पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया

हाय दोस्तो, मैं रानी हूँ, मेरी उम्र 20 साल है मेरा रंग गोरा है और लंबे बाल हैं। मेरे होंठ पतले हैं और ऊपर के होंठ के दाहिनी ओर एक तिल है। मेरी सहेलियां कहती हैं कि उस तिल से मेरी सुंदरता में चार चाँद लग गए हैं।

मेरे चूचे अभी 36 इन्च के हो गए हैं। मेरी कमर 32 इन्च की है और मेरे चूतड़ बहुत ज़्यादा बाहर को आ गए हैं।

क्या करूँ सभी मेरी गाण्ड में ही लौड़ा डालने को मरते हैं, इसलिए मेरी गाण्ड उभर कर बाहर को आ गई है।

आज मेरी ये हालत है कि मेरी चूत और गाण्ड में गधे का लौड़ा भी घुस जाए क्योंकि वक़्त और हालत ने मुझे इतनी बड़ी चुदक्कड़ बना दिया है कि मैं आपको क्या बताऊँ।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

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मैं एक सीधी-सादी लड़की थी पर जब आप कहानी पढ़ेगे तो सब जान जाएंगे कि कैसे हवस के पुजारियों ने मेरी जिंदगी बर्बाद की है।

अब आपको ज़्यादा बोर नहीं करूँगी, चलो सीधे मेरी बर्बादी की दास्तान आपको सुनाती हूँ।

यह बात 14 जून 2006 की है, जब मैं कमसिन थी, मेरे पापा की बीमारी के कारण मौत हो गई थी तो माँ एकदम टूट सी गई थीं।
उनका बस मैं ही अकेली सहारा थी।
इस हादसे ने हमारी जिंदगी बदल थी, पैसों की तंगी रहने लगी थी, तब हमारे दूर के रिश्तेदारों ने माँ पर दबाव डाला कि वो दूसरी शादी कर लें। मगर माँ न मानी, मगर वक़्त के साथ माँ भी टूट गईं और आख़िर एक साल बाद माँ ने दूसरी शादी कर ली।

मेरे नए सौतेले पापा शराबी थे, उनके दो बेटे थे जो करीब मेरी ही उम्र के थे या शायद मुझसे थोड़े बड़े थे।

शुरू में तो सब ठीक तक चलता रहा मगर साल भर में ही पापा माँ को मारने लगे और वे मुझे भी पसन्द नहीं करते थे सो मेरी पढ़ाई भी बन्द हो गई थी।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मेरे दोनों भाई भी हमेशा मुझे मारते रहते थे, घर का सारा काम हम माँ-बेटी मिल कर करती थे और धीरे-धीरे माँ टूट सी गई और बीमार रहने लगी।
आख़िरकार 12 फरवरी 2010 को माँ भी मुझे छोड़ कर चली गईं। अब तो मुझ पर ज़ुल्म बढ़ने लगे। मैं भी धीरे-धीरे इनकी मार की आदी हो गई।

सॉरी दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि यह तो पका रही है, मगर क्या करूँ ये सब कुछ सत्य है और आपको इसके बारे में बताना जरूरी भी है।

अब आपको मेरी चुदाई की कहानी बताती हूँ।

8 सितम्बर 2010 को मेरा जन्मदिन था अब कौन मेरा जन्मदिन मनाता, कहाँ नए कपड़े थे, कहाँ पार्टी थी और कहाँ प्यार.. बस मैं काम में पिस रही थी।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

उस दिन तक मैं पूरी जवान हो गई थी। मेरे सीने के उभार दिखने लगे थे। मेरा सौतेला भाई अजय जो 18 साल का था, अक्सर मुझे मारने के बहाने मेरे चूतड़ों को दबा देता तो कभी मेरे सीने पर हाथ रख देता था।

दोपहर को मैं छत से कपड़े उतारने गई तो अजय वहाँ आ गया और मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। उस वक़्त मैंने एक पुरानी सी सलवार-कमीज़ पहनी हुई थी, दुपट्टा मैंने एक तरफ रख दिया था।
आपको बता दूँ मैं हमेशा दुपट्टा ही अपने सीने पर रखती हूँ।

अजय- अरे रानी, आज ये दुपट्टा तूने एक तरफ क्यों रखा है नहीं तो इसके बिना तू रहती ही नहीं है?

रानी- वो क्या है ना भाई, आज मुझे गर्मी लग रही है इसलिए मैंने सोचा छत पर हवा अच्छी आ रही है, थोड़ी हवा खा लूँ।

अजय- अरे मेरी रानी, बहना आज तो मस्त लग रही हो आओ आज तुम्हें एक चीज दिखाता हूँ।

अजय ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे घूरने लगा।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैं घूम गई। तभी वो मेरे पीछे चिपक गया।

रानी- भाई क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे प्लीज़…

मैंने उसको हटाने की लाख कोशिश की, मगर वो माना नहीं और छत पर बने कमरे में मुझे जबरदस्ती ले गया।
वहाँ वो मेरे होंठ चूसने लगा और एक हाथ से मेरी गाण्ड सहलाने लगा।

मैं छटपटा रही थी मगर वो मेरी एक ना सुन रहा था इतने में विजय जो मेरा बड़ा भाई है, वो आ गया, वो करीब 20 साल का था।

विजय- क्या हो रहा है यहाँ?

अजय- क.. क.. कुछ नहीं भाई.. देखो ये रानी है.. मुझसे चिपक रही है.. पता नहीं क्या चाहती है?

रानी- न.. न.. नहीं भाई.. अजय झूठ बोल रहा है।

अजय ने झट से मुझे एक थप्पड़ मारा।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

अजय- चुप साली मुझे झूठा बोलती है.. भाई इसने खुद ही मुझे यहाँ बुलाया और मुझसे चिपक गई। मुझसे बोल रही है, मुझे गर्मी लग रही है।

विजय ने मुझसे पूछा- क्या अजय सही बोल रहा है?

रानी- वो तो दुपट्टे की बात पर मैंने कहा था, मगर मेरा मतलब ऐसा कुछ नहीं था।

विजय- अच्छा यह बात है साली छिनाल हमने सोचा तू जैसी भी है हमारी बहन है.. तुझे खाना देते हैं मगर तू तो पता नहीं किसका गंदा खून है.. रुक आज मैं तेरी सारी गर्मी निकाल दूँगा और तेरे सारे मतलब पूरे कर दूँगा।

रानी- भाई प्लीज़.. मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो…पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था
पर असल में तो मैं सब समझ रही थी कि ये दोनों भाई मुझे चोदने के ख्याल से यह नौटंकी कर रहे हैं। जवान तो मैं भी हो चुकी थी, मेरे बदन में भी वासना की अग्नि तो उठती ही रहती थी, कहीं मेरे अन्तर्मन में भी कुछ तमन्ना थी नर-नारी के तन के मिलन का मज़ा लेने की, पर मैंने विरोध तो करना ही था ना अपने सौतेले भाइयों की हरकतों का।

अजय वहाँ खड़ा मुस्कुरा रहा था और विजय से नजरें चुरा कर मुझे चिढ़ा रहा था।

विजय- अजय तू नीचे जा और ऊपर मत आना.. आज मैं इसको बताता हूँ कि मैं क्या चीज हूँ।

अजय वहाँ से चला गया और विजय ने मुझे कपड़े निकालने को कहा।

मेरे मना करने पर विजय ने मेरे कपड़े फाड़ दिए। मैं एकदम नंगी हो गई क्योंकि उस वक़्त मुझे कौन ब्रा-पैन्टी लाकर देता.. बस पुराने कपड़े ही नसीब में थे।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

अब मैं एकदम नंगी दीवार के पास खड़ी थी, मेरे बेदाग गोरे बदन को देख कर भाई की आँखों में चमक आ गई थी।

मेरे मम्मे उस वक्त कोई 28 इन्च के रहे होंगे।
भाई की पैन्ट में तंबू बन गया था, उनका लौड़ा मेरे जिस्म को देख कर फुंफकार मार रहा था।

विजय- वाह.. साली तू तो बड़ी ‘हॉट-आइटम’ है.. तभी तुझमें गर्मी ज़्यादा है.. आजा आज तेरी सारी गर्मी निकाल देता हूँ।

रानी- नहीं भाई.. प्लीज़ मुझे जाने दो.. मैं आपकी बहन हूँ प्लीज़…पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

विजय- चुप साली.. छिनाल की औलाद.. तू कहाँ से मेरी बहन हो गई.. हाँ.. आज तुझे अपनी बीवी जरूर बनाऊँगा।

इतना बोलकर भाई मुझ पर टूट पड़ा। मेरे होंठों को चूसने लगा, मेरे मम्मों को दबाने लगा। मुझे बहुत दर्द हो रहा था मगर उस पर भूत सवार था, वो कहाँ मानने वाला था। मैंने उससे छूटने की कोशिश की, उसको गुस्सा आ गया और वो मेरे गाल पर थप्पड़ मारने लगा।

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विजय- क्या हुआ.. साली अब आया समझ में.. कुतिया बहुत नाटक कर रही थी।

इतना बोल कर भाई अपने कपड़े निकालने लगा। धीरे-धीरे वो पूरा नंगा हो गया, उसका 6 इन्च का लौड़ा एकदम तना हुआ मेरी आँखों के सामने लहरा रहा था।

मैं घबरा गई और जल्दी से पलट गई यानि पेट के बल लेट गई।

विजय- अरे वाह.. तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. साली आज इसी का मुहूर्त करूँगा।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

इतना बोलकर वो बिस्तर पर चढ़ गया और मेरे मम्मे दबाने लगा, अपनी ऊँगली से मेरी गाण्ड के छेद को खोलने लगा।

मैं थोड़ी कसमसाई तो उसने ज़ोर से मेरी गाण्ड पर मार दिया, मैं दर्द के कारण सिहर गई।

अब मुझे समझ आ गया था कि यह हरामी मुझे पीछे से ही चोदने वाला है, इसकी मार खाने से अच्छा है अब चुपचाप पड़ी रहूँ।

भाई ने काफ़ी देर मेरे चूतड़ सहलाए अब मैं चुप पड़ी थी उसने अपने लौड़े पर ढेर सारा थूक लगाया और मेरे छेद पर भी थूक लगाया।

विजय- हाँ.. अब आई ना लाइन पर बस ऐसे ही चुपचाप पड़ी रह.. नहीं तो मार खाएगी.. आहह.. क्या मस्त गाण्ड है। अब अपना बदन ढीला छोड़ दे.. मैं लौड़ा डाल रहा हूँ अगर जरा भी हिली ना तो तेरी खैर नहीं…

भाई ने लंड की टोपी गाण्ड के छेद पर रखी और ज़ोर से एक धक्का मारा.. एक ही बार में आधा लौड़ा मेरी गाण्ड को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

रानी- आआ.. उईईई माआ..मर गई.. आआआ आह.. भाई आह.. मेरी जान निकल रही है.. आह निकाल.. लो..

विजय कहाँ मानने वाला था उसने एक और जोरदार झटका मारा अबकी बार पूरा लौड़ा मेरी गाण्ड की गहराइयों मैं खो गया और मेरा दर्द के मारे बुरा हाल हो गया।

मैं चीखती रही वो झटके मारता रहा.. मज़ा लेता रहा।
विजय- आ उह..साली तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. आह मज़ा आ गया उह ले आह उह उह उफ़ क्या कसी गाण्ड है.. आह आह आह…

मैं चिल्लाती रही.. 20 मिनट तक वो मेरी गाण्ड मारता रहा और आख़िरकार उसके लौड़े ने लावा उगल दिया, जो मेरी गाण्ड के कोने-कोने में समा गया। दो मिनट तक विजय मेरे ऊपर पड़ा रहा, उसके बाद एक तरफ लेट गया।

मैं वैसी की वैसी पड़ी रही, उसका वीर्य मेरी गाण्ड से बह कर बाहर आ रहा था।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मेरी गाण्ड में अब भी ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई मोटा डंडा घुसा हुआ हो, बड़ी जलन हो रही थी।
विजय उठा और मेरे कपड़ों से अपना लौड़ा साफ किया अपने कपड़े पहनने लगा।

विजय- साली बड़ी कमाल की गाण्ड है तेरी.. मुझे अभी कहीं जाना है.. नहीं तो तेरी और ठुकाई करता। अब ध्यान से सुन अगर किसी को ये बात बताई ना.. तो तेरा वो हाल करूँगा कि ज़िंदगी भर पछताएगी समझी।

विजय वहाँ से चला गया और मैं वैसे ही पड़ी रोती रही कोई 5 मिनट बाद अजय अन्दर आया।

अजय- हरामजादी.. अगर मेरी बात मान लेती तो तेरा ये हाल ना होता.. अब फट गई ना तेरी गाण्ड.. साली कुतिया भाई का लौड़ा लेकर मज़ा नहीं आया तो अब मेरा लेकर देख.. शायद तुझे मज़ा आ जाए।

इतना बोलकर वो भी नंगा हो गया, उसका भी लौड़ा 6 इन्च का ही था, पर विजय के लौड़े से ज़रा मोटा था। मेरी कहाँ हिम्मत बची थी उसको रोकने की, वो भी मुझ पर सवार हो गया और एक ही झटके में पूरा लौड़ा मेरी खुली हुई गाण्ड में घुसा दिया।

मैं फिर दर्द से कराहने लगी और वो मेरी गाण्ड मारता रहा, मज़े लेता रहा।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

अजय- आहह.. आह.. मज़ा आ गया.. साली तेरी गाण्ड में तो बड़ी गर्मी है.. आहह.. साला लौड़ा बर्दाश्त ही नहीं कर पा रहा आहह.. जल्दी ही पानी छोड़ देगा.. आहह.. मन तो तेरी चूत की सील तोड़ने का है.. मगर डर है कहीं साली तू मर-वर गई तो हमें मुफ़्त की नौकरानी कहाँ से मिलेगी.. आह.. उहह.. मेरा निकलने वाला ही है.. आह उहह…

करीब 7-8 मिनट में वो ठंडा हो गया और मेरी गाण्ड को पानी से भर कर चला गया।

मैं काफ़ी देर तक उसी हालत में पड़ी रही और न जाने कब मेरी आँख लग गई।

शाम को 6.30 बजे मेरी आँख खुली.. गाण्ड में अब भी दर्द था।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मैं जल्दी से उठी और गुसलखाने में चली गई, वहाँ से नहा कर कपड़े पहने।

हाँ.. एक बात मैं आपको बता दूँ.. यहाँ पड़ोस के लोग जानते हैं कि इस घर में मेरी क्या हालत है, इसी लिए बेचारे अपने बच्चों के पुराने कपड़े मुझे दे देते हैं बस मेरा गुजारा चल जाता है।

उन्हीं कपड़ों में से एक गुलाबी टी-शर्ट और नीला पजामा मैंने पहना और खाना बनाने की तैयारी में लग गई।

पापा- रानी कहाँ हो.. यहाँ आओ।

दोस्तो, मैं आपको बताना भूल गई, पापा की खुद की दुकान है, तो वो सुबह 8 बजे जाते हैं तो सीधे शाम को 7 बजे ही आते हैं और आने के साथ ही उनको खाना चाहिए।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मैं भाग कर रसोई से बाहर आई और कहा- बस 15 मिनट में खाना बन जाएगा।

पापा- हरामखोर किसी काम की नहीं है तू.. अब तक खाना नहीं बना.. इतनी देर क्या कर रही थी?

रानी- वो वो.. पापा मेरी आँख लग गई थी, इसी लिए…जरा देर हो गई।

मैं आगे कुछ बोल पाती इससे पहले पापा ने एक जोरदार तमाचा मुझे जड़ दिया।

मैं रोने लगी और अपने आप को बचाने के लिए मैंने वो बोल दिया जो शायद मुझे नहीं बोलना चाहिए था।

रानी- उउउ उउउ पापा.. प्लीज़ मेरी बात तो सुनिए.. इसमें मेरी ग़लती नहीं है.. वो वो.. विजय भाई ने मेरे साथ दोपहर को उूउउ उउउ…
पापा- क्या किया विजय ने.. हाँ.. बताओ?

रानी- उउउ.. वो वो.. उन्होंने मेरे साथ गंदा किया उउउ मेरे कपड़े निकाल कर उूउउ.. उसके बाद अजय ने भी उूउउ…
मैंने पूरी दास्तान कह दी।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मेरी बात सुनकर पापा गुस्सा हो गए और मुझे प्यार से चुप करवाया और कहा- आज आने दो दोनों को, उनकी आज खैर नहीं..

आज पहली बार पापा ने मुझसे प्यार से बात की थी, मैं खाना बनाने चली गई।

पापा अपने कमरे में चले गए, उन्होंने कपड़े बदले.. तब तक खाना भी तैयार हो गया था।

आज पापा ने मेरे साथ बैठ कर खाना खाया और मुझे भी अपने हाथ से खाना खिलाया।

खाने के बाद मैं बर्तन धोकर अपने कमरे में चली गई और बिस्तर पर लेट कर रोने लगी। मुझे माँ की बहुत याद आ रही थी, तभी पापा मेरे कमरे में आ गए।

पापा- अरे रानी.. बेटी रो क्यों रही है? उन दोनों का फ़ोन आया था किसी दोस्त की शादी में गए हैं.. कल शाम तक वापस आएँगे, अब फ़ोन पर तो उनको क्या कहता, कल आने दो उनको अच्छा सबक सिखाऊँगा.. तू मेरे कमरे में आ.. कुछ बात पूछनी है।

इतना बोलकर पापा चले गए, मैंने आँसू पौंछे और उनके पीछे चली गई।

पापा- आओ.. यहाँ बैठो.. मेरी रानी बेटी तू रो रही है.. क्या बहुत दर्द हो रहा है? मुझे ठीक से बता हुआ क्या था?

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रानी- पापा अब मैं कैसे बताऊँ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा।

पापा ने बहुत ज़िद की, तब मैंने उनको बताना शुरू किया कि बात कैसे शुरू हुई और मेरी गाण्ड तक कैसे पहुँची। पापा मेरे एकदम करीब चिपक कर बैठे थे, उन्होंने शराब पी हुई थी, उसकी बदबू आ रही थी।

मेरी बात को सुनते-सुनते लुँगी के ऊपर से वो अपना लौड़ा मसल रहे थे और एक हाथ से मेरी पीठ सहला रहे थे।
‘अच्छा ये बात है… कितने कमीने हैं दोनों.. अच्छा ये बता.. यहाँ ज़ोर से दबाया क्या विजय ने?’ मेरे मम्मों को सहलाते हुए पापा ने पूछा।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मेरी तो हालत खराब हो गई.. उनका छूना मेरे लिए ऐसा था जैसे किसी ने जलते हुए अंगारे मेरे मम्मों पर रख दिए हों।

रानी- पापा ये आप क्या कर रहे हो?

पापा- अरे मैं तो पूछ रहा हूँ.. अब तू ठीक से बताएगी तब ही तो पता चलेगा ना.. अब जो पूछूँ.. चुपचाप बता समझी…

इस बार पापा के तेवर एकदम बदल गए थे, उनकी आँखों में गुस्सा आ गया था और पापा का गुस्सा मैं खूब जानती थी कि अगर वो मारने पर आ गए तो हालत खराब कर देंगे।

रानी- हाँ.. पापा यहाँ ज़ोर से दबाया था, अभी भी दर्द हो रहा है।

पापा ने उनको देखने के बहाने से टी-शर्ट ऊपर कर दी, ब्रा तो थी नहीं, उनको मेरे मम्मों के दीदार हो गए।

पापा- अरे अरे.. कुत्तों ने कैसे ज़ोर से दबाए हैं तेरे छोटे-छोटे चूचे.. देखो तो कैसे लाल निशान पड़ गए हैं।

मेरे सौतेला पिता अपनी औकात दिखा रहे थे, मेरे मम्मों को हल्के-हल्के सहला रहे थे। अब पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था और उन्होंने अपनी ऊँगली चूत पर घुमा कर पूछा।

पापा- रानी.. उन दोनों ने पीछे से ही मारी.. या यहाँ भी कोई छेड़छाड़ की?

मैं एकदम कसमसा गई थी और मैंने ‘ना’ मैं सिर हिलाया।

पापा – चलो अच्छा है.. तेरी सील नहीं टूटी वरना मेरा बड़ा नुकसान हो जाता.. बेटी ये पजामा निकाल तो देखूँ तेरी गाण्ड का क्या हाल किया दोनों ने।

पापा की बात सुनकर मेरी अच्छी तरह समझ में आ गया कि ये कुत्ता मेरा बाप नहीं हवस का पुजारी है। उन दो हरामियों ने तो मेरी गाण्ड मारी थी.. ये मादरचोद मेरे चूत को फाड़ने वाला है।

रानी- नहीं पापा.. रहने दो अब दर्द कम है, मुझे जाने दो नींद आ रही है।

पापा- मैंने कहा ना.. दिखाओ कहीं कुछ उल्टा-सीधा हो गया तो..? चल खड़ी हो जा तुझे शर्म आ रही है तो मैं खुद देख लूँगा।

मैं कर भी क्या सकती थी सो चुपचाप खड़ी हो गई। पापा ने मेरा पजामा नीचे सरकाया और मेरी गोल गाण्ड पर हाथ फेरने लगे।

पापा- आह ह.. क्या कोमल गाण्ड है तेरी.. कमीनों ने कैसे मार कर लाल कर दी है.. देखो सूजन भी आ रही है.. तू पूरे कपड़े निकाल कर लेट जा.. तुझे मालिश की जरूरत है.. तभी तेरा दर्द जाएगा।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

मैं ‘ना’ भी करती तो भी पापा नहीं मानते, तो मैंने सोचा अब जो होगा देखा जाएगा.. इसी बहाने पापा मुझे प्यार से तो पेश आएँगे।

मैं चुपचाप नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई।
पापा ने पास रखी तेल की बोतल ले ली और मेरी गाण्ड पर मालिश करने लगे।
अपने हाथ चलाते-चलाते वो मेरी चूत पर भी ऊँगली घुमा देते।

वहाँ हल्की-हल्की झांटें थीं जो एकदम रुई की तरह मुलायम थीं।

रानी- आहह.. ककककक पापा उह.. गुदगुदी सी हो रही है।

पापा- अरे रानी बेटी.. ये तो शुरूआत है.. आगे देखना तुझे कितना सुकून मिलेगा.. मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इस उम्र में आकर तेरी जैसी कच्ची कली की मालिश करने का मौका मिलेगा.. रानी अगर तू मेरी बात इसी तरह मानती रहेगी ना.. तो तेरे सारे दु:ख दूर हो जाएँगे.. तुझे मैं सच्ची की रानी बना कर रखूँगा.. मानेगी ना मेरी बात?

रानी- हाँ.. पापा आपका प्यार पाने के लिए मैं आपकी हर बात मानूँगी.. मगर पापा ये गलत है.. मैं आपकी बेटी हूँ।

पापा- अरे कहाँ की बेटी.. तेरी माँ तुझे साथ लाई थी यहाँ और ऐसी कमसिन कली सामने हो तो कौन रिश्ते देखता है.. अगर तू मेरी सग़ी बेटी भी होती ना.. तो भी मैं तुझे नहीं छोड़ता.. भला हो उन दोनों का जो उन्होंने तेरी गाण्ड मार कर मेरा रास्ता आसान कर दिया, वरना मैंने तो ये कभी सोचा ही नहीं था।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

रानी- ठीक है.. पापा जैसा आपको अच्छा लगे.. अब मैं कुछ नहीं बोलूँगी।

पापा- ये हुई ना बात.. चल अब सीधी हो जा आज बरसों बाद दोबारा सुहागरात मनाऊँगा तेरे साथ.. अब तू मेरी बीवी बनकर इस घर में राज करेगी.. आज से तेरे दु:ख के दिन ख़त्म हो गए हैं।

अब मुझे किसी बात का डर नहीं था क्योंकि अगर मैं मना भी करती तो भी पापा मुझे छोड़ते नहीं, तो क्यों ना उनकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला कर कम से कम अपनी आगे की जिंदगी तो ठीक करूँ।

मैं सीधी होकर लेट गई, पापा भी एकदम नंगे हो गए, उनका लौड़ा किसी काले नाग की तरह फुंफकार मार रहा था वो करीब कोई 8 इन्च से ज़्यादा ही होगा और मोटा इतना कि मेरी हथेली में भी ना समा पाए। रानी- पापा आपका तो अजय और विजय से भी बड़ा है, उन्होंने ही इतना दर्द दिया और आप तो मेरी जान ही निकाल दोगे।

पापा- अरे रानी… बड़ा कैसे नहीं होगा.. मैं उनका बाप हूँ और तू डर मत.. वो तो नए खिलाड़ी थे, उनको क्या पता चुदाई क्या होती है.. तू बस देखती जा.. मैं तुझे कैसे सात आसमानों की सैर करवाता हूँ। वो दोनों गधे थे जो तेरी जैसी कच्ची कली की चूत का स्वाद चखने की बजाए गाण्ड से खुश हो गए। अब तुझे ऐसा चूसूंगा कि तू खुद मुझसे कहेगी कि मेरे राजा जल्दी से लौड़ा चूत में पेल दो..

रानी- हा हा हा हा.. पापा मैं आपको राजा बोलूँगी.. हा हा हा.. मैं रानी.. आप राजा.. मज़ा आएगा…

मेरी बात सुनकर पापा हँसने लगे और मेरे ऊपर आ गए, मेरे होंठ चूसने लगे।

मैं भी उनका साथ देने लगी.. बड़ा मज़ा आ रहा था।

पापा अपनी जीभ मेरे मुँह में दे रहे थे मैं उसको चूस रही थी। पापा मेरे छोटे-छोटे अमरूदों जैसे मम्मों को भी हल्के-हल्के दबा रहे थे, मुझे पता नहीं क्या हो रहा था।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

लेकिन ‘हाँ’ इतना जरूर कहूँगी कि मज़ा बहुत आ रहा था।

पापा अब मेरे चूचुकों को चूस रहे थे और अपना हाथ मेरी चूत पर घुमा रहे थे। मेरे जिस्म में न जाने कहाँ से इतनी गर्मी आ गई थी कि मेरी चूत आग की भट्टी की तरह जलने लगी थी।

रानी- आह उईईइ.. उफ़ ककक.. सस्स आह.. पापा आहह.. मज़ा आह रहा है.. आराम से पापा आह.. काटो मत दु:खता है आहह…

पापा- अरे मेरी रानी.. अब पापा नहीं.. राजा बोलो और जितने गंदे शब्द आते हैं.. सब बोलो.. उससे चुदाई का मज़ा दुगुना हो जाएगा।

रानी- आहह उईईइ मुझे नहीं समझ आहआह आह रहा है.. क्या बोल रहे हो?

पापा- सीधी सी तो बात है.. तुम मुझे गाली दो.. चूत और लंड की बात करो.. बस जो भी तुम्हें समझ आए.. आह्ह.. जैसे उहह साली रंडी आह्ह.. क्या मस्त दूध हैं तेरे.. आह आज तो तेरी चूत को भोसड़ा बना दूँगा.. आहह…

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इतना बोलकर पापा मेरी चूत चाटने लगे.. अब तो मेरा मज़ा दुगुना हो गया था.. मेरी आँखें अपने आप बन्द होने लगी थीं।

रानी- आहह ससस्स उफ़फ्फ़.. मेरे राजा आह.. मज़ा आह रहा है.. आह चाटो मेरी चूत को आह.. और ज़ोर से चाटो उफ़ आह…

पापा- ये लो मेरी रानी बिटिया.. क्यों मज़ा आया ना.. गाली निकाल साली.. और मज़ा आएगा…

रानी- आहह.. अब मज़ा आया तू एक नम्बर का कुत्ता है आह.. हरामी अपनी ही बेटी की चूत चाट रहा है.. आहह पापा आह.. मेरी चूत में कुछ हो रहा है आहह…

पापा- हा हा हा.. ये हुई ना बात.. अब तू झड़ने के करीब है.. झड़ जा बेटी आज तेरा झड़ने का पहला मौका है, भर दे मेरा मुँह अपने रस से.. आह.. क्या मजेदार माल है.. बरसों बाद मेरी जीभ को चूत रस चखने को मिलेगा।

पापा ने अपनी जीभ मेरी चूत में घुसा दी थी और जीभ से मुझे चोद रहे थे।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

दोस्तो, क्या बताऊँ वो पल ऐसा था जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। मेरी चूत का फव्वारा फूट पड़ा।
मैं गाण्ड उठा-उठा कर झड़ने लगी और पापा ने मेरा सारा रस पी लिया।
मेरी आँखें बन्द थीं मैं दो मिनट तक झड़ती रही और फिर शान्त पड़ गई.. मेरा बदन ठंडा पड़ गया।

पापा- उफ़ कितना गर्म और स्वादिस्ट रस था.. मज़ा आ.. गया.. क्यों मेरी जान तुमको मज़ा आया ना?

रानी- आहह पापा उफ़फ्फ़.. क्या बताऊँ.. आह.. पता नहीं क्या हुआ.. मेरा बदन एकदम हल्का हो गया.. बहुत मज़ा आया आहह…

पापा- यह तो शुरूआत है.. रानी अब देख आगे क्या होता है.. ले मेरे लौड़े को चूस.. इसमें भी बहुत मज़ा आएगा।

पहले तो मैं थोड़ी झिझकी मगर जैसे ही पापा का सुपारा जीभ से चाटा.. उस पर पानी की बूँदें थीं जो अजीब से स्वाद की थीं, मगर उसको चूसने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था.. अब मैं खुल कर पापा का लौड़ा चूसने लगी थी।

अब तो पापा पूरा लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस कर झटके मार रहे थे।

दस मिनट तक उनका लौड़ा चूसने के बाद मेरी चूत में दोबारा खुजली होने लगी और मैं अपने हाथ से चूत मसलने लगी।

पापा- अच्छा.. तो मेरी रानी बिटिया दोबारा गर्म हो गई.. क्यों लौड़े का स्वाद कैसा लगा?

रानी- उफ़.. पापा बहुत मज़ा आ रहा है.. आपका लंड चूसने में.. पर क्या करूँ मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है।

पापा- अच्छा ये बात है.. चल घूम कर मेरे ऊपर आजा, इस तरह तू मेरा लौड़ा चूसना.. मैं तेरी चूत चाटूँगा ताकि दोनों को बराबर मज़ा मिले।

रानी- ओह्ह वाह.. मज़ा आएगा.. ये आइडिया अच्छा है.. पापा आप तो बहुत दिमाग़ वाले हो.. अच्छा एक बात तो बताओ.. आप ये लौड़ा मेरी चूत में कब डालोगे.. विजय ने तो इतना वक्त लिया ही नहीं था.. बस सीधा लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया था।

पापा- हा हा हा.. अरे इसमें दिमाग़ की क्या बात है.. तू अभी बच्ची है.. तुझे नहीं पता इसे 69 का आसन कहते हैं और लौड़ा भी डालूँगा.. तेरे जैसी कच्ची कली को पहले पूरा गर्म करना जरूरी है ताकि तू लौड़े को सहन कर सके समझी.. विजय तो खुद बच्चा है उसे क्या पता लौड़ा कब और कैसे डालते हैं?पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए.. अब मैं पापा के ऊपर लेट कर उनका लौड़ा चूस रही थी और पापा कभी जीभ से तो कभी ऊँगली से मेरी चूत को चोद रहे थे या यूँ कहो कि मेरी कसी चूत को पापा ऊँगली से खोल रहे थे।

करीब दस मिनट तक ये खेल चलता रहा। अब मैंने पापा के लौड़े को बेदर्दी से चूसना शुरू कर दिया था। मेरा बदन एकदम अंगार उगलने लगा था, मेरी चूत रिसने लगी थी और चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी थी।

तभी पापा ने मेरी चूत को चाटना बन्द कर दिया और मुझे ऊपर से नीचे उतार दिया।

रानी- उफ़फ्फ़ पापा प्लीज़ आह.. बीच में क्यों छोड़ दिया.. आह.. अभी तो मज़ा आ रहा था।

पापा- मेरी जान.. अब सही वक्त है लौड़ा तेरी चूत में घुसेड़ने का.. अब तू इसको लेने के लायक हो गई है.. तेरी चूत एकदम रसीली है… और मेरा लौड़ा भी तेरे थूक से सना हुआ है.. चल अब पैरों को मोड़ ले और ले ये तकिया कमर के नीचे रख ले ताकि तेरी चूत का उभार ऊपर आ जाए.. आज तुझे कली से फूल बनाने का वक्त आ गया है।

पापा ने एक हाथ से मेरी चूत को खोला और लौड़ा मेरी चूत पर सैट किया।

पापा- रानी.. अब मैं लौड़ा पेल रहा हूँ.. बस तू अपने दांत भींच लेना.. शुरू में दर्द होगा, उसके बाद हम रोज चुदाई करेंगे.. बड़ा मज़ा आएगा…

रानी- आहह आहह आहह.. उफ़फ्फ़ पापा डाल दो.. अब जो होगा, देखा जाएगा.. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा आहअहह…

पापा ने अपने लौड़े की टोपी चूत में फँसाई और धीरे से आगे को धक्का मारा, कोई 2 इन्च लौड़ा मेरी चूत में फँस गया।
मुझे बहुत दर्द हुआ मगर मेरे ऊपर मस्ती सवार थी, मैंने दाँत भींच लिए।
पापा ने कमर को पीछे किया और एक जोरदार झटका मारा, अबकी बार आधा लौड़ा मेरी सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया।पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था

अबकी बार दर्द की इंतहा हो गई और मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकली, जो शायद बाहर तक किसी ना किसी ने जरूर सुनी होगी। पापा ने जल्दी से अपने होंठ मेरे मुँह पर रख दिए और मेरी दूसरी चीख उनके मुँह से दब कर रह गई।
करीब 5 मिनट तक पापा बिना हिले वैसे ही पड़े रहे। अब मुझे भी दर्द कम हो गया था और मेरा शरीर ढीला पड़ गया था, तब पापा ने अपना मुँह हटाया।

रानी- आहह पापा ऊउउहह बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ बस अब निकाल लो… आह मैं मर जाऊँगी ऊउउहह…
पापा- अरे कुछ नहीं होगा.. मेरा जान ये तो आज तेरा कौमार्य भंग हुआ है.. इसलिए इतना दर्द हुआ.. बस आज बर्दाश्त कर ले.. फिर तू खुद मेरे लौड़े पर बैठ कर उछल-उछल कर चुदेगी.. अब जितना लौड़ा अन्दर गया है उसी को आगे-पीछे करूँगा.. थोड़ा दर्द होगा और कुछ नहीं.. जब दर्द कम हो जाए तो बता देना, एक ही बार में पूरा हथियार घुसेड़ दूँगा.. उसके बाद मज़ा ही मज़ा है।

मैं मुँह से कुछ नहीं बोली बस ‘हाँ’ में सर हिला दिया। अब पापा अपने लौड़े को आगे-पीछे करने लगे मुझे दर्द हो रहा था, पर मैं दाँत भींचे पड़ी रही।
कहानी जारी है।

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