बात आज सोनू के कॉलेज में पहले दिन की है। यह अलग बात थी कि कॉलेज खुले हुए लगभग एक महीना बीत चुका था, पर सोनू कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण कॉलेज शुरू होने के बाद भी नहीं आ पाया था।
कहानी का पिछला भाग: कॉलेज के दिन (भाग-1)
वह कॉलेज में गया तो उसे अपनी क्लास का माहौल बड़ा अलग सा लगा। क्लास के बाकी विद्यार्थियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि पता नहीं सब कितने दिनों से एक-दूसरे को जानते हैं और सिर्फ सोनू ही उन सबमें अनजान है। खैर, इसका कारण सोनू का देर से कॉलेज आना शुरू करना था। अतः अब सोनू इस बारे में कुछ नहीं कर सकता था।
वह क्लास की सबसे आखिरी सीट पर कुछ अनजान चेहरों के साथ बैठ गया। फिर उसका ध्यान क्लास की लड़कियों की ओर गया तो उसने पाया कि कोई भी लड़की ऐसी बला की खूबसूरत नहीं लग रही थी कि जिसे देखते ही बात करने को जी चाहे। सोनू निराश होकर बैठा रहा।
धीरे-धीरे दिन बीतते गए। सोनू का घर भी कॉलेज से काफी दूर था, जिस कारण उसका आधा समय तो आने-जाने में ही निकल जाता था। कुल मिलाकर कॉलेज में होने के बावजूद भी उसकी जिंदगी में कुछ भी ऐसा नहीं हो रहा था जिसकी उसे पहले उम्मीद थी।
उसे लगता था कॉलेज जाते ही मौज-मस्ती शुरू हो जाएगी और जल्द ही वह कोई अच्छी सी लड़की को अपनी गर्लफ्रेंड बना लेगा। पर अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। उसकी तो किसी लड़की से बातचीत तक शुरू नहीं हुई थी। कॉलेज से ज्यादा अच्छा समय तो उसका घर पर बीतता था।
वह रोज शाम को घर आता और पड़ोस की पूनम भाभी को देख-देखकर उनके हुस्न का मजा लेता रहता। इसके अलावा अनीता आंटी से बात करने में भी उसे बड़ा आनंद आता। वह चाहे कॉलेज से कितना भी थका-हारा आता, पर अनीता आंटी की एक मुस्कान उसे एकदम तरोताजा कर देती।
अनीता आंटी सोनू की किरायेदार थी। उनका बात करने का तरीका और खुशमिजाजी सोनू को प्रफुल्लित कर देती। जब भी सोनू उनसे बातें करता, उसे अपने पहले वाले किरायेदार याद आ जाते।
सोनू के पहले वाले किरायेदार 4 लोगों का एक परिवार था, जिसमें बेबी आंटी, उनके पति, उनका एक बेटा और एक बेटी थी, जिसका नाम था नेहा। नेहा दिखने में ठीक-ठाक थी। उसका रंग सांवला था। पहले दिन से ही सोनू नेहा की टांगों का दीवाना था।
नेहा भी अपनी टांगों का प्रदर्शन करने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी। वह अक्सर स्कर्ट पहनती थी। कई बार तो सोनू को नेहा की स्कर्ट के अंदर का दृश्य भी देखने को मिल जाता था। सोनू को उस समय सेक्स का ज्ञान नहीं था, पर इस तरह के दृश्य उसे एक अजीब सा मजा देते थे।
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