Bhatiji ki chudai sex story, Bus me chudai sex story, Niece fucked in bus sex story: नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम नरेंद्र है। आज मैं आपको अपनी एकदम सच्ची और हॉट सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूं। यह मेरी पहली कहानी है इसलिए थोड़ा घबराहट है लेकिन आपको जरूर पसंद आएगी। यह घटना दिवाली के एक दिन पहले की है जब मैं दिल्ली से आजमगढ़ अपनी भाभी, भतीजी रिंकी और छोटे भतीजे मयंक के साथ बस से गांव जा रहा था।
भैया ने कहा था कि भाभी को बच्चों के साथ गांव पहुंचा दो। ट्रेन में सीट नहीं मिली तो बस ही लेनी पड़ी। आनंद विहार बस अड्डे पर पहुंचते ही बस खचाखच भरी हुई थी। किसी तरह से मुझे एक दो सीट वाली जगह मिल गई। मैं और भाभी बैठ गए लेकिन रिंकी और मयंक के लिए जगह नहीं बची।
मयंक को भाभी ने गोद में बैठा लिया और रिंकी को मेरे और भाभी के बीच में बिठाया। उसका आधा चूतड़ मेरी जांघ पर और आधा भाभी की जांघ पर टिका हुआ था। शुरू में सबको थोड़ी झिझक हुई लेकिन भीड़भाड़ में ऐसा होता ही है। रिंकी ने कुछ नहीं कहा और मैंने भी चुपचाप उसे सहारा दिया।
रात के करीब 12 बज गए थे। बस तेजी से चल रही थी, अंदर अंधेरा था और ज्यादातर लोग सो चुके थे। भाभी भी गहरी नींद में चली गई थीं और मयंक भी उनकी गोद में सो रहा था। मुझे नींद नहीं आ रही थी और रिंकी भी बेचैनी से करवट बदल रही थी क्योंकि बैठने की पोजीशन ठीक नहीं बन रही थी।
मैंने धीरे से कहा, “रिंकी, एक काम कर, मेरी गोद में आराम से बैठ जा। बीच में जगह नहीं बन रही, थोड़ी देर के लिए बैठ जा।” उसने थोड़ा हिचकिचाते हुए मेरी गोद में अच्छे से बैठ गई। मैंने उसके पेट को पकड़कर उसे संभाला। धीरे-धीरे मेरे हाथ ऊपर चढ़ने लगे और उसकी संतरे जैसी नरम चुचियां मेरे हाथ में आ गईं।
बस की हरकत से लोग आगे-पीछे हो रहे थे। ब्रेक लगने पर मेरी हथेली उसकी चुचियों पर दब जाती। शुरू में रिंकी को लगा कि बस की वजह से ऐसा हो रहा है लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा कि मैं जानबूझकर उसकी चुचियों को मसल रहा हूं। “चाचा…” उसने फुसफुसाते हुए कहा लेकिन मैंने नींद का बहाना बनाकर चुप रहने का इशारा किया।
उसी बीच मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। रिंकी की चौड़ी गांड के बीच में मेरा लंड दब रहा था और उसे भी महसूस हो रहा था। वह थोड़ा हिली-डुली लेकिन मेरे फैले पैरों के बीच में फंस गई। अब मेरे हाथ उसके पेट से ऊपर चुचियों पर रुक गए। मैंने हल्के-हल्के मसलना शुरू किया।
रात के करीब 1 बज गए। सब गहरी नींद में थे। मैंने उसके कंधे से मुंह उसके गाल के पास ले जाकर हल्का सा चूमा। उसने अपना गाल आगे कर दिया। मैंने उसके गाल पर कई चुंबन किए और धीरे से उसके होंठों पर पहुंच गया। उसने आंखें बंद कर लीं और मेरे साथ होंठ सटाने लगी।
हम दोनों की नजरें एक-दूसरे से नहीं हट रही थीं। उसकी आंखों में शर्म, डर और उत्तेजना तीनों थे। मैंने धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, “रिंकी, नाड़ा थोड़ा ढीला कर दो… कोई नहीं देख रहा।” उसने नर्वस नजरों से इधर-उधर देखा, फिर भाभी की तरफ देखकर पुष्टि की कि वो सो रही हैं। उसने बहुत धीरे से अपना दुपट्टा और बेहतर से फैलाया और सलवार का नाड़ा ढीला कर दिया।
मैंने अपनी पैंट का बटन खोलकर लंड बाहर निकाल लिया। रिंकी ने अपनी गांड थोड़ी सी ऊपर उठाई, बस की हरकत में छुपाकर। मैंने उसकी पेंटी का कपड़ा एक तरफ सरका दिया और अपना मोटा लंड उसकी चूत के गीले मुंह पर सेट कर दिया। उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। उसने होंठ काट लिए और मेरी आंखों में देखकर हल्का सिर हिलाया।
धीरे-धीरे वह नीचे आने लगी। मेरी सुपारी उसके टाइट छेद में दबाव डाल रही थी। उसका चेहरा तन गया, भौंहें सिकुड़ गईं और आंखें भींच लीं। “उफ्फ…” बहुत धीमी, दबी हुई सांस निकली उसके मुंह से। मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर हल्का दबाया कि धीरे रहो।
थोड़ा और दबाव डाला तो मेरी सुपारी अंदर घुस गई। रिंकी ने अपने निचले होंठ को जोर से काट लिया, आंखें बंद हो गईं और सिर थोड़ा पीछे झुक गया। उसकी सांसें तेज और गर्म हो रही थीं। मैं ऊपर से हल्के-हल्के धक्के दे रहा था जबकि वह धीरे-धीरे अपनी गांड नीचे कर रही थी।
पूरा लंड जब अंदर चला गया तो उसकी आंखें खुलीं। उसने मेरी आंखों में गहरी नजर डाली। उसकी पुतलियां फैली हुई थीं, गाल लाल हो गए थे और होंठ थोड़े खुले हुए थे। हम दोनों बस की हरकत के साथ बहुत धीरे-धीरे हिल रहे थे। मैं ऊपर से छोटे-छोटे धक्के दे रहा था और वह अपनी गांड को हल्का-हल्का आगे-पीछे कर रही थी।
उसकी चूत मेरे लंड को बहुत कसकर पकड़े हुए थी। हर छोटे मूवमेंट पर उसका चेहरा बदल जाता। कभी आंखें बंद हो जातीं, कभी मेरी आंखों में देखकर रह जातीं। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मजा आ रहा है ना?” उसने सिर्फ सिर हिलाकर हां कहा, बिना आवाज निकाले।
हम दोनों बहुत सावधानी से कर रहे थे। भाभी बिल्कुल बगल में सो रही थीं। रिंकी ने अपना दुपट्टा और भी अच्छे से फैला रखा था ताकि कुछ भी दिखे नहीं। मैंने उसके समीज के अंदर हाथ डालकर चुचियों को हल्के-हल्के मसलना जारी रखा। निप्पल को उंगलियों से दबाते ही उसका शरीर कांप गया और उसने मेरी जांघ को जोर से पकड़ लिया।
करीब 25-30 मिनट तक हम इसी तरह धीरे-धीरे चुदाई करते रहे। उसकी सांसें और तेज हो गईं। उसका चेहरा पसीने से भीग गया था। आंखें आधी बंद, होंठ कटे हुए। अचानक उसका पूरा शरीर सख्त हो गया, उसने मेरी शर्ट को मुट्ठी में भींच लिया और चेहरा मेरे कंधे में छुपा लिया। उसकी चूत मेरे लंड को बार-बार सिकोड़ रही थी।
मैं भी अपने आखिरी पलों में पहुंच गया था। मैंने जल्दी से लंड बाहर निकाला और उसके जांघ के ऊपर सारा गर्म माल छोड़ दिया। रिंकी अभी भी कांप रही थी। हम दोनों ने कुछ देर ऐसे ही एक-दूसरे को पकड़े रहे। फिर उसने पेंटी और सलवार को सही किया और पहले वाली पोजीशन में बैठ गई।
जैसे ही भाभी जागीं, रिंकी ने पहले वाली पोजीशन बना ली। भाभी को कुछ पता नहीं चला कि उनकी बेटी की वर्जिन चूत की सील मैंने बस में ही तोड़ दी।
अब मैं दिल्ली लौट आया हूं लेकिन रिंकी अभी गांव में है। रोज उस रात को याद करके मुठ मारता हूं। इंतजार है कब वो दिल्ली आए और मैं फिर से उसे चोद सकूं। अगर ऐसा हुआ तो आपको जरूर बताऊंगा।
दोस्तों, आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी?
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