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भाई ने बहन को गेंहू के खेत में चोदा

Behan chudai sex story, Khet mein sex story, Bhai behan sex story: आज मैं अपनी बहन की कहानी सुनाने जा रहा हूं, कैसे अपनी बहन को मैंने खेत में चोदा, वो पूरी कहानी आपको सुना रहा हूं, जिसमें हर पल की गर्माहट और उत्तेजना महसूस होगी, जैसे ठंडी हवा में शरीर की सिहरन और चूत की नमी का स्पर्श। चोदना तो नहीं चाहता था, पर हालात ही ऐसे बन गए थे कि मुझे खुद ही अपनी बहन को चोदना पड़ा, गुस्से और वासना की आग में जलते हुए, जहां हर सांस में उसकी खुशबू घुली हुई थी। अब मैं कहानी पर आता हूं।

मेरी बहन का नाम जन्नत है, मेरा नाम अयान है, मैं मध्य प्रदेश का रहने वाला हूं, जहां गांव की हरी-भरी खेतियां और ठंडी हवाएं हर किसी को मदहोश कर देती हैं। मेरी बहन जो कि अठारह साल की है, वो लड़कों में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट लेती है, उसके शरीर की हर अदा में एक आकर्षण है, जैसे उसकी कमर की मटक और आंखों की चमक हर लड़के को खींचती है। जब से जवान हुई है, तब से उसने हम परिवार वालों का जीना हराम कर रखा है, कभी किसी लड़के के साथ, कभी किसी के साथ, रातों को चुपके से मिलना और सुबह चेहरे पर वो संतुष्टि की लाली। यहां तक कि मेरे रिश्तेदारों में शायद ही कोई होगा, जिसने मेरी बहन की चूत न फाड़ी हो, वो हर बार नए स्पर्श की तलाश में रहती है, जैसे उसकी चूत की गर्मी कभी ठंडी न पड़ती हो।

यानी मेरी बहन एक नंबर की चुड़क्कड़ है, और चूत की गर्मी शांत नहीं होती है, वो गर्मी जो उसके शरीर से निकलती है, जैसे आग की लपटें जो छूने वाले को जला देती हैं। इसलिए वो हर बार नए-नए लड़के को फंसाती है, और फिर घर से बाहर उससे मिलती है, जहां खेतों की गोद में वो अपनी वासना की आग बुझाती है। यही हुआ एक जनवरी के दिन, एक जनवरी को, यानी नए साल पर, वो अपने नए आशिक सिद्धार्थ के साथ सेटिंग की, और खेत में मिलने के लिए बुलाया, जहां शाम की ढलती रोशनी और ठंडी हवा ने माहौल को और कामुक बना दिया।

मुझे ये बात उसके मोबाइल के व्हाट्सएप चैट से मालूम हो गया था, अब वो बाथरूम गई थी, तभी उसका मैंने फोन चेक कर लिया, और उन मैसेजेस में लिखी हर गंदी बात ने मेरे अंदर एक अजीब सी जलन पैदा कर दी। शाम को करीब छह बजे वो सिद्धार्थ को मिलने बुलाई थी, मुझे लगा कि आज ही अपनी बहन को रंगे हाथों पकड़ूंगा, और फिर उसका ये छिनालपन दूर होगा, लेकिन कहीं न कहीं मेरे मन में भी एक उत्सुकता थी कि वो क्या कर रही होगी।

घर से वो साढ़े पांच बजे ही निकल गई, और घर में अब्बू और अम्मी को बोली कि मैं अपनी दोस्त के यहां जा रही हूं, उसका जन्मदिन है, अम्मी अब्बू भी जाने के लिए बोल दिए, उनको लगा कि लड़की का बर्थडे है तो कोई दिक्कत नहीं है, और भी सहेलियां हैं तो कोई दिक्कत भी नहीं है, लेकिन उनकी आंखों में वो मासूमियत थी जो झूठ को छिपा रही थी।

पर मुझे तो पता था, आखिर क्या बात थी और वो कहां जा रही है, वो तो अपनी चूत की गर्मी शांत करने जा रही है, वो गर्मी जो उसके कदमों को तेज कर रही थी, और मैं उसके पीछे-पीछे निकल गया, दिल की धड़कनें तेज होती हुईं, जैसे कुछ अनजाना होने वाला हो। मैं उसके बताए जगह पर पहुंचा तो कोई था नहीं, अंधेरा भी होने को था, तो कुछ साफ-साफ दिखाई नहीं दे रहा था, चारों तरफ गेंहू की बालियां हवा में लहरा रही थीं, और दूर से कोई हल्की सी आवाजें आ रही थीं।

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मुझे लगा कि कहीं और चली गई है, तभी गेंहू के खेत से आह आह आह, और जोर से, और जोर से, और जोर से की आवाज आने लगी थी, ये आवाज मेरी बहन की थी, जो कामुक सिसकारियों से भरी हुई थी, जैसे हर आह में उसकी वासना की गहराई छिपी हो। मैं तुरंत ही दौड़कर करीब पहुंचा तो देखा मेरी बहन नीचे लेटी है, अपना सलवार खोलकर मेड़ पर रख दिया और खेत में दोनों पैर फैलाए ऊपर की हुई थी, और वो लड़का अपना पैंट खोले हुए था और जोर-जोर से धक्के दे रहा था, और चूचियां मसल रहा था, उसकी चूचियां हवा में उछल रही थीं, और पसीने की बूंदें उनके शरीर पर चमक रही थीं। मैं जैसे ही करीब पहुंचा, वो भाग खड़ा हुआ, मैं उसके पीछे दौड़ा, पर वो निकल गया, मेरे दिल में गुस्सा और एक अजीब सी जलन थी।

मैं वापस आया तो उस समय मेरी बहन पैंटी पहन रही थी, और सलवार वही पर रखा था, उसकी सांसें तेज चल रही थीं, और चेहरे पर अधूरी वासना की लाली थी। मैं तुरंत ही उसके बाल पकड़कर बोला, क्यों रे छिनार, बहुत मजे लेती है, किस-किस ने तुमको नहीं चोदा? तुम इतनी हरामी कैसे निकल गई, तुम तो खुले आम रंडीपन कर रही है, तेरी ये हरकतें देखकर मेरा खून खौल रहा है।

कभी किसी से चुदवाती है, कभी किसी से, आखिर तेरी चूत की गर्मी कम क्यों नहीं होती है, वो गर्मी जो तेरे शरीर से निकल रही है, जैसे आग की भट्टी जल रही हो। अगर इतनी ही आग लगी हुई है तुम्हारी चूत में, तो बोल, तेरी चूत में लंड पेल देता हूं ताकि तेरी लंड की प्यास बुझ जाए, जब हरेक से चुदवा ही रही है, तो अपने भाई से ही मरवा ले गांड और चूत, मैंने गुस्से में ये शब्द कहे, लेकिन मेरे लंड में एक सिहरन दौड़ गई।

तो मेरी बहन बोली, “हां मैं रंडी हूं, हां मैं चुड़क्कड़ हूं, हां मुझे लंड चाहिए, हां मुझे चुदाई की गर्मी है, चोद ना मुझे, तू ही शांत कर दे मेरी गर्मी,” उसकी आंखों में चुनौती और वासना की चमक थी, जैसे वो मुझे उकसा रही हो। मैं भी गुस्से में था, तुरंत ही पटक दिया खेत में और पैंटी उतार दी, उसकी चूत पर हल्के बाल थे, और वो गीली होकर चमक रही थी, गर्म रस की महक हवा में फैल रही थी, मैंने पहले उसके शरीर को छुआ, उसके पेट पर हाथ फेरा, नीचे की तरफ सरकाते हुए, उसकी चिकनी जांघों को सहलाया, अंदरूनी हिस्से पर उंगलियां फिराते हुए, वो सिहर उठी, उसकी सांसें और तेज हो गईं, “आह… अयान, छू ना मुझे और, तेरे हाथ इतने गर्म लग रहे हैं,” मैंने अपनी उंगलियां उसकी चूत के होंठों पर फेरनी शुरू की, धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करते हुए, क्लिट को हल्के से दबाते हुए, वो कराह उठी, “ओओह्ह… हां, वहां… आआह्ह, कितना अच्छा लग रहा है,” उसका रस मेरी उंगलियों पर लग रहा था, गर्म और चिपचिपा, मैंने क्लिट को गोल-गोल घुमाया, धीरे-धीरे दबाव बढ़ाते हुए, वो अपनी कमर हिलाने लगी, “उउउफ्फ… भाई, और तेज… इह्ह, मुझे और चाहिए,” फिर मैंने एक उंगली उसकी चूत के छेद पर रखी, धीरे से अंदर सरकाई, गर्मी और नमी महसूस करते हुए, अंदर-बाहर करने लगा, वो अपनी टांगें और फैलाने लगी, “आआह्ह… ह्ह्ह्ह… ओओह्ह… तेरी उंगली कितनी गहरी जा रही है,” फिर दूसरी उंगली जोड़ी, अब दो उंगलियां अंदर-बाहर करते हुए, तेजी से, उसकी चूत की दीवारों को सहलाते हुए, फोरप्ले में उसकी गर्मी को और भड़काते हुए, वो सिसकारियां भर रही थी, “आआह्ह… ह्ह्ह्ह… ओओह्ह… तेरी उंगलियां जादू कर रही हैं, मुझे पागल कर रही हैं,” मैंने उसके होंठों को चूमा, धीरे से काटते हुए, जीभ से जीभ मिलाई, गहरा किस करते हुए, उसके मुंह की मिठास चखते हुए, उसके होंठों का रस चूसते हुए, फिर नीचे आया, उसके गले पर किस किया, चाटते हुए, चूचियों तक पहुंचा, एक चूची को मुंह में लिया, जीभ से निप्पल को चाटते हुए, चूसते हुए, जीभ से निप्पल घुमाते हुए, दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए, निप्पल को उंगलियों से खींचते हुए, वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी, खींच रही थी, “चूस ले भाई, काट ले इन्हें, आआह्ह… मजा आ रहा है, तेरे मुंह की गर्मी मुझे जला रही है,” उसकी सांसें तेज हो रही थीं, शरीर पसीने से चिपचिपा, खेत की मिट्टी की खुशबू और उसकी वासना की गंध मिलकर माहौल को मदहोश कर रही थी, मैंने चूचियों को और जोर से चूसा, निप्पल्स को दांतों से हल्के से काटा, वो चिल्लाई, “आआह्ह… हां, ऐसे ही,” उसके बाद अपना लंड निकाला, जो पहले से ही खड़ा हो चुका था, गुस्से और उत्तेजना से सात इंच का हो गया था, मोटा और सख्त, नसें फूली हुईं, मैंने उसे छुआ, गर्म महसूस किया, फिर चूत पर लगा कर पहले धीरे से टिप को रगड़ा, उसकी चूत के होंठों पर ऊपर-नीचे फिसलाते हुए, रस से चिकना करते हुए, वो बोली, “डाल ना अंदर, सहन नहीं हो रहा, मुझे तेरे लंड की जरूरत है,” फिर मैंने धीरे से टिप अंदर सरकाया, चूत की गर्मी महसूस करते हुए, फिर जोर से घुसाया, पूरा लंड एक झटके में अंदर।

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मेरी बहन की चूत पहले से ही गीली थी, सिद्धार्थ के चोदने से रस बह रहा था, इसलिए जल्दी ही लंड अंदर चला गया, लेकिन वो चीखी, “आआह्ह… अयान, धीरे… तेरा लंड बहुत मोटा है,” चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं, गर्म और टाइट, जैसे हर इंच को निचोड़ रही हो। मैंने कोई परवाह नहीं की, तुरंत ही उसके चूचियों को पकड़ लिया, जो 34 साइज की गोल-गोल थीं, और मसलने लगा, निप्पल्स को उंगलियों से दबाते हुए, उनकी सख्ती महसूस करते हुए, चूचियां मेरे हाथों में नरम लग रही थीं, मैंने उन्हें जोर से दबाया। जोर-जोर से धक्के देने लगा, पहले धीरे-धीरे, लंड को आधा बाहर निकालकर फिर अंदर घुसाते हुए, हर धक्के के साथ फच-फच की आवाज आ रही थी, और वो कराह रही थी, “उउउफ्फ… आह… हां भाई, चोद मुझे जोर से,” उसकी चूत का रस मेरे लंड पर लग रहा था, गर्म और स्लिपरी, मैंने स्पीड बढ़ाई, अब पूरा लंड बाहर निकालकर जोर से अंदर डालते हुए, हर थ्रस्ट में उसकी चूत की गहराई छूते हुए।

मेरी बहन भी जोश में आ गई, उसने स्वेटर उतार दी, अपनी कमीज़ भी उतार दी, ब्रा खोल दिया, टांगें ठीक से फैला ली, अब वो पूरी तरह नंगी हो गई थी, खेत की ठंडी हवा में उसके निप्पल्स सख्त हो गए थे, और शरीर पर ठंड से रोएं खड़े हो गए थे, उसकी त्वचा पर ठंडी हवा की सिहरन महसूस हो रही थी। मैं उसको चूसने लगा, कभी होंठों को काटते हुए, जीभ से चाटते हुए, कभी बूब्स को मुंह में लेकर चूसते हुए, जीभ से निप्पल्स को घुमाते हुए, और वो सिसकारियां भर रही थी, “ओओह्ह… अयान, चूस ले मेरे बूब्स, काट ले इन्हें, आआह्ह… ह्ह्ह्ह… इतना मजा कभी नहीं आया,” उसकी सांसों की गर्मी मेरे चेहरे पर लग रही थी, मैंने उसके होंठों को फिर चूसा, धक्के देते हुए।

मैंने अपना पैंट नीचे सरका दिया, शर्ट उतार दी, अब हम दोनों नंगे थे, खेत की मिट्टी पर लेटे हुए, गेंहू की बालियां हमारे शरीर को गुदगुदा रही थीं, जैसे हर स्पर्श में एक नई उत्तेजना, मिट्टी की नमी हमारी पीठ पर लग रही थी। मैंने धक्के तेज कर दिए, हर थ्रस्ट के साथ उसकी चूत टाइट हो रही थी, रस बह रहा था, और वो बोली, “भाई, तेरे लंड ने मेरी चूत फाड़ दी, आआह्ह… इह्ह… ओओह्ह… और जोर से, मुझे रंडी बना ले,” मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया, मिशनरी पोजीशन में गहराई तक घुसाते हुए, अब लंड और गहरा जा रहा था, हर धक्के में उसकी चूत की दीवारों को रगड़ते हुए, और वो अपनी गांड उठा-उठाकर गोल-गोल घुमाने लगी, चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं, हर मूवमेंट में एक नई सेंसेशन, मैंने स्पीड बढ़ाई, पसीना हमारे शरीर पर बह रहा था।

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वो कहने लगी, “जोर से, जोर से, और जोर से, मार मेरी चूत, और जोर से, आआह्ह… ह्ह्ह्ह… आऊऊ… ऊऊ… ऊई… उईईई… बहुत अच्छा लग रहा है, भाई तू ही मेरी प्यास बुझा,” मैं जोर-जोर से चोदने लगा, मेरे पसीने की बूंदें उसकी छाती पर गिर रही थीं, मैंने उसके निप्पल्स को चुटकी में दबाया, खींचा, और वो चिल्लाई, “आआह्ह… हां, ऐसे ही, मुझे दर्द दे, मजा आ रहा है,” दर्द और मजा की वो मिली-जुली फीलिंग ने हमें और जोश दिया। करीब दस मिनट ऐसे ही चोदने के बाद, मैंने उसे धीरे से घुमाया, पहले साइड में लिटाया, फिर घुटनों पर उठाया, अब वो डॉगी स्टाइल में थी, गांड ऊपर करके, उसकी गांड की गोलाई चमक रही थी, मैंने पीछे से पहले लंड को चूत पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर डाला, हाथ से उसकी कमर पकड़ी, और तेज-तेज धक्के देने लगा, फट-फट की आवाज गूंज रही थी, हर धक्के में लंड पीछे से गहरा घुस रहा था, उसकी गांड पर मेरी जांघें टकरा रही थीं, और वो कराह रही थी, “ओओह्ह… भाई, पीछे से कितना गहरा जा रहा है, आआह्ह… इह्ह… मुझे चोदते रहो,” उसकी गांड की गोलाई को थपथपाते हुए, मैंने बाल पकड़े, धीरे से खींचते हुए चोदा, स्पीड बढ़ाते हुए, और वो बोली, “हां, मैं तेरी रंडी हूं, चोद मुझे जैसे चाहे,” फिर मैंने उसे धीरे से उठाया, खुद लेट गया, उसे ऊपर बिठाया, काउगर्ल पोजीशन में, वो मेरे लंड पर पहले धीरे से बैठी, लंड को चूत में समाती हुई, फिर उछलने लगी, उसके बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे, मैंने उन्हें पकड़कर मसला, निप्पल्स दबाए, और वो सिसकारी, “आआह्ह… ऊऊ… ओओह्ह… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया, भाई,” हम दोनों पसीने से तर थे, खेत की महक और हमारे शरीर की गंध मिल गई थी, मैंने उसके क्लिट को उंगली से रगड़ा, गोल-गोल घुमाते हुए, और वो झटके खाने लगी, “उउउफ्फ… हां, वहां रगड़, मैं झड़ने वाली हूं,” उसकी चूत सिकुड़ने लगी, रस और बहने लगा, वो तेज उछलने लगी।

करीब आधे घंटे तक उसे खूब चोदा, हर पोजीशन में ट्राई किया, मिशनरी से डॉगी, फिर काउगर्ल, साइड से, उसकी चूत लाल हो गई थी, रस से चिपचिपी, और जब वो शांत हुई, चरम पर पहुंचकर चिल्लाई, “आआह्ह… मैं गई… ओओह्ह… ह्ह्ह्ह…,” उसकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी, तब मैंने अपना माल उसकी चूत में डाला, गर्म वीर्य की धारें भरते हुए, एक-एक स्पर्ट में, और हम दोनों हांफते हुए लेट गए, शरीर की थकान और संतुष्टि की लहरें महसूस करते हुए। उस दिन के बाद मैं अब अपनी बहन को रोजाना चोद रहा हूं, मैं भी खुश, वो भी खुश, घर का माल घर में।

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