चाचा ने मुझे गन्दी गन्दी गालियाँ देकर चोदा
मैं छत पर बैठी हुई अपने ख्यालों में डूबी हुई थी। गर्म दोपहर की धूप मेरे चेहरे पर पड़ रही थी और हल्की सी हवा मेरे बालों को उड़ाती हुई मेरी गर्दन को छू रही थी। छत की ठंडी फर्श पर रखी कुर्सी पर मैं आराम से बैठी थी। मेरे मन में तरह-तरह के विचार …