मैं शरमा उठी। गाण्ड चुदने वाली थी, दिल खुशी से उछलने लगा। आँखें बंद करके इंतज़ार करने लगी कि कब लण्ड उद्धार कर दे। चूतड़ की दरार में खुजली मचने लगी।
तभी बीच में नर्म सुपारे का अनुभव हुआ। आह्ह… शुरुआत हो गई। लण्ड चूतड़ों के बीच घुसने लगा। मैंने पाँव और खोल दिए, सुपारा गाण्ड के छेद को छू गया। छेद लपलपाया, फिर ढीला कर दिया।
शिवम् का जोश देखते बनता था। झुककर उभार पकड़ दबाए, चूचियाँ मसल डालीं…
मोटा लण्ड गाण्ड फोड़ता अंदर घुसने लगा। गाण्ड मस्त हो उठी। मुँह से वासनामय सिसकारी फूटी। उसके मुँह से मोहक चीख निकली। लण्ड पूरा उतर गया। भार डालकर लिपट गया।
अब नशे में नहीं था, होश में चोद रहा था। वास्तविक अनुभव ले रहा था। जमकर गाण्ड चुदाई कर आनन्द के सागर में बहा रहा था। धीरे कान में कहा, “भाभी, चूत चोद दूँ… जी कर रहा है…!”
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शिवम् गाण्ड के पीछे पड़ा था… भोसड़ा चोदने की बात पर बोली, “मुझे सीधी होने दे… ऐसे कैसे चूत चोदेगा?” वासना भरी आवाज़ में।
सीधी हो गई। शिवम् टाँगों के बीच आया, हाथों से चूत के कपाट खोल दिए। रस भरी गुफा नज़र आई। लौड़ा हिलाया और गुफा में घुसाता गया। बीच में एक-दो बार बाहर खींचा, फिर पेंदे तक फिट कर दिया।
खुशी से चीख उठी। वो धीरे ऊपर लेट गया, होंठ दबाकर रसपान करने लगा। हाथ सीने को गुदगुदाते रहे। मुझे होश कहाँ! चूतड़ दबा लिए, सिसकने लगी।
चूत लण्ड के साथ थाप देने लगी, थप-थप की आवाज़ आने लगी। चूत पिटने लगी। झाँटें काँटों की तरह चुभकर मज़ा दुगना कर रही थीं। लण्ड की गोलियाँ चूत के नीचे टकराकर मीठापन बढ़ा रही थीं।
कैसा सुहाना माहौल था। सुबह लौड़ा मिल जाए तो कामदेव की आराधना हो जाती, दिन मस्ती से गुजरता।
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दिन भर शिवम् चिपका रहा। कॉलेज नहीं गया, कभी गाण्ड मारता, कभी चूत जमकर चोदता। पति लौटने तक चोद-चोदकर रंडी बना दिया, चूत को इंडिया गेट, गाण्ड को समंदर बना डाला।
पति लौटते ही चुदाई से राहत मिली। पर कितनी! जैसे ही काम जाते, शिवम् चोद देता।
हाय राम… चुदने की इच्छा मेरी थी, पर ऐसी नहीं कि चटनी बना दे…
बस फिर क्या, रात को पति को खुश करती, दिन में देवर के लौड़े से खुद खुश रहती।
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