अब उसकी गालियाँ मुझे बहका रही थीं। “ऐ चुप रहो…” मैंने प्यार से सर पर हाथ फेरते कहा।
“यार तेरी चुदी चूत दिखा दे ना… साली को चोदना है! मोटा लंड तेरी प्यारी चूत में डाल दूँगा।” आँखों में वासना के डोरे साफ़ नज़र आने लगे।
“आप सो जाइए अब… बहुत हो गया!”
“अरे मेरी चिकनी भाभी, मेरा लण्ड देख… तेरे साथ तुझे नीचे दबाकर सो जाऊँ मेरी जान!”
वो बेशर्म होकर पजामा नीचे सरकाकर लण्ड हाथ में लेकर हिलाने लगा। मुझे शर्म आने लगी, पर उसकी हरकत दिल में बर्छियाँ चला रही थी। लगा वो टुन्न हो चुका था। अच्छा मौका था देवर की जवानी देखने का। दिल कर रहा था कि उसका मस्त लौड़ा चूत में भर लूँ। पजामा नीचे गिर चुका था। मैंने सहारा दिया तो उसने मुझे जकड़ लिया और चूमने की कोशिश करने लगा।
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उसने बनियान उतार दी और मस्ती से सांड की तरह झूमने लगा। लंड घोड़े जैसे आगे-पीछे झूल रहा था। मुझे पीछे से पकड़कर कमर कुत्ते की तरह हिलाने लगा, जैसे चोद रहा हो। मैंने बिस्तर पर लेटा दिया, पर उसने मुझे कसकर दबा लिया और उभरे स्तनों को मसलने लगा।
पहले मैं नीचे दबी आनन्द लेने लगी, फिर दब चुकी तो देखा उसका वीर्य निकल चुका था। मेरा पेटीकोट गीला हो गया। मैंने उसे ऊपर से उतारा और बिस्तर से उतर गई। उसका गोरा लण्ड एक तरफ़ लटक गया। समय देखा तो नौ बज रहे थे। मैंने भोजन किया और कमरे में लेट गई। जो हुआ, सोचकर आनन्दित हो रही थी, मन बहक रहा था।
जोश में पेटीकोट ऊपर कर चूत दबाने लगी। सोच रही थी, अगर देवर से चुदवा लूँ तो किसी को पता चलेगा? टुन्न होकर चोदेगा तो याद रहेगा? बात घर में रहेगी, जब चाहो मजे करो।
शादी से पहले स्वतंत्र थी, दोस्तों से खूब चुदवाया करती थी। शादी के बाद पुराने दोस्त याद बन गए। इसी उधेड़बुन में आँख लग गई।
अचानक नींद खुली, नीचे हलचल लगी। शिवम् कमरे में था, पेटीकोट ऊपर कर नंगी चूत देख रहा था। चेहरा वासना से लाल था। मैंने धीरे से टाँगें चौड़ी कर लीं। तभी चूत में मीठी टीस उठी। शिवम् की जीभ चूत की दरार में लपलपाती दौड़ गई। गीली चूत चाटकर साफ़ कर दी। जाँघें काँप गईं।
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