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भाभी ने बालकनी में देखा देवर का मोटा लंड

फिर कुछ दिन तक ऐसे ही बात करते-करते मैंने उनसे अपना मोबाइल नंबर ले लिया और अपना नंबर उन्हें दे दिया। अब हमारी मैसेज से चेटिंग भी होने लगी और फिर हम दोनों बहुत जल्दी एक बहुत अच्छे दोस्त भी बन गए थे। अब हम एक दूसरे को गंदे मैसेज भी करने लगे। दोस्तों भाभी मेरे गंदे मैसेज पर बहुत खुश होकर जवाब करती थीं और फिर हमारी बहुत बार खुलकर बात भी होने लगी। अब मैंने बहुत रात होने पर कहा कि क्यों कल रात मजे किये। भाभी भी जवाब दे देती थी और सब इस तरह चलता रहा।

फिर कुछ दिन बाद भाभी ने मुझे छोटा सा एक काम बोला कि उनकी बेटी का कल टेस्ट है और वो उसके लिए पेंसिल लाना भूल गई हैं तो क्या तुम ला दोगे। क्योंकि उनके पति रात को उन्हें बाहर नहीं जाने देते थे और उनकी बेटी पांच साल की थी तो इसलिए वो भी नहीं जा सकती थीं। फिर मैंने एक पेंसिल का बॉक्स लाकर अपनी बालकनी से उनकी बालकनी में फेंक दिया और फिर उन्होंने उठाकर मुझसे धन्यवाद बोला। इस तरह कोई भी छोटे-मोटे काम जब भी होते तो भाभी मुझसे बोल देतीं और मैं भविष्य में उनसे वसूल करने की बात सोचकर खुश हो जाता था।

फिर भाभी ने एक दिन मुझसे कहा कि तुम मेरी बहुत मदद किया करते हो, लेकिन कभी भी मुझसे पैसे नहीं लेते हो। मुझे यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। फिर मैंने तुरंत शरारती हंसी हंसते हुए उनसे कहा कि मैं आपसे पैसे नहीं कुछ और चाहता हूँ। फिर उन्होंने हैरान होते हुए मुझसे पूछा कि तुम मुझसे ऐसा क्या चाहते हो। फिर मैंने नाटक करते हुए कहा कि आप मुझे देने से साफ मना कर दोगे। दोस्तों मैं उन्हें उलझाने के लिए गोल-मोल बातें कर रहा था और फिर भाभी भी मेरा कहने का मतलब समझ रही थीं कि मेरा इशारा किस तरफ है। अब भी भाभी मुझसे जानबूझकर पूछ रही थीं कि बताओ ना क्या चाहते हो तुम। और आखिरकार मैंने उन्हें कहा कि आप बालकनी में रूम में आ जाओ और मैं भी वहां पर आ जाता हूँ।

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हम दोनों वहां रूम में आ गए और फिर मैंने उन्हें कॉल किया तो वो बोलीं कि हाँ अब बताओ तुमने मुझे यहां पर क्यों बुलाया और तुम मुझे क्या चाहते हो। फिर मैंने कहा कि बस मैं आपसे यही चाहता हूँ। अब वो बोलीं कि क्या। मैं तुम्हारा कहने का मतलब बिल्कुल भी नहीं समझी। फिर मैंने कहा कि बस आप इस तरह मेरे सामने आ जाना, जब भी मैं चाहूं। तो भाभी ने मुझे एक सेक्सी सी स्माइल देकर कहा कि तुम जब भी चाहो मुझे बुला लेना, मैं चली आऊंगी।

फिर एक दिन भाभी ने दबंग 2 फिल्म देखी और अब उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे सलमान की बॉडी बहुत अच्छी लगती है। फिर मैंने उनसे कहा कि मुझे भी सल्लू मियां बोलते हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों लेकिन तुम्हारी बॉडी तो वैसे नहीं है। मैंने कहा कि आपने कभी देखी नहीं इसलिए आप मुझसे ऐसा कह रही हो। तभी भाभी बोलीं कि आओ चलो अभी दिखाओ। फिर मैं उनके मुंह से यह बात सुनकर एकदम से चकित रह गया कि आज भाभी मुझसे यह क्या कह रही हैं।

फिर उन्होंने मुझसे कहा कि तुम अपने रूम में आ जाओ। जब मैं पहली मंजिल पर अपने रूम में गया तो मैंने देखा कि सामने वाली मंजिल पर ही भाभी भी अपने रूम में आ गईं और फिर वो मुझसे कहती हैं कि तुम अब अपना रूम बंद करो तो मैंने रूम बंद किया और उधर भाभी ने भी। भाभी और मेरा रूम आमने-सामने है तो हमारे रूम में बस हम दोनों ही देख सकते हैं, आस-पास वाले घर नहीं। बालकनी के दरवाजे भी हमने थोड़े से बंद ही रखे थे कि बस हम एक दूसरे को ही देख सकें। अब भाभी बोलीं कि दिखाओ मुझे अपनी बॉडी। मैंने शरमाते हुए अपनी शर्ट को उतार दिया और उन्हें अपनी छाती दिखाने लगा। वो फोन पर यह सब देखते-करते हुए हंस रही थीं और फिर मैंने उनसे कहा कि क्यों अब आप भी मुझे अपना शरीर दिखाओ ना।

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फिर उन्होंने भी तुरंत अपने हाथ फ्री करके मुझे अपने डोले दिखाए और अब हम हंसने लग गए। लेकिन तभी उन्हें हंसता हुआ देखकर पता नहीं मुझे क्या हुआ और मैंने उनसे बोल दिया कि भाभी आप मुझे बहुत सुंदर लगते हो। मेरी आवाज सुनकर भाभी भी मुझे देखती रह गईं और मैं भी। फिर वो वहां से चली गईं और शाम को जब वो मुझे बालकनी में दिखीं, लेकिन वो जल्दबाजी के साथ मुझे स्माइल देकर अंदर चली गईं। उसी रात को भाभी का करीब दस बजे मेरे पास एक मैसेज आया और मैं उसे देखकर एकदम चकित रह गया। मैं मन ही मन सोचने लगा कि आज इतनी रात को उनका मेरे पास मैसेज कैसे आ गया।

फिर भाभी ने मुझे बताया कि उनके पति इस समय ऑफिस की एक पार्टी में गए हुए हैं और वो रात को देर से आएंगे। अब उनकी बेटी सो गई है। फिर मैंने उस टाइम भाभी को बालकनी वाले रूम में बुलाया और उन्होंने पूछा क्या हुआ। लेकिन मेरे बुलाने पर वो आ गईं और फिर जैसे ही वो आईं तो मैंने अपनी टी-शर्ट को उतार दिया। भाभी मेरी तरफ देख रही थीं और मेरी टी-शर्ट के नीचे कुछ नहीं था। फिर मैंने अपना लोवर नीचे उतारा और अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था। भाभी मुझे लगातार देखती रहीं और फिर कुछ देर बाद वो उठकर वहां से जाने लगीं, लेकिन जाते-जाते वो मेरी तरफ मुड़कर जरूर देख रही थीं। मैंने उन्हें फोन पर पूछा कि क्या हुआ। आप इस तरह उठकर क्यों जा रही हो। वो बोलीं कि नहीं कुछ नहीं बस ऐसे ही। फिर मैंने उन्हें याद दिलाया कि मैंने उनसे कुछ मांगा था कि जब मैं आपसे कहूं आप मेरे सामने आओगी और आपने भी उसके लिए मुझसे हाँ कहा था।

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अब मेरे मुंह से यह बात सुनकर भाभी को मैंने वापस बुलाया और मैं उनके सामने अंडरवियर में खड़ा हुआ उन्हें देखता रहा। भाभी भी देखती रहीं और अब उनके बड़े-बड़े बूब्स देखकर मेरा लंड थोड़ा-थोड़ा बड़ा होने लगा। मैं उस पर हाथ लगाकर अंडरवियर को घिसने लगा। भाभी यह सब देखकर अपनी आंखें बंद करके वहीं पर खड़ी रहीं और धीरे से देखती रहीं और फिर आंख बंद कर लेतीं। वो अब हॉट हो रही थीं और फिर उन्होंने मुझे फोन पर कहा कि बस करो, मुझे हॉट मत करो।

फिर मैंने कहा कि क्या हुआ, होता है तो होने दो। गरम होने से तो आपकी रात और भी अच्छी कटेगी तो वो मेरी यह बात सुनकर हंस पड़ीं और बोलीं कि मेरी रात तो मेरे पति के साथ कट जाएगी, लेकिन तुम्हारे क्या होगा। तुम यह बात भी तो सोचो। अब मैंने भी तुरंत हंसते हुए उनसे कहा कि मेरी रात आपको अपने साथ लेते हुए सोचते करते हुई गुजर जाएगी। फिर मेरे मुंह से यह सुनकर भाभी की आंखें फटी की फटी रह गईं, क्योंकि मैं उनके सामने इसी स्थिति में था और जिसको देखकर वो बहुत चकित हो गई थीं। मैं मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि आज वो अपनी जगह से थोड़ा भी नहीं हिली थीं और वो एक जगह पर जमकर खड़ी हुई थीं।

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