सोनू ने थोड़ी सी कोशिश की तो उसका हाथ आंटी की चूत को छूने में कामयाब हो गया। आंटी की चूत बड़ी ही चिकनी और गरम हो चुकी थी।
सोनू को कमाल का एहसास हो रहा था और उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा था। आंटी को भी मजा आ रहा था क्योंकि वो हल्की-हल्की सिसकियां ले रही थीं।
तभी सोनू ने अपनी उंगली आंटी की चूत में घुसा दी और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। वह आंटी को भी वही आनंद देना चाहता था जो आंटी ने उसे दिया था।
आंटी की सांसें तेज हो चुकी थी और आंटी आंखें बंद करके सोनू को अपनी चूत से खेलने का पूरा मौका दे रही थी। आंटी ने अपनी टांगें चौड़ी कर ली थी ताकि सोनू को कोई दिक्कत ना हो।
सोनू का लंड फिर से पूरी तरह उत्तेजित हो गया था और वह फैसला कर चुका था कि आज तो आंटी को चोदकर ही दम लेगा।
उसने आंटी की नाइटी को पूरा ऊपर उठा दिया और सिर के ऊपर से निकाल कर आंटी को एकदम निर्वस्त्र कर दिया क्योंकि आंटी ने उस नाइटी के सिवा और कुछ भी नहीं पहना था।
आंटी ने सोनू की इस हरकत का जरा भी विरोध नहीं किया। यह साफ था कि आंटी अपना बदन पूरी तरह से सोनू को सौंप चुकी थी।
सोनू ने आंटी को नंगा करते ही आंटी का एक निप्पल अपने मुंह में ले लिया और दूसरी चूची को जोर से मसलने लगा। आंटी के मुंह से “आह..आह्ह..” की आवाजें आए जा रही थी जिनका अर्थ था कि आंटी को पूरा मजा आ रहा था।
सोनू ने बारी-बारी से आंटी के दोनों निप्पल चूसे और चूचियां दबाई, फिर वह आंटी की टांगें चौड़ी करके उनके बीच में आ गया।
आंटी आराम से लेटकर सोनू की अगली हरकत का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। सोनू ने एक तकिया उठाया और आंटी के चूतड़ों के नीचे रख दिया, आंटी ने भी धीरे से अपने चूतड़ उठा कर सोनू का ऐसा करने में पूरा सहयोग किया।
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