Sister Brother Fuck sex story: हाय दोस्तों, मैं नील एक बार फिर अपनी सुपर हॉट भाई-बहन सेक्स कहानी का सातवाँ हिस्सा लेकर हाज़िर हूँ। आप सबके पिछले हिस्सों के लिए ढेर सारे कमेंट्स और प्यार के लिए दिल से शुक्रिया। आपके मेल और कमेंट्स ही मुझे और लिखने की प्रेरणा देते हैं। पिछले हिस्से में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने नेहा दीदी के बूब्स के बीच पहले अपनी उंगली और फिर अपने लंड से फक किया, और दीदी को डबल मज़ा आया। अब आगे की कहानी पढ़िए, कि कैसे दीदी और मैंने अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाकर पूरी तरह से सेडक्शन और चुदाई का मज़ा लिया।
कहानी का पिछला भाग: बहेन की चुदाई की तलब का शिकार भाई-6
दीदी ने मेरा लंड पकड़ लिया और शरारती मुस्कान के साथ बोलीं, “हाँ, मैं सही थी। ये डबल मज़ा तेरे लंड से ही आ रहा है। तू ऐसे ही करता रह, बहुत मज़ा आ रहा है।”
मैंने थोड़ी देर और उनके बूब्स के बीच लंड को आगे-पीछे किया। दीदी की साँसें तेज़ थीं, और उनकी “आह… आह…” की सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। फिर मैंने उनके ऊपर झुककर एक गहरी लिप किस शुरू की। उनकी जीभ मेरे मुँह में थी, और उनकी गर्म साँसें मुझे पागल कर रही थीं। किस खत्म होने के बाद मैंने कहा, “नेहा दी, अब जब आपको डबल मज़ा आ गया है, तो मेरी मर्ज़ी बताऊँ, जो आपने कहा था कि कुछ भी माँगूँगा, आप पूरी करेंगी?”
दीदी ने हँसते हुए कहा, “हाँ, मैंने बोला था। अब तू जो चाहे माँग ले, चाहे कुछ भी हो, मैं तुझे मना नहीं करूँगी।”
मैंने थोड़ा हिचकते हुए कहा, “ठीक है, दी। तो मैंने जो अभी किया, वो मैं कहीं और भी करना चाहता हूँ। मतलब, जैसे मैंने आपके बूब्स के बीच लंड डालकर आगे-पीछे किया, वैसे ही मैं आपकी चूत में भी लंड डालकर आगे-पीछे करना चाहता हूँ। क्या मैं ये कर सकता हूँ?”
दीदी ने शरारत से मेरी तरफ देखा और बोलीं, “अच्छा, बेटे, तो अब तेरे दिमाग में अपनी ही बहन को चोदने के खयाल आ रहे हैं?”
मैंने थोड़ा शरमाते हुए कहा, “अब, दी, जब इतना कुछ हो ही गया है, तो ये भी तो कर सकते हैं ना? अगर आप मना करेंगी, तो मैं कुछ नहीं कहूँगा।”
दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा, लेकिन तुझे खुद को कंट्रोल नहीं करना पड़ेगा? तू ये कर सकता है। तुझसे चुदकर मुझे भी बहुत मज़ा आएगा, और बहुत खुशी होगी।”
ये सुनते ही मैं दीदी पर टूट पड़ा। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और एक लंबी, गहरी लिप किस शुरू की। दीदी ने भी मेरा पूरा साथ दिया। उनकी जीभ मेरे मुँह में थी, और उनकी साँसों की गर्मी मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मैंने किस करते-करते उनके गाल, उनकी गर्दन, और फिर नीचे की तरफ बढ़ना शुरू किया। उनकी गर्दन पर मैंने हल्के से काटा। दीदी ने सिसकारी ली, “आह… नील… बहुत मज़ा आ रहा है। ये तेरी लव बाइट ने दिल खुश कर दिया। एक बार और कर।”
मैंने कहा, “दी, अब आपको मज़ा आ गया। तो एक लव बाइट मुझे भी दो ना।”
दीदी ने हँसते हुए मेरी गर्दन और कंधे पर 2-3 लव बाइट्स दीं। उनकी गर्म जीभ और दाँतों का स्पर्श मुझे पागल कर रहा था। फिर मैं और नीचे गया और उनके बूब्स चूसने लगा। एक बूब्स को मैं चूस रहा था, और दूसरे को दबा रहा था। मैं उनके गुलाबी निप्पल्स के साथ खेल रहा था, उन्हें हल्के से मसल रहा था। दीदी की साँसें तेज़ थीं, और वो सिसकार रही थीं, “नील… आह… बहुत मज़ा आ रहा है… ऐसे ही करता रह… आह…”
फिर मैं और नीचे गया और उनकी नाभि को चाटने लगा। उनकी गोरी त्वचा और गर्मी मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मैं उनकी पैंटी तक पहुँचा और उस पर से ही उनकी चूत पर किस किया। दीदी की सिसकारी और तेज़ हो गई। मैंने उनके दाँतों से उनकी पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींचा। उनकी गुलाबी, गीली चूत मेरे सामने थी। मैं उसे देखता ही रह गया। दीदी ने शरारत से कहा, “नील, अब क्या सिर्फ़ देखता रहेगा? जल्दी कुछ कर। मैंने और मेरी चूत ने तेरे और तेरे लंड का बहुत इंतज़ार किया है। अब हमें और मत तड़पा।”
मैंने कहा, “हाँ, दी, मैं जानता हूँ आपने बहुत इंतज़ार किया। लेकिन आपकी ये गुलाबी, क्लीन चूत देखकर मेरे होश उड़ गए।”
मैंने उनकी चूत पर एक किस किया। जैसे ही मेरे होंठ उनकी चूत को छूए, दीदी की ज़ोर से “आह…” निकली। वो बोलीं, “हाय, नील… इसी दिन का तो इंतज़ार था। अब इसे सिर्फ़ किस मत कर, पूरा चूस ले।”
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मैंने कहा, “ठीक है, दी। लेकिन फिर आपको भी मेरे लंड को चूसना होगा।”
दीदी ने शरारत से कहा, “हाँ, पक्का। लेकिन बाद में क्यों? अभी चूस लेती हूँ। तू भी मेरी चूत चाटता रह। हम 69 की पोजीशन में आ जाते हैं, तो दोनों का काम एक साथ हो जाएगा।”
हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। मैं उनकी चूत को चाटने लगा, और दीदी मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं। उनकी गीली चूत की खुशबू और स्वाद मुझे पागल कर रहे थे। मैं उनकी चूत के दाने को जीभ से सहलाने लगा, और दीदी मेरे लंड को गहरे तक चूस रही थीं। हम दोनों की ये पहली बार चुसाई थी, और हम पूरे उत्साह के साथ एक-दूसरे को मज़ा दे रहे थे। दीदी की सिसकारियाँ और मेरी उत्तेजना से कमरा गर्म हो गया था।
थोड़ी देर बाद हम दोनों झड़ गए। मैंने दीदी की चूत का सारा पानी चाट लिया, और दीदी ने मेरे लंड का वीर्य निगल लिया। हमने एक-दूसरे की चूत और लंड को साफ किया और फिर सीधे होकर लिप किस करने लगे। किस करते-करते मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। दीदी ने हँसते हुए कहा, “देख, इसे कितनी जल्दी है मेरी चूत में जाने की। फिर से खड़ा हो गया।”
मैंने कहा, “तो, दी, अब इंतज़ार किसका? जब ये तैयार है, मैं तैयार हूँ, आप तैयार हो, तो डालूँ इसे?”
दीदी ने कहा, “रुक, इसे कंडोम तो पहना दूँ। और मेरे प्यारे भाई, मेरा भी फर्स्ट टाइम है, तो आराम से करना।”
दीदी ने मेरे लंड पर कंडोम पहनाया। मैंने उनका पैर फैलाया और उनकी चूत पर लंड सेट किया। उनकी चूत पहले से ही गीली थी। मैंने एक हल्का सा धक्का दिया, और लंड का टिप अंदर चला गया। दीदी ने दर्द से चिल्लाया, “आह… नील… बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ा रुक…”
मैंने उनकी चूत को सहलाया और उनके होंठों पर किस किया। फिर उनके बूब्स को दबाया और निप्पल्स के साथ खेला। थोड़ी देर बाद मैंने फिर से एक धक्का दिया। इस बार लंड आधा अंदर गया। दीदी को फिर दर्द हुआ, और वो “आह…” करके सिसकारीं। मैं थोड़ा रुका। फिर मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा, और मेरा पूरा 7 इंच का लंड उनकी चूत में समा गया।
दीदी चिल्लाईं, “कुत्ते, ये क्या किया तूने? आह… कितनी ज़ोर से डाला। मैं मर गई… बोला था ना आराम से कर? मैंने तुझे मना तो नहीं किया, लेकिन आराम से कर ना, प्लीज़।”
मैंने देखा कि उनकी आँखों में आँसू आ गए थे। मैंने कहा, “सॉरी, दी। सचमुच सॉरी। मैं ध्यान रखूँगा।” मैंने उनके बूब्स को सहलाया और उनके निप्पल्स के साथ खेला। थोड़ी देर बाद मैंने लंड को धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया। दीदी ने बेडशीट को कसकर पकड़ लिया और आँखें बंद कर लीं। उनके मुँह से सिर्फ़ “आह… आह…” की आवाज़ें आ रही थीं। मैं समझ गया कि अब उन्हें मज़ा ज़्यादा और दर्द कम हो रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने स्पीड बढ़ा दी। दीदी बोलीं, “आह… नील… थोड़ा धीरे… बहुत तेज़ कर रहा है… आह…” लेकिन मैं उनकी बात अनसुनी करके उसी स्पीड में चोदता रहा। थोड़ी देर बाद दीदी चुप हो गईं। अब पूरे कमरे में सिर्फ़ उनकी सिसकारियाँ और हमारी चुदाई की “पच-पच” की आवाज़ गूँज रही थी। दीदी को अब मज़ा आने लगा था। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई, लेकिन बीच-बीच में ज़ोरदार धक्के भी मार रहा था।
दीदी ने मस्ती में कहा, “तुझे बहुत मस्ती सूझ रही है ना? तुझे बाद में देखूँगी।”
मैंने महसूस किया कि मेरा होने वाला है। मैंने दीदी से कहा, तो उन्होंने कहा, “मेरे मुँह में निकाल दे।” मैंने लंड उनकी चूत से निकाला और उनके मुँह में डाल दिया। मैं उनके मुँह को चोदने लगा। मेरा लंड उनके गले तक जा रहा था। मैंने उनके गले में ही सारा वीर्य छोड़ दिया। दीदी ने गुस्से में इशारे से मना किया और बोलीं, “ऐसे गले तक लंड कौन डालता है? मुझे साँस भी नहीं आ रही थी। अगली बार ऐसा किया, तो तेरा लंड दाँतों से काट लूँगी।”
मैंने हँसते हुए कहा, “ठीक है, दी। सॉरी। अब से ऐसा नहीं होगा।”
फिर मैंने उनकी चूत को चाटा, जो दूसरी बार पानी छोड़ने वाली थी। मैंने उनकी चूत को चाट-चाटकर सारा पानी निकाला और साफ किया। हम दोनों बेड पर लेट गए। हम बहुत खुश थे। उस रात हमने दो बार और चुदाई की। उस रात के बाद हमारा रिश्ता और ज़िंदगी दोनों बदल गए। अब जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई करते। रात को तो एक बार चुदाई करके ही सोते।
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तो दोस्तों, ये थी “बहेन की चुदाई की तलब का शिकार भाई” सीरीज़ का सातवाँ और आखिरी हिस्सा। उम्मीद है आपको ये हॉट और मसालेदार कहानी पसंद आई। अपनी राय और फीडबैक कमेंट्स में ज़रूर बताएँ।
कहानी का अगला भाग: बेटे ने मम्मी को अपना अगला शिकार बनाया-1
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