Kunwari fuddi sex story, Maa beti chudai sex story, Fufi beti chudai sex story: मेरा नाम सफी है दोस्तो। मैं 22 साल का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ। मेरा कद 5 फुट 10 इंच है और बदन एकदम कसरती है। मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूँ लेकिन छोटा-मोटा अपना धंधा करता हूँ।
हमारा कुनबा बड़ा है पर सब लोग अलग-अलग घरों में रहते हैं। सबके घर आस-पास ही हैं और एक-दूसरे के घर में खूब आना-जाना रहता है।
मेरी रहीमा फूफी जान बहुत खूबसूरत, हंसमुख और हाजिरजवाब हैं। मैं उन्हें बहुत पसंद करता हूँ। वे खुलकर बोलती हैं। गंदी-गंदी बातें करती हैं और बीच-बीच में लंड, बुर, चूत भी बोल देती हैं। मादरचोद, बहनचोद जैसे शब्द उनके मुंह से आम हैं। मुझे ये सब सुनकर बड़ा मजा आता है। मैं फूफी के मुंह से गंदी बातें सुनने के लिए अक्सर उनके पास जाता था।
उनके मम्मे बहुत बड़े-बड़े हैं। जब वे चलती हैं तो मम्मे ऊपर-नीचे लहराते हैं। मेरा मन बार-बार उनके मम्मों में लंड पेलने का हो जाता था। उनकी मस्तानी गांड देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता था। उनकी गांड इतनी गोल और भरी हुई है कि हाथ लगाते ही दब जाती है। मैं उन्हें सच में एकदम नंगी देखना चाहता था। उनके कपड़ों के ऊपर से ही उनके बदन की हर लकीर साफ दिखती है और मेरी आंखें वहीं अटक जाती हैं।
एक दिन जब मैं उनके घर गया तो उनकी देवरानी मिली। वह घर में अकेली थी। जैसे ही मैं अंदर दाखिल हुआ उसने दरवाजा बंद कर लिया। उसकी आंखों में शरारत थी। मेरा कांटा फूफी की देवरानी से भिड़ा हुआ था। वह मेरे बहुत करीब आई। उसने धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखा और फिर नीचे की तरफ सरकाया। उसने मेरे पजामे के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया। मैं भी पीछे नहीं हटा। मैंने उसके मम्मों पर हाथ रख दिया और धीरे-धीरे दबाने लगा। उसके मम्मे नरम थे लेकिन सख्त भी। उसने मेरी कमीज के अंदर हाथ डाला और मेरी छाती पर उंगलियां फेरने लगी।
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फिर उसने हाथ बढ़ाकर मेरे पजामे का नाड़ा खींचा और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। उसने उसे अपनी हथेली में भर लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। उसकी उंगलियां गर्म थीं। वह मेरे लंड के सुपारे पर अंगूठे से गोल-गोल घुमा रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के अंदर हाथ डाला और उसके मम्मों को मसलने लगा। उसके निप्पल सख्त हो गए थे। मैंने उन्हें पिंच किया तो वह सिसकारी भर उठी।
उसने हाथ बढ़ाकर मेरा लंड पकड़ लिया और बोली, “जानता है सफी, तेरी फूफीजान बुरचोदी गैर मर्दों से खूब चुदवाती है। उसे लंड लेने का जबरदस्त शौक है। बड़ी चालू चीज है तेरी फूफीजान!”
मैंने कहा, “अरे मुझे ये सब नहीं मालूम था।”
वह बोली, “तुम संभल रहना, किसी दिन तेरा भी लंड पकड़ लेगी वह भोसड़ी वाली।”
मैंने कहा, “मैं तो चाहता हूँ कि वह जल्दी से जल्दी मेरा लंड पकड़ ले।”
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वह बोली, “अच्छा तो फिर मैं कुछ ऐसा करूंगी कि वह कल तुझे खुद बुलाएगी और तेरा लंड पकड़ लेगी। एक बात और तू जान ले कि तेरी फूफी जान भोसड़ी वाली मेरे शौहर का लंड लेती है अपनी चूत में।”
मैंने कहा, “तो फिर तुम क्या करती हो?”
वह बोली, “मैं भी उसके शौहर का लंड लेती हूँ अपनी चूत में!”
अब मुझे फूफी जान की करतूत मालूम होने लगी। मैं मन ही मन फूफी से एकदम बेशर्म होने लगा।
एक दिन मैं घर से निकला तो एक कोने में उसकी बेटी सबा को अपनी सहेली से बात करते देख लिया। दोनों दीवार के पीछे छिपकर फुसफुसा रही थीं। मैं चुपके से पास गया और एक पेड़ के पीछे छिपकर उनकी बातें सुनने लगा। मेरी सांसें थम सी गईं थीं ताकि वे मुझे नोटिस न करें।
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फूफी जान की बेटी सबा भी बेहद खूबसूरत है। वह 20 साल की है और एकदम टनाटन जवानी में है। उसका बदन गोरा, कसी हुई त्वचा वाला और हर अंग आकर्षक है। उसकी कमर पतली है, कूल्हे भरे हुए और मम्मे इतने उभरे हुए कि कुर्ते से बाहर झांकते हैं। उसे देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है। उसकी चाल में ही कुछ ऐसी अदा है कि मन बेकाबू हो जाता है।
वह अपनी सहेली से कह रही थी, “यार, मेरी अम्मी जान बड़ी चुदक्कड़ है। कल रात मैंने उसे नंगी होकर चाचू का लंड चूसते देखा। अम्मी घुटनों पर बैठी थीं, चाचू का लंड मुंह में लिया हुआ था। वे जोर-जोर से चूस रही थीं, सुपारे को जीभ से चाट रही थीं और कभी-कभी पूरा मुंह में लेकर गले तक ले जा रही थीं। कुछ देर बाद चाचू ने अम्मी को बिस्तर पर लिटाया और अपना लंड अम्मी के भोसड़े में पेल दिया। अम्मी की चूत से आवाजें आ रही थीं, घप-घप की। अम्मी सिसकारियां भर रही थीं और कमर हिला रही थीं। मुझे देखकर इतना जोश आया कि मेरी चूत गीली हो गई। मेरी चूत से रस टपकने लगा था। मैंने एक बार और भी अम्मी को गैर मर्द से चुदवाते देखा है। उस बार तो अम्मी चिल्ला रही थीं कि और जोर से पेलो।”
उसकी सहेली बोली, “अरे यार सबा, ऐसा तो हर घर में होता है। सबकी अम्मियां गैर मर्दों के लंड रात में लेती हैं। मैं तो हर रोज रात में अपने घर में यही देखती हूँ। मेरे पापा की सहेली आती है और पापा उसे कमरे में ले जाते हैं। मैं छिपकर देखती हूँ। अब तो मैंने भी धीरे-धीरे कुनबे के लंड लेना शुरू कर दिया है। पहले तो सिर्फ हाथ से सहलाती थी, अब मुंह में भी ले चुकी हूँ। मैं दो लंड का मजा ले भी चुकी हूँ। एक बार मेरे चचेरे भाई और उसके दोस्त ने मिलकर मुझे चोदा था। दोनों ने बारी-बारी से मेरी चूत में डाला और मैं मजा लेती रही।”
उन दोनों की बातों ने मेरे लंड में आग लगा दी। मेरा लंड पजामे में तनकर खड़ा हो गया था और दर्द करने लगा था। मैंने मन ही मन ठान लिया कि एक दिन मैं सबा की कुंवारी फुद्दी में लंड जरूर पेलूंगा। उसकी तंग चूत को फाड़कर अपना रस भरूंगा।
दूसरे दिन फूफी ने मुझे दोपहर दो बजे अपने कमरे में बुला लिया। मैं खुशी-खुशी उनके पास पहुंच गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
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मुझे देख वे हंसकर बोलीं, “अरे सफी आ जा, तू मेरे घर आता है और बिना मुझसे मिले चला जाता है। मुझे मालूम ही नहीं होता कि तू कब आया और कब चला गया। आज तुम्हें मैंने एक खास मकसद के लिए बुलाया है।”
मैंने कहा, “जी फूफी जान, बताओ मुझे किसलिए बुलाया है?”
वे बोलीं, “अरे बरखुरदार, सुना है कि तू मर्द हो गया है?”
मैं बोला, “हां फूफी जान, मर्द तो हो गया हूँ मैं!”
वे बोलीं, “पर मुझे कैसे मालूम कि तू मर्द हो गया है बेटा सफी?”
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मैंने कहा, “मैं कह तो रहा हूँ कि मैं मर्द हो गया हूँ। यकीन करो न फूफी जान!”
वे बोलीं, “मर्द होने की पहचान मर्द के लंड से होती है बेटा सफी। जब तक मैं तेरा लंड पकड़ कर देख नहीं लेती तब तक मुझे यकीन नहीं होगा कि तू मर्द हो गया है। मैं मर्दों को उनके लंड से पहचानती हूँ। इसलिए तू मुझे खोल कर दिखा अपना लंड, मैं पकड़ कर देखूंगी तेरा लंड!”
फूफी ने इंतजार नहीं किया और उठकर मेरी कमीज उतार दी। उन्होंने मेरी कमीज के बटन तेजी से खोले और उसे फेंक दिया। फिर मेरे पजामा का नाड़ा पकड़ा और एक झटके में खोल दिया। पजामा धीरे-धीरे नीचे सरकने लगा।
मैंने कहा, “ऐसे में मैं नंगा हो जाऊंगा फूफी जान!”
वे बोलीं, “नंगा करूंगी तभी तो लंड पकड़ूंगी। नंगा करके तेरा लंड पकड़ कर देखूंगी। मर्द कभी शर्माता नहीं है बेटा सफी। तू बहनचोद क्यों शर्मा रहा है?”
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मैंने कहा, “ऐसा है तो फिर तुम भी नंगी हो जाओ न फूफी जान। मैं भी तुम्हें नंगी देखना चाहता हूँ।”
वे बोलीं, “तू भोसड़ी का बड़ा चालाक है। अच्छा, ले देख ले मेरे बड़े-बड़े दूध।”
फूफी ने अपना ब्लाउज खोलकर फेंक दिया। ब्लाउज उतरते ही उनकी मस्तानी चूचियां मेरी आंखों के सामने छलक पड़ीं। वे बिना ब्रा के थीं। चूचियां इतनी बड़ी और भरी हुई थीं कि वे हिल रही थीं। निप्पल गुलाबी और सख्त थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें दबोच लिया। मेरा हाथ उनके नरम मांस में धंस गया। मैंने उन्हें मसलना शुरू किया, ऊपर-नीचे हिलाया और निप्पलों को उंगलियों से दबाया। फूफी सिसकारी भर उठीं।
इतने में मेरा पजामा पूरी तरह नीचे गिर पड़ा और मेरा लंड तनकर उसके आगे खड़ा हो गया। लंड सख्त था, नसें उभरी हुई थीं और सुपारा चमक रहा था।
वे मेरा लंड पकड़कर बोलीं, “हायल्ला… क्या मस्त लौड़ा है तेरा मादरचोद! तू सच में मर्द हो गया है। चूत क्या भोसड़ा चोदने वाला हो गया है तेरा लंड बेटा सफी! सच बताऊं… तेरे फूफा के लंड से बड़ा है तेरा लंड, उससे ज्यादा मोटा है तेरा लंड। मुझे नहीं मालूम था कि इतना बढ़िया लंड मेरे घर में ही है।”
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फूफी जान ने मेरे लंड को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ा। उनकी उंगलियां गर्म और नरम थीं। उन्होंने लंड को ऊपर-नीचे हिलाना शुरू किया, धीरे-धीरे लेकिन दबाव के साथ। फिर उन्होंने झुककर मेरे लंड पर कई चुम्मियां लीं। पहले सुपारे पर हल्की-हल्की चुंबन की, फिर लंड की पूरी लंबाई पर होंठ फेरने लगीं। उन्होंने जीभ निकालकर सुपारे को चाटा। जीभ गोल-गोल घुमा रही थीं, सुपारे के चारों ओर चाट रही थीं। कभी जीभ को लंबा करके लंड की नसों पर फेरा, कभी सुपारे के छेद पर जीभ डालकर चाटा। उनका मुंह गर्म था और लार से गीला हो रहा था। वे बोलीं, “यार सफी, मैं तेरे लंड की गुलाम हो गई हूँ।”
तब तक मैंने फूफी का भोसड़ा खोलकर बाहर निकाल लिया। मैंने उनके सलवार का नाड़ा खींचा, सलवार नीचे सरकाई और पैंटी को एक तरफ किया। उनकी चूत पहले से गीली थी, बाल साफ थे और होंठ फूले हुए लग रहे थे। मैंने उंगलियों से उनकी चूत के होंठों को अलग किया, क्लिटोरिस पर अंगूठा फेरा तो वे सिहर उठीं। अब वे मेरे आगे एकदम नंगी हो गईं। उनका बदन गोरा, चिकना और जवानी से भरा हुआ था।
मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी। 42 साल की मस्त जवान सेक्सी और एकदम हॉट थी मेरी फूफी जान। उनकी चूचियां भारी और लटकती हुई, कमर पतली, गांड गोल और मजबूत। नंगी होने पर वे और भी ज्यादा सेक्सी और हॉट लग रही थीं। उनकी चूत से हल्की महक आ रही थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
मेरा लंड साला काबू के बाहर हो जा रहा था। वह और सख्त हो गया था, नसें फूली हुई थीं और सुपारा लाल हो रहा था। मैंने उन्हें सामने पड़ी कुर्सी पर बैठा दिया। वे बैठ गईं, चूचियां फैलकर रखीं। मैं उनके सामने खड़ा हो गया, लंड उनके चेहरे के ठीक सामने।
तब मैंने कहा, “मैं सबसे पहले आपके बड़े-बड़े मम्मे चोदूंगा फूफी जान!”
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मैंने लंड दोनों मम्मों के बीच में पेल दिया। मम्मे इतने नरम और गर्म थे कि लंड उनके बीच फंस गया। फूफी ने अपने हाथों से दोनों मम्मों को दबाकर एक तंग सुरंग बना दी। मम्मों की नरमी और दबाव से लंड पर दबाव पड़ रहा था। मैं कमर हिलाने लगा, लंड आगे-पीछे सरकने लगा। सुरंग गीली हो गई थी क्योंकि मेरे लंड से प्रीकम निकल रहा था। मैं सुरंग को चूत समझकर चोदने लगा। लंड जब ऊपर जाता तो वे जीभ निकालकर लंड का सुपारा चाट लेतीं। उनकी जीभ गर्म और गीली थी, हर बार सुपारे पर चाटने से जोश बढ़ता जाता था।
उनका ऐसा करना मेरे अंदर और जोश पैदा करने लगा। मैं जल्दी-जल्दी उसकी रसीली चूचियां चोदने लगा। लंड तेजी से सुरंग में घुस-निकल रहा था। मम्मे हिल रहे थे, लहरा रहे थे। फूफी सिसकारियां भर रही थीं।
वे बोलीं, “हायल्ला बड़ा मजा आ रहा है बेटा सफी। इस तरह तो मेरे दूध आज तक किसी ने भी नहीं चोदे। मुझे बड़ा मजा आ रहा है। और चोद, खूब चोद इन्हें, आज पहली बार लंड मिला है इन्हें। लौड़ा पूरा पेल-पेल के चोद। शाबाश बेटा, तेरे लंड में बड़ी ताकत है। तू सच में बड़ा जबरदस्त मर्द बन गया है।”
मैं इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया कि मेरे लंड ने उगल दिया सारा वीर्य उसकी चूचियों पर। वीर्य गरम-गरम निकला, चूचियों पर फैल गया, कुछ निप्पलों पर टपका। मैं झड़ते हुए कांप रहा था।
फूफी जान मेरा झड़ता हुआ लंड चाटने लगीं। उन्होंने लंड को मुंह में लिया, बाकी वीर्य चूस लिया और जीभ से साफ किया।
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मैंने कहा, “माफ करना फूफीजान, मैं जल्दी झड़ गया।”
वे बोलीं, “पहली बार ऐसा ही होता है बेटा! चिंता न करो दूसरी पारी में मेरा भोसड़ा बड़ी देर तक चोदोगे तुम!”
फिर मैं बाथरूम गया। ठंडे पानी से मुंह धोया, लंड साफ किया और थोड़ा आराम करने के लिए वापस आया। मैं बिस्तर पर लेट गया।
कुछ देर बाद उसकी बेटी सबा आ गई। वह कुछ ज्यादा ही मूड में नजर आ रही थी। उसकी आंखें चमक रही थीं, चेहरा लाल था। उसे नहीं मालूम था कि मैं अंदर बिस्तर पर लेटा हूँ।
आते ही वह अपनी अम्मी से उलझ गई और बोली, “अम्मी जान, मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ।”
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फूफी बोलीं, “हां बोलो क्या कहना चाहती हो तुम बेटी सबा?”
सबा बोली, “देखो, अब मैं पूरी तरह जवान हो गई हूँ अम्मी जान। मुझे भी चाहिए लंड, लंड और लंड! मेरे कॉलेज में सभी लड़कियां लंड की बातें करती हैं और मैं चूतिया बनी हुई सुना करती हूँ, कुछ बोल ही नहीं पाती। लड़कियां सब मुझ पर हंसती हैं, कहती हैं कि सबा तो अभी बच्ची है। इसे तो दूध पीना आता है लंड पीना अभी आता ही नहीं। इस तरह कॉलेज में मेरी खूब खिल्ली उड़ाई जाती है। समझ में आया भोसड़ी वाली अम्मीजान?”
फूफी बोलीं, “तो लड़कियां लंड के बारे में क्या बातें करती हैं कॉलेज में?”
सबा बोली, “लंड की बातें करती हैं और क्या? लंड के साइज की बातें करती हैं। कोई कहती है मेरे भाईजान का लंड बड़ा मोटा है, कोई कहती मेरे जीजू का लंड लोहे की तरह सख्त है, कोई कहती मेरे अब्बू का लंड 9 इंच का है, कोई कहती है मैं आज अपने खालू का लंड पीकर आई हूँ। कोई कहती है मैंने कल अपने चचा जान से रात भर चुदवाया। लेकिन मेरे मुंह से कुछ निकलता ही नहीं क्योंकि मैंने आज तक कोई लंड पकड़ा ही नहीं। जल्दी से मुझे लंड पकड़ाओ अम्मी जान। नहीं तो मैं कुछ कर बैठूंगी। मैं और ज्यादा दिन तक इंतजार नहीं कर सकती।”
मैं बिस्तर पर पड़े-पड़े सब सुन रहा था। सबा की बातें सुनकर मेरा लंड तमतमा गया। वह फिर से सख्त होने लगा, कम्बल के नीचे तन गया।
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शाम को मैं जब उठा तो फूफी ने मुझे चाय दी और नाश्ता करवाया। चाय गरम-गरम थी, चीनी ज्यादा डाली हुई थी जैसी मुझे पसंद है। नाश्ते में पराठे, दही और अचार रखा था। वे मेरे बगल में बैठीं, हाथ से पराठा फाड़कर मेरे मुंह में डाल रही थीं। उनकी उंगलियां मेरे होंठों को छू रही थीं। वे बोलीं, “सफी आज रात को तुम यहीं रहना मेरे साथ ही सोना।”
मैंने कहा, “ठीक है फूफी जान, मगर मैं अभी अपने काम से जा रहा हूँ। रात को 10 बजे मैं आ जाऊंगा।”
मैं वहां से निकल पड़ा। बाहर निकलते ही मन में फूफी की नंगी तस्वीर घूम रही थी, उनकी चूचियां, उनकी चूत, सब याद आ रहा था।
शाम 9 बजे जब फूफी और उसकी बेटी सबा आमने-सामने बैठी थीं तो फूफी ने पूछा, “ये बता तू भोसड़ी वाली सबा, तूने सच में अभी तक कोई लंड नहीं पकड़ा?”
सबा थोड़ा शरमाई लेकिन फिर हंसकर बोली, “पकड़ा तो है पर ठीक से नहीं पकड़ पाई कोई भी लंड! पड़ोसी अंकल का लंड पकड़ा तो पकड़ते ही आंटी आ गई तो अंकल भाग गया। लंड हाथ में आया ही था कि छूट गया। फिर एक दिन खाला के बेटे का लंड पकड़ा। मैंने उसे कमर से पकड़कर नीचे किया, लंड बाहर निकाला। वो सख्त था लेकिन जैसे ही मैंने हाथ में लिया और हिलाना शुरू किया, वह भोसड़ी का मेरे हाथ में ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य मेरी उंगलियों पर गिरा और मैं वैसी ही सूखी-साखी रह गई। चूत में कुछ नहीं गया।”
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फूफी ने कहा, “इसका मतलब तेरी कुंवारी फुद्दी की सील अभी टूटी नहीं है।”
सबा बोली, “बिल्कुल नहीं टूटी। जानती हो अम्मी जान, मैंने दो बार तेरा भोसड़ा चुदते हुए देखा है। एक बार चाचू ने पीछे से पेला था, तुम्हारी गांड हिल रही थी। दूसरी बार कोई अनजान आदमी था, तुम ऊपर चढ़कर कूद रही थीं। सच बताऊं मेरी बुरचोदी अम्मी जान, तुझे तो अपनी चूत की परवाह है मेरी चूत की नहीं।”
फूफी ने कहा, “अगर तूने मुझे गैर मर्द से चुदवाते हुए देखा तो फौरन मेरे पास आई क्यों नहीं? मेरी चूत से लौड़ा निकालकर अपनी चूत में लिया क्यों नहीं? मैं तो खुशी-खुशी दे देती।”
सबा बोली, “मुझे डर लग रहा था और शर्म भी आ रही थी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, हाथ-पैर कांप रहे थे।”
फूफी ने कहा, “डरेगी तो जवानी का मजा नहीं ले पाएगी। शरमाएगी तो बिना लंड के रह जाएगी पगली। जवानी का मजा लेना है तो लौड़ा लपककर बड़ी बेशर्मी से पकड़ लेना चाहिए। बोल्ड बनो, बेशर्म बनो, गंदी-गंदी बातें करो और लौड़ा रंडियों की तरह लपककर पकड़ो। पहले अपनी मां चोदो फिर दुनिया की मां चोदो। शर्म छोड़, चूत गीली कर और लंड मांग।”
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मुझे इन सब बातों का पता बाद में चला।
मैं रात को 10 बजे आ गया। दरवाजा खुलते ही फूफी ने मुझे अंदर खींचा और गले लगा लिया। फिर हम तीनों ने एक साथ खाना खाया। खाने में रोटी, सब्जी, दाल और चावल था। खाते वक्त सबा मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। खाना खत्म होने के बाद हम बिस्तर पर आ गए। कमरे की लाइट धीमी कर दी गई थी, सिर्फ एक छोटी बल्ब जल रही थी।
फूफी बोलीं, “सफी तुम सबा को कितना जानते हो?”
मैंने कहा, “सबा तो एक बहुत अच्छी लड़की है। बड़ी सीधी-सादी है।”
फूफी बोलीं, “ये भोसड़ी की सीधी-सादी नहीं है, बड़ी हरामजादी है बदचलन है। मेरी चुदाई छुप-छुपकर देखती है। सबा की मां का भोसड़ा!”
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सबा बोली, “अरे भाईजान, तेरी फूफी जान तो बड़ी चुदक्कड़ औरत है। पराये मर्दों के लंड खाती है।”
बस इतने में ही महफिल गर्म हो गई। हवा में उत्तेजना फैल गई थी।
फूफी ने अपनी बेटी का हाथ मेरे पजामे में डाल दिया और बोलीं, “बेटी सबा, अब तू निकालकर दिखा मुझे अपने भाई जान का लंड? तू लंड-लंड चिल्ला रही थी अब लंड तेरे हाथ में है।”
सबा ने हाथ अंदर डाला। उसकी उंगलियां मेरे लंड को छू रही थीं। लंड पहले से ही खड़ा था, सख्त और गरम। सबा ने धीरे से पजामा नीचे किया और लंड बाहर निकाल लिया। लंड हवा में तनकर खड़ा हो गया, सुपारा चमक रहा था।
सबा बोली, “बाप रे बाप, इतना बड़ा लंड? इतना मोटा लंड तो पड़ोसी का भी नहीं था। मजा आ गया अम्मी जान इतना बड़ा लंड पकड़कर!”
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उसने मेरा लंड खूब चूमा। पहले सुपारे पर होंठ रखे, हल्के-हल्के चुंबन किए। फिर जीभ निकालकर सुपारे को चाटा। जीभ गोल-गोल घुमा रही थी। फिर लंड की पूरी लंबाई पर होंठ फेरने लगी। कभी सुपारे को मुंह में लिया, चूसा, कभी लंड को चूमते हुए नीचे तक गई। उसकी सांसें गरम थीं, मुंह गीला था। वह बार-बार बोली, “वाह भाईजान, कितना स्वादिष्ट लंड है।”
तब तक फूफी ने सबा के कपड़े उतार दिए। पहले उन्होंने सबा की कुर्ती के बटन खोले, धीरे-धीरे ऊपर से नीचे तक खींचा और कुर्ती उतार दी। सबा की ब्रा में उसके मध्यम आकार के मम्मे उभरे हुए दिख रहे थे। फूफी ने ब्रा का हुक पीछे से खोला, ब्रा गिर गई और सबा के गोरे, सख्त मम्मे सामने आ गए। निप्पल हल्के गुलाबी और पहले से ही उभरे हुए थे। फिर फूफी ने सबा की सलवार का नाड़ा खींचा, सलवार नीचे सरकाई और पैंटी को भी एक झटके में उतार दिया। सबा अब पूरी तरह नंगी हो गई। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, चूत के होंठ गुलाबी और थोड़े फूले हुए लग रहे थे। उसकी कमर पतली थी, कूल्हे थोड़े चौड़े और गांड गोल-मटोल।
मैं सबा को पूरी नंगी देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो गया। मेरा लंड पहले से ही सख्त था, अब और तन गया। दिल की धड़कन तेज हो गई, सांसें गरम हो रही थीं। सबा का नंगा बदन इतना आकर्षक था कि आंखें हट नहीं रही थीं।
तब तक फूफी जान भी नंगी हो गईं। वे पहले से ही कपड़े उतार चुकी थीं। उनकी बड़ी चूचियां लहरा रही थीं, चूत गीली और तैयार। अब दोनों मां-बेटी नंगी-नंगी मेरे सामने थीं। वे दोनों मेरे लंड की तरफ झुकीं और साथ में चाटने लगीं।
अब मां-बेटी दोनों नंगी-नंगी मेरा लंड चाटने लगीं। मैं तो पहले से ही पूरा नंगा था। मैं बिस्तर पर लेट गया था, लंड सीधा खड़ा। फूफी ने लंड का सुपारा मुंह में लिया और चूसने लगीं। सबा नीचे झुककर मेरे पेल्हड़ चाट रही थी। उनकी जीभें गर्म और गीली थीं। कभी फूफी लंड को गले तक ले जातीं, कभी सबा सुपारे को जीभ से घुमाती। दोनों एक-दूसरे के मुंह में मेरा लंड घुसेड़ने लगीं। मां लंड चाटती तो बेटी मेरे पेल्हड़ चाट लेती और जब बेटी लंड चाटती तो मां मेरे पेल्हड़ चाट लेती। उनकी जीभें लंड पर आपस में टकरा रही थीं। लार से लंड पूरी तरह गीला हो गया था।
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मुझे तो अपार आनंद आ रहा था। मेरा तो मां-बेटी को एक साथ लंड चटाने का पहला मौका था। शरीर में करंट सा दौड़ रहा था। दोनों भोसड़ी वाली बड़े शिद्दत से और बड़े प्यार-मोहब्बत से मेरा लंड चाट रही थीं। उनकी सांसें मेरे लंड पर पड़ रही थीं, मुंह की गर्मी महसूस हो रही थी।
फूफी बोलीं, “बेटी सबा, तू तो बुरचोदी बड़ी अच्छी तरह से लंड चाट लेती है। कहां से सीखा लंड चाटना?”
सबा बोली, “तुम्हें लंड चाटते हुए देखा था न… बस तुम्ही से सीख लिया मैंने लंड चाटना मेरी चुदक्कड़ अम्मी जान! तुम्हारी तरह जीभ घुमाना, सुपारा चूसना सब देखा था।”
मुझे सबा की बुर बड़ी प्यारी लग रही थी। वह गुलाबी, तंग और गीली दिख रही थी। मैंने सबा को बिस्तर पर लिटाया, उसके पैर फैलाए और उसकी बुर पर मुंह रख दिया। जीभ से होंठों को चाटा, क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई। सबा सिहर उठी, कमर उठाकर बोली, “हाय भाईजान… कितना अच्छा लग रहा है।” सबा को डबल मजा मिलने लगा और मुझे भी! उसकी चूत से रस निकल रहा था, मीठा-मीठा। मैं जीभ अंदर डालकर चाट रहा था।
मेरा मां-बेटी को एक साथ चोदने का पहला मौका था। मेरा लंड साला एकदम ताव पर था। मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित था। लंड फटने को तैयार था।
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जब सबा ने बड़ी देर तक मेरा लंड चूसा और चाटा, उसे घुमा-घुमा कर बड़े प्यार से देखा, सुपारे को चूमकर बोली, “कितना सुंदर लंड है,” तब फूफी जान बोलीं, “बेटा सफी, अब पेल दे तू सबा की बुर में अपना लंड, इसकी बुर अभी कुंवारी है। तोड़ दे इसकी चूत की सील। इसकी चूत पकी हुई है। चोद डाल इसकी पकी हुई बुर। मेरे सामने फाड़ मेरी बिटिया की बुर!”
मैं तो इसी इंतजार में था। फूफी भी मुझसे अपनी बिटिया की बुर चुदवाना चाहती थीं। वे भी जोश में थीं, अपनी बेटी की चुदती हुई बुर देखना चाहती थीं। उनकी आंखें चमक रही थीं।
फूफी ने मेरा लंड पकड़ा। उनकी उंगलियां लंड पर कस गईं। उन्होंने लंड का सुपारा सबा की चूत के होंठों पर टिका दिया। सबा की चूत गीली थी लेकिन तंग। फूफी ने मेरे चूतड़ एकदम से दबा दिए तो लंड गच्च से घुस गया सबा की चूत में! सील फटने की आवाज आई, सबा की चूत से थोड़ा खून निकला।
सबा चिल्ला पड़ी, “उई मां मर गई मैं… फट गई मेरी चूत! बड़ा मोटा है भाई का लंड अम्मी जान! बड़ा दर्द हो रहा है। बड़ा बेरहम है भाई तेरा लंड! एक ही बार में पूरा घुसा दिया लंड तूने।”
फूफी बोलीं, “अभी तो तू लंड-लंड चिल्ला रही थी। अब लंड मिला तो मां चुदने लगी तेरी? गांड फटने लगी तेरी? अब मालूम हुआ कि लंड क्या चीज है? थोड़ा दर्द तो बनेगा, फिर मजा आएगा।”
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फिर मैंने 10-12 बार लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। हर बार थोड़ा गहरा। सबा की चूत तंग थी लेकिन रस से गीली हो रही थी। दर्द कम होने लगा। वह बोली, “हाय, अब आ रहा है मजा, अब पूरा पेल दो लंड भाई जान, जल्दी-जल्दी चोदो!”
अपनी कमर हिला-हिलाकर सबा चुदवाने लगी। उसकी चूत लंड को कसकर पकड़ रही थी।
उसके मुंह से निकला, “अम्मी जान, तू बहुत हरामजादी है, अपने सामने बिटिया चुदवा रही है।”
फूफी बोलीं, “बिटिया की मां की चूत… तू भी तो नंगी होकर अपनी मां के सामने बड़ी बेशर्मी से चुदवा रही है। तू तो मुझसे ज्यादा हरामजादी है बुरचोदी सबा! मुझे तो सच में अपनी बेटी चुदाने में जन्नत का मजा आ रहा है।”
मैं अपना पूरा लंड पेल-पेलकर उसे चोदने लगा। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। घप-घप की आवाजें आ रही थीं। फूफी जान बीच-बीच में मेरा लंड सबा की बुर से निकाल-निकाल चाटने लगीं। लंड पर सबा का रस और खून लगा होता तो वे चाटकर साफ करतीं और फिर वापस सबा की चूत में डलवातीं।
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सबा का यह पहला मौका था। वह बहुत उत्तेजित थी तो वह जल्दी ही खलास हो गई। उसकी चूत सिकुड़ने लगी, शरीर कांपने लगा। वह चिल्लाई, “हाय… आ गया… मैं झड़ रही हूँ!” उसका रस निकला।
अब तक वह बड़ी बेशर्म और निर्लज्ज हो चुकी थी, एकदम रंडी बन चुकी थी।
उसे अम्मी की बात याद थी कि जवानी का पूरा मजा लेना है तो एकदम बेशर्म बन जा, गंदी-गंदी बातें कर और निडर होकर सबके लंड का पूरा मजा ले।
फिर उसने अपनी बुर से लंड निकालकर अपनी अम्मी की बुर में पेल दिया। फूफी लेट गईं, पैर फैलाए। सबा ने लंड पकड़कर फूफी की चूत में डाला और बोली, “अब मैं चोदूंगी तेरा भोसड़ा अम्मी जान। तूने अपनी बेटी की बुर फड़वाई, अब मैं अपनी अम्मी का भोसड़ा फड़वाऊंगी।”
फिर क्या… मैं फूफी का भोसड़ा घपाघप चोदने लगा। पूरा लौड़ा पेल-पेलकर चोदने लगा। फूफी की चूत ढीली लेकिन गीली और गर्म थी। हर धक्के पर फूफी सिसकारियां भर रही थीं। सबा मेरे पेल्हड़ सहलाती हुई अपनी मां का भोसड़ा चुदवाने लगी। सबा की उंगलियां मेरे अंडकोष को दबा रही थीं, सहला रही थीं। तीनों का बदन पसीने से भीगा हुआ था।
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मुझे फूफी की चूत चोदने में उतना ही मजा आ रहा था जितना मजा मुझे उसकी बेटी की चूत चोदने में आ रहा था। फूफी की चूत गर्म, गीली और अनुभवी थी। हर धक्के पर उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं, जैसे पूरा लंड निचोड़ रही हों। फूफी कमर हिला रही थीं, सिसकारियां भर रही थीं, “हाय सफी… और जोर से… पूरा पेल… तेरी फूफी की चूत तेरे लंड की गुलाम है।” उनकी चूत से रस बह रहा था, लंड पर चिपचिपा हो रहा था। सबा बगल में बैठी देख रही थी, अपनी उंगलियां अपनी चूत पर फेर रही थी। मुझे दोनों की चूतों का अलग-अलग स्वाद मिल रहा था – सबा की तंग और कुंवारी जैसी अभी भी सिकुड़ती हुई, फूफी की ढीली लेकिन ज्यादा गहराई वाली और रस से भरी। दोनों में मजा बराबर था, बस अहसास अलग-अलग।
मैं तेज-तेज धक्के मार रहा था। फूफी की चूत में लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। घप-घप की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरे पसीने की बूंदें फूफी की चूचियों पर गिर रही थीं। सबा मेरे पीछे से मेरे चूतड़ दबा रही थी, पेल्हड़ सहला रही थी। उत्तेजना चरम पर पहुंच गई। अचानक मेरे लंड में झटका आया, वीर्य उबलने लगा। मैंने जोर से धक्का मारा और फूफी की चूत के अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य फूफी की चूत में भर गया, कुछ बाहर निकलकर बहने लगा। मैं कांप रहा था, सांसें तेज चल रही थीं।
फिर जब मैं झड़ा तो दोनों मां-बेटी ने मेरा झड़ता हुआ लंड बड़े प्यार से चाटा। मैंने लंड निकाला, वह अभी भी थोड़ा-थोड़ा वीर्य उगल रहा था। फूफी ने सबसे पहले लंड को मुंह में लिया। उन्होंने सुपारे को चूसा, बाकी वीर्य चूस लिया। उनकी जीभ लंड पर फेर रही थी, साफ कर रही थी। सबा नीचे झुकी, मेरे पेल्हड़ चाट रही थी। फिर दोनों ने मिलकर लंड को चाटा। फूफी लंड की एक तरफ से जीभ फेर रही थीं, सबा दूसरी तरफ से। उनकी जीभें आपस में टकरा रही थीं, लंड पर लार और वीर्य का मिश्रण फैल रहा था। वे बड़े प्यार से, जैसे कोई कीमती चीज हो, लंड को सहला रही थीं और चाट रही थीं। फूफी बोलीं, “हाय बेटा… कितना गरम वीर्य है तेरा… फूफी की चूत भर दी।” सबा ने भी कहा, “भाईजान… स्वादिष्ट है… और निकालो ना।”
सबा बोली, “अब मैं सबके लंड का मजा लूंगी और सबके लंड को मजा दूंगी। अब तो मेरी चूत खुल गई है, अब रुकना नहीं है। कॉलेज के लड़के, पड़ोसी, चाचा, सबको दूंगी।”
फूफी जान सबा के गाल थपथपाकर बोलीं, “तेरी मां का भोसड़ा बेटी सबा! बड़ी बेशर्म हो गई है तू। अच्छा है, जवानी का मजा ले।”
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सबा ने भी उसी लहजे में जवाब दिया, “तेरी बेटी की मां की चूत अम्मी जान! तू भी तो चुदक्कड़ है, मुझे भी बनाया है वैसा ही।”
दोनों हंस पड़ीं। कमरे में हंसी और उत्तेजना की खुशबू फैली हुई थी। मैं बिस्तर पर लेटा सब देख रहा था। मेरा लंड अभी भी आधा सख्त था। फूफी ने मेरे लंड को फिर से सहलाना शुरू किया, सबा मेरे मम्मों पर जीभ फेर रही थी। रात अभी बाकी थी।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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