Sali ki chut sex story: हाय दोस्तों, मैं मानसी आप सभी का फ्री सेक्स कहानी में स्वागत करती हूँ।
दोस्तों, कुछ ही महीने पहले मुझे फ्री सेक्स कहानी के बारे में पता चला। जब मैंने यहाँ की मस्त सेक्सी स्टोरी पढ़ी तो मेरी चूत बिलकुल गीली हो गई। इसलिए मैंने फैसला किया कि जो कांड मैंने अभी तक किए हैं, उनके बारे में आप लोगों को जरूर बताऊंगी।
पाँच महीने पहले मेरे जीजा जी मेरे घर आए। वे एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर हैं। गर्मी की छुट्टियों में मेरी दीदी और बच्चों को लेकर वे हमारे घर आए।
जब जीजा मुझे देखते तो मुझसे चिपकने लग जाते। तरह-तरह के कॉम्प्लिमेंट मुझे देते। “मानसी!! साली जी! तुम बहुत सुंदर हो। मेरी शादी तुम्हारी दीदी ने नहीं बल्कि तुमसे होनी चाहिए।” जीजू बोले।
फिर वे मुझे रोज कहीं-कहीं घुमाने ले जाते। कभी आइसक्रीम खाने ले जाते।
धीरे-धीरे जीजा मुझे पसंद आने लगे। अब वे मेरे घर के सदस्यों से छुपकर मुझे छूने लगे। मेरे नए-नए छोटे-छोटे बूब्स पर जीजा का हाथ लगने लगा।
फिर एक दिन जब मेरे सारे घर वाले किसी मंदिर के दर्शन करने गए थे, जीजा ने मुझे पकड़ लिया और गले लगा लिया। मुझे भी यह सब बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने भी जीजा को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उनका आलिंगन करने लगी।
धीरे-धीरे हम अपनी मर्यादा भूल गए और एक-दूसरे को चूमने-चाटने लगे। जीजा ने मेरी नाजुक, गुलाब की पंखुड़ी जैसे कुँवारे होठों को पहले अपने हाथ से छुआ। उनकी उँगलियाँ मेरे नरम होठों की गर्माहट महसूस कर रही थीं।
फिर उन्होंने अपने गर्म और नम होठ मेरे कुँवारे होठों पर रख दिए। जीजा मुझे गहरी चुम्बन देने लगे और मेरे होठों को चूसने लगे। मैंने उनके साथ सारी हदें पार करती चली गई।
जैसे मैं उनके वश में आ गई थी। धीरे-धीरे वे मेरे कान को चबाने लगे। उनकी गर्म साँसें मेरे कान के अंदर घुस रही थीं, जिससे मुझे गुदगुदी होने लगी। बड़ा अच्छा लग रहा था।
धीरे-धीरे जीजा मेरे गले की पतली, नाजुक खाल को हल्का-हल्का दाँतों से कुतरने लगे। मुझे तो पूरे शरीर में झुनझुनाहट होने लगी।
जीजा आगे बढ़ने लगे। मुझे उन्हें इसी वक्त रोक देना चाहिए था। पर न जाने क्यों मैं कमजोर हो गई थी। जीजा ने मेरा दुपट्टा मेरे सीने से निकालकर हटा दिया।
मेरा यौवन मेरी छातियों पर उनके हाथ न जाने कहाँ से आ गए। मुझे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था।
धीरे धीरे जीजा आगे बढ़ते चले गए। आगे… और आगे।
वो जोर-जोर से मेरे नींबू जैसे दूध दाबने लगे। मैंने उनको कुछ नहीं कहा। जबकि मुझे उन्हें इसी समय रोक देना चाहिए था। हम दोनों अपनी-अपनी हदें पार कर गए। फिर जीजा मुझे बिस्तर पर ले गए। हमारे घर में कोई नहीं था। क्योंकि सभी लोग मंदिर दर्शन करने गए थे।
इधर मेरे जीजा मेरी चूत का दर्शन करना चाहते थे। शायद मैं भी यह सब चाहती थी। उन्होंने मेरे दोनों हाथ ऊपर कर दिए। मैं जानती थी क्यों। फिर जीजा ने मेरा सफेद रंग का सूट निकाल दिया। जैसे ही सूट उतरा, मैंने दोनों हाथों से अपने दूध छुपाने की कोशिश की। मैंने लाल रंग की ब्रा पहन रखी थी। तीस साइज थी इसका।
जीजा मुझे चूमने लगे। मैं सब समझ रही थी। वो चाहते थे कि मैं अपने हाथ अपनी इज्जत, अपनी कड़क छातियों से हटा लूँ। पर मैंने ऐसा नहीं किया। जीजा मुझे लाख चूमते-चाटते रहे, पर मैंने अपने हाथ नहीं हटाए।
“साली जी!! क्या तुम चुदाई के बारे में कुछ जानती हो?” जीजा ने मेरे कान में फुसफुसाकर बोला। मैं कुछ नहीं बोली। पर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने ना में सर हिला दिया।
“अरे साली जी!! चुदाई दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज होती है! जिंदगी में तुमको एक बार जरूर चुदवाना चाहिए। दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज को क्या तुम नहीं पाना चाहती हो?” जीजा बोले।
“हाँ!! जीजा जी! मैं चुदवाना चाहती हूँ।” मैंने कहा।
“तो साली जी! अपने हाथ हटाओ अपनी नर्म-नर्म छातियों से।” जीजा बोले। तो दोस्तों, मुझे न चाहते हुए भी अपनी नर्म-नर्म नई-नई कड़क छातियों से हाथ हटाने पड़े।
जीजा ने मेरी पीठ में हाथ डाल दिया और मेरी ब्रा निकाल दी। हाय दोस्तों, कितनी बड़ी बात थी। एक भारतीय लड़की किसी के सामने बिना कपड़ों के नहीं आती है। और मैंने अपनी इज्जत जीजा के सामने रख दी।
मेरे हाथ तुरंत मेरी दोनों नंगी, बेहद नर्म मलाई जैसी खूबसूरत छातियों को छिपाने दौड़े। पर जीजा के हाथ वहाँ उससे पहले पहुँच गए। उन्होंने मेरी छातियों पर अपने हाथ रख दिए। मेरा जिया धक्क से हो गया।
जीजा धीरे-धीरे मेरी नंगी नर्म छातियों पर हाथ फेरने लगे। उन्होंने मेरे हाथ नीचे कर दिए। यह सब रंगरेलियाँ चलती रहीं। बड़ी देर बाद मैं नॉर्मल फील कर पाई। अब मैंने पाया कि जीजा धीरे-धीरे मेरे दूध को दबा रहे थे।
एक अजीब सी झनझनाहट पूरे बदन में हो रही थी। जैसे कोई चींटी नीचे से ऊपर तक काट रही थी।
जीजू आगे बढ़ने लगे। मेरी छोटी छातियों को दबाने लगे। मुझे नहीं मालूम था कि लड़के लड़कियों की छाती को दबाते हैं।
“जीजा!! क्या दीदी ने भी आपसे अपनी नर्म छातियाँ इसी तरह दबवाई थीं?” मैंने झुकी पलकों से पूछ लिया। जीजू को मुझ पर प्यार आ गया। उन्होंने करीना कपूर जैसी मेरी खूबसूरत आँखें चूम लीं।
“हाँ!! साली जी!! सुहागरात में तुम्हारी दीदी ने अपनी नर्म छातियाँ मुझसे इसी तरह दबवाई थीं।” जीजा बोले।
ये जानने के बाद मैं थोड़ा कम्फर्टेबल फील कर रही थी। मैं जीजू के सामने खुल गई थी। मैंने अपने हाथ नीचे कर लिए जिससे जीजा मेरे बूब्स अच्छे से दबा सकें।
फिर क्या था दोस्तों, जीजा ने मेरे छोटे-छोटे नींबू अपने ताकतवर हाथों में पकड़ लिए और जोर-जोर से दबाने लगे। मेरे पूरे बदन में झुनझुनी होने लगी। जीजा के हाथ फौलाद जैसे थे। मेरे नींबू को पकड़कर वे जैसे निचोड़ने लगे।
दोस्तों, मेरी तो जान ही जाने लगी। जीजा मेरे साथ फुल रोमांस, फुल मजा करना चाहते थे। वो जोर-जोर से मेरे टिकोरों को दबा रहे थे। और मेरे गोरे-गोरे गालों को चूमने लगे।
फिर सारी हदें पार हो गईं जब उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। एक साथ जीजू मेरे होठ पीने लगे और मेरी नर्म-नर्म छातियाँ अपने पंजों में भरकर दबाने लगे।
मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। इसलिए मैं चाहकर भी उन्हें रोक नहीं पाई। मुझे शर्म भी बहुत आ रही थी कि मैं अपनी दीदी की तरह अपने जीजा से चुदवाने जा रही थी। जबकि मुझे चोदने का लाइसेंस जीजू के पास नहीं था। उनके पास तो सिर्फ दीदी को चोदने का लाइसेंस था।
पर वो कहावत है ना कि साली आधी घरवाली होती है, इसलिए मेरे जीजा आज मुझे चोदने जा रहे थे। जीजा बड़ी देर तक मेरी नंगी छोटी-छोटी छातियों को दबा-दबाकर मजा लेते रहे।
इस दौरान मैंने भी जिंदगी का मजा लिया। छातियाँ दबवाने के दौरान मेरी चूत ढीली होकर गीली होने लगी।
दिल हुआ कि जीजू से कह दूँ कि भोसड़ी के, क्या सिर्फ मेरी चुचियाँ ही मिंजोगे या मुझे चोदोगे भी। मुझे मत तड़पाओ जीजा, आज जी भर के चोद लो अपनी जवान साली को। आज घर में कोई नहीं है जीजा। चोद लो….तुम अपनी चुदासी लंड की प्यासी साली को।
पर दोस्तों, मैं ये सब कह नहीं पाई। धीरे-धीरे जीजा मुझे चोदने की तैयारी करने लगे। मेरा कलेजा धक-धक करने लगा। कैसा लगेगा चुदकर। मैं यही सोचने लगी।
जीजा का हाथ धीरे-धीरे मेरी टांग से होता हुआ मेरी जांघों पर चला गया। वो मेरी जांघ सहलाने लगे। वो मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरी नर्म-नर्म छातियों को अपने मुँह में भरकर मेरी चुचियाँ पीने लगे।
मुझे जाने कैसा लगा। बड़ा अजीब सा सुख मिला मुझे। लगा जैसे आज मेरा स्त्री होना पूरा हो गया। यही अहसास हुआ मुझे। जीजा मेरी नर्म-नर्म छोटी नींबू की आकार वाली छातियाँ पीने लगे।
मैंने आँखें बंद कर लीं। एक अजीब सा नशा मुझे चढ़ गया। मजा तो बहुत आने लगा दोस्तों। आज मुझे पता चला कि किसी मर्द को चुचियाँ पिलाने में कितना सुख मिलता है।
जीजा हप-हप करके मेरी चुचुक पीने लगे। आज तो मेरा एक स्त्री होना पूरा हो गया। धीरे-धीरे जीजा मेरी गोरी चिकनी जांघें सहला रहे थे।
वो एक के बाद एक चुची अपने मुँह में भर लेते थे और किसी छोटे बच्चे की तरह आवाज करते हुए पीते थे। इस दौरान मुझे पूरे शरीर में सनसनी होने लगी थी।
अब तो यही मन था कि जीजा मुझे जल्दी से चोदें। मेरी मुलायम बुर में अपना पत्थर जैसा लौड़ा डालकर मुझे इतना चोदें कि मेरी माँ चुद जाए। मेरी माँ-बहन एक हो जाए। यही मेरा दिल कर रहा था।
इस दौरान मेरी नजरें झुकी रही। जीजा मेरे दूध बदल-बदलकर पीते रहे। फिर उनका हाथ मेरी सलवार के नारे तक आ पहुँचा।
मैं जानती थी कि अब आगे क्या होगा। जीजा ने मेरी सलवार की गोरी डोरी उँगली में फँसाकर खींच दी। डोरी सर्रर्र की आवाज करते हुए खुल गई।
जीजा मेरी सलवार धीरे-धीरे नीचे करने लगे।
“नहीं जीजा!! ….आज नहीं! फिर कभी।” मैंने मना कर दिया। पर अंदर से मेरा चुदवाने का पूरा मन था। जीजा ने मेरी बात नहीं सुनी। मेरे दूध पीते-पीते सलवार नीचे सरका दी। मैंने गुलाबी रंग की पैंटी पहन रखी थी। मेरी दीदी ने मुझे यह गिफ्ट की थी।
“अरे!! साली जी!! यह पैंटी तो मैं तुम्हारी दीदी के लिए खरीदकर लाया था!” जीजा बोले।
“हाँ! जीजा! दीदी ने मुझे यह गिफ्ट कर दी थी।” मैंने कहा।
जीजा मुस्कुरा दिए। उनकी आँखों में सिर्फ और सिर्फ वासना थी। मुझे चोदने की वासना उनकी आँखों में तैर रही थी। मेरी नाजुक चूत में वो अपना पत्थर जैसा लंड डालकर मुझे रगड़कर चोदना चाहते थे। मैं यह बात अच्छी तरह जानती थी।
जीजू मेरे नर्म दूध पीते रहे। उनका हाथ मेरी पैंटी पर आ गया। मेरी चूत के ऊपर पैंटी पर वो जोर-जोर से उँगली रगड़ने लगे। दोस्तों, मेरी तो माँ चुदने लगी। मुझे बिजली के झटके लगने लगे। मेरे पूरे बदन में करेंट दौड़ने लगा।
जीजा जोर-जोर से मेरी पैंटी अपनी उँगली से घिसने लगे। मेरी चूत घिसने लगी। मैंने अपने हाथ-पाँव पटकने लगी। जीजा ने मेरे दोनों हाथ-पैर पकड़ लिए। बड़ी देर तक यही करते रहे।
बदल-बदलकर मेरे नर्म-नर्म कुँवारे दूध वो पीते और पैंटी के ऊपर से मेरी चूत घिसते। मेरी तो गांड फट गई दोस्तों। फिर जीजा ने मुझे कुछ सेकंड के लिए छोड़ दिया। एक-एक कर अपने सारे कपड़े निकाल दिए। अपना अंडरवीयर भी निकाल दिया।
जीजू ने मेरी पैंटी आखिर उँगली से खींचकर निकाल दी। हाय राम, अपने जीजा के सामने मैं पूरी तरह से नंगी थी। मेरी इज्जत उनके हाथ में थी।
जीजा ने मेरी चूत देखी तो वो आँखों से मेरी चूत चोदने लगे। इतनी घूर-घूरकर मेरी गुलाबी चूत देख रहे थे जैसे अभी उसको खा जाएँगे। बड़ी देर तक जीजू मेरी चूत के दर्शन करते रहे।
फिर उन्होंने मेरी दोनों पैर खोल दिए। मैंने शर्म और हया से अपने दोनों हाथ अपनी आँखों पर रख लिए। जीजा ने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया और मेरी चूत पीने लगे।
मेरे पूरे जिस्म पर आग की लपटें उठ रही थीं। जीजा मेरी चूत पी रहे थे। कितनी अजीब बात थी। शादी से पहले ही मैं चुदने वाली थी। शादी से पहले मैं शादी का मजा मारने वाली थी।
मैं अपनी आँखें नहीं खोली। अपने दोनों हाथों से अपना मुँह ढके रही। जीजा मेरी बुर का चूतपान करने लगे। वो मजे लेकर मेरी कुँवारी चूत पी रहे थे।
जीजा का लंड धीरे-धीरे बड़ा ठोस होता जा रहा था। मैं जानती थी जितना उनका लंड ठोस होगा, उतना ही चुदवाने में मुझे मजा आएगा। दोस्तों, मैं यह बात अच्छे से जानती थी।
जीजा अपनी जीभ निकालकर मेरी चूत लप-लप करके पीने लगे। मैं जन्नत की सैर करने लगी। चाँद-तारों में मैं उड़ने लगी। मेरी चूत बिलकुल पानी-पानी हो गई थी।
जीजा से मेरी मीठी नमकीन चूत का खूब मजा लिया।
फिर उन्होंने उँगली से मेरी नाजुक चूत खोलकर देखी। उनको एक बंद झिल्ली दिखाई दी।
“साली जी!! क्या आपको किसी ने अभी तक चोदा नहीं?” जीजा ने पूछा। मैं कुछ नहीं बोली। मैंने सिर्फ ना में सर हिला दिया।
जीजा ने अपना लौड़ा सेट किया। हाथ से दो-चार बार मुठ मारने लगे। उनका लंड कोई आठ इंच का लंबा था और दो इंच का मोटा था।
जीजा ने मेरी चूत पर लंड रख दिया और धक्का जोर से मारा। मेरी माँ चुद गई। उनका लोहे जैसा सख्त लंड मेरी चूत की सील तोड़ता हुआ अंदर घुस गया।
मैंने जीजा को मना करना चाहती थी। पर वो बड़े चालाक निकले। उन्होंने मेरे छोटे से मुँह पर अपना ताकतवर हाथ रख दिया। इससे मैं दर्द से चिल्ला भी नहीं पाई।
जीजा मुझे दनादन चोदने लगे। मेरी खूबसूरत काँच जैसी आँखों से मोतियों की तरह मेरे आँसू बह रहे थे और नीचे लुढ़क रहे थे। मेरे गाल से लुढ़कते हुए मेरे गाल तक जा रहे थे। मैं रो रही थी और जीजू से चुद रही थी।
पूरे पंद्रह मिनटों तक जीजा ने मेरे छोटे से मुँह पर अपना बड़ा सा ताकतवर पंजा दबाए रखा और मुझे किसी घर की मालकिन की तरह चोदते रहे। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मेरी चूत पर सब ओर खून ही खून लगा हुआ था।
मेरे जीजू का लौड़ा मेरी चूत की लाल स्याही से रंग चुका था। जीजा मुझे फटाफट करके चोद रहे थे। वो तो ऐश कर रहे थे, मजे लूट रहे थे और इधर मैं चुद रही थी।
मुझे दर्द हो रहा था। जीजा का लौड़ा बड़ा ताकतवर निकला। उन्होंने मुझे आधे घंटे चोदते रहे पर एक बार भी नहीं झड़े। इधर मैं एक बार झड़ चुकी थी। मैंने अपना माल जीजा के लौड़े पर ही छोड़ दिया था।
आधे घंटे बाद जीजा ने अपना हाथ निकाल लिया और लंड भी कुछ देर के लिए निकाल लिया।
“क्यों साली जी….मजा आया कि नहीं?” जीजा बोले।
“हाँ जीजा मजा तो आया!! पर दर्द बहुत हुआ।” मैंने कहा।
“कोई बात नहीं…धीरे-धीरे तुम्हारा दर्द खत्म हो जाएगा!” जीजा बोले।
फिर वो मेरी चूत पीने लगे।
फिर उन्होंने अभी-अभी चुदी चूत में उँगली डाल दी और फेरने लगे। मुझे पूरे बदन में सनसनी होने लगी। जैसे न जाने क्या मेरे साथ हो रहा है।
जीजा बड़ी देर तक मेरी चूत में जल्दी-जल्दी उँगली करते रहे। फिर अपना मुँह लगाकर मेरी बुर पीने लगे। अब मैं कुँवारी लड़की नहीं रह गई थी। अपने जीजा के साथ मैंने अपने कुँवारेपन को खत्म कर दिया था।
फिर जीजा ने फिर से मेरी नाजुक जान से प्यारी चूत में अपना लोहे जैसा लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगे।
शुरू-शुरू में मुझे दर्द हुआ, पर धीरे-धीरे दर्द खत्म हो गया और जगह लेने लगा गहरा सुख।
“आह्ह… साली रंडी… तेरी चूत तो बिलकुल स्वर्ग है… मेरे लंड को कितनी जोर से चूस रही है,” जीजा ने गरम साँसों के साथ कहा और गहरे ठोके लगाने शुरू कर दिए।
कुछ देर बाद जीजा तो मुझे ऐसे चोदने लगे जैसे मैं कोई रंडी छिनाल हूँ। उन्होंने किसी नुची मुर्गी की तरह अपने पंख फैलाकर पड़ी हुई थी। जीजा अपना पिछवाड़ा बड़ी जोर-जोर से चला रहे थे और गच-गच्च करके मुझे पेल रहे थे।
“ले… ले अपनी जीजा का मोटा लंड… बोल साली, तेरी चूत को फाड़ रहा हूँ ना?” जीजा हाँफते हुए बोले। मैं सिसकते हुए जवाब दी, “हाँ जीजा… आह्ह… फाड़ दो… पूरी चोद लो अपनी साली की चूत को… ओह्ह… बहुत मजा आ रहा है।”
मेरी चूत से पक-पक की आवाज आ रही थी। मैं अपने जीजा से चुद रही थी। फिर जीजा किसी मशीन की तरह मुझे बिजली की रफ्तार से पक-पक पेलने लगे।
उन्होंने मुझे कुत्ते की मुद्रा में घुटनों पर कर दिया और पीछे से जोर-जोर से ठोके लगाने लगे।
“कुतिया जैसी चुद रही है मेरी साली… ले… और ले…” वे बोलते हुए मेरी कमर पकड़कर तेजी से धक्के दे रहे थे।
जीजा ने मेरी कमर को दोनों हाथों से मजबूती से थाम लिया था। उनका मोटा, लोहे जैसा लंड मेरी चूत में पूरी ताकत से घुस-घुसकर बाहर निकल रहा था। हर ठोके के साथ मेरी चूत से जोरदार पच-पच और गच-गच्च की आवाजें गूँज रही थीं।
“आह्ह… जीजा… बहुत जोर से… ओह्ह… फाड़ दोगे मेरी चूत को,” मैं दर्द और मजे के मिश्रण में चीखते हुए बोली। जीजा ने मेरे बालों को हल्के से खींचा और और तेजी से पेलने लगे।
“चुप कर रंडी साली… चुपचाप अपनी गांड ऊँची करके चुदवा… तेरी दीदी से भी ज्यादा टाइट है तेरी चूत,” उन्होंने गरम साँसों के साथ कहा और एक हाथ से मेरी लटकती छातियों को जोर-जोर से दबाने लगे।
मेरी गोरी जांघें उनके हर धक्के से काँप रही थीं। मेरी चूत उनके लंड के आकार को पूरी तरह से अपना चुकी थी। हर बार जब उनका लंड अंदर तक धँसता तो मेरे अंदर एक गहरा कंपन फैल जाता।
मैं घुटनों के बल झुकी हुई थी, मेरी छातियाँ नीचे लटक रही थीं और जीजा पीछे से जानवरों की तरह मुझे चोद रहे थे। “हाँ… इसी तरह… कुतिया बनकर चुद… ले मेरी साली… तेरी चूत आज मेरे लंड की गुलाम हो गई है,” जीजा फुसफुसाते हुए और भी तेज ठोके लगाने लगे।
मेरी चूत से लगातार रस निकल रहा था जो उनकी जांघों तक बह रहा था। पूरा कमरा हमारे शरीरों की चप्प-चप्प और हमारी हाँफती साँसों से भर गया था।
मेरे नींबू अब चुदने के दौरान बड़े हो गए थे। मैं पहली बार नहीं बल्कि कई बार झड़ चुकी थी, हर बार मेरे शरीर में तेज कंपन उठता और मेरी चूत उनके लंड को और भी भीगेपन से निचोड़ती।
फिर जीजा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, मेरी टांगें अपने कमर के चारों ओर लपेट दीं और खड़े-खड़े मुझे ऊपर-नीचे करके चोदने लगे।
मेरी छातियाँ उनके मुँह से टकरा रही थीं।
“आह्ह… साली जी, तेरी कसी हुई चूत कितनी टाइट है… पूरी तरह मेरे लंड को निचोड़ रही है,” जीजा ने हाँफते हुए कहा और मुझे जोर से नीचे गिराते हुए अपना मोटा लंड पूरी गहराई तक ठोंक दिया।
मेरी भीगी चूत उनके हर ठोके के साथ पक-पक की आवाज कर रही थी। “जीजा… आह्ह… धीरे… ओह्ह… बहुत गहरा जा रहा है,” मैं सिसकते हुए बोली, लेकिन मेरी टांगें उनकी कमर को और कसकर जकड़ रही थीं।
उनके मजबूत हाथ मेरी कमर को थामे हुए थे। हर बार जब वे मुझे ऊपर उठाकर नीचे पटकते तो उनका गर्म, मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर तक घुस जाता।
“ले साली… ले अपनी जीजा का लंड… आज तेरी चूत को फाड़ के रख दूँगा… बोल, मजा आ रहा है ना रंडी साली?” जीजा ने गरम साँसों के साथ कहा और मेरी छातियों को चबाते हुए तेज-तेज ठोके लगाने लगे।
मुझे लग रहा था जैसे कोई आग की लौ मेरे अंदर दौड़ रही हो। मेरी साँसें तेज हो गई थीं और मेरे मुँह से अनियंत्रित सिसकारियाँ निकल रही थीं। “हाँ जीजा… आह्ह… चोदो मुझे… और जोर से चोदो… आपकी साली की चूत आपकी हो गई है,” मैं दर्द और मजे के मिश्रण में चीखते हुए बोली।
जीजा कभी मेरी एक छाती को मुँह में भर लेते तो कभी दूसरी को चूसने लगते। उनके लंड की रगड़ से मेरी चूत की दीवारें बार-बार सिकुड़ रही थीं।
मुझे कई बार तेज झटके लगे। हर बार मेरा शरीर कंपकंपा उठता और मेरी चूत उनके लंड को कसकर भीगकर निचोड़ती।
पैंतीस मिनट बाद जीजा ने मेरी खौलती चूत में अपना माल छोड़ दिया।
पंद्रह दिन बाद मेरी एमसी रुक गई और प्रेग्नेंसी टेस्ट करने पर मालूम पड़ा मैं पेट से हूँ। अब मेरे समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूँ।