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मेरी लंडखोर रंडी बहन की गैंग बैंग चुदाई-1

मेरी बहन इतनी सेक्सी है कि जो भी देखे, उसे चोदना चाहे। एक बार उसका जन्मदिन था। मैंने अपने दोस्त को बुलाया था। उस दिन मैंने अपनी बहन की चुदाई देखी। आप भी मजा लें।

मेरी बहन का नाम अंजलि है। उसका फिगर बेहद आकर्षक और मस्त है। उसके बड़े-बड़े, गोल और नुकीले चुचे हमेशा टाइट कपड़ों में उभरकर नजर आते हैं। उसकी गांड भी बहुत मोटी, गोल और लुभावनी है। कोई भी उसे एक बार देख ले तो उसी पल उसके शरीर को छूने और चोदने के खयालों में खो जाता है। उसके होंठ गुलाबी और मोटे हैं। आंखें बड़ी-बड़ी और चमकदार हैं। उसकी कमर पतली है जो उसके चौड़े कूल्हों के साथ बेहद आकर्षक लगती है।

उस दिन मम्मी और पापा दोनों शादी के सिलसिले में बाहर गए थे। मैं और मेरी बहन अंजलि घर पर अकेले थे। अगले दिन बहन का बर्थ-डे था। हमने पहले ही केक का आर्डर दे दिया था। सुबह मैं अपने कॉलेज के लिए निकल गया। शाम में बर्थडे सेलिब्रेट करने का प्रोग्राम तय था। इसलिए मैंने अपने जिगरी दोस्त अनमोल को ही बुला लिया था।

दुर्भाग्य से उसी शाम को मेरे एक अन्य दोस्त का एक्सीडेंट हो गया। हम कुछ दोस्त मिलकर कॉलेज से सीधा अस्पताल चले गए। मैंने अनमोल को फोन करके बताया कि तुम केक लेकर मेरे घर पहुंच जाओ, मैं थोड़ी देर में आता हूं।

वो बोला, ठीक है।

उसने मेरे घर से केक लेने की पेड रसीद ली और केक लेने चला गया। उसके बाद बहन अंजलि का कॉल आया। उसने बताया कि भैया, अनमोल भैया आए थे। उनके साथ कोई और भी था। वे लोग केक लेने गए हैं। आप भी जल्दी से घर आ जाइए।

मैंने कहा कि हमें कोई डेढ़ घंटा लगेगा।

उसने कारण पूछा तो मैंने उसे पूरा विवरण बताया।

इस पर वो बोली, ठीक है आ जाइए।

लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां बनीं कि मैं वहां से अगले 20 मिनट में ही निकल गया। मैं घर आया तो सोचा कि अन्दर झांक कर देखते हैं कि सजावट कैसी की है।

मैंने खिड़की से अन्दर झांक कर देखा तो एकदम घुप्प अंधेरा था। मुझको लगा कि लाइट में कुछ फाल्ट हुआ होगा लेकिन इन्वर्टर तो ऑन रहना चाहिए था। मेरे पास दूसरी चाभी थी तो मैं बिना डोरबेल बजाए गेट खोल कर अन्दर घुस गया। अन्दर से अजीब सी आवाजें आ रही थीं। मैं धीरे-धीरे अंदर गया तो समझ में आया कि ये आवाजें तो मेरी बहन के कमरे से आ रही हैं।

उसके कमरे में मैंने अंदर देखा तो मैं शॉक रह गया। मेरी बहन अंजलि मेरे दोनों दोस्तों के काले लंड हाथ में लेकर सहला रही थी। वो इस वक्त बस ब्रा पैंटी में थी। पिंक कलर की ब्रा उसके बड़े-बड़े चुचियों को कसकर दबाए हुए थी। पिंक पैंटी उसकी मोटी गांड में गड़ी हुई थी। उसका गोरा शरीर पसीने से चमक रहा था। बड़ी गजब की रांड लग रही थी।

मुझे गुस्सा भी आ रहा था कि साली अपने ही घर में बहन रंडी बनी हुई है। वो भी मेरे दोस्त अनमोल और उसके चचेरे भाई के साथ ऐसा कर रही है। फिर भी मेरी नजरें उस दृश्य से हट नहीं पा रही थीं।

मैंने कुछ सोचा और बस बहन को ये सब करते हुए चुपचाप देखने लगा। अंजलि दोनों के मोटे लंडों को अपनी नरम हथेलियों से ऊपर-नीचे सहला रही थी। उसकी उंगलियां उनके लंडों की मोटी नसों पर घूम रही थीं। फिर वो झुक गई और पहले अनमोल का लंड मुंह में ले लिया। उसने गहरी चूसाई शुरू कर दी। साली एकदम खेली खाई रंडी के जैसे लंड चूस रही थी। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। होंठ कसकर लिपटे हुए थे। वो आवाजें निकाल रही थी।

“म्म्मह्… चूसती हूं… कितना मोटा है…”

अब अनमोल ने अंजलि को बोला, “बस लंड ही चूसती रहोगी या चोदने भी दोगी।”

वो खुशी से खड़ी हुई और पहले ब्रा फिर पैंटी उतार कर फेंकते हुए बोली, “आजा साले … मेरे भैया के आने से पहले जितना चोदना है, चोद ले।”

पर वो लोग क्या जानते थे कि मैं घर पर आ चुका था।

दोनों हरामी मेरी बहन की एक-एक चुच्ची चूसने लगे। एकदम दुधमुंहे बच्चे के जैसे निप्पल चूसने में लगे थे। मेरी रांड बहन दोनों के सर पर हाथ फेरते हुए उनको अपना दूध चुसवा रही थी। अनमोल और मोनू उसके मोटे निप्पलों को मुंह में भरकर जोर-जोर से चूस रहे थे। उनकी जीभें निप्पलों को घुमा रही थीं। कभी-कभी दांतों से हल्का काटते भी थे। अंजलि की सांसें तेज हो गई थीं। उसकी आहें कमरे में गूंज रही थीं। बड़ा गजब का सीन था। मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था।

उसके बाद अंजलि उन दोनों को हटाते हुए बोली, “अनमोल भैया, आप मेरी चूत चोदो और मोनू (अनमोल का कजिन) आप मेरी गांड मारो … वो भी एक साथ पेलना।”

अनमोल बोला, “साली, मेरे को भैया मत बोलो।”

वो हंस कर बोली, “ठीक है मेरे जानू …”

अनमोल ने मेरी बहन की इच्छा के जैसा ही किया। वो नीचे लेट गया। अंजलि उसका मोटा काला लंड अपनी चूत में लेकर उसके ऊपर आ गयी। उसकी चूत पहले से गीली थी। लंड धीरे-धीरे अंदर घुसा तो अंजलि की कमर कांप उठी। मोनू पीछे से बहन की मोटी गांड फैलाकर अपना लंड उसके गांड के छेद पर रखा। उसने जोर से धक्का दिया। पूरा लंड एक साथ अंदर चला गया। दोनों के पूरे लंड अन्दर घुसे तो मेरी रांड बहन की चीख निकल गई।

“उम्म्ह… अहह… हय… याह…”

मगर साली पक्की चुदक्कड़ थी। सो एक मिनट में ही दोनों के लंड अपनी गांड और चूत में लील गई। अब वे दोनों एक साथ मिलकर लगातार उसकी गांड और चूत में लंड पेल रहे थे। हर धक्के के साथ अंजलि का पूरा शरीर हिल रहा था। उसके बड़े चुचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे। पसीना उसकी पीठ पर बह रहा था। कमरे में चूत और गांड की चुदाई की आवाजें भर गई थीं।

फिर अनमोल ने पूछा, “आज तक कितने लंड ले चुकी हो?”

बहन मजा लेते हुए बोली, “अब तक 6 लौड़े ले चुकी हूँ।”

ये सुनकर मेरे होश उड़ गए।

कुछ देर बाद दोनों ने अपना-अपना स्थान बदला। इतनी देर में वे लोग एक-एक बार झड़ चुके थे।

उसके बाद मैंने बहन को कॉल लगाने को सोचा। बहन का फ़ोन बजा तो सारे सकपका गए। मैंने कहा, “मुझे अभी डेढ़ घंटा और लगेगा।”

यह सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वो बोली, “तो क्या मैं केक काट लूं?”

मैं बोला, “हां काट लो। क्या तुम अकेली हो घर पर?”

तो बोली, “नहीं … अभी भैया और उनके भाई यही हैं।”

मैं बोला, “हां ठीक है। मैं आता हूँ … बाय।”

उसके बाद अनमोल का फ़ोन बजा। सुनने के बाद मालूम हुआ कि राहुल ने उसे कॉल किया था।

अनमोल ने उसको बोला कि वो मेरे घर पर है। उसकी बहन का बर्थडे सेलिब्रेट करने आया है।

तभी बहन बीच में बोली कि उसे भी बुला लीजिए … आज पूरा मजा आ ही जाने दो।

अनमोल बोला, “आ जाओ तुम भी … तुमको भी मजा दिलवा देता हूँ।”

राहुल ने पूछा, “कैसा मजा?”

तो अनमोल ने ये कहते हुए कॉल कट कर दिया, “यहीं आ जा, सब मालूम हो जाएगा।”

अब वो लोग नंगे ही रूम डेकोरेट करने लगे। बीच-बीच में वो लोग मेरी बहन को किस करते। उसके दूध दबाते या उसकी चूत में उंगली कर देते। अंजलि की चूत अभी भी दोनों के वीर्य से गीली थी। अनमोल ने उसे चूमते हुए उसके मोटे चुचों को जोर से मसला। मोनू पीछे से उसकी गांड थपथपाते हुए उसकी चूत में दो उंगलियां डालकर अंदर-बाहर करने लगा। बहन भी उन दोनों के लंड से खेलते हुए सजावट करने में लगी थी। उसके हाथ कभी अनमोल के लंड को सहलाते तो कभी मोनू के लंड को हिलाते।

कोई दस मिनट के बाद डोरबेल बजी। मैं छुप गया। अनमोल ने कपड़े पहन कर गेट खोले और राहुल को अन्दर ले लिया।

उसके बाद वो सब लोग रूम में चले गए। रूम का गेट अंदर से लॉक कर लिया। अब मैं फिर खिड़की के पास आ गया।

राहुल बोला, “क्या करना है, केक काटना है?”

तभो उधर से बाथरूम से मेरी बहन ब्रा पैंटी में निकली। राहुल हक्का बक्का रह गया। उसको समझ आ गया था कि सीन क्या होने वाला है।

वो भी खड़ा हुआ और अपने कपड़े खोलने लगा। उसके बाद उन लोगों ने मेरी बहन को घेर लिया और मेरी बहन अब उन सबका लंड चूस रही थी।

अंजलि घुटनों के बल बैठ गई। उसके सामने तीन मोटे काले लंड थे। वो दो के लंड को हाथ से पकड़ कर बारी-बारी से चूस रही थी। उसकी नरम उंगलियां लंडों को कसकर पकड़े हुए ऊपर-नीचे हिला रही थीं। तीसरा लंड अनमोल का था जो खुद आगे बढ़कर उसके मुंह में ठेल रहा था। अंजलि ने मुंह खोलकर उसे गहरी चूसाई दी। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। होंठ कसकर लिपटे हुए थे। वो जोर-जोर से चूसती हुई आवाजें निकाल रही थी।

“म्म्मह्… उफ्फ्… कितने स्वादिष्ट लंड हैं… चूसती हूं… और चूसती हूं…”

क्या मस्त सीन था वो। मेरी तो गांड फटने के साथ-साथ लंड भी पानी टपकाने लगा था।

उसके बाद उन लोगों ने मेरी बहन को लिटा दिया। तीनों पिपासुओं ने उसकी चूत को खूब चूसा। अनमोल ने उसके मोटे होंठों को फैलाकर चूत की गहराई में जीभ डाली। मोनू और राहुल उसके निप्पल चूसते हुए कभी-कभी उंगलियों से उसकी चूत में उंगली कर रहे थे। बेहिसाब चुत चुसाई में बहन का शरीर तन गया। उसकी कमर ऊपर उठने लगी। वह जोर-जोर से कराह रही थी।

“अह्ह्ह… हां… चूसो… मेरी चूत चूसो… मैं झड़ने वाली हूं… आह्ह्ह!”

बहन एक बार झड़ गई। उसकी चूत से रस निकलकर उनके मुंह पर फैल गया।

फिर आया चोदने का टाइम। बहन फिर सैंडविच स्टाइल में चुद रही थी। इस बार अनमोल उसके मुंह में लंड दिए खड़ा था। अंजलि उसके लंड को पूरा मुंह में ले रही थी। नीचे मोनू ने उसकी चूत में लंड घुसा दिया। राहुल पीछे से गांड में। तीनों तरफ से लंड अंदर-बाहर हो रहे थे। बहन का पूरा शरीर हिल रहा था। उसके चुचे उछल रहे थे। पसीना चारों तरफ उड़ रहा था। सभी ने बहन की चूत गांड और मुंह का खूब मजा किया।

फिर एक एक करके वे तीनों बहन के मुँह में झड़ गए। उसके बाद सभी ने केक काटा। केक भी बहन की चुच्ची पर लगा-लगा कर खूब चूसा।

कुछ ही देर में मस्ती फिर से परवान चढ़ने लगी। उन तीनों ने मेरी बहन की पूरे शरीर पर केक लगा कर चाटना शुरू कर दिया। अनमोल ने उसके बड़े चुचों पर केक फैलाकर जोर से चाटा। मोनू ने उसकी चूत पर केक लगाकर जीभ से साफ किया। राहुल ने उसकी गांड और कमर पर केक लगाकर चाटते हुए उंगलियां घुसाईं। अंजलि कराह रही थी। उसका शरीर चिपचिपा और मीठा हो गया था।

इसके बाद सभी ने एक बार और बहन चोदने का प्लान किया। बस सभी शुरू हो गए।

इस बार मेरी बहन की अंधाधुंध चुदाई हो रही थी। वो लोग पूरी ताकत से मेरी बहन को रंडी समझ चोदने में लगे थे। अनमोल ने उसे कुत्ते की तरह घुटनों पर बैठाकर गांड में लंड ठोंका। मोनू सामने से चूत में घुस गया। राहुल उसके मुंह में लंड दे रहा था। तीनों तरफ से तेज धक्के पड़ रहे थे। बहन का शरीर बार-बार झटके खा रहा था। उसके चुचे जोर-जोर से हिल रहे थे।

दस मिनट में अनमोल को छोड़ सभी झड़ गए थे। फिर अनमोल ने जो जोरदार चुदाई चालू की तो समझो पूरे घर में बहन की ‘आह आह आह..’ की आवाज के साथ लंड चूत की ‘पच पच..’ की आवाजें गूंजने लगी थीं।

कुछ देर बाद वो दोनों एक साथ झड़ गए और लेट गए।

सब एक साथ लेटे हुए थे। मेरी बहन की चुदाई लगातार 3 घंटे चली थी और टाइम का पता ही नहीं चला था। बहन की चूत से वीर्य टपक रहा था। फिर सभी एक साथ नहाने घुस गए और सबने बहन को नहलाया। उसके बाद वो लोग कपड़े पहनने लगे। मैं भी गेट खोल कर बाहर आ कर सिगरेट पीने लगा।

उसके बाद अंजलि का कॉल आया, “भैया आप कहां पहुंचे?”

मैं बोला, “बस चौक पर आ गया हूँ। कोई 5 मिनट में घर आ जाऊंगा।”

मैंने घर जाकर घंटी बजाई। राहुल ने गेट खोला। मैंने उसे देख कर पूछा, “अरे राहुल तुम कब आए?”

वो बोला, “बस अभी आधा घंटा हुआ है।”

सब कुछ अरेंज्ड था। मैंने केक मांगा खाने को तो बहन बोली कि इन तीनों ने सब खाकर खत्म कर दिया।

मगर मैं तो जानता ही था कि केक कैसे-कैसे खाया है सबने।

थोड़ी देर सभी दोस्तों से बात हुई। उसके बाद उन लोगों ने अंताक्षरी खेलने का प्रोग्राम बनाया।

मैं बोला, “यार मैं तो थका हुआ हूँ।”

बहन ने बोला, “ओके भैया आप खाना खा लो, फिर सो जाना … हम लोग खेल लेंगे।”

रात का खाना हम लोगों ने बाहर से आर्डर कर लिया। जैसे ही खाना आया हम सब खाना खाकर टीवी देखने लगे। थोड़ी देर बाद मैंने कहा कि मैं सोने जा रहा हूँ, गुड नाईट।

बहन बोली, “गुड नाईट भैया, स्वीट ड्रीम्स।”

अनमोल बोला, “अच्छे से सोना।”

राहुल और मोनू ने भी गुड नाईट कहा और मैं चला गया।

मैं जाते समय यही सोचता हुआ आश्चर्य कर रहा था कि इन सब लोगों को इतनी हवस चढ़ी हुई है कि सबने मुझे तुरंत गुड नाईट कह दिया।

मैं अपने रूम में चला गया और गेट को जोर से बंद किया। मेरे पीछे-पीछे राहुल आया था। मैं समझ गया था कि वो क्यों आया। मेरे कमरे में घुसने के बाद मैंने दरवाजे पर कान लगा कर महसूस किया कि वो दो मिनट तक मेरे रूम के बाहर खड़ा रहा।

मुझे सोने से पहले हल्का संगीत सुनने की आदत थी जो कि मेरे दोस्तों को मालूम था। मैंने रोज के जैसे स्पीकर पर मद्धिम आवाज में गाना बजा दिया। लाइट ऑफ कर दी। ये समझ कर राहुल वहां से दो मिनट रुकने के बाद चला गया।

उसके बाद मैंने बिस्तर पर तकिया लगा कर उसके ऊपर चादर डाल दी और पीछे वाले दरवाजे रूम से बाहर आ गया। मैं सीधे बहन के रूम के पास गया और कान लगा कर सुनने लगा।

वे लोग बातें कर रहे थे।

राहुल बोला, “अनमोल, तूने इसे आज पहली बार चोदा है?”

अनमोल बोला, “हां।”

राहुल ने पूछा, “कैसे मान गयी?”

अनमोल बोला, “अंजलि तुम बताओगी या मैं बताऊं?”

अंजलि बोली, “आप ही बताइए न।”

अनमोल ने कहा, “मैंने इसको बगल वाले लड़के का लंड चूसते देखा था। उसी दिन समझ गया था कि चुदाई के मचलती जवानी है। बस मैं तो इसे चोदने का मौका तलाश रहा था कि कब मुझे मौका मिले और मैं इसके हुस्न का मजा ले सकूं। इसीलिए केक देते वक्त मैंने इससे पूछा कि चॉकलेट खाती हो। जिस पर ये बोली कि हां। मैंने कहा कि बगल वाला अभय उस दिन जो चॉकलेट तुमको खिला रहा था, वो वाला चलेगा। ये मुस्कुरा दी। बस फिर क्या था … इसे हां करना पड़ा।”

अंजलि बोली, “ऐसा नहीं है, मुझे तगड़े और काले लंड बहुत पसंद हैं। काले लंड मेरी कमजोरी हैं। मैंने आपको एक बार पेशाब करते वक़्त देखा था। बस मुझे आपका लंड भा गया था और उसी दिन मैं आपसे चुदने को बेताब थी।”

राहुल ने पूछा, “मेरा लंड पसंद नहीं आया क्या?”

अंजलि बोली, “अभी बताती हूँ पसन्द आया या नहीं।”

अनमोल बोला, “हां … बता न।”

अंजलि बोली, “भैया सो गए थे न?”

राहुल बोला, “हां।”

इसके बाद मेरी रांड बहन ने अपनी चुत और गांड का कैसे गैंग बैंग करवाया, ये सब आपको उसकी चुत चुदाई की कहानी के अगले भाग में लिखूँगा।

आपको सेक्स कहानी कैसी लग रही है?

अगला भाग: मेरी लंडखोर रंडी बहन की गैंग बैंग चुदाई-2

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।

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