सोनू को भी आंटी की बात ठीक लगी। वह उठकर गया और अपने घर का ताला लगाकर आ गया। इससे एक फायदा यह भी हुआ कि इतनी देर में उसका लंड सामान्य रूप में आ चुका था।
सोनू वहीं सोफे पर बैठकर अनीता आंटी के कपड़े बदल कर बाहर आने का इंतजार करने लगा।
तभी अंदर से आंटी की आवाज आई- “सोनू, जरा यहां आना।”
सोनू आंटी के बाथरूम के दरवाजे के बाहर पहुंचा तो आंटी ने कहा- “मैं अपनी नाइटी ले जाना भूल गई हूं। क्या तुम मेरी अलमारी से निकाल कर मुझे दे दोगे।”
सोनू ने कहा- “जी आंटी, अभी ला देता हूं।” कहकर सोनू बेडरूम में जाकर आंटी की अलमारी में से उनकी नाइटी निकाल लाया।
जैसे ही वह बाथरूम के बाहर पहुंचा आंटी ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर हाथ बाहर निकाला ताकि सोनू उन्हें उनकी नाइटी पकड़ा दे। पर जैसे ही सोनू ने उन्हें नाइटी दी, वह उनके हाथ से छुटकर नीचे गिर गई और जल्दबाजी में वो एकदम से उसे उठाने के लिए झुकी।
परन्तु ऐसा करते हुए उनके बाथरूम का दरवाजा ज्यादा खुल गया। हड़बड़ाहट में आंटी के हाथ से उनकी नाइटी नीचे गिर गई और सोनू को एक झलक में आंटी का पूरा बदन निर्वस्त्र दिखाई दे गया।
आंटी की चूचियां काफी बड़ी-बड़ी थीं और उनके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे। आंटी नाइटी उठा कर जैसे ही उठी सोनू का ध्यान आंटी की चूत की ओर गया और उसे वहां पर घने बाल दिखाई दिए और घने बालों के बीच में थोड़ी सी झलक आंटी की गुलाबी चूत की भी दिखाई दे गई।
सोनू का लंड पहले ही बड़ी मुश्किल से सामान्य हुआ था, आंटी का रूप देखकर तो कुछ ही क्षणों में सोनू का लंड पूरी तरह उत्तेजित होकर अपने पूरे आकार में आ गया।
आंटी भी सोनू पर पड़े अपने हुस्न के प्रभाव को भांप चुकी थी। उन्होंने देख लिया था कि सोनू अपने लंड के उभार को छुपाने की कोशिश कर रहा था।
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