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प्रेमिका की चिकनी चुत चुदाई

मैं रजत अपनी प्रेमिका वंदिता से अपनी बड़ी बहन की शादी में मिला था. वो मेरी बुआ की देवरानी की बड़ी लड़की थी. जब मैंने पहली बार उसे देखा तो बस देखता ही रह गया. वो खाने की मेज पर मेरी बुआजी के साथ बैठी हुई थी.


उसे देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके बारे में जानने के लिए बुआ के पास जा पहुँचा. मैंने बुआजी को नमस्ते करके बात शुरू की. थोड़ी देर के बाद बातों ही बातों में मैंने वंदिता के बारे में बुआजी से पूछ लिया तो बुआजी ने हमारा परिचय करवाया. हमारी बातें शुरू हो गईं.

फिर तो मैं सारे मेहमानों को छोड़कर वंदिता की सेवा करने में लग गया, जिसे देखकर वो भी मुझसे इंप्रेस होने लगी. शादी में हम लोगों की ज़्यादा बातें नहीं हो पाईं लेकिन हम लोगों की नजरों ने बहुत कुछ बातें की, जिसका फायदा मुझे उस वक़्त मिला जब मैं अपनी बुआजी के घर गया. वंदिता अपने घर जाते वक़्त अपना नंबर मुझे दे गई जिससे हम लोगों की फोन पर रोज ही बातें होने लगीं.
हम दोनों एक-दूसरे से मिलना चाहते थे, लेकिन ऐसा कोई अवसर नहीं मिल पा रहा था कि हम मिल सकें.

एक दिन वंदिता ने मुझे फोन करके बताया कि उसकी मम्मी उसके मामा के घर जा रही हैं और वो 2 दिन के बाद आएंगी.
फिर मैंने अपने पापा से बात करके बुआजी के घर जाने की इजाजत ले ली और मैं तय किए गए दिन अपनी बुआजी के घर पहुँच गया. अचानक से मुझे देख कर बुआजी चौंक गईं और मुझसे घर के समाचार पूछने लगीं.

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मैंने कहा- सब कुछ ठीक है बस आपकी याद आ रही थी तो मिलने आ गया.
बुआजी ने कहा- बहुत अच्छा किया जो तू आ गया.

एक बात में आपको बताना भूल गया कि मेरी बुआजी एक जॉइंट फैमिली में रहती हैं. बुआजी ने वंदिता को आवाज लगाई और पानी लाने के लिए कहा.
थोड़ी देर के बाद वंदिता मेरे लिए पानी लेकर आई और मुझे उस हूर परी के दर्शन हुए, जिसके लिए मैं यहाँ आया था. मुझे देखकर वंदिता ने स्माइल किया और बदले में मैं भी मुस्कुरा दिया.

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पानी लेने के बहाने मैंने वंदिता के हाथ को छू लिया तो वंदिता आँखों के इशारे से मुझे मना करने लगी.

वंदिता गुलाबी रंग के सलवार सूट में बहुत सुंदर दिख रही थी. थोड़ी देर बात करने के बाद मेरी बुआजी दूध लेने के लिए गाँव में चली गईं. अब मैं और वंदिता बैठकर बातें करने लगे. मैंने वंदिता को गले से लगाने की कोशिश की तो वंदिता ने मुझे मना कर दिया कि कोई देख लेगा और रात में मिलने का प्रोग्राम बनाने लगी.

वंदिता ने कहा- हम लोग सब बाहर सोते हैं. वैसे तो मैं अपनी मम्मी के पास सोती हूँ लेकिन आज मम्मी नहीं है तो मुझे तुम्हारी बुआजी के पास सोना पड़ेगा. मैं तुम्हारा बिस्तर मेरे पास लगा दूँगी, जिससे मेरे एक तरफ तुम्हारी बुआजी और एक तरफ तुम हो जाओगे. जब बुआजी सो जाएं तो तुम चुपके से उठकर मेरे बिस्तर पर आ जाना.

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अभी तक मैंने वंदिता को किस भी नहीं किया था तो मैं रात के बारे में सोच सोच कर रोमांचित होने लगा. जल्दी ही शाम हो गई और शाम से रात. हम सब लोगों ने खाना खाया और फिर मैं और बुआजी बात करने लगे.
मैंने अपने फोन से बुआजी की घर पर बात करवाई.

थोड़ी देर के बाद मैं वंदिता सब लोगों के बिस्तर लगाने लगी और सब लोग सोने की तैयारी करने लगे.

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अब हम लोगों को रात के दस बज चुके थे. सब लोग अपने अपने बिस्तरों पर जा चुके थे. कुछ सो गए थे ओर कुछ जाग रहे थे.
घर का सारा काम निपटाकर बुआजी और वंदिता भी अपने अपने बिस्तरों पर आ गईं. वंदिता ने लाइट बंद कर दी. रात अंधेरी होने के कारण हम लोगों को बहुत आसानी हो गई.

जब बुआजी बिस्तर पर आईं तो मुझे आवाज लगाई लेकिन मैं सोने का नाटक करने लगा. बुआजी को लगा कि मैं सो गया हूँ. वंदिता को चिंता होने लगी कि यदि मैं सो गया, तो सारा प्लान खराब हो जाएगा. इसलिए सोने के बाद मुझे हाथ से जगाने की कोशिश करने लगी. जैसे ही वंदिता ने अपना हाथ मेरे बदन से छुआ मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया. अब वो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी.

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