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कॉलेज के दिन (भाग-2)

धीरे-धीरे सोनू नेहा के साथ काफी घुलमिल गया था। उसका ज्यादातर खाली समय नेहा के साथ ही बीतता था। एक बार तो सोनू ने खेल-खेल में नेहा की स्कर्ट ऊपर उठा दी, पर नेहा ने कुछ नहीं कहा। इससे सोनू की हिम्मत थोड़ी बढ़ी और उसने नेहा के साथ थोड़ी और छेड़छाड़ करने की सोची।

एक दिन सोनू जब उसके घर में घुसा तो उसने नेहा को आवाज दी। पर अंदर से कोई जवाब नहीं आया। सोनू को लगा शायद घर में कोई नहीं है। फिर भी उसने एक बार दूसरे कमरे में भी देखने की सोची।

वह दूसरे कमरे में गया तो देखा नेहा कपड़े बदल रही थी। उसने सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी और कुर्ता पहनने लगी ही थी कि सोनू आ गया और नेहा घबरा कर एकदम से पलट गई। सोनू सिर्फ उसकी निर्वस्त्र पीठ ही देख पाया था कि नेहा ने उसे बाहर जाने को कहा।

सोनू दूसरे कमरे में आकर इंतजार करने लगा। उसके मन में अभी-अभी हुई घटना के दृश्य घूम रहे थे। थोड़ी देर में नेहा आई तो वो सोनू से नजरें मिलाने में शरमा रही थी। पर थोड़ी देर यहां-वहां की बात करने के बाद वह सामान्य हो गई।

तभी बेबी आंटी, जो कि पड़ोस में किसी के घर गई हुई थी, आ गई। उन्होंने सोनू से हालचाल पूछा और रसोई में जाकर कुछ काम करने लगी। सोनू थोड़ी देर बाद वापस अपने घर आ गया।

अगले दिन सोनू के स्कूल की छुट्टी थी पर नेहा स्कूल चली गई थी। सोनू घर में बैठा बोर हो रहा था कि तभी बेबी आंटी ने उसे आवाज लगाई। सोनू उनके घर गया तो आंटी ने कहा कि उन्हें सोनू से कुछ काम है।

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सोनू तो वैसे भी खाली बैठा बोर ही हो रहा था तो सोचा चलो इस बहाने कुछ करने को मिल जाएगा। उसने आंटी से पूछा- “क्या काम है आंटी?”

आंटी- “मुझे एक पार्टी में जाना है। उसके लिए साड़ी पहननी पड़ेगी। पर दिक्कत ये है कि खुद मैं ब्लाउज के हुक बंद नहीं कर पाऊंगी। घर में कोई है नहीं तो सोचा तुमसे करवा लूं।”

सोनू ने कहा- “वैसे तो मैंने कभी ये काम नहीं किया। पर आप बता देंगी कि कैसे करना है तो मैं जरूर कर दूंगा।”

आंटी हंसकर बोली- “ठीक है! मैं सिखा दूंगी। थोड़ी देर रुको, मैं जरा कपड़े बदलना शुरू कर लूं। जब ब्लाउज पहनने लगूंगी तब तुम्हें बुला लूंगी।”

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