहां से जाने का फैसला कर लिया और कुछ ही दिन में बेबी आंटी और उनका परिवार वहां से चले गए।

सोनू को बस एक ही बात का मलाल था कि बेबी आंटी का परिवार कुछ दिन और रुकते तो शायद उसके और आंटी के बीच कुछ और हो पाता, या फिर नेहा की टांगों और पैंटी के अलावा कुछ और दिखाई देता। खैर अब उस बारे में सोनू कुछ नहीं कर सकता था।

अनीता आंटी के परिवार में भी 4 ही लोग थे- पति-पत्नी और उनके 2 बच्चे। उनमें अनीता आंटी सोनू को पहले दिन से ही व्यवहार में काफी पसंद आई। उनकी उम्र कोई 40 साल थी।

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