गाण्ड का छेद ढीला छोड़ दिया, लस्त सी बिस्तर पर पसर गई। वो गाण्ड चोदता रहा, फिर लण्ड बाहर निकालकर सारा वीर्य गाण्ड के गोलों पर छोड़ दिया। कितनी देर नोचता-खसोटता रहा, पता नहीं, मैं नींद में खो गई। मन में संतुष्टि थी।
सुबह आँख खुली तो शिवम् नंग-धड़ंग लिपटा पड़ा था। मैंने सोचा ऐसे ही पड़े रहूँ, याद रहे कि भाभी को चोदा है, आगे का रास्ता खुल जाए। मैं नंगी उसकी बाहों में पड़ी रही। वो उठा और आश्चर्य से आँखें फाड़कर देखने लगा। वीर्य के निशान और नंगी भाभी देखकर सब याद आया।
जल्दी उठकर खुद को ठीक किया। मुझे ध्यान से देखा, झुका। अंग-प्रत्यंग निहारने लगा। लण्ड फिर खड़ा होने लगा। चेहरे पर वासना उभरी। मैं धीरे उठी, चेहरा छिपा लिया। शर्म का अभिनय करने लगी।
“ऐसे मत देखो देवर जी! देखो ये क्या कर दिया?”
निर्वस्त्र शरीर को वासनामयी दृष्टि से निहारता बोला, “भाभी, आप इतनी सुंदर हैं, ये तो होना ही था!” नज़रें चूत पर टिकी थीं। मैं कुछ कहती, लण्ड कड़ा हो गया, तनकर खड़ा हो गया, दिल डोल उठा।
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“इसे नीचे करो… वरना फिर जिस्म में घुस जाएगा।”
जानकर लण्ड पकड़ नीचे करने लगी। शिवम् मुस्कराया, धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दिया। उछलकर पीठ पर सवार हो गया।
“भाभी, पहले गुड मॉर्निंग तो कर लें!” चूतड़ों के नीचे टाँगों पर बैठ गया। लंबा लण्ड चूतड़ों पर स्पर्श करने लगा।
“शिवम् चुप हो जा, बड़ा आया गुड मॉर्निंग करने वाला!”
“इतनी प्यारी गाण्ड का उद्घाटन करना पड़ेगा, भाभी, कर दूँ?”
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