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कॉलेज के दिन (भाग-2)

फिर फिल्म खत्म हो गई तो सोनू ने आंटी से पूछा- “आंटी, कैसी लगी फिल्म?”

आंटी बोली- “बाकी सब तो ठीक था, पर लड़की की चीखें बड़ी बनावटी लग रही थी। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि उसे इतना दर्द हो रहा हो। और वैसे भी इतना दर्द होता भी कहां है?”

यह बोलते ही आंटी समझ गई कि उन्होंने कुछ ज्यादा ही बोल दिया है। उन्होंने सोनू की ओर देखा तो वह हंस रहा था।

फिर सोनू बोला- “क्या सच में इतना दर्द नहीं होता आंटी?”

“सिर्फ पहली बार होता है, उसके बाद तो केवल मजा ही मजा है।” आंटी ने जवाब दिया तो सोनू ने वही सवाल पूछ लिया जिसका आंटी को पहले ही अंदाजा हो गया था- “क्या आपको भी पहली बार बहुत दर्द हुआ था?”

इस पर आंटी शरमा गई और बोली- “बस अब बहुत हो गया। बाकी बातें फिर कभी करेंगे। अब सो जाते हैं।”

सोनू को थोड़ी निराशा हुई क्योंकि उसे आंटी से इस तरह की बातें करने में बड़ा ही आनंद आ रहा था और उसके लंड में बुरी तरह तनाव आ चुका था।

वह समझ गया था कि अब हस्तमैथुन किए बिना काम नहीं चलेगा। उसने आंटी से कहा- “मुझे एक बार बाथरूम जाना है।”

फिर वो बाथरूम में घुस गया और आंटी के साथ सेक्स की कल्पनाएं करते हुए हस्तमैथुन करने लगा। उसके दिमाग में आज आंटी के साथ हुई बातें ही चल रही थीं।

सोनू को अंदाजा नहीं हुआ पर उसे बाथरूम में काफी देर हो चुकी थी। तभी बाहर से आंटी की आवाज आई- “सोनू, तुम क्या कर रहे हो अंदर? इतनी देर हो चुकी है। सो तो नहीं गए?”

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