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कॉलेज के दिन (भाग-1)

बात उन दिनों की है जब सन्नी ने इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया ही था। बचपन से ही लड़कियों से घुलमिल कर रहने वाला सन्नी अब लड़कियों को कुछ अलग नजर से देखने लगा था। ऊपर से अपने अन्य साथियों से कॉलेज में हो सकने वाली मौज-मस्तियों की कहानियां सुन-सुनकर उसका मन बहुत सी कल्पनाओं से भरा हुआ था।

अंततः वह समय आ चुका था जिसका उसे काफी समय से इंतजार था। उसने फैसला कर लिया था कि अगले चार सालों में वह अपनी सारी कल्पनाएं अंजाम तक पहुंचाकर ही रहेगा। कॉलेज के पहले दिन से ही उसने अपनी क्लास की लड़कियों से घुलना-मिलना शुरू कर दिया था। वह तो बस यह सोच रहा था कि उसकी कल्पनाओं के सच होने की शुरुआत किस लड़की से होने वाली है।

कुछ ही दिनों में उसकी कई लड़कियां दोस्त बन गई थीं। इनमें प्रियंका, सीमा, काजल और सोनल से उसकी काफी अच्छी बनने लगी थी। क्लास में घंटों उनसे बातें करते रहना, बंक मार कर कैंटीन में बैठे रहना, फिर घर जाकर देर रात तक फोन पर बातें करते रहना आम बात हो गई थी। आखिर घर में अपना अलग कमरा होने के भी अलग ही फायदे हैं। लड़कियां तो कॉलेज के हॉस्टल में ही रहती थीं, जहां उन्हें देर रात तक फोन पर लगे रहने में कोई दिक्कत नहीं थी।

सन्नी की गाड़ी सही दिशा में पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी। बस एक दिक्कत थी। लड़कियों से बातें करने तक तो सब ठीक था, पर अब इससे आगे कैसे बढ़ना है, यह सन्नी को नहीं पता था। उसने सुन रखा था कि लड़कियां अपनी तारीफ सुनकर बड़ी खुश होती हैं और उस खुशी में वो तारीफ करने वाले को क्या खुशी दे बैठें, इसका तो बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

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सन्नी ने ठान लिया कि जब भी वह किसी लड़की के साथ अकेले में होता तो उसकी खूबसूरती की तारीफें करनी शुरू कर देता। अकेले में इसलिए ताकि किसी लड़की को ये न लगे कि वह हर लड़की की यूँ ही झूठी तारीफें करता रहता है। कुछ दिनों में उसे महसूस होने लगा कि उसका यह तरीका काम कर रहा है क्योंकि सभी लड़कियां अब उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करतीं, वो भी अकेले में।

खासतौर पर काजल उसमें कुछ ज्यादा ही रुचि लेने लगी थी। वह जब भी कोई नई ड्रेस पहन कर आती तो उससे पूछती कि आज मैं कैसी लग रही हूं और सन्नी हमेशा की तरह उसकी तारीफों के पुल बांध देता। काजल वैसे तो दिखने में ठीक-ठाक ही थी, पर उसकी चूचियां काफी बड़ी-बड़ी थीं। जो भी उसे देखता, उसकी नजर सबसे पहले काजल की चूचियों पर ही जाती।

एक दिन काजल काफी टाइट टी-शर्ट व जीन्स पहन कर आई। सन्नी ने उसे देखा तो देखता ही रह गया। उसमें उसकी गोलाइयां कुछ ज्यादा ही उभर कर आ रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे किसी भी पल उसकी टी-शर्ट उसके बड़े-बड़े स्तनों का दबाव झेलने से मना कर देगी और एकदम से खुलकर उसके स्तनों को अपनी कैद से आजाद कर देगी।

काजल ने भी सन्नी की नजरों में आई चमक को पहचान लिया था और उससे नजरें मिलते ही उसने तुरंत शर्म से नजरें झुका लीं। सन्नी मौका देख कर उसके पास आया और धीरे से उसके कान में बोला- “क्या बात है, आज तो कमाल लग रही हो।” यह सुनते ही काजल के होठों पर मुस्कान आ गई और उसने शर्म से सिर झुका लिया।

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रात करीब 11 बजे जब सन्नी अपने कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि काजल की मिस्ड कॉल आई हुई थी। उसने तुरंत काजल को कॉल की।

“हैलो!” सामने से काजल की आवाज आई।

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