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कॉलेज के दिन (भाग-2)

सोनू को असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी। सोनू आराम से लेटा रहा और आंखें बंद करके हस्तमैथुन का मजा लेने लगा।

तभी उसे एक और अद्भुत आनंद का अनुभव हुआ। उसका लंड किसी गरम और गीली जगह में घुस गया था। उसने एकदम से आंखें खोलकर देखा तो आंटी ने सोनू का लंड अपने मुंह में ले रखा था और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रही थी।

सोनू ने कभी ऐसे आनंद की कल्पना भी नहीं की थी। अनीता आंटी के लंड चूसने के तरीके से साफ लग रहा था कि उन्हें ऐसा करने का काफी अनुभव था और होता भी क्यों ना, आखिर वो एक शादीशुदा औरत थीं।

आंटी कभी तो सोनू का पूरा लंड अपने मुंह में ले लेती और कभी पूरा बाहर निकाल देती। धीरे-धीरे आंटी ने ऐसा करने की गति बढ़ा दी।

सोनू की उत्तेजना अपने चरम पर थी। उसे पता चल चुका था कि वह जल्दी ही स्खलित हो जाएगा। उसकी सांसें तेजी से चल रही थीं।

उसने आंटी को आगाह करने की कोशिश भी की पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसके लंड से फव्वारे की तरह वीर्य निकला और आंटी के मुंह में जा गिरा।

आंटी जरा भी विचलित नहीं हुई और बड़ी आसानी से सोनू का सारा वीर्य पी गई। फिर आंटी ने अच्छे से चाट कर सोनू का लंड साफ कर दिया और आराम से लेट गई।

सोनू की सांसें जब सामान्य हुई तो उसे आभास हुआ कि अभी-अभी क्या हुआ है। उसे तो यह सब सपने जैसा लग रहा था।

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उसने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे कभी ऐसा अनुभव होगा और वो भी अनीता आंटी के साथ, जिनके साथ सेक्स से संबंधित बात तक करने की उसने कभी कल्पना तक नहीं की थी।

पर अब सोनू यह मौका अपने हाथ से गवाना नहीं चाहता था। उसने आंटी से कहा- “आंटी, आपने तो मेरे लंड देख लिया।”

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