Bhabhi devar sex story – Mota lund sex story: शहर की व्यस्त जिंदगी में मेरा जीवन बहुत खाली और उदास लगता था, जहां मेरा पति राजेश एक व्यस्त बिजनेसमैन था जो सुबह जल्दी निकल जाता और रात देर से घर लौटता, जिससे घर में अकेली मैं राधा अपनी 28 साल की उम्र में अपने गोरे चमकदार बदन, भरे हुए स्तनों और कसी हुई कमर के साथ किसी को भी आकर्षित कर सकती थी, लेकिन राजेश के पास मेरी जरूरतों को पूरा करने का समय ही नहीं था, और मैं अंदर ही अंदर उस कमी से जलती रहती थी, जहां हर रात बिस्तर पर लेटकर मैं अपनी उंगलियों से खुद को छूकर थोड़ी राहत पाने की कोशिश करती लेकिन वो कभी काफी नहीं होता।
घर में मेरा देवर विक्रम था जो 22 साल का जवान और मजबूत लड़का था, जो कॉलेज से घर लौटकर अक्सर मेरे आसपास मंडराता रहता, उसकी गहरी नजरें मेरे शरीर के हर हिस्से पर रुकतीं जैसे वो मेरी हर वक्र को महसूस कर रहा हो, और मुझे भी उसकी मस्कुलर बॉडी, चौड़ी छाती और शरारती मुस्कान पसंद आने लगी थी, जहां कभी-कभी हमारे बीच की बातों में एक अजीब सी गर्माहट महसूस होती जो मेरी त्वचा पर झनझनाहट पैदा कर देती।
एक दिन राजेश सुबह ही ऑफिस के लिए निकल गया, घर में सिर्फ मैं और विक्रम थे जिससे हवा में एक अजीब तनाव महसूस हो रहा था, मैं किचन में चाय बनाते हुए उसकी खुशबू महसूस कर रही थी जब विक्रम पीछे से आया और उसकी गर्म सांसें मेरी गर्दन पर लगीं, वो बोला, “भाभी आज आप अकेली लग रही हो, भैया तो काम में लगे रहते हैं”, उसकी आवाज में एक गहराई थी जो मेरे शरीर में कंपन पैदा कर रही थी।
मैं मुस्कुराई लेकिन मेरी आंखों में उदासी साफ झलक रही थी, “हां देवर जी क्या करूं जिंदगी ऐसी ही है”, विक्रम और करीब आया और उसके मजबूत हाथ मेरे कंधे पर रखे गए जिससे उसकी उंगलियों की गर्मी मेरी त्वचा के माध्यम से अंदर तक उतर गई, वो बोला, “भाभी मैं हूं ना आपकी हर जरूरत पूरी कर सकता हूं”, उसकी बातों में छिपा मतलब मेरे कानों में गूंजा और मेरी सांसें तेज हो गईं।
मेरा दिल तेज धड़क रहा था क्योंकि मैं समझ गई थी कि विक्रम की बातों का डबल मीनिंग क्या है, मैं धीरे से मुड़ी और विक्रम की आंखों में देखा जहां उसकी पुतलियां मेरे चेहरे पर टिकी हुई थीं, अचानक विक्रम ने मुझे अपनी मजबूत बाहों में खींच लिया और उसके गर्म होंठ मेरे होंठों पर दब गए, वो किस इतना गहरा था कि मैं उसकी सांसों की खुशबू महसूस कर रही थी और मेरी जीभ उसकी जीभ से टकरा रही थी।
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मैंने पहले थोड़ा मना किया लेकिन मेरी अंदर की जरूरत इतनी ज्यादा थी कि मैं पूरी तरह मान गई और उसके चुंबन में खो गई, विक्रम के हाथ मेरे ब्लाउज पर सरक गए और उसने बटन खोल दिए जिससे मेरी सांसें और तेज हो गईं, मेरे बड़े स्तन ब्रा से बाहर आने को बेताब थे और हवा में उनकी गर्मी महसूस हो रही थी, विक्रम ने ब्रा उतारी और मेरे कड़े निप्पल्स को मुंह में लेकर जोर से चूसने लगा जिससे मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं, “आह देवर जी ये गलत है” मैं बोली लेकिन मेरे हाथ खुद-ब-खुद विक्रम के पैंट पर चले गए जहां मैं उसके उभरे हुए लंड की कठोरता महसूस कर रही थी।
विक्रम ने मुझे किचन स्लैब पर उठाकर बिठाया और मेरी साड़ी ऊपर उठा दी जिससे मेरी नंगी जांघों पर ठंडी हवा लगी, मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और उसकी नमी मेरी पैंटी से टपक रही थी, पैंटी उतारकर विक्रम ने अपनी गर्म जीभ से उसे चाटना शुरू किया जिससे मेरी चूत पर उसकी जीभ की गीली और रफ सेंसेशन ने मुझे पागल कर दिया, “ओह भाभी तुम्हारी चूत कितनी अच्छी है भैया ने कभी ऐसी नहीं चाटी होगी”, मेरी सिसकारियां बढ़ गईं और मैंने उसके सिर को अपनी चूत पर दबाया, “आह देवर चाटो जोर से मैं इस जरूरत से परेशान हूं”।
विक्रम ने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा जिससे अंदर की दीवारों पर उसकी उंगलियों की रगड़ ने मुझे झनझनाहट दी, मेरा शरीर कांप उठा और मैंने महसूस किया कि मेरी मांसपेशियां सिकुड़ रही हैं, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह आह्ह ह्ह आऊ ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई”, और मैं जोर से झड़ गई जहां मेरी चूत से गर्म रस की धारा बह निकली जो विक्रम की जीभ पर लगी और उसने उसे चाट लिया।
अब विक्रम का लंड पूरी तरह खड़ा हो गया था और उसकी नसें फूली हुई महसूस हो रही थीं, उसने अपना पैंट उतारा और 8 इंच का मोटा लंड बाहर आया जिसकी गर्मी और कठोरता देखकर मेरी आंखें चमक उठीं, “देवर जी इतना बड़ा भैया का तो छोटा है”, विक्रम मुस्कुराया और मुझे घुटनों पर बिठा दिया जहां फर्श की ठंडक मेरी घुटनों पर लग रही थी।
मैंने उसके लंड को मुंह में लिया और चूसने लगी जैसे मैं भूखी थी, उसका स्वाद नमकीन और गर्म था, विक्रम के हाथ मेरे बालों में कसकर जकड़े थे और वो जोर-जोर से धक्के देने लगा जिससे लंड मेरे गले तक उतर रहा था, “भाभी चूसो पूरा अंदर लो आह ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गी गों गों गोग”।
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फिर विक्रम ने मुझे गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया जहां बेड की चादर की मुलायमाहट मेरी पीठ पर लगी, उसने मुझे बेड पर लिटाकर मेरी टांगें फैला दीं और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा जिससे उसकी गर्मी और रगड़ ने मुझे और गीला कर दिया, फिर एक झटके में अंदर पेल दिया जिससे दर्द और मजा का मिश्रण मेरे पूरे शरीर में फैल गया, “आआआह देवर फाड़ दो मेरी चूत” मैं चिल्लाई।
विक्रम ने तेज धक्के मारने शुरू किए जहां उसका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था और हर धक्के के साथ मेरी चूत की दीवारें उसकी मोटाई महसूस कर रही थीं, मेरे स्तन उछल रहे थे और विक्रम ने उन्हें जोर से दबाया और दांतों से काटा जिससे हल्का दर्द लेकिन गहरा मजा आया, “भाभी तुम्हारी चूत टाइट है भैया ने कभी इस्तेमाल नहीं किया अब मैं रोज पूरी करूंगा तुम्हारी जरूरत”।
हम घंटों चुदाई करते रहे जहां पसीने की खुशबू कमरे में फैल गई थी, विक्रम ने मुझे डॉगी स्टाइल में घोड़ी बनाकर चोदा जहां उसका लंड मेरी चूत के गहरे हिस्सों तक पहुंच रहा था, फिर उसने मेरी गांड में उंगली डाली जिससे उसकी उंगली की गर्मी और रगड़ ने मुझे नई सेंसेशन दी, मैं बोली, “देवर गांड भी मारो सब तुम्हारा है”, विक्रम ने लंड पर थूक लगाया और धीरे से मेरी गांड में घुसाया जहां शुरुआत में तीखा दर्द हुआ लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा जैसे मेरी गांड की टाइटनेस उसके लंड को निचोड़ रही हो, “ओह दर्द हो रहा है लेकिन अच्छा लग रहा है” मैं बोली, “आह इह्ह ओह्ह ओह आह ह्ह्ह इह्ह”।

विक्रम ने स्पीड बढ़ाई और हम दोनों एक साथ झड़ गए जहां उसका गर्म वीर्य मेरी गांड से बहकर मेरी जांघों पर लगा और उसकी चिपचिपाहट महसूस हुई।
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उस दिन से जब भी राजेश बाहर जाता विक्रम और मैं मिलते जहां हमारे शरीर की गर्मी और पसीने की मिली हुई खुशबू हमें और करीब लाती, मेरी जरूरत देवर से पूरी होती और घर में ये राज छिपा रहता लेकिन ये सिर्फ शुरुआत थी क्योंकि अगले दिनों हमारी मुलाकातें और ज्यादा तीव्र हो गईं।
एक रात राजेश देर से आने वाला था, मैं और विक्रम छत पर गए जहां ठंडी हवा मेरी त्वचा पर झनझनाहट पैदा कर रही थी, मैंने पतली नाइटी पहनी थी जो मेरे बदन से चिपककर मेरे कड़े निप्पल्स को उभार रही थी और हवा में उनकी सेंसेशन बढ़ा रही थी, विक्रम की नजर उन पर टिकी थी, “भाभी रात ठंडी है लेकिन तुम्हारा बदन गर्म लग रहा है” विक्रम ने कहा और मुझे दीवार से सटा लिया जहां दीवार की ठंडक मेरी पीठ पर लगी।
मैं हंसी, “देवर जी तुम्हारी वजह से गर्मी है”, विक्रम ने नाइटी ऊपर की और पैंटी में हाथ डाला जहां उसकी उंगलियों की गर्मी मेरी गीली चूत पर लगी, चूमते हुए बोला, “भाभी छत पर ही करें” जहां उसके होंठों की नरमी मेरे गाल पर महसूस हुई।
मैं मान गई, विक्रम ने मुझे घुटनों पर बिठाया और लंड निकाला जहां उसकी गर्मी मेरे चेहरे पर लगी, मैंने मुंह में लिया और गले तक उतारा जहां उसका स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया, विक्रम की सिसकारियां हवा में गूंजीं, “आह भाभी चूसो जोर से ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गी गों गों गोग”।
मैंने तेजी से चूसा और विक्रम मेरे मुंह में झड़ गया जहां उसका गर्म वीर्य मेरे गले से नीचे उतर गया और उसका नमकीन स्वाद मुंह में रह गया।
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फिर विक्रम ने दीवार से सटाकर मेरी टांगें उठाईं और लंड मेरी चूत में डाला जहां हवा की ठंडक और उसके लंड की गर्मी का कंट्रास्ट मुझे पागल कर रहा था, “ओह देवर छत पर कोई देख लेगा” मैं बोली लेकिन मजा ले रही थी जहां सितारों के नीचे ये सब हो रहा था, विक्रम ने धक्के मारे और मेरे स्तन हवा में उछलते हुए महसूस हो रहे थे, “भाभी रिस्क में मजा है तुम्हारी चूत टाइट लग रही है”, “आह इह्ह ओह्ह ओह आह ह्ह्ह इह्ह”।
हम दोनों चिल्लाते हुए झड़ गए जहां मेरा रस विक्रम के लंड पर बहा और हवा में उसकी खुशबू फैल गई, उस रात छत हमारी गर्म मुलाकात का गवाह बनी।
अगले दिन सुबह राजेश जल्दी निकल गया, मैं नहाने गई जहां पानी की ठंडी बौछारें मेरी त्वचा पर गिर रही थीं, विक्रम चुपके से बाथरूम में घुस गया और पीछे से मुझे पकड़ा जहां उसकी गर्म बॉडी मेरी पीठ से चिपक गई, उसने मेरे स्तनों को दबाया जिससे पानी के साथ उनका मसला जाना मजेदार लगा, “देवर जी क्या कर रहे हो” मैं चौंककर बोली लेकिन मुस्कुरा उठी।
विक्रम ने साबुन लगाकर मेरे बदन को सहलाया खासकर मेरी चूत और गांड को जहां साबुन की फिसलन और उसकी उंगलियों की रगड़ ने मुझे गीला कर दिया, “भाभी आज साफ करके चोदूंगा”, उसने मुझे घुमाया और घुटनों पर बिठाया जहां पानी मेरे चेहरे पर गिर रहा था, मैंने लंड चूसा और साबुन का फेन वाला स्वाद मुंह में आया, “ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गी गों गों गोग”।
विक्रम ने मुझे उठाया और शावर के नीचे डॉगी स्टाइल में चोदा जहां पानी की धारें हमारी चुदाई को और गीला बना रही थीं, “आह देवर पानी में चुदाई अच्छी है जोर से”, विक्रम ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारे जिससे गीली त्वचा पर चटाक की आवाज आई और लंड तेजी से अंदर-बाहर किया, मेरी चूत से रस और पानी मिलकर बह रहा था, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह आह्ह ह्ह आऊ ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई”।
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हम दोनों पानी की धार में भीगे हुए झड़ गए जहां विक्रम ने मेरी पीठ पर वीर्य गिराया जो पानी के साथ बह गया, बाथरूम अब हमारी गंदी खेलों का अड्डा बन गया जहां साबुन की खुशबू और हमारे पसीने की मिली हुई गंध फैली रहती।
एक शाम हम दोनों शॉपिंग से लौट रहे थे, राजेश घर पर था लेकिन विक्रम ने मुझे कार पार्किंग में रोक लिया जहां कार की सीट की चमड़े की खुशबू नाक में आ रही थी, “भाभी थोड़ी देर रुकें भैया को पता नहीं चलेगा”, कार की बैकसीट पर विक्रम ने मेरी साड़ी उठाई और मेरी चूत में उंगलियां डाली जहां उसकी उंगलियों की गर्मी और रगड़ ने मुझे सिसकारियां भरवाई।
मैं सिसक उठी, “देवर बाहर कोई देख लेगा आह” लेकिन मैं रुक नहीं सकी जहां बाहर की आवाजें हमें और एक्साइटेड कर रही थीं, विक्रम ने अपना लंड निकाला और मुझे ऊपर बिठाया, मैं उछल-उछल कर चुदाई करने लगी जहां कार हिल रही थी और उसकी आवाज बाहर जा रही थी, “भाभी तुम्हारी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है जोर से उछलो”, “आह इह्ह ओह्ह ओह आह ह्ह्ह इह्ह”।
मेरे स्तन विक्रम के मुंह में थे जहां वो उन्हें चूस रहा था और उसके दांतों की हल्की काट मुझे दर्द और मजा दे रही थी, बाहर से आवाजें आ रही थीं लेकिन हम रुके नहीं, मैं जोर से झड़ गई जहां मेरा रस सीट पर गिरा और उसकी चिपचिपाहट महसूस हुई।
विक्रम ने मुझे नीचे लिटाकर मेरी गांड मारी जहां उसका लंड मेरी गांड की टाइटनेस में घुसते हुए दर्द पैदा कर रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था, “ओह देवर फाड़ दो आह”, हम चुपके से घर लौटे लेकिन हमारे दिल में और मुलाकातों की चाहत और मजबूत हो गई जहां उस रिस्क की याद हमें तड़पाती रहती।
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फिर एक वीकेंड पूरा परिवार गांव गया, रात में सब सो गए लेकिन विक्रम और मैं चुपके से खेतों में निकल गए जहां चांदनी रात में घास की नरमाहट और मिट्टी की सोंधी खुशबू हवा में फैली थी, मेरी साड़ी हवा में उड़ रही थी, विक्रम ने मुझे घास पर लिटाया और पूरा नंगा कर दिया जहां ठंडी घास मेरी पीठ पर गुदगुदी कर रही थी, “भाभी आज खुले आसमान के नीचे चोदूंगा”।
मैंने उसके लंड को चूसा जहां खुले में उसकी खुशबू और स्वाद और तीव्र लग रहा था, फिर विक्रम ने मेरी चूत चाटी जहां उसकी जीभ की गर्मी और रगड़ ने मुझे सिसकारियां भरवाई, “देवर जीभ अंदर डालो आह”, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह आह्ह ह्ह आऊ ऊऊ ऊउइ ऊई उईईई”, विक्रम ने मिशनरी स्टाइल में चोदा जहां सितारों के नीचे उसका लंड मेरी चूत में घुस रहा था।
फिर उसने मुझे ऊपर लिया जहां मैं उछल रही थी और हवा मेरे स्तनों पर लग रही थी, मेरी सिसकारियां खेतों में गूंज रही थीं, “जोर से फाड़ दो मेरी ओह देवर”, विक्रम ने मेरी गांड में लंड डाला जहां हम दोनों पसीने से तर हो गए और मिट्टी की खुशबू हमारे पसीने के साथ मिल गई, हम कई बार झड़ गए जहां खेतों की मिट्टी हमारे बदन पर चिपक गई जैसे वो हमारी चुदाई का हिस्सा बन गई हो, वो रात हमारी सबसे यादगार और वाइल्ड मुलाकात थी।
समय बीतता गया और हमारी मुलाकातें जारी रहीं जहां हर बार नई सेंसेशन और गर्मी हमें बांधती रहती, मेरी प्यास विक्रम के प्यार से पूरी हो चुकी थी लेकिन हमारा अफेयर एक राज बना रहा जो कभी भी खुल सकता था, लेकिन अभी हम दोनों अपनी इस गुप्त दुनिया में खुश थे जहां हर स्पर्श, हर खुशबू और हर आवाज हमें और करीब लाती।
कहानी का अगला भाग: पड़ोसी लड़के ने मेरी चूत को जमकर चोदा
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