आंटी ने सोनू से कहा- “सॉरी, एकदम से जल्दी में ध्यान नहीं रहा। तुम चलो मैं आती हूं।”
आंटी ने इस घटना को सोनू की उम्मीद के विपरीत बड़ी ही सहजता से लिया था। सोनू वापस कमरे में आ गया और आंटी का इंतजार करने लगा। उसकी आंखों के सामने आंटी का नंगा बदन अभी भी घूम रहा था और वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।
थोड़ी देर में अनीता आंटी बाहर आई तो सोनू उन्हें देखता ही रह गया। अनीता आंटी ने गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी और वो उसमें गजब की सेक्सी लग रही थी।
साफ दिख रहा था कि आंटी ने नाइटी के नीचे कुछ नहीं पहना था क्योंकि नाइटी उनके बदन से चिपक रही थी और उनके बदन का हर कटाव दिखाई दे रहा था। यहां तक कि सोनू को आंटी के निप्पलों का आकार भी दिखाई दे रहा था।
आंटी ने सोनू को अपने बेडरूम में चलने को कहा तो सोनू आंटी के पीछे-पीछे चल दिया। बेड पर दो रजाइयां रखी हुई थी। उनमें से एक ओढ़कर आंटी लेट गई और दूसरी तरफ सोनू को लेटने का इशारा किया।
सोनू फटाफट आकर लेट गया। वह नहीं चाहता था कि आंटी को दिखाई दे कि उसका लंड पूरा ताव में आ चुका है, अन्यथा पता नहीं आंटी उसके बारे में क्या सोचती।
लेटते ही आंटी ने सोनू से कहा- “बाथरूम में जो दिखा पसंद आया?”
सोनू ने शरमा कर सिर झुका लिया तो आंटी बोली- “छोड़ो भी अब ज्यादा बनो मत। बच्चे थोड़े हो तुम। जवान हो, मुझे पता है इस उम्र में लड़के क्या सोचते हैं, क्या करते हैं।”
सोनू चुपचाप आंटी की बातें सुने जा रहा था। तभी आंटी बोली- “अच्छा हस्तमैथुन करते हो?”
सोनू समझ गया कि आंटी ऐसे आसानी से पीछा छोड़ने वाली नहीं है, इसलिए चुप रहने से कोई फायदा नहीं होने वाला। सोनू ने कहा- “हां आंटी, करता हूं…कभी-कभी।”
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