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बहेन की चुदाई की तलब का शिकार भाई-4

Hot sibling sex story: हाय दोस्तों, मैं नील एक बार फिर अपनी हॉट कहानी का चौथा हिस्सा लेकर हाज़िर हूँ। आप सबके पिछले हिस्सों के लिए ढेर सारे कमेंट्स और प्यार के लिए दिल से शुक्रिया। आपका उत्साह ही मुझे और लिखने की प्रेरणा देता है। पिछले हिस्से में आपने पढ़ा कि कैसे नेहा दीदी ने मुझे अपनी सेक्सी ड्रेस में फोटोशूट करवाकर और चेस्ट की मसाज करवाकर सेड्यूस करना शुरू किया। मेरे खड़े लंड को देखकर वो मन ही मन खुश हो गईं। अब आगे की कहानी पढ़िए, कि कैसे दीदी ने अपने सेडक्शन को और गहरा किया और मुझे अपने जाल में फँसाया।

कहानी का पिछला भाग: बहेन की चुदाई की तलब का शिकार भाई-3

मसाज के बाद दीदी अपने रूम में गईं। मेरे हाथों का स्पर्श और मेरी उंगलियों की गर्मी उनकी बॉडी में आग लगा रही थी। वो बेड पर लेटीं और मेरे टच को याद करने लगीं। उनकी चूत पहले से ही गीली थी। दीदी ने धीरे-धीरे अपनी टी-शर्ट उतारी। फिर अपनी शॉर्ट्स और पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी नंगी थीं। उनकी गोरी त्वचा चमक रही थी, और उनके 34 इंच के बूब्स सख्त होकर उभर रहे थे। दीदी ने अपने बूब्स को सहलाना शुरू किया। उनकी उंगलियाँ उनके निप्पल्स पर घूम रही थीं, जो सख्त हो चुके थे। वो कल्पना करने लगीं कि मैं उनकी चेस्ट की तरह उनके बूब्स की मसाज कर रहा हूँ। “आह… नील… मेरे बूब्स दबा… और ज़ोर से…” वो धीरे-धीरे सिसकारियाँ ले रही थीं।

उनका एक हाथ उनकी चूत पर चला गया। उनकी चूत इतनी गीली थी कि उंगलियाँ अंदर जाते ही ‘पच-पच’ की आवाज़ करने लगी। दीदी ने अपनी चूत के दाने को रगड़ा और मेरे लंड की झलक को याद किया। “उह… नील… तेरा लंड मेरी चूत में डाल दे…” वो बुदबुदा रही थीं। उनकी उंगलियाँ तेज़ी से अंदर-बाहर हो रही थीं। उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं, और उनकी चूत से गीलेपन की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। “आह… उह… नील… मेरी चूत मार…” वो चिल्ला रही थीं। कुछ ही मिनटों में उनका पानी निकल गया, और वो “हाय… नील…” कहते हुए झड़ गईं। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। फिर उन्होंने अपनी चूत साफ की और बेड पर लेटकर सो गईं।

रात को डिनर का टाइम हुआ। मैं दीदी को बुलाने उनके रूम में गया। वो अभी-अभी सोकर उठी थीं, और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वो एक ढीली टी-शर्ट और शॉर्ट्स में थीं। हम सबने साथ में डिनर किया। डिनर के बाद मैं दीदी के पास गया और बोला, “दी, आपका पिंपल अब कैसा है? क्रीम लगाने से ठीक हुआ?”

दीदी ने शरारती मुस्कान के साथ कहा, “हाँ, नील, अब बहुत बेहतर है। और तूने जो मसाज की थी, उससे तो कमाल हो गया। सारा दर्द गायब, और बॉडी रिलैक्स हो गई। नील, अब तू रोज़ मेरी मसाज करना। तू बहुत अच्छी मसाज करता है।”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, दी। जब भी आपको मसाज चाहिए, मुझे बता देना। मैं कर दूँगा।”

दीदी ने तुरंत कहा, “नील, आज से तू रोज़ रात को मेरी मसाज करेगा। मम्मी-पापा के सोने के बाद मेरे रूम में चुपके से आ जाना। लेकिन ध्यान रखना, किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि तू मेरे रूम में मसाज के लिए आ रहा है।”

मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ, दी, ये हमारा सीक्रेट रहेगा। मैं किसी को नहीं बताऊँगा। आप मुझसे इतना प्यार करती हो, तो मैं आपके लिए रोज़ मसाज तो कर ही सकता हूँ।” मैंने दीदी को टाइट हग किया और उनके गाल पर पप्पी दे दी। दीदी ने भी मुझे हग किया और बोलीं, “लव यू, नील।”

मैंने कहा, “लव यू टू, दी।” फिर हम दोनों मम्मी-पापा के सोने का इंतज़ार करने लगे। थोड़ी देर बाद मम्मी-पापा अपने रूम में सो गए। दीदी ने धीरे से कहा, “चल, नील, जल्दी से चेंज करके मेरे रूम में आ जा। मैं भी चेंज कर लेती हूँ। देर मत करना, मुझे तेरी मसाज का इंतज़ार है।”

मैंने कहा, “ठीक है, दी।” मैं अपने रूम में गया, जल्दी से एक ढीली टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी, और पाँच मिनट में दीदी के रूम में पहुँच गया। दरवाज़ा खुला था। मैं अंदर गया और दरवाज़ा लॉक कर दिया। दीदी पहले से ही तैयार थीं। उन्होंने अपना टॉप उतार रखा था और सिर्फ़ काली ब्रा और शॉर्ट्स में थीं। उनकी ब्रा में उनके बूब्स आधे बाहर झाँक रहे थे, और उनकी गोरी जाँघें शॉर्ट्स से बाहर चमक रही थीं। मैं उन्हें देखकर थोड़ा शरमाया। दीदी ने कहा, “नील, जल्दी आ ना। कितना टाइम लगा दिया। मैं कब से तेरे इंतज़ार में हूँ। देख, मैं तो मसाज के लिए तैयार हूँ। अब तू भी शॉर्ट्स उतार दे और अंडरवियर में आ जा। फिर अच्छे से मसाज करना।”

मैंने हल्का सा शरमाते हुए कहा, “ठीक है, दी।” मैंने अपनी शॉर्ट्स उतार दी और सिर्फ़ अंडरवियर में खड़ा हो गया। मेरा लंड पहले से ही हल्का-हल्का तन रहा था। मैंने क्रीम ली और दीदी की चेस्ट पर लगाने लगा। मेरी नज़रें बार-बार उनकी क्लीवेज पर जा रही थीं। उनकी ब्रा इतनी टाइट थी कि उनके बूब्स जैसे बाहर निकलने को बेताब थे। क्रीम लगाने के बाद मैंने लोशन लिया और उनकी चेस्ट की मसाज शुरू की। मेरी उंगलियाँ उनकी त्वचा पर धीरे-धीरे घूम रही थीं, और उनकी गर्मी मुझे पागल कर रही थी।

दीदी ने आँखें बंद करके कहा, “नील, तेरे हाथों में जादू है। तेरी मसाज से मेरी सारी थकान गायब हो जाती है।” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी मिठास थी। मैं मसाज करता रहा, लेकिन मेरे लंड ने बगावत शुरू कर दी। वो अंडरवियर में पूरी तरह तन गया। मसाज करते वक्त मेरा हाथ लोशन की वजह से फिसला और उनकी ब्रा के अंदर चला गया। मेरी उंगली उनके निप्पल को छू गई। दीदी ने हल्की सी सिसकारी ली, “उह…” मैंने झट से हाथ बाहर निकाला और बोला, “सॉरी, दी। वो लोशन की वजह से हाथ फिसल गया। गलती से ब्रा के अंदर चला गया।”

दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, नील, कोई बात नहीं। तूने जानबूझकर तो नहीं किया। तू मेरा काम कर रहा है, तो सॉरी मत बोल। मुझे बुरा नहीं लगा।” लेकिन उनके मन में तो तूफान मचा हुआ था। वो सोच रही थीं, “हाय, नील का हाथ मेरे निप्पल पर लगा। बस, अब जल्दी ही इसका मुँह भी मेरे बूब्स पर होगा।” वो मन ही मन खुश हो रही थीं।

फिर दीदी बोलीं, “नील, तू सचमुच कमाल की मसाज करता है। एक काम कर, आज मेरी पूरी बॉडी की मसाज कर दे। अगर तू अच्छे से करेगा, तो मैं भी तेरी मसाज करूँगी। बराबरी होनी चाहिए ना।”

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मैंने हँसते हुए कहा, “ठीक है, दी। मैं आपकी फुल बॉडी मसाज कर दूँगा। लेकिन आप मेरी मसाज की बात कर रही हो, तो एक और चीज़ में भी बराबरी होनी चाहिए।”

दीदी ने उत्सुकता से पूछा, “क्या? किस चीज़ में बराबरी?”

मैंने शरारत से कहा, “दी, आपने ऊपर का टॉप उतार दिया, और मैंने नीचे की शॉर्ट्स। तो बराबरी के लिए दोनों को ऊपर और नीचे की ड्रेस उतारनी चाहिए। मतलब, आप शॉर्ट्स उतार दो, और मैं टी-शर्ट।”

दीदी ने हँसते हुए कहा, “हाँ, नील, बात तो सही है। चल, तू अपनी टी-शर्ट उतार। मैं भी शॉर्ट्स उतार देती हूँ। लेकिन इस बार मुझे ऐसे देखकर फिर से खो मत जाना।”

मैंने हँसते हुए कहा, “दी, कोशिश करूँगा। लेकिन आप इतनी हॉट और सेक्सी हो कि मैं क्या करूँ? आपको बिना कपड़ों के देखकर खो ही जाता हूँ।”

दीदी ने मस्ती भरे अंदाज़ में कहा, “अच्छा, फ्लर्टिंग कम कर। वैसे तू भी तो कम हॉट नहीं है। इसलिए मैं भी तुझे देखकर खो जाती हूँ।”

अब हम दोनों आधे नंगे थे। मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था, और दीदी काली ब्रा और पैंटी में। उनकी पैंटी इतनी टाइट थी कि उनकी चूत का उभार साफ दिख रहा था। उनकी गोरी जाँघें और मटकती गांड देखकर मेरा लंड पूरी तरह तन गया। दीदी ने मेरे लंड की तरफ देखा और शरारती मुस्कान दी। वो बोलीं, “नील, अब क्या मुझे देखता ही रहेगा, या मसाज भी करेगा? मैं तेरे हाथों की मसाज का इंतज़ार कर रही हूँ।”

मैंने दीदी को बेड पर लेटने को कहा और उनकी मसाज शुरू की। मेरी उंगलियाँ उनकी चेस्ट से शुरू होकर उनकी कमर तक गईं। मेरा लंड बार-बार उनकी जाँघों को छू रहा था। मैं उसे एडजस्ट करने की कोशिश करता, लेकिन दीदी ने कहा, “नील, बार-बार एडजस्ट क्यों कर रहा है? इसे ऐसे ही रहने दे। मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं।” लेकिन सच तो ये था कि मेरे लंड का स्पर्श उनकी चूत में आग लगा रहा था। वो अपनी हवस को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थीं।

मैं दीदी की पीठ की मसाज करने लगा। मेरी उंगलियाँ उनकी रीढ़ की हड्डी पर धीरे-धीरे घूम रही थीं। मैं जानबूझकर अपने हाथ उनकी जाँघों तक ले गया। दीदी ने मुझे नहीं रोका। अब मैं मसाज कम और उनकी सेक्सी बॉडी का मज़ा लेने में ज़्यादा डूब गया। दीदी भी मेरे टच का मज़ा ले रही थीं। उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं। फिर दीदी बोलीं, “नील, एक काम कर। मेरे ऊपर बैठ जा। इससे तू मेरी पीठ की मसाज बेहतर कर पाएगा।”

मैं दीदी की गांड के ऊपर बैठ गया। मेरा खड़ा लंड उनकी पीठ पर टच हो रहा था। मैं उनकी पीठ की मसाज करने लगा, और जानबूझकर अपने लंड को उनकी पीठ पर रगड़ने लगा। दीदी मेरे लंड का अहसास अपनी पीठ पर महसूस कर रही थीं। वो हल्की-हल्की सिसकारियाँ ले रही थीं, “उह… नील… कितना अच्छा लग रहा है…” उनकी आवाज़ में हवस साफ झलक रही थी।

थोड़ी देर बाद दीदी बोलीं, “नील, आज तो तेरी मसाज ने मज़ा दे दिया। अब तू लेट जा। मैं तेरी मसाज करती हूँ।” मैं बेड पर लेट गया। दीदी मेरी पीठ की मसाज करने लगीं। उनकी उंगलियाँ मेरी पीठ पर जादू कर रही थीं। मेरी हालत खराब हो रही थी। फिर दीदी बोलीं, “नील, पलट जा। अब तेरी चेस्ट की मसाज करूँगी।”

मैं पलट गया। दीदी मेरे ऊपर बैठ गईं। उनकी पैंटी मेरे खड़े लंड के ठीक पास थी। वो मेरी चेस्ट की मसाज करने के बहाने अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ने लगीं। उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं, और वो हल्की-हल्की सिसकारियाँ ले रही थीं, “आह… उह… नील…” मेरा लंड अब पूरी तरह सख्त था, और दीदी की चूत का गीलापन उनकी पैंटी के ज़रिए मेरे अंडरवियर तक पहुँच रहा था। मैं भी बेचैन हो रहा था। दीदी की चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी, और हम दोनों की हालत खराब हो रही थी।

मसाज खत्म होने के बाद दीदी उठीं। उनकी पैंटी गीली थी, और मेरा अंडरवियर भी प्रीकम से गीला हो गया था। हम दोनों एक-दूसरे को देखकर शरमाए। दीदी ने हँसते हुए कहा, “नील, आज तूने मुझे बहुत खुश कर दिया। तेरी मसाज में मज़ा आ गया। इसलिए मैं तुझे एक गिफ्ट देना चाहती हूँ।”

मैंने उत्सुकता से पूछा, “कैसा गिफ्ट, दी?”

दीदी ने शरारती अंदाज़ में कहा, “आज से हमारे रिश्ते में प्रोमोशन होगा। अब से हम ऐसे ही रहेंगे। मैं ब्रा-पैंटी में, और तू अंडरवियर में। और अब से मैं तुझे लिप किस करूँगी।” ये बोलकर दीदी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उनकी जीभ मेरे मुँह में थी, और हम दोनों पाँच मिनट तक एक-दूसरे को चूमते रहे। उनकी साँसें गर्म थीं, और उनकी जीभ मेरे होंठों पर जादू कर रही थी। मैंने भी उनका पूरा साथ दिया।

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किस खत्म होने के बाद मैंने कहा, “दी, आप तो कमाल का किस करती हो। बहुत मज़ा आया। और आपकी मसाज करके भी मैं बहुत खुश था। अब इस प्रोमोशन से तो और खुशी हो गई। आप दुनिया की बेस्ट दीदी हो। लव यू, नेहा दी।”

दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “लव यू टू, नील। मुझे भी बहुत मज़ा आया। ये प्रोमोशन तेरे अच्छे काम के लिए है। तूने मुझे इतना खुश किया, इसलिए ये गिफ्ट। अगर तू मुझे ऐसे ही खुश करता रहेगा, तो और भी प्रोमोशन मिलेंगे।”

मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ, दी, अब तो मैं सारे प्रोमोशन ले लूँगा। वैसे, दी, आज मैं आपके पास सो जाऊँ?”

दीदी ने कहा, “हाँ, सो जा। लेकिन सुबह जल्दी अपने रूम में चले जाना। और हाँ, पहले अपने इस खड़े लंड और गीले अंडरवियर का कुछ कर। मुझे भी अपनी पैंटी चेंज करनी पड़ेगी।”

मैंने कहा, “ठीक है, दी। मैं वॉशरूम जाकर आता हूँ।” मैं वॉशरूम में गया, अपना अंडरवियर उतारा, और दीदी को इमेजिन करके मुठ मारने लगा। मेरा प्रीकम पहले ही निकल चुका था, और दीदी की हॉट बॉडी का खयाल आते ही मेरा पानी जल्दी निकल गया। “आह… दी… तुम्हारी चूत में मेरा लंड…” मैं बुदबुदा रहा था। फिर मैंने सब साफ किया, नया अंडरवियर पहना, और दीदी के रूम में वापस आ गया।

दीदी भी वॉशरूम गईं। उन्होंने अपनी पैंटी उतारी, और उनकी चूत से गीलेपन की धार निकलने लगी। वो फिर से अपनी चूत में उंगलियाँ डालने लगीं। “हाय… नील… तेरा लंड मेरी चूत को चोद रहा है…” वो सिसकारियाँ ले रही थीं। उनकी उंगलियाँ तेज़ी से अंदर-बाहर हो रही थीं, और ‘पच-पच’ की आवाज़ गूँज रही थी। तभी उनकी नज़र मेरे अंडरवियर पर पड़ी, जो मैं वॉशरूम में छोड़ आया था। उसमें मेरा वीर्य लगा था। दीदी ने उसे उठाया, सूँघा, और फिर धीरे-धीरे चाट लिया। “हाय… नील… तेरा वीर्य कितना टेस्टी है…” वो बुदबुदाईं। फिर वो झड़ गईं, अपनी चूत साफ की, नई पैंटी पहनी, और मेरे पास बेड पर आकर लेट गईं।

रात में हम दोनों एक-दूसरे से चिपक गए। मैंने दीदी को टाइट हग किया, और उनकी बॉडी की गर्मी मुझे नींद में भी महसूस हो रही थी। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।

तो दोस्तों, ये था कहानी का चौथा हिस्सा। अगले हिस्से में पढ़िए कि कैसे दीदी ने मुझे और प्रोमोशन देकर अपने सेडक्शन का शिकार बनाया। आपको दीदी का सेडक्शन और हमारा लिप किस कैसा लगा? क्या आप भी ऐसी मसालेदार स्टोरीज़ पढ़ना पसंद करते हैं? कमेंट में ज़रूर बताएँ।

कहानी का अगला भाग: बहेन की चुदाई की तलब का शिकार भाई-5

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ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

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