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कॉलेज के दिन (भाग-2)

फिर सोनू ने आंटी की चूत को ध्यान से देखा तो वह गीली होने के कारण चमक रही थी। सोनू ने आंटी की चूत के दाने को धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया तो आंटी सिहर उठी, पर अभी भी उन्होंने सोनू को रोका नहीं।

वो किसी तरह उस चरम आनंद को झेलने का प्रयास कर रही थी और उनके मुंह से कामुक सिसकारियां निकले जा रही थीं जो सोनू को और भी उत्तेजित कर रही थीं।

जब सोनू को लगा कि आंटी अब उत्तेजना से पागल हो चुकी हैं तो उसने आंटी की चुदाई शुरू करने के मकसद से अपना लंड अपने हाथ में पकड़कर आंटी की चूत के मुंह पर लगाया और पूरा जोर लगाकर अंदर की ओर धकेल दिया।

आंटी की दर्द के मारे चीख निकल गई। सोनू को उम्मीद नहीं थी कि शादी के इतने साल बाद आंटी की चूत इतनी तंग होगी।

उसने आंटी से कहा- “सॉरी आंटी। मुझे नहीं पता था कि आपको इतना दर्द होगा। आपने ही कहा था कि दर्द सिर्फ पहली बार होता है।”

आंटी के दर्द के मारे आंसू निकल आए थे। उन्होंने सोनू को रोकने का इशारा किया। थोड़ी देर में सामान्य होने के बाद बोली- “पहली बार के बाद से दर्द इसलिए नहीं होता क्योंकि लगातार सेक्स करते रहने के कारण चूत खुली रहती है। पर मुझे सेक्स किए हुए बहुत दिन हो गए हैं। असल में गलती मेरी ही है। मुझे तुम्हें पहले ही आगाह कर देना चाहिए था। चलो कोई बात नहीं। अब धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू करो।”

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सोनू ने वैसा ही किया। वह धीरे-धीरे आंटी की चुदाई करने लगा। उसे आंटी की गीली हो चुकी चूत में लंड घुसाते हुए बड़ा ही आनंदमयी अनुभव हो रहा था।

ऊपर से आंटी की चूत तंग थी इसलिए ऐसा लग रहा था जैसे वो सोनू के लंड को निचोड़ लेने की कोशिश कर रही है और इसी कारण सोनू के लंड में जो एहसास हो रहा था वो उसे उत्तेजना से पागल किए जा रहा था।

वह आंटी के ऊपर ही लेट गया और धीरे-धीरे उन्हें काफी देर तक चोदता रहा। फिर सोनू ने पलट कर आंटी को अपने ऊपर कर लिया, पर सोनू का लंड इस दौरान आंटी की चूत में ही घुसा रहा।

तभी आंटी ने कहा- “मुझे ऊपर क्यों कर दिया? अब मुझे भी मेहनत करनी पड़ेगी।”

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