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कॉलेज के दिन (भाग-2)

आंटी बोली- “अरे वाह! मैं तो तुम्हें नादान समझती थी। तुम तो बचपन से ही सही दिशा में जा रहे हो।”

इस पर सोनू ने कहा- “अरे कहां की सही दिशा आंटी। आज तक एक भी गर्लफ्रेंड नहीं बनी।”

आंटी बोली- “मतलब आज तक सेक्स भी नहीं किया होगा?”

सोनू ने एकदम से आए इस प्रश्न से हैरान होकर आंटी की तरफ देखा तो आंटी बोली- “अरे अब मुझसे शरमाना छोड़ भी दो। तुम इतने बड़े हो चुके हो। ऐसा तो हो नहीं सकता कि तुम्हें कुछ भी ना पता हो, तो फिर इस बारे में बात करने में शरमाना कैसा?”

सोनू को भी आंटी की बात सही लगी और उसने कहा- “बस आंटी, कभी मौका ही नहीं मिला।”

“कोई बात नहीं, मिल जाएगा।” आंटी ने शरारती अंदाज में कहा। फिर कहने लगी- “अच्छा आज इतनी देर तक छत पर क्या कर रहे थे?”

सोनू ने आंटी को पूरी बात सच-सच बताई कि उसने कॉलेज में उसकी क्लास के लड़के सन्नी से क्या सुना और किस तरह आज पूनम भाभी से बात करने का पक्का इरादा करके वह छत पर इंतजार करता रहा, पर वो नहीं आई।

इस पर आंटी सोनू को समझाने लगी- “कोई बात नहीं निराश होने की जरूरत नहीं है। तुम्हें भी जल्द ही सन्नी की तरह सेक्स का सुख लेने का मौका मिलेगा।”

यह सुनकर सोनू को अच्छा तो लगा पर एक दिक्कत हो गई थी। आंटी के मुंह से सेक्स का जिक्र सुन-सुनकर उसके लंड में तनाव आने लगा था और उसे पूरा भरोसा था कि जल्दी ही अनीता आंटी का ध्यान उसके पायजामे के उठाव की ओर चला जाएगा।

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तभी आंटी बोली- “रात काफी हो गई है और बातें हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। तुम एक काम करो। आज रात यहीं सो जाओ। ऐसे बैठे-बैठे कब तक बातें करेंगे। तुम अपने घर का ताला लगा आओ और मैं तब तक कपड़े बदल लेती हूं। फिर आराम से रजाई में लेटकर बातें करेंगे।”

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