नज़रें उठाकर बोला, “चुदवा ले मेरी जान… लण्ड कड़क हो रहा है!”
शायद और पीकर आया था, मुँह से शराब की भभका आ रही थी। बात सुनकर शरीर में ठंडी लहर दौड़ गई। मुँह फिर चूत पर चिपक गया, वेक्यूम सा हो गया। लगा मदहोश है, पता नहीं क्या कर रहा। मौका है, चुदवा लूँ।
भरपूर चूत चूसी, मैं गुदगुदी से निहाल हो गई। बरबस मुँह से निकला, “शिवम् यूँ मत कर, मैं तेरी भाभी हूँ ना…”
बेकरारी बढ़ती जा रही थी। टाँगें चुदने को ऊपर उठ रही थीं। तभी अँगुली चूत में घुसाई और पास आकर स्तन उघाड़कर चूसने लगा।
मैं शर्म से धकेल रही थी, पर चुदना चाह रही थी। दोनों टाँगें पूरी उठ चुकी थीं। इसी दौरान मोटा लण्ड मुँह में घुसा दिया।
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हाय राम! कब से चूसने को बेकरार थी। गड़प से ले लिया और आँखें बंद करके चूसने लगी। उसने चूतड़ हिलाकर लण्ड मुँह में हिलाया। लण्ड में रस सा था, मुँह चिकना कर रहा था।
“भाभी, देखो टाँगें चुदने को उठी हैं… अब चुदवा लो!”
“देवर जी ना करो! भाभी को चोदेगा… हाय नहीं, शर्म आएगी…!”
“पर भाभी, टाँगें तो उठ रही हैं।” लण्ड चूत की तरफ़ झुकाते कहा।
“देवर जी, बहुत खराब हो…” मैंने तिरछी नज़र का वार किया।
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